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साउथ अफ़्रीका का अगला नायाब सितारा हो सकते हैं पीटरसन

अपने पहले दो टेस्ट में मात्र 44 रन बनाने वाले कीगन इस सीरीज़ में चैंपियन बनकर उभरे

इस टेस्ट सीरीज़ में साउथ अफ़्रीकी टीम की सबसे बड़े खोज साबित हो सकते हैं पीटरसन  •  AFP/Getty Images

इस टेस्ट सीरीज़ में साउथ अफ़्रीकी टीम की सबसे बड़े खोज साबित हो सकते हैं पीटरसन  •  AFP/Getty Images

कीगन पीटरसन चौथे दिन की पहली गेंद पर आउट हो सकते थे। मोहम्मद शमी की ड्राइव को ललचाती गेंद आई और वह ऑफ़ स्टंप के करीब गिरकर बाहर की ओर निकल गई। इस गेंद ने पीटरसन को शॉट खेलने के लिए मजबूर किया। अच्छा हुआ कि गेंद ने उनके बल्ले का बाहरी किनारा नहीं लिया और वह बीट हो गए।
वह इसके बाद भी आउट हो सकते थे, यह गेंद उससे भी बेहतर थी। अगर यह गेंद थोड़ा सा हरक़त करती तो वह उनके बल्ले का बाहरी किनारा ले सकती थी, लेकिन वह दोबारा बीट हो गए।
वह चार गेंद बाद भी आउट हो सकते थे, यह गेंद शमी की थी और उनके ओवर की आख़िरी गेंद। यह गेंद गिरकर अंदर की ओर आई। वह सोच रहे थे कि बाहर की ओर जाएगी और उन्होंने छोड़ने का निर्णय लिया। लेकिन देखिए यह गेंद भी स्टंप्स के ऊपर से निकलते हुए चली गई।
इन सबके बीच पीटरसन ने गली की ओर स्लाइस खेलते हुए सीरीज़ का अपना तीसरा अर्धशतक लगाया। यह गेंद हवा में थी लेकिन पीटरसन का दिल धुक धुक कर रहा था लेकिन यह गेंद गैप में पहुंची और वह दो रन निकालने में कामयाब रहे। उन्होंने शायद ही अपने अर्धशतक का जश्न मनाया। इसकी जगह वह अपने साथी रासी वान देर दुसें से जाकर मिले।
क्या वे चर्चा कर रहे थे कि उन्हें और कितने शरीर के वार की उम्मीद थी? या फिर वे सोच रहे थे कि 109 रन और बनाने के लिए किस तरह से जद्दोजहद की जाए? हो सकता है कि यह सिर्फ़ पीटरसन, दुसें को बता रहे थे कि जब वह बायो-बबल छोड़ेंगे तो सबसे पहले क्या करेंगे, क्योंकि दुसें के लिए तो अभी वनडे सीरीज़ बाक़ी है। इस तरह की बातें मूड को हल्का करने के लिए काफ़ी हो सकती थी।
केपटाउन की गर्मी ने इस सप्ताह 30 डिग्री से अधिक का तापमान लिया है और दोपहर तक यह और भी बढ़ गया। लेकिन असली गर्मी तो भारतीय टीम का यह तेज़ गेंदबाज़ी आक्रमण ला रहा था।
बुमराह ने पैड पर दुसें को को गेंद मारी और फ़िर एक किनारा पाया जो गली और बैकवर्ड प्वाइंट के बीच के गैप में चला गया। उन्होंने पीटरसन को शरीर से दूर की गेंद पर ड्राइव करते हुए बीट किया। एक ऐसा बल्लेबाज़ जिसका डिफे़ंस इस सीरीज़ में अब तक बेहतर रहा था। उन्होंने काम करके दिखाया। पीटरसन तब 59 रनों पर थे और गेंद बल्ले का बाहरी किनारा लेती हुई पहली स्लिप में गई लेकिन पुजारा ने कैच छोड़ दिया। यह टेस्ट का एक यादगार कैच हो सकता था।
उस समय तक उन्हें 83 रनों की ज़रूरत थी और दुसें एक अच्छे टच में लग रहे थे, लेकिन यहीं से साउथ अफ़्रीका को एक मोमेंटम मिल गया। आप देख सकते हैं कि अगले कुछ मिनट कैसे खेले गए। पीटरसन ने अगली ही गेंद को स्क्वायर लेग की ओर तीन फ्लिक करके तीन रन चुरा लिए। इस बीच भारतीय टीम ने भी उमेश यादव की गेंद पर एलबीडब्ल्यू का रिव्यू नहीं लिया, यह गेंद तो पीटरसन की थाई पैड पर जाकर लगी थी। इसके बाद वह आत्मविश्वास से भर गए।
पीटरसन ने अपनी तीन पारियों में ख़ुद के प्रदर्शन में ही सुधार किया है और हो सकता है कि वह इस लक्ष्य के अंत में पीटरसन अपने पहले टेस्ट शतक का इंतज़ार कर रहे थे, लेकिन शतक के पास आते हुए वह यह पीटरसन नहीं रहे थे। शार्दुल की एक ऑफ़ स्टंप के नजदीक की गेंद पर पंच करने की चाहत में गेंद उनके बल्ले का अंदरूनी किनारा लेती हुई विकेट से जा टकराई।
इसमें एक बात ध्यान देने वाली यह थी कि पीटरसन दिन की 100वीं गेंद पर आउट हुए।
साउथ अफ़्रीका को अभी भी 57 रनों की ज़रूरत थी और उनके हाथों में सात विकेट बाक़ी थे। लेकिन क्या यह बल्लेबाज़ी क्रम बिखर सकता था, जो दबाव में भी था। हालांकि, दुसें ने यह सुनिश्चित किया कि ऐसा हो ही नहीं सकता था।
पीटरसन के विकेट के बाद दुसें और बवूमा पर दबाव था और इससे निकलना जरूरी भी था। बवूमा तो शार्दुल की एक दरार पर डाली गई गेंद पर आउट भी हो गए होते, लेकिन यह गेंद ऑफ़ स्टंप के करीब से निकल कर चली गई। शार्दुल ने शरीर पर गेंद की और यह गेंद उनके ग्लव्स पर लगी लेकिन वह फ‍िर भी बच गए।
इसके बाद बवूमा ने बुमराह पर बैकफुट पंच लगाने का सोचा और वहां पर तीन रन निकाल लिए गए। जहां तक अब बात साउथ अफ़्रीका के बल्लेबाज़ों के सेट होने की थी, तो यह काम हो चुका था। बवूमा ने तो स्क्वायर लेग पर विजयी रन भी लगाए, लेकिन दूसरी ओर पीटरसन पहली बार से ही इस सीरीज़ में सकारात्मक दिखे। वह आउट होकर साउथ अफ़्रीका के नेवी ब्लू ट्रेनिंग किट को पहनकर बैठ गए थे। वह एल्गर और केशव महाराज के बीच बैठकर मुस्कुरा रहे थे। वह उठते हैं और अपनी टीम के लिए तालियां बजाते हैं। जैसा कि लुंगी एनगिडी कहते हैं, "बिना सुपरस्टार" के कुछ पाया गया है और दुनिया में नंबर एक रैंक वाली टीम के ख़िलाफ़ सीरीज़ जीतकर और दो बार मुश्किल लक्ष्य का पीछा करके अच्छा लगा। और हां इन दोनों प्रयासों में पीटरसन रीढ़ की हड्डी साबित हुए।
इस सीरीज़ से पहले, पीटरसन केवल उन लोगों के बीच जाने जाते थे जिन्होंने छह महीने पहले वेस्टइंडीज़ में साउथ अफ्रीका को खेलते देखा था और हो सकता है कि कुछ सहानुभूति का विषय रहा हो। सलामी साझेदारी के टूटने के बाद पीटरसन ने तीन पारियों में 44 रन बनाए। और अब देखिए यह वही पीटरसन है जो इस घरेलू सीरीज़ में नायाब नायक बनकर उभरे हैं। कह सकते हैं कि यह साउथ अफ़्रीका के अगले दौर की शुरुआत की झलकियां भर हैं।

फ़िरदौस मूंडा ESPNcricinfo की साउथ अफ़्रीकी संवाददाता हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सीनियर सब एडिटर निखिल शर्मा ने किया है।