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भारत बनाम ज़िम्बाब्वे : लेस्टर, शारजाह हो या फ़रीदाबाद, इस जंग में उलटफेर की कोई कमी नहीं

टी20 विश्व कप में इस अहम मैच से पहले इन दोनों टीमों के यादगार मैचों पर एक नज़र

रविवार को टी20 विश्व कप में भारत का मुक़ाबला ज़िम्बाब्वे के साथ मेलबर्न के ऐतिहासिक मैदान पर होगा। आंकड़े और फ़ॉर्म दोनों भले ही भारत को इस मैच में फ़ेवरिट घोषित करते हों लेकिन इतिहास गवाह है कि ज़िम्बाब्वे ने भारत को कई बार परेशान किया है। वैसे टी20 विश्व कप में यह उनकी पहली मुलाक़ात होगी पर हम नज़र डालते हैं पांच ऐसे वनडे मैचों पर जहां भारत फ़ेवरिट ज़रूर था लेकिन ज़िम्बाब्वे ने उन्हें कड़ी टक्कर देते हुए चौंकाया। इन्हें कलानुक्रमानुसार बनाने की बजाय उलटफेर कितना बड़ा था, उस हिसाब से रैंक किया है।
5 - वह पहली जीत - सेंचूरियन, 1997
ज़िम्बाब्वे भारत के साथ 1983 विश्व कप के बाद से 13 वनडे मैच (और दो टेस्ट मैच) खेल चुका था लेकिन उन्हें अपनी पहली जीत के लिए 14 साल का इंतज़ार करना पड़ा। साउथ अफ़्रीका में त्रिकोणीय श्रृंखला में वह भारत के साथ पार्ल में खेला गया एक मैच टाई कर चुके थे लेकिन 11 दिन बाद उन्होंने इससे भी बेहतर नतीजा अपने नाम किया
उन दिनों सचिन तेंदुलकर की कप्तानी में भारतीय टीम में कई प्रयोग चल रहे थे। तेंदुलकर ख़ुद नंबर चार पर बल्लेबाज़ी करने उतरे और सौरव गांगुली और मौजूदा कोच राहुल द्रविड़ की सलामी जोड़ी के बाद जवागल श्रीनाथ बल्लेबाज़ी करने आए। भारत के क्रम में कई खिलाड़ियों ने अच्छी शुरुआत की लेकिन मोहम्मद अज़हरउद्दीन के 44 से अधिक कोई नहीं कर सका और भारत ने 216 का स्कोर खड़ा किया। पारी के ब्रेक में बारिश के चलते ज़िम्बाब्वे को 34 ओवरों में 171 का लक्ष्य मिला। भारत के लिए श्रीनाथ और वेंकटेश प्रसाद की शुरुआत बेहतरीन रही और देखते ही देखते मौजूदा ज़िम्बाब्वे कोच डेविड हाउटन के आउट होने पर ज़िम्बाब्वे ने 77 पर आधी टीम गंवा दी थी। ऐसे में क्रेग एवंस, जिनके पुत्र ब्रैड मौजूदा टीम का हिस्सा हैं, ने पुछल्ले बल्लेबाज़ों के साथ खेलते हुए 47 गेंदों पर 43 नाबाद की पारी खेली और एक ऐतिहासिक जीत के रचनाकर्ता रहे।
4 - हीरो कप का उलटफेर - इंदौर, 1993
1993 में क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ़ बंगाल (सीएबी) ने पांच देशों के हीरो कप का आयोजन किया। श्रीलंका को हराने के बाद भारत को वेस्टइंडीज़ से बड़ी हार का सामना करना पड़ा और उसके दो दिन बाद उनका मैच ज़िम्बाब्वे से था। सेमीफ़ाइनल में प्रवेश करने के लिए जीत शायद काफ़ी होती और जब मनोज प्रभाकर (91), विनोद कांबली (55) और कप्तान अज़हर (56 गेंदों पर नाबाद 54) ने भारत को 248 तक ला खड़ा किया तब एक ही विजेता दिखाई दे रहा था। भारतीय गेंदबाज़ी क्रम में प्रभाकर, श्रीनाथ, कपिल देव, अनिल कुंबले और राजेश चौहान जैसे नाम शामिल थे।
जवाब में प्रभाकर और श्रीनाथ ने ग्रांट फ़्लावर और ऐलेस्टर कैंपबेल को जल्दी आउट किया। ग्रांट के भाई ऐंडी टिके रहे और उनके आस पास हाउटन, ऐंडी वॉलर और गाय व्हिटल बल्ला चलाने लगे। कपिल, कुंबले और तेंदुलकर सब ने पांच के ऊपर की इकॉनमी से रन दिए और खब्बू बल्लेबाज़ और गेंदबाज़ी ऑलराउंडर अली शाह ने 31 गेंदों पर 37 की निर्णायक पारी खेली। आख़िरी गेंद पर हीथ स्ट्रीक के रन आउट होने से स्कोर बराबर रहे लेकिन जश्न का माहौल केवल मेहमान टीम के ड्रेसिंग रूम में नज़र आया
3 - ओलोंगा की यादगार शाम - शारजाह, 1998
1998 में शारजाह की त्रिकोणीय श्रृंखला में भारत और ज़िम्बाब्वे दोनों ने अपने सारे मैचों में विश्व चैंपियन श्रीलंका को हराया। यह अपने-आप में बड़ा उलटफेर था लेकिन लीग के आख़िरी मैच में भारत और ज़िम्बाब्वे का आमना-सामना हुआ। अगर ज़िम्बाब्वे कप्तान कैंपबेल 83 की नाबाद पारी नहीं खेलते तो उनकी टीम 205 के स्कोर तक भी नहीं पहुंचती। 1998 पूरी तरह तेंदुलकर का साल रहा था और जब वह गांगुली के साथ उतरे तो नील जॉनसन के पहले ओवर में 10 रन आने पर एकतरफ़ा नतीजा दिखने लगा।
दूसरे छोर पर हेनरी ओलोंगा ने पहली गेंद पर गांगुली को पगबाधा किया। इसके बाद रफ़्तार और उछाल का बेहतरीन उपयोग करते हुए ओलोंगा ने द्रविड़, अजय जाडेजा और तेंदुलकर को पवेलियन का रास्ता दिखाया। 104/6 के स्कोर से रॉबिन सिंह (49 नाबाद) और निखिल चोपड़ा (39) ने वापसी करने की पूरी कोशिश की लेकिन आख़िर में ज़िम्बाब्वे 13 रनों से विजयी रहा। हालांकि दो दिन बाद फ़ाइनल में भारत की 10 विकेट से जीत में तेंदुलकर ने ओलोंगा को इसका जवाब सूद समेत वापस कर दिया।
2 - मरिलियर स्कूप बना फ़ासला - फ़रीदाबाद, 2002
मार्च 2002 में भारत ने पांच मैच के सीरीज़ के पहले मुक़ाबले में टॉस जीतकर 274 रन बनाए। कप्तान गांगुली (57) के अलावा वीवीएस लक्ष्मण (75) ने आकर्षक पारियां खेली जिसपर अजीत आगरकर ने 19 गेंदों पर 40 नाबाद बनाकर लगभग जीत की मुहर लगा दी थी।
जवाब में ज़हीर ख़ान के दो विकेट जल्दी लेने पर भी कैंपबेल (84) के प्रत्याक्रमण को ऐंडी (71) का सहारा मिला। हालांकि भारत लगातार विकेट लेता रहा और जब दियोन इब्राहिम का आठवां विकेट गिरा तब ज़िम्बाब्वे को लगभग पांच ओवर में 65 रन चाहिए थे। ऐसे में बल्लेबाज़ी करने उतरे ऑलराउंडर डगलस मरिलियर ने भारतीय गेंदबाज़ों के होश उड़ाते हुए 24 गेंदों पर 56 की नाबाद पारी खेली। उन्होंने लगातार ज़हीर और आगरकर को स्कूप किया और अंतिम क्षणों में कुंबले की भी जमकर तुड़ाई की। आख़िरी बल्लेबाज़ गैरी ब्रेंट को सिर्फ़ छह गेंदें खेलते देने के साथ ही उन्होंने आख़िरी ओवर में अपनी पारी के 10वें चौके के साथ मैच को ख़त्म किया
भारत, साउथ अफ़्रीका से अपना उद्घाटन मैच हार चुका था और दूसरे मुक़ाबले से पूर्व तेंदुलकर अपने पिता के मृत्यु की ख़बर सुनकर भारत लौट आए। भारत ने गेंद से अच्छा प्रयास करते हुए ज़िम्बाब्वे को 252 पर रोका। हालांकि धीमे ओवर रेट के चलते उन्हें अपनी पारी में 46 ओवर ही मिलने वाले थे। फ़्लावर बंधु ऐंडी (68 नाबाद) और ग्रांट (45) सबसे प्रभावशाली बल्लेबाज़ रहे।
जवाब में भारत ने तीन विकेट जल्दी गंवाए लेकिन फिर तेंदुलकर की जगह टीम में आए सदगोपन रमेश और जाडेजा के बीच अच्छी साझेदारी पनपने लगी। जब लक्ष्य 100 के नीचे आ गया था तब रमेश (55) ग्रांट को बड़ा शॉट मारने के चक्कर में कैच आउट हुए। जाडेजा और आगरकर के आउट होने के बाद रॉबिन ने भारत को मैच में बनाए रखा। 45वां ओवर जब शुरू हुआ तो ओलोंगा, रॉबिन को गेंदबाज़ी कर रहे थे और 12 गेंदों पर नौ रन चाहिए थे।
पहली गेंद पर दो रन लेकर रॉबिन अगली गेंद पर कवर पर कैंपबेल द्वारा कैच आउट हुए। इसके बाद ओलोंगा ने उसी ओवर में श्रीनाथ को बोल्ड किया और प्रसाद को पगबाधा। भारत तीन रन से हारा और इसके बाद केन्या, श्रीलंका और इंग्लैंड पर ज़बरदस्त जीत हासिल करने के बावजूद उस साल के नियम के अनुसार सुपर सिक्स में शून्य अंक लेकर गया। भारत अपने ग्रुप में साउथ अफ़्रीका और ज़िम्बाब्वे दोनों से हारा था, जो उनके साथ अगले पड़ाव तक गए।

देबायन सेन ESPNcricinfo के सीनियर असिस्टेंट एडिटर और स्थानीय भाषा प्रमुख हैं।