नॉटिंघम में खेले गए पहले टेस्ट मैच के दौरान धीमी ओवर रेट से गेंदबाज़ी करने के लिए भारत और इंग्लैंड को विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) के दूसरे संस्करण में दो-दो बहुमूल्य अंक गंवाने पड़े। साथ ही मैच रेफ़री ने दोनों टीमों पर 40 प्रतिशत मैच फ़ीस का जुर्माना भी लगाया। बारिश के कारण पांचवें दिन का खेल संभव नहीं हो पाया था और पहला टेस्ट मैच ड्रॉ पर समाप्त हुआ था।

2021-23 डब्ल्यूटीसी चक्र की नई अंक प्रणाली के तहत टीमों को ड्रॉ मुक़ाबलों के लिए 4-4 अंक दिए जाएंगे। इस फ़ैसले का मतलब है कि भारत और इंग्लैंड को अब चार की बजाए केवल दो-दो अंकों से संतोष करना पड़ेगा।

इस धीमे ओवर रेट का एक बड़ा कारण यह था कि दोनों टीमों ने स्विंग गेंदबाज़ी के लिए अनुकूल परिस्थितियों में कई सारे तेज़ गेंदबाज़ों को उतारा था, जहां इंग्लैंड ने अपने गेंदबाज़ी क्रम में चार तेज़ गेंदबाज़ों का समावेश किया था। वहीं भारत ने चार तेज़ गेंदबाज़ों के साथ-साथ रवींद्र जाडेजा को इकलौते स्पिनर के रूप में अपनी टीम में जगह दी थी। पहले टेस्ट के दौरान फेंके गए कुल 250.2 ओवरों में से मात्र 16 ओवरों में स्पिन गेंदबाज़ी हुई थी।

हालांकि बारिश के कारण मैच में बार-बार रुकावटें आईं, ओवरों की धीमी गति का कारण यह था कि बल्लेबाज़ गेंद का सामना करने के लिए तैयार होने में काफी देरी कर रहे थे। दूसरे दिन जब रोशनी बिगड़ रही थी, केएल राहुल जेम्स एंडरसन के ख़िलाफ़ गार्ड लेने में भरपूर समय ले रहे थे। इंग्लैंड के बल्लेबाज़ भी पीछे नहीं थे। उन्होंने कई मौकों पर मोहम्मद सिराज को अपने गेंदबाज़ी मार्क पर इंतज़ार करवाया।

डब्ल्यूटीसी के दौरान ओवर-रेट संबंधित अंक कटौती टीमों के लिए महंगी साबित हो सकती है। 2019-21 के पहले चक्र में, ऑस्ट्रेलिया को मेलबर्न में भारत के ख़िलाफ़ बॉक्सिंग-डे टेस्ट के दौरान धीमी ओवर गति के लिए चार अंकों से हाथ धोना पड़ा था। अंततः वह फ़ाइनल में जगह बनाने से चूक गए और उनकी जगह फ़ाइनल में प्रवेश करने वाली न्यूज़ीलैंड टीम पहली विश्व टेस्ट चैंपियन बन गई।

अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर अफ़्ज़ल जिवानी (@jiwani_afzal) ने किया है।