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हुबली डायरी : बारिश, क्रिकेट और एक छोटे शहर में खेल का जुनून

मौसम के कारण भले ही खिलाड़ियों को क्रिकेट में व्यस्त होने का मौक़ा ना मिला हो, लेकिन उनके प्रशंसकों के लिए यह एक बड़ा अवसर था

दर्शकों के बीच से सबसे अधिक नाम उमरान मलिक और रजत पाटीदार का गूंज रहा था  •  Manoj Bookanakere/KSCA

दर्शकों के बीच से सबसे अधिक नाम उमरान मलिक और रजत पाटीदार का गूंज रहा था  •  Manoj Bookanakere/KSCA

रघुराम (14 ) और लीलाकृष्णा (12) सगे भाई हैं। रघुराम नौवीं तो लीलाकृष्णा सातवीं कक्षा में पढ़ते हैं। पढ़ाई के अलावा ये दोनों घर से थोड़ी दूर स्थित एक क्रिकेट एकेडमी में क्रिकेट भी सीखने जाते हैं। इन भाईयों के लिए बीता रविवार यादगार बन गया क्योंकि उन्हें अपने कुछ पसंदीदा क्रिकेटरों से हाथ मिलाने, उनका ऑटोग्राफ़ लेने और साथ में सेल्फ़ी खिंचाने का मौक़ा मिला।
उत्तरी कर्नाटका के धारवाड़ ज़िले में रहने वाले रघुराम और लीलाकृष्णा अपने घर से 20 किलोमीटर दूर स्थित हुबली क्रिकेट ग्राउंड पर इंडिया ए और न्यूज़ीलैंड ए के बीच चल रही टेस्ट श्रृंखला का दूसरा मैच देखने आए थे। पहाड़ों और झीलों से घिरे ख़ूबसूरत मैदान में हुए इस मैच का पहला और तीसरा दिन जहां बारिश के कारण पूरा ही बर्बाद हुआ, वहीं दूसरे और चौथे दिन क्रमशः 66 और 12.5 ओवर का ही खेल हो पाया। इंडिया ए ने दूसरे दिन पूरे 66 ओवर बल्लेबाज़ी करते हुए कप्तान प्रियांक पांचाल और केएस भरत की अर्धशतकों की मदद से छह विकेट पर 229 रन बनाए, जवाब में चौथे दिन मैच ड्रॉ समाप्त होने से पहले न्यूज़ीलैंड की टीम 39 रन पर दो विकेट गंवा कर संघर्ष कर रही थी।
भले ही इस मैच को कागज़ों में बारिश के कारण नीरस समझा जाएगा, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं था। मैदान पर उपस्थित दर्शकों ने अपने उत्साह से इस मैच को आख़िरी दिन तक ज़िंदा बनाए रखा। मैच के पहले और आख़िरी दिन जब खेल हुआ तो भारी संख्या में दर्शक आए और टेंट व प्लास्टिक की कुर्सियों से बनाया गया रंग-बिरंगा अस्थायी स्टैंड पूरी तरह से भरा रहा।
बारिश की लुका-छिपी के बीच ये दर्शक ना सिर्फ़ भारतीय बल्कि कीवी क्रिकेटरों के भी मैदान में आने पर चिल्ला रहे थे, उन्हें चीयर कर रहे थे और पास आने पर उनके साथ सेल्फ़ी और ऑटोग्राफ़ लेने का भी मौक़ा नहीं गंवा रहे थे। दोनों देशों के खिलाड़ी भी उन्हें निराश नहीं कर रहे थे। मैच के बाद प्रेंस कॉन्फ़्रेंस में इंडिया ए के विकेटकीपर बल्लेबाज़ केएस भरत ने भी माना कि फ़ैंस का यह उत्साह और समर्थन अभूतपूर्व था।
दर्शकों के बीच से सबसे अधिक नाम उमरान मलिक और रजत पाटीदार का गूंज रहा था। जहां स्पीडस्टर उमरान हाल ही में भारत का प्रतिनिधित्व करके आए हैं, वहीं रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू (आरसीबी) में होने के कारण पाटीदार उनके लिए एक स्थानीय खिलाड़ी के जैसे हैं। दर्शक खिलाड़ियों को दूर से देखते ही उनका नाम चिल्लाने लगते थे और उन्हें अपनी तरफ़ आने की गुज़ारिश करते थे ताकि उनके साथ सेल्फ़ी और ऑटोग्राफ़ ली जा सके।
रघुराम और लीलाकृष्णा अपने नियमित बल्ले के साथ एक और छोटा सा बल्ला लाए थे, जिस पर उन्हें उमरान , राहुल चाहर, पाटीदार, ऋतुराज गायकवाड़, तिलक वर्मा, सरफ़राज़ ख़ान, पांचाल और कुलदीप यादव का ऑटोग्राफ़ मिल चुका था। हालांकि वे निराश थे कि उन्हें शार्दुल ठाकुर का ऑटोग्राफ़ नहीं मिल पाया। वे इस रिपोर्टर से भी शार्दुल का ऑटोग्राफ़ दिलाने की गुहार करने लगे, हालांकि यह रिपोर्टर के लिए भी संभव नहीं था।
बड़े भाई रघुराम इस अनुभव के बारे में कहते हैं, "इन खिलाड़ियों को पहले सिर्फ़ टीवी पर ही देखा था, पहली बार सामने से देख रहा हूं। उन्हें देखने से पता चल रहा है कि वे मैदान में जाने से पहले, मैच के दौरान और बाद में क्या-क्या करते हैं, यह सब टीवी पर देखने को नहीं मिलता है। कोचिंग के दौरान हमें भले ही बल्लेबाज़ी, गेंदबाज़ी, फ़िल्डिंग सब कुछ सिखाया जाता हो लेकिन यहां आकर ही हमें खिलाड़ियों का अनुशासन पता चला। वह कब क्या करते हैं, गेंदबाज़ी में कहां टप्पा कराते हैं, बल्लेबाज़ी में कैसे स्टांस लेते हैं, यह सब मैंने लाइव देखा।"
शेन वॉर्न को अपना आदर्श मानने वाले 12 वर्षीय लेग स्पिन ऑलराउंडर हर्षित का भी कुछ ऐसा ही हाल था। वह भी पहली बार इतने बड़े स्तर का कोई मैच देखने आए थे। उन्हें अपने बैट पर अपने पसंदीदा खिलाड़ी राहुल चाहर सहित उमरान, तिलक, पाटीदार और न्यूज़ीलैंड के रचिन रविंद्र का ऑटोग्राफ़ मिला। हर्षित कहते हैं कि वह इस बैट से अब कभी नहीं खेलेंगे बल्कि इसे संभाल कर रखने वाले हैं।
इन सबके बीच हुबली शहर से आईं प्रार्थना दीक्षित (16 वर्ष) थोड़ी सी निराश दिखीं। प्रार्थना भी पिछले तीन साल से शहर के ही एक क्रिकेट एकेडमी में क्रिकेट सीखती हैं। वह दाएं हाथ की मध्य क्रम की बल्लेबाज़ और एक ऑफ़ स्पिनर हैं। उनकी निराशा यह रही कि बारिश की अनिश्चितता के बीच वह सुबह मैच देखने नहीं आईं और जब वह दोपहर बाद मैदान पर पहुंची तब तक 13 ओवर का खेल होने के बाद फिर से बारिश के कारण मैच रूक गया था। इससे ना उन्हें खेल देखने को मिला और ना ही वह अपनी पसंदीदा खिलाड़ियों का ऑटोग्राफ़ ले पाईं।
निराशा भरे अंदाज़ में वह मुस्कुराते हुए कहती हैं, "मैंने अपने पसंदीदा खिलाडियों ऋतुराज और उमरान को तो देखा, लेकिन और अच्छा लगता कि उन्हें खेलते हुए देख पाती।"
प्रार्थना के साथ उनके पिता प्रसन्ना दिक्षित भी आए थे। वह एक बहुत बड़े क्रिकेट फ़ैन हैं और बचपन से ही भारतीय घरेलू क्रिकेट को फ़ॉलो करते आए हैं। उन्हें इस बात की ख़ुशी है कि हुबली जैसे टियर टू सिटी में फिर से प्रथम श्रेणी क्रिकेट लौट आया है।
वह कहते हैं, "टीवी में मैच देखना और लाइव मैदान से मैच देखने में बहुत अंतर है। यहां पर आप ना सिर्फ़ क्रिकेट देखते हो बल्कि उसकी वास्तविकता को महसूस भी करते हो। इससे क्रिकेट सीख रहे बच्चों को भी बहुत उत्साह मिलता है। मैं चाहता हूं कि बीसीसीआई और केएससीए (कर्नाटका स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन) यहां पर और भी ऐसे मैच कराए।"
केएससीए धारवाड़ ज़ोन के संयोजक अविनाश पोतदार का भी मानना है कि लाइव क्रिकेट देखकर ही गेंद की गति, बल्ले की आवाज़ को महसूस किया जा सकता है। वह कहते हैं, "टीवी पर देखकर और लाइव देखकर क्रिकेट सीखने में बहुत अंतर होता है। इसलिए यह क्रिकेट सीख रहे बच्चों के लिए बहुत ज़रूरी है कि वे खिलाड़ियों को नज़दीक से देखें कि वे कैसे खेलते हैं, कैसे फ़ील्डिंग सजाते हैं और कैसी तैयारियां करते हैं। बच्चों को यही मौक़ा देने के लिए हमने धारवाड़ ज़ोन के सभी 36 रजिस्टर्ड क्रिकेट कोचिंग क्लब को चिट्ठी लिखी थी और उनसे आग्रह किया था कि वे अपने बच्चों को इस मैच को देखने के लिए भेजे।"

दया सागर ESPNcricinfo हिंदी में सब एडिटर हैं @dayasagar95