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आंकड़े झूठ नहीं बोलते : भारत के लिए आसान नहीं होगा आख़िरी क़िला भेदना

सिर्फ़ साउथ अफ़्रीका ही एकमात्र देश है, जहां पर भारत कोई टेस्ट सीरीज़ नहीं जीत सका है

Lungi Ngidi appeals for the wicket of Virat Kohli, South Africa v India, 2nd Test, Centurion, 2nd day, January 14, 2018

भारतीय बल्लेबाज़ों को साउथ अफ़्रीकी तेज़ गेंदबाज़ों से रहना होगा सावधान  •  BCCI

क्या इस बार भारत भेद पाएगा साउथ अफ़्रीका का क़िला
आने वाले कुछ हफ़्तों में भारतीय टीम साउथ अफ़्रीका का क़िला भेदने की कोशिश करेगी, जहां पर उन्होंने कभी भी टेस्ट सीरीज़ नहीं जीती है। हालांकि साउथ अफ़्रीका का हालिया घरेलू रिकॉर्ड भी बेहतर नहीं रहा है और उन्होंने अपने पिछले आठ घरेलू टेस्ट में से पांच गंवाए हैं। इस दौरान तीन घरेलू टेस्ट सीरीज़ में दो में उन्हें हार मिली है। यह रिकॉर्ड टीम इंडिया को साउथ अफ़्रीका में अपना पहला टेस्ट सीरीज़ जीतने के लिए प्रेरित करेगा।
पहला मैच सेंचुरियन में खेला जाएगा, जो मेज़बान टीम का क़िला माना जाता है। इस मैदान पर 26 टेस्ट मैच हुए हैं, जिसमें से साउथ अफ़्रीका ने सिर्फ़ दो गंवाए हैं, जबकि 21 में उन्हें जीत मिली है। इन दोनों मैचों में से एक मैच वह है, जब ख़राब मौसम के कारण बहुत सारा समय बर्बाद हो जाने के बाद इंग्लैंड और साउथ अफ़्रीका ने एक-एक पारी का मैच खेला था। भारत ने यहां पर 2010 और 2018 में दो टेस्ट मैच खेले हैं और दोनों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा है।
पाकिस्तान ने कराची के नैशनल स्टेडियम में 43 टेस्ट खेले हैं, इसमें से उन्हें 23 में जीत और दो में हार का सामना करना पड़ा है। अगर जीत प्रतिशत की बात की जाए, तो सेंचुरियन में 80.77% जीत के साथ साउथ अफ़्रीका इस मामले में नंबर एक बना हुआ है। इस सूची में दूसरा नंबर फिर से साउथ अफ़्रीका का है। केपटाउन में 70% के रिकॉर्ड के साथ साउथ अफ़्रीका ने वहां पर 14 में से 10 टेस्ट मैच जीते हैं, हालांकि उन्हें बाक़ी चार में हार का भी सामना करना पड़ा है।
बल्लेबाज़ों के लिए चुनौती
बल्लेबाज़ी के लिहाज़ से साउथ अफ़्रीका सबसे कठिन देश है। 2018 से साउथ अफ़्रीका में बल्लेबाज़ी औसत (25.39), वेस्टइंडीज़ (23.53) के बाद से दूसरा सबसे कम है। 2018 के बाद से यहां पर 18 टेस्ट में सिर्फ़ 15 शतक बन पाए हैं, जो कि औसत (0.83 शतक प्रति मैच) के हिसाब से पूरे विश्व में सबसे कम है।
यहां पर स्पिनरों का औसत 45 से भी अधिक रहा है और मार्च 2013 के बाद से किसी भी स्पिनर ने इन तीन मैदानों में से किसी पर भी पांच विकेट नहीं प्राप्त कर सके हैं। आर अश्विन का यहां पर औसत तीन मैचों में 46.14 का है, जो कि किसी भी देश में उनका सबसे ख़राब प्रदर्शन है। दिसंबर, 2013 से यहां पर स्पिनरों का औसत 43.51 है, जो कि विदेशी स्पिनरों के लिए और ख़राब होकर 48.04 हो जाता है।
भारत के मध्य क्रम की चिंता
पिछले साल विदेशी दौरों पर भी भारत के सलामी बल्लेबाज़ों ने कुछ निरंतरता दिखाई लेकिन विराट कोहली, अजिंक्य रहाणे और चेतेश्वर पुजारा का अनुभवी मध्य क्रम रनों की कमी से जूझता रहा। तीनों ने दो-दो बार साउथ अफ़्रीका का दौरा किया है और तीनों का रिकॉर्ड बहुत अच्छा रहा है। कोहली और रहाणे ने तो यहां पर 50 अधिक के औसत से रन किए हैं, जबकि पुजारा ने भी कुछ महत्वपूर्ण पारियां खेली हैं। हालांकि पिछले दो सालों में इन तीनों बल्लेबाज़ों का प्रदर्शन गिरा है और औसत 30 से भी कम का हो गया है।
इस साल सिर्फ़ श्रेयस अय्यर ही एक ऐसे भारतीय बल्लेबाज़ रहे हैं, जिन्होंने नंबर तीन से नंबर पांच पर आते हुए शतक लगाया है। पुजारा के नाम पिछले 42 पारियों में शतक नहीं है, वहीं कप्तान कोहली ने नवंबर 2019 के बाद से कोई शतक नहीं लगाया है। वहीं रहाणे के नाम 16 टेस्ट में सिर्फ़ तीन 50+ के स्कोर हैं।
2016 तक 29 टेस्ट खेलने के बाद रहाणे का औसत पहली और एकमात्र बार 50 से अधिक 51.37 तक गया था। इसके बाद से उन्होंने 50 से अधिक टेस्ट खेला है और उनका औसत 32.73 तक आ गया है। पिछले साल मेलबर्न में मैच जीताऊ शतक के बाद उन्होंने 22 पारियों में सिर्फ़ दो अर्धशतक लगाए हैं। लगातार शीर्ष छह में 50 टेस्ट खेलते हुए इससे कम औसत सिर्फ़ रवि शास्त्री (32.38) का रहा है।
साउथ अफ़्रीका के लिए गेंद और बल्ले दोनों से चिंता
पिछले 11 घरेलू टेस्ट मैचों में साउथ अफ़्रीकी बल्लेबाज़ों ने सिर्फ़ चार शतक लगाया है, इसमें से भी दो अकेले फ़ाफ़ डुप्लेसी ने लगाया है। डुप्लेसी और क्विंटन डिकॉक सिर्फ़ दो ही ऐसे बल्लेबाज़ हैं, जिनका औसत घरेलू मैदान पर 40 से अधिक का है। वहीं उनकी तेज़ गेंदबाज़ी अनुभवहीन है और रबाडा-एनगिडी के अलावा किसी ने भी एक साथ कभी टेस्ट मैच नहीं खेला है।