बड़ी तस्वीर

यह पहला बार हो रहा है कि साउथ अफ़्रीका किसी बड़े टूर्नामेंट में प्रवेश कर रहा है और लोगों की निगाहें उस पर नहीं है। 1992 विश्व कप की तरह वह पहली बार किसी टूर्नामेंट में भाग नहीं ले रहा है। इस टीम के पास 1999 विश्व कप की तरह दमदार प्रदर्शन करने की क्षमता नहीं है और तो और इस टीम में 2015 के विश्व कप टीम की तरह सुपरस्टार खिलाड़ियों की कमी है।

यह मेहनती खिलाड़ियों की टीम है जिन्हें सर्वश्रेष्ठ तो नहीं बल्कि उपयोगी समझा जा रहा है। इस वजह से प्रशंसकों को उनसे ट्रॉफ़ी जीतने की उम्मीद कम ही है। इसका मतलब यह है कि टीम पर विश्व कप जीतने का दबाव नहीं है लेकिन फिर भी इस टीम पर दांव लगाने के पहलू अभी ख़त्म नहीं हुए है।

यह पहला मौक़ा है जब किसी बड़े टूर्नामेंट में साउथ अफ़्रीका की कप्तानी का भार एक अश्वेत खिलाड़ी पर है। मार्च में कप्तान नियुक्त किए गए तेम्बा बवूमा भले ही टीम के पिछले दौरे पर चोटिल हुए थे, अपने पहले मैच से पहले उनके फ़िट होने की पूरी उम्मीद लगाई जा रही है। वह साउथ अफ़्रीका को 2019 का रग्बी विश्व कप जिताने वाले पहले अश्वेत कप्तान सिया कोलिसी के नक़्श-ए-क़दम पर चलते हुए पूरे आत्मविश्वास के साथ इस टीम का नेतृत्व करना चाहेंगे।

साउथ अफ़्रीका ने हाल ही में इस खेल पर अपने अतीत के अलग-अलग प्रभावों को समझने की प्रक्रिया शुरू की है और वह इस टूर्नामेंट के दौरान भी इसे जारी रखेंगे। क्रिकेट साउथ अफ़्रीका की सोशल जस्टिस एंड नेशन बिल्डिंग (एसजेएन) सुनवाई उसी दिन फिर शुरू हो रही है जिस दिन इस टूर्नामेंट का आग़ाज़ होगा।

हालिया फ़ॉर्म

साउथ अफ़्रीका लगातार तीन टी20 सीरीज़ जीतकर इस टूर्नामेंट में प्रवेश कर रहा है। हालांकि उनमें से दो सीरीज़ उन टीमों के ख़िलाफ़ थी जो सुपर 12 चरण का हिस्सा नहीं है - आयरलैंड और श्रीलंका। इसके अलावा उन्होंने गत चैंपियन वेस्टइंडीज़ को 3-2 से मात दी थी।

बल्लेबाज़ी

साउथ अफ़्रीका अक्सर इस प्रारूप में गेंदबाज़ी के विकल्पों के साथ जाना पसंद करता है। इस वजह से टीम की बल्लेबाज़ी थोड़ी कमज़ोर दिखाई देती है। साथ ही बवूमा, क्विंटन डिकॉक, एडन मारक्रम और रीज़ा हेंड्रिक्स के रूप में टीम में सलामी बल्लेबाज़ों की भरमार है। इसके चलते मध्यक्रम में बड़े शॉट लगाने वाले खिलाड़ी कम है और अगर टीम को अच्छी शुरुआत नहीं मिलती है तो पारी को संभालना मुश्किल हो जाता है। ख़ास तौर पर रासी वान दर दुसें और डेविड मिलर का फ़ॉर्म टीम के लिए चिंता का विषय है।

गेंदबाज़ी

तेज़ गेंदबाज़ी के लिए मशहूर साउथ अफ़्रीका ने इस टीम में तीन मुख्य स्पिनरों का समावेश किया है। तबरेज़ शम्सी और केशव महाराज निश्चित तौर पर हर मैच खेलेंगे लेकिन इनमें से कोई भी स्पिनर एक विशेषज्ञ ऑलराउंडर नहीं है। इसके चलते टीम को तेज़ गेंदबाज़ी करने वाले ऑलराउंडर को खिलाना होगा और टीम में केवल दो मुख्य तेज़ गेंदबाज़ों की जगह बचेगी। इसके अलावा टीम के पास कोई नामित डेथ गेंदबाज़ भी नहीं है।

इन पर होगी नज़र

अपनी सटीक गेंदबाज़ी के साथ शम्सी छोटे प्रारूपों में साउथ अफ़्रीका के लिए महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनकर उभरे हैं। 2019 के बाद इमरान ताहिर की ग़ैरमौजूदगी में उन्हें लगातार मैच खेलने का मौक़ा मिला है और वह बेहतर होते चले गए हैं। आक्रामक गेंदबाज़ होने के साथ-साथ वह रन रोकने की भूमिका भी निभा सकते हैं। इस साल सबसे ज़्यादा टी20 अंतर्राष्ट्रीय विकेट चटकाने वाले शम्सी विश्व कप में भी अपनी छाप छोड़ सकते हैं।

बड़ा सवाल

आम तौर पर साउथ अफ़्रीका इस सवाल के साथ बड़े टूर्नामेंट में प्रवेश करता है : क्या अबकी बार ट्रॉफ़ी मिलेगी?

हालांकि इस बार टीम पर उम्मीदों का दबाव नहीं हैं क्योंकि कोई उनसे ट्रॉफ़ी जीतने की उम्मीद नहीं लगाए बैठा है। इस बार का बड़ा सवाल यह है : उनके लिए टूर्नामेंट कितना बुरा हो सकता है? 2019 विश्व कप में अब तक का अपना सबसे ख़राब प्रदर्शन करने के बाद कोचिंग दल में बदलाव किया गया और मार्क बाउचर को टीम की कमान सौंपी गई। एसजेएन सुनवाईयों के बीच अगर टीम सुपर 12 चरण में बाहर हो जाती है तो बाउचर के लिए रास्ता कठिन हो जाएगा। लेकिन अगर टीम सेमीफ़ाइनल या फ़ाइनल में जगह बनाती है तो यह इस देश में क्रिकेट के लिए एक बड़ा पल हो सकता है।

संभावित प्लेइंग-XI

1. क्विंटन डिकॉक , 2 तेम्बा बवूमा (कप्तान), 3 एडन मारक्रम, 4 रासी वान दर दुसें, 5 डेविड मिलर, 6 हेनरिक क्लासेन, 7 वियान मुल्डर, 8 कगिसो रबाडा, 9 केशव महाराज, 10 लुंगिसानी एनगिडी/अनरिख़ नॉर्खिये, 11 तबरेज़ शम्सी

फ़िरदौस मूंडा ESPNcricinfo की साउथ अफ़्रीकी संवाददाता हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर अफ़्ज़ल जिवानी ने किया है।