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कोण का इस्तेमाल और अश्विन की रणनीति, क्या चेपॉक पर दोहरा पाएंगे 13 साल पुराना करिश्मा?

एलिमिनेटर मुक़ाबले में अश्विन ने जिस तरह से कोण का इस्तेमाल किया वो अपने आप में अद्भुत था

बुधवार शाम को दो गेंद पर एक रन बनाकर खेल रहे रजत पाटीदार ने जब अपना बैट टैप कर के सामने की तरफ़ देखा होगा तब उन्हें मैदान में सारी चीज़ें दिखाई दी होंगी सिवाय उस गेंदबाज़ के जो उनके दृश्य से ओझल था। दरअसल उस समय रविचंद्रन अश्विन एंगल का उपयोग करने की रणनीति के तहत गेंदबाज़ी कर रहे थे। वो वैसी ही रणनीति अपना रहे थे जो उन्होंने न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ 2021 के नवंबर महीने में अपनाया था।
अहमदाबाद में एंगल का इस्तेमाल करने के पीछे सबसे बड़ा कारण यही था कि स्क्वायर बाउंड्री आसमान थीं। ऐसी परिस्थिति में अश्विन का एंगल का इस्तेमाल करना स्वाभाविक भी था। पाटीदार को जब वह गेंद डाल रहे थे तब लेग साइड की बाउंड्री लंबी थी और यही वह थी कि अश्विन ने कोण के साथ रन अप लेने का मन बनाया और वाइड ऑफ़ द क्रीज़ से पाटीदार को उन्होंने गेंद डाली।
अश्विन ने पूरे मैच में एंगल के साथ गेंदबाज़ी की और लगातार 95 किमी प्रति घंटे की गति से गेंद डाली रहे ताकि बल्लेबाज़ को रूम बनाकर शॉट खेलने का अवसर ना मिले। अगर बल्लेबाज़ लेग साइड की ओर जाने का प्रयास करते तो अश्विन भी उन्हें फ़ॉलो करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे।
अश्विन की इस रणनीति का परिणाम उनके उस मैच के गेंदबाज़ी आंकड़े में साफ़ तौर पर दिखाई दिया। अश्विन ने चार ओवर में 19 रन देकर दो विकेट लिए और प्लेयर ऑफ़ द मैच भी बने। लगातार दो गेंदों पर कैमरन ग्रीन और ग्लेन मैक्सवेल का विकेट लेने के अलावा उन्होंने पाटीदार के ख़िलाफ़ भी मौक़ा बनाया था। हालांकि ख़ुद अश्विन मानते हैं कि टी20 क्रिकेट में विकेट मिल जाते हैं।
अश्विन ने कहा, "टी20 एक ऐसा प्रारूप है जहां विकेट मिल जाते हैं। आप इस प्रारूप में विकेट लेने की सोच के साथ गेंदबाज़ी नहीं कर सकते। अगर आपको विकेट मिल गया है तब आप अगली गेंद पर विकेट की ख़ोज में जा सकते हैं। ट्रेंट बोल्ट और मिचेल स्टार्क जैसे गेंदबाज़ तो फिर भी विकेट लेने की सोच सकते हैं क्योंकि वे नई गेंद से गेंदबाज़ी करते हैं और उस समय गेंद को स्विंग कराने का भी मौक़ा होता है। और अगर गेंद स्विंग ना हो रही हो तो फिर गेंदबाज़ विकेट लेने की सोच रखने के बजाय यही सोचने पर मजबूर हो जाता है कि उसे विकेट मिल जाए।"
IPL के पहले चरण में अश्विन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उन्हें विकेट मिले ही नहीं। पहले नौ मैचों में 159 की औसत से उनके खाते में सिर्फ़ दो विकेट थे। लेकिन पिछले चार मैचों में अब उनके खाते में 15.57 की औसत से सात विकेट हैं।
अश्विन का इकोनॉमी रेट (8.31) भले ही इस IPL में अन्य स्पिनर्स की तुलना में उतना अच्छा ना हो लेकिन इसके बावजूद अश्विन ने इस सीज़न में खेले 13 में से 12 मैचों में अपने कोटे के पूरे ओवर किए और एक मैच जिसमें अश्विन ने अपने पूरे ओवर नहीं किए उसमें भी उन्होंने तीन ओवर की गेंदबाज़ी की। प्रति मैच गेंद डालने की दर के मामले में अश्विन सुनील नारायण की बराबरी पर हैं। यह आंकड़ा यह भी बताता है कि ख़ुद अश्विन के कप्तान को उनके ऊपर कितना भरोसा है और यह भी कि अश्विन किसी भी बल्लेबाज़ी कॉम्बिनेशन के सामने गेंदबाज़ी कर सकते हैं।
शुक्रवार को अश्विन RR की उस लाइन अप का हिस्सा होंगे जो फ़ाइनल में पहुंचने से सिर्फ़ एक जीत दूर होगी। वह अपनी टीम के गेंदबाज़ी आक्रमण के सबसे अहम कड़ी होंगे और संभव है कि उन्हें दो बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों के सामने उनका पावरप्ले में ही इस्तेमाल कर लिया जाए।
चेपॉक उनका होम ग्राउंड भी है और वह इससे पहले भी यह कारनामा कर चुके हैं। 2011 में ही अश्विन ने पहले क्वालिफ़ायर और फ़ाइनल में नई गेंद से क्रिस गेल को आउट किया था। चेन्नई में अश्विन ने 6.5 की इकोनॉमी से IPL में 50 विकेट लिए हैं।
चेपॉक से अश्विन को कितना लगाव है यह उनके उस भाषण के एक हिस्से को पढ़कर समझा जा सकता है जब 100 टेस्ट खेलने और टेस्ट में 500 विकेट लेने पर तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन द्वारा आयोजित अपने सम्मान समारोह में उन्होंने कहा था, "शायद मैं कल जीवित ना रहूं लेकिन तब भी मेरी आत्मा इसी मैदान में रहेगी। आप समझ सकते हैं कि यह मैदान मेरे लिए क्या मायने रखता है।"
शुक्रवार को अश्विन अपने पूरे तन मन से एक बार फिर चेपॉक पर होंगे।

कार्तिक कृष्णास्वामी ESPNcricinfo के सहायक एडिटर हैं