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जानिए कैसे श्रेयस अय्यर ने छोटी गेंद की समस्‍या से छुटकारा पाया

केके‍आर के सहायक स्‍टाफ़ से जुड़े अभिषेक नायर के साथ मुंबई में दायें हाथ के बल्‍लेबाज़ ने अभ्‍यास सत्र में समय बिताया है

पुल गेंद को खेलने की समस्‍या से लगभग बाहर निकल चुके हैं श्रेयस अय्यर  •  Associated Press

पुल गेंद को खेलने की समस्‍या से लगभग बाहर निकल चुके हैं श्रेयस अय्यर  •  Associated Press

80, 54, 63, 44, 50, 113*, 28*, 80, 49, 24, 82
इस साल की शुरुआत में जब से साउथ अफ़्रीका ने भारतीय टीम का 3-0 से सूपड़ा साफ़ किया है, श्रेयस अय्यर ने 11 बार वनडे में बल्‍लेबाज़ी की है। इस दौरान, उन्‍होंने छह अर्धशतक लगाए और अपने करियर की सर्वश्रेष्‍ठ नाबाद 113 रनों की पारी खेली, वह भी 97.61 के स्‍ट्राइक रेट के साथ। उन्‍होंने हाल ही में मीरपुर की टर्निंग विकेट पर 82 रनों की उम्‍दा पारी खेली जहां बांग्‍लादेश के स्पिनरों ने अन्‍य भारतीय बल्‍लेबाज़ों का परेशानी में डाला।
इस निरंतरता को सुरक्षा की भावना के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है, जहां यह कहा जा सकता है कि शिखर धवन के नेतृत्‍व वाली दूसरे दर्जे की टीम में वह महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा बने। 11 में से आठ पारियां उनकी तब आई जब रोहित शर्मा और विराट कोहली एकादश में शामिल नहीं थे। उनकी अनुपस्थिति में परिस्थितियों के आधार पर देखा जाए तो श्रेयस या तो एंकर की भूमिका में दिखे हैं या टीम के सबसे बड़े पालनहार।
यह साल उनका ज़बरदस्‍त रहा है और वह इस साल पूर्ण सदस्‍य देशों में सबसे ज्‍़यादा वनडे रन बनाने वाले बल्‍लेबाज़ बनकर उभरे हैं। हां यहां पर चर्चा भी नहीं होनी चाहिए कि जब भारत की असल टीम खेलेगी तो उनका स्‍थान क्‍या होगा। लेकिन क्‍योंकि भारत का मध्‍य क्रम कई खिलाड़‍ियों के रहने से भरा हुआ रहा है तो श्रेयस को इस क्रम में अपना रास्‍ता बनाना तो पड़ा है।
उनके इस साल के प्रदर्शन ने उन्‍हें मध्‍य क्रम के कई दावेदारों में सबसे आगे ले जाकर खड़ा कर दिया है। इससे उम्‍मीद जगी है कि श्रेयस नंबर चार पर बल्‍लेबाज़ी करके स्‍थायित्‍व लाएंगे, जिसमें भारत 2019 विश्‍व कप में चूक गया था।
श्रेयस की सबसे बड़ी ताक़त तो उनका फ़्री होकर रन बनाना है। जहां अन्‍य बल्‍लेबाज़ फंस सकते हैं, चंकि श्रेयस स्पिन के ख़‍िलाफ़ अच्‍छे स्‍कोरिंग रेट से रन बनाते हैं। उन्होंने स्पिन के ख़ि‍लाफ़ अपनी एक पहचान बनाई है और इसके लिए सबसे बड़ी वजह तो उनका फ़ुटवर्क और उनकी स्‍पष्‍टता है।
लेकिन कुछ चीज़ें श्रेयस के लिए मुसीबत भी बन रही हैं, जैसे छोटी गेंद। यह सब आईपीएल से शुरू हुआ जहां पर वह बाउंसर पर चूकते नज़र आए। वह चार बार छोटी गेदों पर आउट हुए। और यह मुसीबत और तब बढ़ी जब उमरान मलिक ने कई छोटी गेंदें डालने के बाद उन्‍हें चौंकाते हुए यॉर्कर डालकर बोल्‍डर कर दिया।
इंग्‍लैंड में तो उनकी यह जद्दोजहद और खुलकर सामने आई जब ब्रैंडन मक्‍कलम ने बालकनी से गेंदबाज़ को बाउंसर डालने का इशारा किया। इस क्षेत्र को श्रेयस अच्‍छे से जानते हैं और मैदान के बाहर इस पर काबू पाने का भी प्रयास कर रहे होंगे। हो सकता है कि वह छोटी गेंद के सर्वश्रेष्‍ठ बल्‍लेबाज़ नहीं हों, लेकिन उन्‍होंने हमेशा इस मामले से निपटने का प्रयास किया है। इस क्‍वालिटी से टीम प्रबंधन भी उनसे खु़श होगा।
जब यह पता चला कि श्रेयस टी20 विश्‍व कप में रिज़र्व खिलाड़ी के तौर पर ऑस्‍ट्रेलिया नहीं जा रहे हैं, तो उन्होंने अभिषेक नायर के साथ कई सत्र किए। श्रेयस और नायर के बीच एक अच्‍छा कार्य संबंध पिछले कुछ सालों में बना है। इन निजी सत्र की तह यही थी कि मुंबई में श्रेयस की छोटी गेंद की कमज़ोरी को दूर किया जाए।
जिन लोगों ने उन्हें क़रीब से देखा है, उन्हें पता होगा कि प्वाइंट या कवर के ऊपर से स्लैश करने की उनकी प्रवृत्ति कैसी है। यह शरीर पर आती छोटी गेंद के ख़‍िलाफ़ उनके रिलीज़ शॉट्स में से एक है, जो बहुत बेकार दिखता है। सोच यह थी कि अधिक विकल्पों का पता लगाया जाए, अपने सेट अप में मामूली बदलाव करके उन्हें अभ्यास में लाने के लिए उन्‍हें पर्याप्त समय दिया जाए।
ईएसपीएनक्रिकइंफ़ो के साथ बातचीत में अभिषेक नायर ने बताया, "सबसे पहला काम तो यह पता लगाना था कि वह क्‍यों छोटी गेंद नहीं खेल पा रहे हें। हमने तकनीकी तौर पर काम किया और उनके शुरुआती स्टेप्स में बदलाव किया। अगर आप उनको नज़दीक से देखेंगे तो आप पाएंगे कि कुछ रणनीतिक और तकनीकी बदलाव आए हैं, जैसे वह कहां खड़े होते हैं, कैसे वह खड़े होते हैं। उनके पैरों और उनके शुरुआती स्टेप्स के बीच बदलाव आया है, जिससे उन्‍हें पुल खेलने में मदद मिली है। न्‍यूज़ीलैंड में उन्‍होंने शॉट आर्म पुल बहुत खेला।"
उन्‍होंने आगे बताया, "हमने आईपीएल में इस पर काम करना शुरू किया था, लेकिन पता नहीं लगा पाए थे क्‍योंकि मैच बहुत ही कम समय में हो रहे थे। लिहाज़ा जब हमें ब्रेक मिला तो हमने उनकी तकनीक पर काम किया, वो भी सैयद मुश्‍ताक़ अली ट्रॉफ़ी से पहले। उनके शुरुआती कदम बहुत दूर से था और इससे उन्‍हें पुल खेलने में मदद मिली। एक बार जब उन्‍होंने यह समझ लिया कि वह क्‍यों इसे ठीक से नहीं खेल पा रहे हैं, तो यह बताना उन्‍हें आसान हाे गया।"
"बाद में उन्‍हें अधिक सफलता मिली क्‍योंकि तब वह ओवर प्‍वाइंट या कवर प्‍वाइंट के ऊपर से नहीं खेलते थे, जैसा वह पहले कर रहे थे। उन्‍हें जानते हुए और उन्‍होंने क्या किया है और समस्या को ख़त्‍म करने की उनकी मानसिकता को जानते हुए वह चार या छह लगाने के लिए 150 किमी प्रति घंटे की बाउंसर पर भी पुल करने से दूर नहीं हैं। वह ऐसा करेंगे और बहुत जल्‍दी करेंगे, लेकिन 135-140 पर वह आसानी से ऐसा कर पा रहे हैं। जहां तक बदलावों की बात की जाए तो उन्‍होंने तकनीक पर बहुत मेहनत की है क्योंकि उनके साथ यह समस्‍या हो रही थी। अगर इन समस्‍यों के चलते भी उनके नंबरों की संख्‍या इतनी अच्‍छी है तो एक बार जब यह सुलझ जाएगी तो वह कुछ ख़ास बनकर उभरेंगे।"
रिकॉर्ड के लिए, आईपीएल के बाद से श्रेयस का नियंत्रण प्रतिशत 77 था, जो शॉर्ट ऑफ़ लेंथ या छोटी गेंद के ख़‍िलाफ़ था। जिन गेंदों पर उनका नियंत्रण था, उन्होंने उन्हें 97.10 की स्ट्राइक रेट से 134 रन बनाने में मदद की है। क्या तकनीकी बदलाव अब छेटी गेंद के ख़‍िलाफ़ बेहतर रिकॉर्ड में तब्दील होते हैं, यह तो समय ही बताएगा।
बड़ी तस्वीर को देखते हुए अय्यर शायद एक बल्लेबाज़ी स्लॉट के लिए सूर्यकुमार यादव और संभवतः संजू सैमसन और दीपक हुड्डा के साथ संघर्ष करेंगे, अगर हम मान लें कि रोहित, शिखर धवन या शुभमन गिल में से एक के साथ ओपनिंग करेंगे, कोहली नंबर तीन, केएल राहुल या ऋषभ पंत 5वें और हार्दिक पांड्या 6वें नंबर पर हैं।
उन लोगों में जो श्रेयस को टक्कर दे सकते हैं, तो हुड्डा ही एक हैं जो गेंद के साथ कुछ ओवर करने का फ़ायदा उठा सकते हैं, लेकिन अभी तक उन्‍हें अपना पक्ष रखने का कोई मौक़ा ही नहीं मिला है। सूर्यकुमार भी हैं लेकिन जब तक वह रन नहीं बनाए तो उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है।
हालांकि वह न्‍यूज़ीलैंड में वनडे खेले और बांग्‍लादेश सीरीज़ में उन्‍हें आराम दिया गया। कोच राहुल द्रविड़ का कहना है कि घरेलू सीज़न में एक आदर्श पहली एकादश उतारी जा सकती है तो अगले कुछ सप्‍ताह में यह देखने को मिल जाएगा कि वह किसके साथ जा रहे हैं।
वैसे अब तक श्रेयस ने नंबर चार पर खेलने की अपनी दावेदारी को बेहद मज़बूत कर लिया है।

शशांक किशोर ESPNcricinfo में सीनियर सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी में सीनियर सब एडिटर निखिल शर्मा ने किया है।