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बदली हुई रणनीति के साथ क्या ऑस्ट्रेलिया जीत पाएगा विश्व कप?

पिछले दो साल से ऑस्ट्रेलिया ने पांच प्रमुख गेंदबाज़ों को उतारने की रणनीति बनाई थी, जिसे उन्होंने इस विश्व कप के दौरान बदल दिया

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ज़ैम्पा के साथ तेज़ गेंदबाज़ों पर होगी ज़िम्मेदारी  •  ICC via Getty

ऑस्ट्रेलिया की टीम गुरुवार रात दुबई में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ टी 20 विश्व कप सेमीफ़ाइनल में 177 रनों का पीछा करते हुए एक वक़्त 95 रनों पर 5 विकेट गंवा कर बैकफ़ुट पर थी। लेकिन 35 मिनट, 41 गेंदें, 81 रन, 6 सिक्सर और 4 चौके मैच की पूरी कहानी को बदलने के लिए काफ़ी थे।
मैथ्यू वेड और मार्कस स्टॉयनिस की साझेदारी ने रविवार के फ़ाइनल में कमाल कर दिया और मैच ऑस्ट्रेलिया के पाले में गिर गया। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के सभी खिलाड़ियों का आत्मविश्वास अब हम सभी के सामने है।
यह सही है कि वेड और स्टॉयनिस फ़िनिशर हैं, जो को एक मुश्किल वक़्त से निकालने में सक्षम थे। वेड और स्टॉयनिस पिछले तीन बिग बैश सीज़न में सबसे शानदार और नियमित सलामी बल्लेबाज़ हैं। वे साउथ अफ़्रीका और पाकिस्तान के ख़िलाफ़ दबाव की स्थिति में थे, लेकिन उन्होंने मैच को अपने पाले में डालने का तरीक़ा खोज लिया है।
ऑस्ट्रेलिया ने हमेशा पुरुषों के टी20 विश्व कप में प्रतिभा और क्षमता का समर्थन किया है। इससे पहले खेले गए पांच विश्व कपों में से तीन विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया सटोरियों का प्रिय टीम रहा था। हालांकि वह कभी टी20 विश्व कप जीतने में कामयाब नहीं रहा। दो सेमीफ़ाइनल मैचों में से एक में उन्हें युवराज सिंह ने और दूसरे में उन्हें क्रिस गेल ने तहस-नहस कर दिया था। वहीं 2010 में वह इंग्लैंड से फ़ाइनल हार गए थे।
उनके ज़्यादातर सर्वश्रेष्ठ माने जाने वाले खिलाड़ी वनडे और टेस्ट में एक साथ खेलते थे, लेकिन कभी उनके सबसे बेहतरीन खिलाड़ी टी20 टीम में एक साथ नहीं दिखते थे और जब वह टीम में होते भी थे तो उनकी भूमिकाएं कभी स्पष्ट नहीं होती थी।
लेकिन इस बार टीम की रणनीति में बदलाव आया है। ऑस्ट्रेलिया 15 महीने पहले आईसीसी रैंकिंग में नंबर एक टीम और एक स्पष्ट रणनीति के साथ इंग्लैंड पहुंची थी। नंबर सात पर ऐश्टन एगार सहित पांच विशेषज्ञ गेंदबाज़ और नंबर तीन पर स्टीवन स्मिथ एंकरिंग रोल के साथ टीम में थे। जस्टिन लैंगर ने यह टीम एक विशेष योजना के साथ बनाई थी।
ऑस्ट्रेलिया इसके ठीक एक साल के बाद लगातार पांच सीरीज़ हारते हुए बांग्लादेश से विश्व कप के लिए प्रस्थान करता है। उस वक़्त टीम के चयन में किसी प्रकार की स्पष्टता नहीं थी। उनका प्लेइंग 11 तय नहीं था। कोविड काल में यात्राएं करते हुए कई खिलाड़ियो ने अपने व्यक्तिगत कारण के अनुसार कई सीरीज़ से अपना नाम वापस ले लिया था और उसके कारण टीम के चयन में किसी प्रकार से भी, कुछ भी तय नहीं था। वहीं टीम और टीम से बाहर लैंगर की नीतियों को लेकर भी कई प्रश्न खड़े किए गए थे। विश्व कप को लेकर टीम की कोई भी योजना स्पष्ट नहीं थी।
एक बार के लिए तो उनसे कोई भी सेमीफ़ाइनल तक पहुंचने की कोई उम्मीद भी नहीं कर रहा था। ऐडम ज़ैम्पा कहते हैं, "हमें कम करके आंका जा रहा था। हमने विश्व कप से पहले एक टीम के रूप में इसके बारे में बात की थी। हमारा वर्तमान फ़ॉर्म उतना सही नहीं था, लेकिन जब आप पीछे मुड़कर देखते हैं, तो 18 महीने या दो साल पहले, हम दुनिया की नंबर एक टीम थे और ये सभी नाम हमारी टीम में थे। इस टीम के चयन के बाद हम इस विश्व कप में अपने प्रदर्शन को लेकर काफ़ी आश्वस्त थे।"
टूर्नामेंट शुरु होने से पहले ऑस्ट्रेलियाई टीम ने इस बात को स्पष्ट भी कर दिया था कि वह अपने दीर्घकालिक योजना के साथ टी20 विश्व कप में उतरेंगे। इसी योजना को लैंगर ने बांग्लादेश में अप्लाई किया था। हालांकि वहां उनकी टीम पूरी नहीं थी और टीम के कई मुख्य खिलाड़ी उस सीरीज़ में टीम का हिस्सा नहीं थे। लैंगर ने टीम के लिए जो भी प्लान बनाया था वह यूएई की धीमी पिचों को ध्यान में रखते हुए बनाया था। टीम में सात स्पेशलिस्ट बल्लेबाज़ थे जिसमें स्मिथ का बल्लेबाज़ी क्रम फिक्स नहीं था और मार्श को नंबर 3 पर बल्लेबाज़ी करवाने की योजना थी।
हालांकि इंग्लैड के ख़िलाफ़ उनका जो मुक़ाबला रहा वह उनकी टीम के लिए काफ़ी मायूसी देने वाला था। इस मैच के दौरान उनकी पूरी बल्लेबाज़ी क्रम धराशायी हो गई। इस मैच के बाद में फिंच ने कहा कि "हम निराश थे, हमें लगा कि उस मैच में हम शायद थोड़ा डर कर खेल रहे थे और पावरप्ले में हमने कई ग़लतियां की। यह वास्तव में आक्रामक रहने और खेल के इस प्रारूप को समझने के बारे में था कि जब आप एक बेहतरीन विपक्ष के सामने होते हैं, तो वह आपको मैच में वापस आने का ज़्यादा मौक़ा नहीं देता है।"
हालांकि इस मैच के बाद वेस्टइंडीज़ और बांग्लादेश के सामने ऑस्ट्रेलियाई टीम ने बढ़िया जीत दर्ज की। इन दोनों मैचों में ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी मानसिक और शारीरिक रूप से काफ़ी सकारात्मक दिख रहे थे। साथ ही ऑस्ट्रेलिया ने टीम में मार्श को वापस बुलाया, जो काफ़ी कारगर रहा। इसके बाद सेमीफ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने गेंदबाज़ी के साथ-साथ बल्लेबाज़ी में भी अपने सभी प्लान को काफ़ी सही तरीक से अप्लाई करते हुए एक शानदार जीत दर्ज़ की थी।
हालांकि मध्यक्रम में दो खिलाड़ी अभी भी ऐसे हैं जो अपने लय में नहीं हैं। मैक्सवेल का टी20 करियर उनके आईपीएल की सफलता को अंतरराष्ट्रीय फ़ॉर्म में बदलने में नाकाम रहा है, वहीं स्मिथ का भी फॉर्म कुछ ख़ास नहीं रहा है।
हालांकि टीम की बल्लेबाज़ी क्रम में काफ़ी गहराई है जिसके कारण इंग्लैंड के मैच को अगर छोड़ दें तो ऑस्ट्रेलियाई टीम को ज़्यादा परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ा है। वॉर्नर और मार्श ने अपनी कुछ अच्छी पारियों से टीम के भीतर एक बढ़िया संदेश दिया है। वहीं वेड और स्टॉयनिस ने पिछले मैच में बता दिया है कि वह टीम को मुश्किल परिस्थिति से निकालने में सक्षम हैं।
पैट कमिंस और जोश हेज़लवुड जैसे खिलाड़ियों की टी20 क्रिकेट की वापसी में आईपीएल की भूमिका भी रही है। उनके टेस्ट आक्रमण के प्रमुख तेज़ गेंदबाज़, इस टूर्नामेंट से पहले कभी भी टी20 में एक साथ नहीं खेले थे। कोलकाता नाइट राइडर्स और चेन्नई सुपर किंग्स के लिए दोनों खिलाड़ियों ने बढ़िया प्रदर्शन किया। जिसका साफ प्रभाव उनके मौजूदा फ़ॉर्म पर दिख रहा है।
ऑस्ट्रेलिया की यह वर्तमान टीम प्रतिभा, अनुभव और आक्रामकता का बेहतरीन मेल है। उन्हें अब इस विश्व कप को जीतने के लिए बस 40 ओवर चाहिए।

मैट रोलर ESPNcricinfo में असिस्टेंट एडिटर हैं, अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर राजन राज ने किया है