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डर को हराकर अब देविका वैद्य अपने विश्‍व कप के सपने से एक कदम दूर

उन्‍होंने सबकुछ किया जो वह कर सकती थी, क्रिकेट एकेडमी खोली जिससे खु़द की और दूसरों की मदद कर सकें

पिछले महीने ऑस्‍ट्रेलिया के ख़‍िलाफ़ टी20 सीरीज़ से देविका ने वापसी की थी  •  Getty Images

पिछले महीने ऑस्‍ट्रेलिया के ख़‍िलाफ़ टी20 सीरीज़ से देविका ने वापसी की थी  •  Getty Images

25 साल की उम्र तक देविका वैद्य तीन विश्व कप का हिस्सा बनने से बेहद क़रीबी अंतर से चूक चूकी हैं। 2017 में वह चोट के कारण विश्व कप दल से बाहर हुई थीं। 2018 में वह 40 घंटे की यात्रा कर सेमीफ़ाइनल से पहले वेस्टइंडीज़ पहुंचीं और भारतीय दल से जुडीं, लेकिन कुछ घंटे बाद सेमीफ़ाइनल में हारकर भारतीय टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई। 2020 में मलेरिया के कारण वह चयन के लिए उपलब्ध नहीं थीं।

इस बार जब उन्हें विश्व कप के लिए न्यौता मिला तो देविका ने अपने आप से कहा, "उम्मीद है कि इस बार कुछ बुरा नहीं हो!"

देविका ने कहा, "यह सुखद है कि मेरा सपना पूरा होने जा रहा है। 2003 में जब मैं ब्रेट ली की गेंदबाज़ी की नकल करती थी, तब से मैं विश्व कप खेलना चाहती थी। मैं शीशे के सामने खड़े होकर अपने आपको ऑस्ट्रेलिया का कप्तान समझती थी और मैच के बाद होने वाले इंटरव्यू देती थी। मेरे पिता तब मुझसे सवाल पूछते थे।"

अब कैसा लगता है, जब आप सही में सवालों को जवाब देती हैं?

उन्होंने कहा, "बहुत बेहतरीन लगता है। शायद तभी कहा गया है, 'सपने देखों और उसका पीछा करो, वे पूरे होते हैं।' अब मैं इसे महसूस करती हूं। विश्व कप से खेलने से बड़ा कोई भी सपना नहीं हो सकता और उसको जीतना एक अलग ही एहसास।"

2014 में देविका ने 17 साल की उम्र में टी20आई डेब्यू किया था। इसके बाद पिछले साल के आख़िरी में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ उनकी भारतीय टीम में वापसी हुई। इस दौरान वह लगातार घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन करती रहीं। तब से अब तक उन्होंने क्रिकेट के मैदान में सफलता और असफलता दोनों देखा है। उनकी मां की मृत्यु हुई, उन्होंने बिजनेस (क्रिकेट एकेडमी) खोला और फिर फ़ॉर्म और फ़िटनेस समस्याओं को दूर करते हुए भारतीय टीम में वापसी की।

वह कहती हैं, "2019 में मां को खोने के बाद मेरी रूचि क्रिकेट में कम होने लगी। एक समय ऐसा भी आया, जब मुझे लगा कि मैं इसका लुत्फ़ नहीं उठा पा रही हूं। मानसिक रूप से मैं अपने आपको बहुत कमज़ोर महसूस कर रही थी। फिर मैंने निर्णय लिया कि मुझे इस स्थिति से लड़ना है, अपने डर को कम करना है। मैंने साइकोलॉजिस्ट से संपर्क किया और अपना थैरेपी कराई। मुझे इससे उबरने में लंबा समय लगा, लेकिन थैरेपी के बाद मैं अलग होकर निकली। अब मैं अपने आपको खुलकर व्यक्त कर सकती हूं। तब से मेरे लिए सब ठीक रहा है।"

इसके बाद देविका ने फिर से क्रिकेट की प्रैक्टिस करना शुरू की। उनकी निगाहें अब वापसी पर थी। उन्होंने बताया, "मैं हर प्रैक्टिस सेशन से कुछ ना कुछ निकालना चाहती थी। मैंने निर्णय लिया कि अगर मेरे पास कई चीज़ों तक पहुंच नहीं है, तो मैं अपना ख़ुद का निवेश करूंगी। मैंने अपनी दोस्त तेजल हसाबनिस (महाराष्ट्र की महिला क्रिकेटर) से बात की और लियो क्रिकेट क्लब शुरू किया। मुझे लगा कि मेरी स्थिति ऐसी होनी चाहिए कि मैं अपनी आवश्यकतानुसार अभ्यास कर सकूं। हालांकि शुरुआती विचार यही थे, लेकिन इससे मुझे बिजनेस की भी जानकारी मिली। हमने बिजनेस पार्टनर ढूंढ़ें, एक ग्राउंड को लीज़ पर लिया, गेंदबाज़ी मशीन पर पैसे लगाए और टर्फ़ पिच तैयार किया।"

अपनी एकेडमी के बारे में बात करते हुए देविका कहती हैं, "हम फ़ीस लेते हैं और सुनिश्चित करते हैं कि वे बेहतरीन खिलाड़ी बनकर उभरे। युवा लड़कियों के लिए तो यह उनकी क्रिकेट यात्रा की शुरुआत जैसी होती है। जब हमने क्रिकेट खेलना शुरू किया तो महिला क्रिकेटरों के लिए ऐसी सुविधा नहीं होती थी। तो एकेडमी से ना सिर्फ़ मुझे अपने क्रिकेट को सुधारने में मदद मिली बल्कि इससे मैंने मैनेजमेंट, वित्तीय प्रबंधन और संचालन सीखा। अगर मैं किसी दौरे पर होती हूं तब भी मैं अपने एकेडमी के बच्चों से वीडियो कॉल पर बात करती हूं। मुझे बहुत ख़ुशी होती है, जब कोई मां आती है और कहती है कि उनकी बेटी ने कवर ड्राइव करना सीख लिया है, जब कोई पिता कहता है कि उनके बेटे ने ऐसा किया। इससे मुझे भी आत्मविश्वास मिलता है।"

देविका अब क्रिकेट सोचती हैं। वह अपनी मज़बूती और कमजोरियों का विश्लेषण करती हैं और उन्हें सुधारने का हरसंभव प्रयास करती हैं। उन्होंने बताया, "मैं अभी फ़िलहाल अपना पावर गेम सुधारने पर काम कर रही हूं क्योंकि टी20 में यह बहुत ज़रूरी है। मैं क्लासिक टच खिलाड़ी हूं, लेकिन इस तीर को अपने तरकश में जल्द से जल्द जोड़ना चाहती हूं। मैंने अपना स्किल सुधारने के लिए अपने फ़िटनेस पर भी बहुत काम किया है। मैं उम्मीद करती हूं कि यह मैदान में भी दिखेगा।"

ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ हुई सीरीज़ में देविका लेग स्पिनर अलाना किंग की गेंद पर आउट हुईं। इसके बाद से वह लगातार लेग स्पिन गेंदबाज़ी पर अतिरिक्त अभ्यास कर रही हैं। देविका भारत की विश्व कप दल में एकमात्र लेग स्पिनर हैं। उन्होंने शेन वॉर्न को देखकर यह कला सीखी है।

अपनी गेंदबाज़ी के बारे में वह कहती हैं, "मैं फ़िलहाल कुछ वैरिएशन पर काम कर रही हूं। हालांकि मैं यह भी समझती हूं कि वैरिएशन के लिए अपनी स्टॉक गेंदों से समझौता नही किया जा सकता। अलाना किंग ने भी मुझसे यही कहा था। मैंने उनसे उनके माइंडसेट के बारे में बात की और पूछा कि कैसे वह परिस्थितियों से तालमेल बिठाकर अपनी स्पीड को घटाती-बढ़ाती हैं और बल्लेबाज़ों को परेशान करती हैं।"

2012 में देविका अनिल कुंबले से मिली थीं और लेग स्पिन के बारे में ख़ूब बात की थी। उनको यह बातचीत पूरा याद है। उन्होंने कहा, "वह मेरे लिए सबसे यादगार बातचीत थी। उस समय मैं अपनी राज्य की टीम का भी नियमित हिस्सा नहीं थी, लेकिन फिर भी उन्होंने मुझे पूरा समय दिया। मैंने उन्हें अपना गेंदबाज़ी वीडियो दिखाया। इसके बाद उन्होंने मुझे कई तकनीकी सुझाव दिए। उन्होंने बताया कि चतुराई से गेंदबाज़ी करना उन्हें ख़ुद से सीखना होगा, यह कोई नहीं सीखा सकता।"

देविका को उम्मीद है कि वह अब भारतीय एकादश का नियमित हिस्सा होंगी।

शशांक किशोर ESPNcricinfo में सीनियर सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी में सब एडिटर दया सागर ने किया है।