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पुजारा-रहाणे ने फिर दिखाया कि वे ऐसी ही परिस्थितियों के लिए बने हैं

दोनों पुराने दोस्तों ने धैर्य से सधी हुई बल्लेबाज़ी करते हुए टीम इंडिया को एक बड़ी मुश्किल से निकाला

रविवार का खेल शुरू होने के 41 मिनट बाद ही चेतेश्वर पुजारा क्रीज़ पर थे। अभी तक इस सीरीज़ में शानदार फ़ॉर्म में चल रहे भारतीय सलामी बल्लेबाज़ केएल राहुल और रोहित शर्मा एक-एक करके दो ओवर के अंतराल में ही पवेलियन लौट गए। पुजारा का साथ देने आए कप्तान कोहली ने एक साझेदारी बनाने की कोशिश की लेकिन वह भी 20 रन के निजी स्कोर पर आउट हो गए। अब सारा दारोमदार ख़राब फ़ॉर्म में चल रहे पुजारा और रहाणे के कंधों पर था, जो कि टीम में अपना स्थान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
हालांकि पुजारा जब मैदान पर उतरे तो उनके हाव-भाव से यह बिल्कुल नहीं लग रहा था कि उनके करियर पर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ इंग्लिश गेंदबाज़ों का आक्रमण लगातार जारी था। एंडरसन ने पुजारा के ऑफ़ स्टंप को लक्ष्य बनाया और लगातार वहीं से गेंदबाज़ी करते रहे। इसका उन्हें तुरंत फ़ायदा भी हुआ, जब पुजारा के बल्ले का बाहरी किनारा लेते हुए एक गेंद पहले स्लिप तक गई। हालांकि पुजारा ने इसे बहुत हल्के हाथों से खेला था, इसलिए वह रूट तक कैरी नहीं हुई।
अगली गेंद पुजारा का बैट और थाई पैड लेते हुए शॉर्ट लेग पर खड़े हसीब हमीद के बिल्कुल सामने गिरी। लेकिन इन सभी हमलों से पुजारा का ध्यान भंग नहीं हुआ। वह कोई जल्दबाज़ी में नहीं थे। वह उसी तरह खेलना चाहते थे, जैसा वह हमेशा खेलते आए हैं। शायद लंच के समय उन्होंने टीम मैनेजमेंट को भी यह बात बता दी थी कि अगर मैनेजमेंट चाहता है कि वह मैच में कोई अंतर पैदा करें तो उन्हें उनके जैसा ही खेलने दें।
लगभग 45 मिनट बाद अपनी 35वीं गेंद पर पुजारा ने सैम करन की एक गेंद को मिडविकेट की तरफ भेज कर अपना खाता खोला और दर्शक खिलवाड़ में "पुजारा-पुजारा" चिल्ला बैठे। लंच के ठीक आठ मिनट पहले भारतीय कप्तान कोहली पुजारा का साथ छोड़ गए। इसके बाद उनका साथ देने टीम के उपकप्तान और पुजारा के पुराने दोस्त रहाणे क्रीज़ पर आए।
दोनों ने अपने करियर के शुरूआती दिनों से ही साथ क्रिकेट खेला है। अंडर-16, अंडर-19 जैसे एज ग्रुप टीम के अलावा वह मुंबई कॉर्पोरेट क्रिकेट लीग में भी एक ही टीम में थे। पुरानी शैली से क्रिकेट (ओल्ड स्कूल ऑफ़ क्रिकेट) खेलने वाले ये दोनों क्रिकेटर अपनी मजबूत तकनीक और टेम्परामेंट के लिए जाने जाते हैं। दोनों में आपसी समझ और एक-दूसरे के लिए सम्मान भी बहुत है। लेकिन पिछले कई टेस्ट मैचों से लगातार ख़राब फ़ॉर्म में चल रहे इन दोनों खिलाड़ियों के अब टीम में स्थान पर भी सवाल उठने लगे थे।
ख़ैर, शनिवार तक बराबरी पर चल रहे इस मैच में शीर्ष क्रम को जल्दी गंवाने के बाद भारत मैच में बहुत पीछे चला गया था। अब जिम्मेदारी उन दो कंधों और पुराने दोस्तों पर थी, जो खुद फ़ॉर्म, तकनीक, आत्मविश्वास और माइंडसेट जैसे सवालों से जूझ रहे थे। सवाल यह भी था कि टीम में अपनी जगह बचाने के लिए जूझ रहे ये दोनों बल्लेबाज़ क्या इंग्लैंड की गेंदबाज़ी आक्रमण को झेल पाएंगे?
शुक्रवार को एंडरसन ने रहाणे को अपनी पहली ही गेंद पर आउट किया था। इसके बाद रहाणे अपनी तकनीक पर काम करते हुए दिखे। आउट होने के बाद वह नेट्स में गए और लगातार अभ्यास किया। रविवार को रहाणे ने लेग गॉर्ड लिया और खुले हुए स्टांस के साथ बल्लेबाज़ी की। इससे पहले के कुछ पारियों में वह लगातार मिडिल और ऑफ़ स्टंप पर गॉर्ड ले रहे थे। ऑली रॉबिन्सन की एक गेंद उनके पैड पर लगी लेकिन हॉक-आई दिखा रहा था कि गेंद उनके लेग स्टंप को मिस कर रही थी।
पूरे साल रनों के लिए जूझ रहे पुजारा और रहाणे इस पारी के दौरान बिल्कुल जल्दी में नहीं थे। वे नहीं चाहते थे कि भारत का निचला क्रम इंग्लैंड के सामने धराशायी हो जाए। इसलिए उनकी योजना था कि वे पूरे दूसरे सत्र के दौरान पिच पर ही टिके रहें, भले ही कितना भी कम रन आए। इन दोनों में से पुजारा कुछ अधिक ही रक्षात्मक थे।
जब पुजारा ने 100 गेंद खेल लिए तो लॉर्ड्स का मैदान तालियों से गूंज उठा। फरवरी के बाद यह पहला मौका था, जब पुजारा ने किसी पारी में 100 गेंद खेली हो। उन्होंने 118 गेंदों के बाद मार्क वुड को फ़्लिक करके अपनी पहली बॉउंड्री लगाई।
रन भारत के नहीं बन रहे थे, लेकिन हताश-निराश इंग्लैंड के गेंदबाज़ हो रहे थे। चाय के आधा घंटे पहले मार्क वुड रॉउंद द विकेट आए और बॉउंसरों की बौछार कर दी। पुजारा उनके निशाने पर खास थे। हालांकि ऑस्ट्रेलिया में पैट कमिंस और उनके साथियों के बॉउंसर्स को झेलने के बाद यह पुजारा के लिए कुछ नहीं था। इंग्लिश कप्तान ने भी वुड को वह फ़ील्ड दी, जिसे वह चाहते थे। पुजारा के लिए शॉर्ट लेग, सिली प्वाइंट, लेग स्लिप, फ्लाइंग स्लिप और पुल करने की दशा में डीप स्क्वेयर लेग और डीप फ़ाइन लेग दोनों तैनात था। लेकिन पुजारा को ये सब भी नहीं परेशान कर सका।
यह इस सीरीज़ में पहला मौका था, जब पूरे सत्र के दौरान भारत ने अपना कोई विकेट नहीं गंवाया। हालांकि चाय के बाद दोनों की साधना टूटी और एक-एक करके दोनों पवेलियन लौट गए। लेकिन तब तक दोनों ने अपना काम कर दिखाया था। एक समय जहां भारत एक कोलैप्स की तरफ बढ़ रहा था, वहीं दूसरी तरफ भारत के पास अब 140 रन की बढ़त है और वह मैच में बना हुआ है। ऋषभ पंत की एक पारी मैच को अब भारत के तरफ भी ला सकती है।
जब ये दोनों बल्लेबाज़ पवेलियन की ओर लौटे तो पूरा भारतीय ड्रेसिंग रूम उनके लिए तालियां बजा रहा था। दुनिया भर के सवालों से जूझ रहे ये दोनों बल्लेबाज़ बहुत ही साफ दिमाग से मैदान पर गए थे कि उन्हें अपना विकेट नहीं गंवाना है और अधिक से अधिक बल्लेबाज़ी कर भारत को मैच में बनाए रखना है। पिच पर उन्होंने अपना क्लास, तकनीक, अनुभव, टेंपरामेंट सब कुछ झोक दिया और एक बार फिर से साबित किया कि वे ऐसी ही परिस्थितियों के लिए बने हुए हैं।

नागराज गोलापुड़ी ESPNcricinfo के ग्लोबल एडिटर हैं, अनुवाद ESPNcricinfo के दया सागर ने किया है