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BCCI के पूर्व अध्यक्ष आईएस बिंद्रा का 84 साल की आयु में निधन 

वह 1978 से 2014 तक पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन के प्रेसीडेंट भी रहे

ESPNcricinfo स्टाफ़
26-Jan-2026 • 6 hrs ago
IS Bindra arrives for a BCCI meeting, New Delhi, June 10, 2013

IS Bindra ने 2014 में क्रिकेट प्रसाशन ने संन्यास ले लिया था  •  Getty Images & Hindustan Times

BCCI के पूर्व अध्यक्ष आईएस बिंद्रा का रविवार को नई दिल्ली में 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया।
भले ही उन्होंने 1993 से 1996 तक BCCI अध्यक्ष के रूप में कार्य किया, लेकिन पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन (PCA) प्रमुख के रूप में बिंद्रा का दबदबा 36 वर्षों तक (1978 से 2014 तक) कायम रहा, जिसके बाद उन्होंने क्रिकेट प्रशासन से संन्यास ले लिया। उन्होंने मोहाली के PCA स्टेडियम को, जिसका नाम बाद में उनके नाम पर रखा गया, विश्व मानचित्र पर प्रतिष्ठित मैचों के आयोजन के साथ स्थापित किया। इसमें 2011 विश्व कप का सेमीफ़ाइनल भी शामिल है, जहां भारत ने दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की मौजूदगी में पाकिस्तान को हराया था।
बिंद्रा और पूर्व BCCI अध्यक्ष एनकेपी साल्वेजगमोहन डालमिया ने 1987 विश्व कप को भारत में आयोजित कराने में अहम भूमिका निभाई थी। यह पहली बार था जब विश्व कप इंग्लैंड के बाहर आयोजित किया गया था। बिंद्रा ने पश्चिमी देशों के गुट की पकड़ को ढीला करने में बड़ी भूमिका निभाई और भारत, पाकिस्तान व श्रीलंका के नेतृत्व में एशियाई देशों ने मिलकर यह सुनिश्चित किया कि विश्व कप पहली बार उपमहाद्वीप में आयोजित हो।
पूर्व भारतीय टीम मैनेजर और वरिष्ठ BCCI अधिकारी अमृत माथुर के अनुसार, जब 1986 में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ने के बाद ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड ने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई, तो यह बिंद्रा ही थे जिन्होंने पाकिस्तान के सैन्य तानाशाह जनरल ज़िया-उल-हक को सुझाव दिया कि गतिरोध को तोड़ने के लिए वे भारत का दौरा करें।
भले ही कई मुद्दों पर बिंद्रा और डालमिया के विचार आपस में मेल नहीं खाते थे, फिर भी उन्होंने एक बार फिर सुनिश्चित किया कि 1996 विश्व कप की सह-मेज़बानी भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका करें। बिंद्रा एक राजनयिक और नौकरशाह थे, जिन्होंने BCCI और बाद में ICC में निर्णय लेने की प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए अपने व्यापक नेटवर्क का इस्तेमाल किया। ICC में वे शरद पवार के प्रमुख सलाहकार थे, जब पवार चेयरमैन थे।
दोनों के बीच गहरे मतभेदों के बावजूद, डालमिया को अपनी श्रद्धांजलि में, जिनका 2015 में निधन हो गया था, बिंद्रा ने लिखा: "दुनिया भर के क्रिकेट प्रशंसकों को यह याद रखने की ज़रूरत है कि आधुनिक खेल और जिस तरह से इसे वर्तमान में चलाया जा रहा है, वह बहुत अलग होता अगर 'जग्गू' नहीं होते।"