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शारजाह में फ़तह हासिल करने वाला निचले दीर का एक युवा नसीम शाह

एक 19 साल के युवा ने दबाव को झेलते हुए बल्‍ले से उस समय जीत दिलाई जब यह बहुत मायने रखती थी

पाकिस्‍तान की जीत में नसीम शाह ने अहम भूमिका निभाई  •  AFP/Getty Images

पाकिस्‍तान की जीत में नसीम शाह ने अहम भूमिका निभाई  •  AFP/Getty Images

एशिया कप में पाकिस्‍तान के पहले मुक़ाबले में 18वां ओवर था और लगा कि नसीम शाह अब आगे ओवर नहीं कर पाएंगे। वह रवींद्र जाडेजा को गेंदबाज़ी कर रहे थे और भारत जीत के क़रीब था। वह गेंदबाज़ी कर रहे थे क्‍योंकि पाकिस्‍तान को विकेट चाहिए था, लेकिन इस 19 साल के लड़के की टांगे मुश्किल से ही उनके शरीर का वजन संभाल पा रही थी। वह हर गेंद के बाद पिच पर गिर रहे थे, उनके चेहरे से दर्द साफ़ दिख रहा था। दुबई की गर्म शाम में 145 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से गेंदबाज़ी करना आसान नहीं था।
वह फ‍िर से खड़े होते और दोबारा से अगली गेंद करने के लिए ख़ुद को मनाते हुए दोबारा से रन अप पर जाते। वह गति से समझौता नहीं करना चाहते थे और जब वह गेंद छोड़ते तो वह दर्द दोबारा से उनको परेशान करता। ऐसा बार-बार होता रहा और यह उनकी मानसिक मज़बूती को दर्शा रहा था।
अब उनकी मानसिक मज़बूती को दिखाने वाला एक और दिन आया पाकिस्‍तान बनाम अफ़ग़ानिस्‍तान। दोनों देशों के प्रवासियों से भरा एक शहर, उनमें से प्रत्येक ने इसे अपना दूसरा घर कहना सीख लिया है। यह मैच भारत के नज़रिये से भी अहम था और पाकिस्‍तान की जीत उन्‍हें इस टूर्नामेंट से बाहर कर देती।
यह पसंद आए या नहीं भारत, पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान ने भू-राजनीति की दुनिया में अपने भाग्य को एक साथ जोड़कर देखा है। शारजाह में एक असली शाम में तीनों ही देशों की सांसें अटकी हुई थी। कहानी दिलचस्‍प है क्‍योंकि खेल लोगों को एक साथ लाता है या कम सुखद रूप से यह इस पर निर्भर करता है कि खेल कैसे चलता है।
खेल में एक हाइप थी और आधे समय तक पाकिस्‍तान, अफ़ग़ानिस्‍तान के बल्‍लेबाज़ों की परीक्षा ले रहा था। 129 टूर्नामेंट का तीसरा सबसे न्‍यूनतम स्‍कोर था। नसीम ने चार ओवर में केवल 19 रन देकर एक बेहतरीन इकॉनमी से गेंदबाज़ी की।
अगर दुबई या शारजाह शहर के विपरीत ऐसी कोई चीज़ है, तो वह निचले दीर है जहां के नसीम रहने वाले हैंं। यहां ठंड होती है, पहाड़ हैं और यहां का माहौल यूएई के रेगिस्‍तान से कतई अलग है। यह सच है कि शुरुआती 10 सालों में उनके पिता उनको पेशेवर क्रिकेट छोड़ने के लिए कहते रहे, लेकिन यह भी कहते रहे कि शॉर्ट कट नहीं अपनाए। लड़का उस मौके़ को लेने के लिए तैयार था और विफलता की दर्द ही वही थी जिसकी क़ीमत उनको चुकानी पड़ सकती थी।
पाकिस्तान के राष्ट्रीय ढांचे के लिए मार्ग कभी-कभी अधिक भूलभुलैया लगता है, लेकिन नसीम की कच्ची गति और तेज़ गेंद करने की क्षमता स्पष्ट थी। आपको उसे खोजने के लिए किसी मार्ग की आवश्यकता नहीं थी और इसलिए जिस दिन से उन्होंने प्रथम श्रेणी में पदार्पण किया, राष्ट्रीय टीम की निगाहें उन पर थीं। उन्होंने अपने दूसरे प्रथम श्रेणी मैच में केवल पांच विकेट लिए। वह अभी 16 साल के भी नहीं हुए थे।
लेकिन यूएई में वहां से यहां तक ​​का रास्‍ता सीधा नहीं था। संदेह, असफलताएं, उत्कर्ष के क्षण और निश्चित रूप से बहुत सारे क्लेश थे। अपने पदार्पण की पूर्व संध्या पर उनकी मां का निधन हो गया था, जब 16 वर्षीय नसीम ऑस्ट्रेलिया में दुनिया के दूसरे छोर पर थे। इस तरह की चीज़ें नहीं होनी चाहिए, घर से दूर एक बच्चा अपने सबसे बड़े दुख की घड़ी में पेशेवर खेल खेलता है, लेकिन नसीम ने किया। यह सिर्फ़ शारीरिक दर्द की बाधा नहीं है जिससे वह गुजरे हैं।
ऐसा नहीं है कि मन के साथ संघर्ष करने के लिए शारीरिक दर्द बाधाएं नहीं हैं। उनकी पीठ में मल्टीपल स्ट्रेस फ़्रैक्चर था, जिसके कारण उन्हें मैदान की तुलना में अस्पताल में अधिक बार देखा गया। कलाई की स्थिति और रन-अप के बारे बातें हुई। इस साल हाल ही में उनके कंधे में समस्या थी।
फ‍िर आती है शारजाह की यह रात जो क्रिकेट ड्रामे से भरपूर थी और इतिहास में दर्ज हो गई। यह खेल अभी भी कुछ लोगों द्वारा भारत और पाकिस्तान के बीच एक प्रॉक्सी के रूप में देखा जा सकता है (और क्या अफ़ग़ानिस्तान यह सुनकर थक नहीं गया है?), लेकिन अफ़ग़ानिस्तान ने क्रिकेट के सबसे बड़े महाद्वीपीय कप में अपनी जगह बनाने के लिए लड़ाई लड़ी है, और वे अपनी कहानी किसी और को नहीं बताने देंगे। फ़ज़लहक़ फ़ारूक़ी (3-31), मुजीब उर रहमान (4-0-12-0), फ़रीद अहमद (3-31), राशिद ख़ान (2-25) और मोहम्‍मद नबी (3-0-22-0) ने आक्रमण को संभाला और पाकिस्‍तान की नींव हिला दी। आसिफ़ अली उनके आख़‍िरी उम्‍मीद थे, वह भी आउट हो गए। इसके बाद कुछ स्‍लेजिंग हुई। वह इसको पसंद नहीं करत हैं, पाकिस्‍तान इसको पसंद नहीं करता है, लेकिन अफ़ग़ानिस्‍तान को नहीं लगा कि उन्‍होंने कुछ ग़लत किया है।
आख़‍िरकार निचले दीर का लड़का मैदान पर आता है। वह अफ़ग़ानिस्‍तान की ऐतिहासिक जीत के आगे इकलौते अड़चन थे। वे पाकिस्‍तान के ख़‍िलाफ़ पिछले दो नज़दीकी मैच खेल चुके थे लेकिन इस बार बात अलग थी। नसीम को गेंद हाथ में लिए, ख़तरनाक क्षेत्ररक्षण करते देखा जाता है।
फ़रूक़ी जिन्‍होंने पहले बाबर आज़म को गोल्‍डन डक पर आउट किया था। पिछले मैच में भारत के ख़‍िलाफ़ जीत के हीरो मोहम्‍मद नवाज़ और खुशदिल शाह का विकेट निकाला था। तीनों ही कुछ नहीं कर सके। तो क्‍यों नसीम ख़ुद को किसी मैच में साबित करेगा? जिनके टी20 अंतर्राष्‍ट्रीय में कोई रन नहीं थे और टी20 क्रिकेट में केवल 63 रन थे।
आख़‍िरी ओवर में 11 रन की ज़रूरत थी। फ़ारूक़ी यॉर्कर मिस कर गए और नसीम ने बल्‍ला घुमाया और गेंद साइट स्‍क्रीन की ओर हवा में तैरती हुई पहुंची। कुछ ही देर में अफ़ग़ान दर्शकों का जश्‍न बेचैनी में बदल गया। लेकिन एक शॉट से नसीम को जज नहीं किया जा सकता है और उन्‍होंने एक बार दोबारा इस तरह का शॉट खेल दिया। यह गेंद भी फुल टॉस थी और नसीम ने बल्‍ला घुमाया। यह इतना साफ़ हिट नहीं था, गेंद लांग ऑफ़ की ओर हवा में गई, भारत, पाकिस्‍तान और अफ़ग़ानिस्‍तान तीनों की ही नज़र इस गेंद पर थी। लेकिन नसीम ने अपनी बाहें खोलकर जश्‍न मनाया और दिखाया कि यह 19 साल का लड़का केवल 145 किमी प्रति घंटा की गति से गेंदबाज़ी ही नहीं करता है।
नसीम ने अपना बल्‍ला छोड़ा और पाकिस्‍तानी खिलाड़‍ियों और स्‍टाफ़ की ओर दौड़ लगा दी। गेंद से वह क्‍या कर सकते हैं यह सभी जानते हैं लेकिन बल्‍ले से उन्‍होंने सभी को अचंभित कर दिया।
जैसे ही दर्शकों का मूड लड़ाई में बदला, अफ़ग़ानिस्‍तान के खिलाड़ी घुटनों पर बैठे और अपनी सबसे कड़वी हार के लिए दुखी हुए, यह नहीं होना चाहिए था लेकिन नसीम ने ऐसा कर दिखाया।

दनयाल रसूल ESPNcricinfo में सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी में सीनियर सब एडिटर निखिल शमा ने किया है।