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कोहली का नया टीम संतुलन अभी रह सकता है बरकरार

अधिकांश संकेत इस ओर इशारा करते हैं कि भारत चार तेज गेंदबाज व जाडेजा के साथ मैदान पर उतरेगा

वह कौन सा आखिरी स्पिनर था, जिसने लॉर्ड्स में अंतिम अपने प्रदर्शन के बलबूते पर प्लेयर ऑफ द मैच का खिताब जीता था? एक बात लगभग तय है कि वह गेंदबाज़ दूसरा टेस्ट खेलेगा। उस स्पिनर का नाम मोईन अली था। साल 2017 में उन्होंने 112 रन देकर 10 विकेट लिए थे। साथ ही पहली पारी में 87 रन बनाकर इंग्लैंड को 221 रन से जीत दिलाई। उस वर्ष स्पिनरों ने लॉर्ड्स में पिछले 50 वर्षों में अपने सर्वश्रेष्ठ किया था। उस टेस्ट में 20 में से 18 विकेट स्पिनरों ने लिए थे।
हालांकि तब से स्पिनरों ने इस मैदान पर आधा दर्जन टेस्ट में सिर्फ 12 विकेट लिए हैं। उनमें से सात विकेट 2019 ऐशेज के दूसरे टेस्ट में आए जो ड्रॉ हो गया था। 2018 से लॉर्ड्स के मैदान पर तेज गेंदबाज़ों ने 143 विकेट लिए हैं जबकि स्पिनरों ने पांच टेस्ट में केवल 11 विकेट लिए हैं। यदि आप इसी अवधि में सभी प्रथम श्रेणी क्रिकेट के क्रिकेट को जोड़ भी दें तो तेज गेंदबाज़ों ने यहां कुल 631 विकेट लिए हैं, जबकि स्पिनरों ने 22 मैचों में 62 विकेट लिए हैं। पिछले दस सालों में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में लॉर्ड्स में जुलाई के बाद केवल एक बार स्पिनर ने पांच विकेट लिए हैं।
क्या इसके बाद शार्दुल ठाकुर के चोटिल होने के बाद भारत आर अश्विन को टीम में शामिल करने के बारे में सोचेगा। पहले टेस्ट के ड्रॉ होने के बाद कोहली ने कहा था कि शार्दुल और जाडेजा के साथ पांच गेंदबाज़ों का आक्रमण टीम को सही संतुलन प्रदान करता है और शायद इस सीरीज़ के आने वाले मैचों में हम इस टेम्पलेट के साथ मैदान पर उतरेंगे लेकिन अब सवाल यह है कि ठाकुर के हैमस्ट्रिंग में खिंचाव के कारण, भारत उस संतुलन को कैसे बनाए रखेगा जिसके बारे में कोहली बात कर रहे थे? एक गेंदबाजी ऑलराउंडर के रूप में अश्विन भारत के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी हैं। एक निचले क्रम के बल्लेबाज़ के रूप में वह बहुत बार भारत के लिए एक मजबूत उम्मीद के तौर पर उभरते हैं। इन सब चीज़ों के बाद वह कहीं ना कहीं सबसे महान टेस्ट स्पिनरों में से एक हैं, ऐसे में उनकी उपस्थिति इंग्लैंड के कप्तान जो रूट को छोड़कर कम अनुभवी बल्लेबाज़ी क्रम के लिए खतरे की घंटी हो सकती है। अश्विन के साथ भी भारत निचले क्रम में बल्लेबाजी की गहराई को बरकरार रखता है और यह तब और भी ज्यादा महत्वपूर्ण है जब आपका निचला क्रम कमजोर रहता है। ट्रेंट ब्रिज में पहली पारी में भारत में जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी और मोहम्मद सिराज की 95 रनों की महत्वपूर्ण बढ़त लेने के बाद ऐसा हुआ है।
क्या भारत अभी भी ऐसे स्थान पर दो स्पिनरों के साथ खेलने के लिए जाएगा,जहां स्पिन ने इतने लंबे समय तक एक कमजोर भूमिका निभाई है? यदि आपने प्री-मैच प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोहली को सुना है, तो आपको यह मानने में कोई दिक्कत नहीं होगी कि अश्विन के खेलने की संभावना नहीं है। कोहली के अनुसार ट्रेंट ब्रिज में भारत जिस बल्लेबाज़ी क्रम के साथ मैदान में उतरा, वह "सबसे मजबूत" था। रोहित शर्मा और केएल राहुल की सलामी जोड़ी ने भारत को दोनों पारियों में मजबूत शुरुआत दिलाई, जबकि ऋषभ पंत और रवींद्र जाडेजा ने पहली पारी में कोहली, चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे की विफलताओं को कुछ हद तक कवर किया।
कोहली से जब पूछा गया कि क्या वह अश्विन को दूसरे मैच में मौका देंगे तो उन्होंने कहा कि, "अच्छी बात यह है कि जाडेजा ने पहले टेस्ट में रन बनाए थे। अब दूसरे टेस्ट में वह आत्मविश्वास के साथ मैदान पर उतरेंगे। उनकी बल्लेबाजी के कारण हमारे बल्लेबाज़ी क्रम में गहराई आती है। वहीं ​निचले क्रम के खिलाड़ी भी रन बनाने में अपना योगदान दे चुके हैं। हां, शार्दुल की बल्लेबाज़ी टीम को और ज़्यादा मज़बूती प्रदान करती है। लेकिन पुजारा, जिंक्स, ख़ुद मेरे अधिक स्कोर न बनाने के बाद भी हम बल्लेबाज़ी के दृष्टिकोण से अच्छे स्तर पर हैं।"
हर मैच में दूसरे बल्लेबाज़ों के लिए भी आगे बढ़ने का मौका होता है। रोहित और केएल ने अच्छा प्रदर्शन किया, इसलिए हम एक बल्लेबाज़ी इकाई के रूप में बहुत सहज हैं और हमें नहीं लगता कि अगर शार्दुल नहीं खेलते हैं तो एक बल्लेबाज़ की कमी खलेगी। यह सही है कि हमें एक संतुलित टीम बनाने के लिए थोड़ा विचार करना पड़ेगा लेकिन अगर शार्दुल जैसा कोई खिलाड़ी उपलब्ध नहीं है तो हम निश्चित रूप से पहले यह सोचेंगे कि 20 विकेट कैसे लें। हम केवल बल्ले से अतिरिक्त रन प्रदान करने वाले खिलाड़ी को मौका नहीं देंगे। पहले टेस्ट के प्रदर्शन के बाद हम काफी सहज महसूस कर रहे हैं।
क्या इससे चौथे तेज गेंदबाज के रूप में इशांत शर्मा या उमेश यादव के लिए फिर से दरवाजा खुल जाता है? 2018 में पर्थ और जोहान्सबर्ग, 2021 में गाबा टेस्‍ट और नॉटिंघम टेस्ट ऐसे चार उदाहरण हैं जहां भारत ने पिछले चार वर्षों में कम से कम चार तेज गेंदबाज़ों के साथ खेला है। भारत ने साउथ अफ्रीका दौरे का अंतिम टेस्ट जीता, लेकिन तेज गेंदबाज़ों में भुवनेश्वर कुमार और हार्दिक पांड्या दोनों शामिल थे। वहीं भारत वाका की पिच पर 2018-19 ऑस्ट्रेलिया दौरे का दूसरा टेस्ट हार गया, जहां नेथन लायन ने मैच को आठ विकेट लेकर नाटकीय रूप से बदल दिया। उस मौके पर भारत ने हनुमा विहारी और मुरली विजय ने स्पिनरों की भूमिका निभाई थी। वहीं 2021 में गाबा टेस्‍ट में भारत ने सिराज, नटराजन, सैनी और शार्दुल को खिलाया और यहां पर वॉशिंगटन सुंदर स्पिन ऑलराउंडर के रुप में खेले।
कोहली ने कहा कि तीन साल बाद सिर्फ भारतीय गेंदबाज़ ही नहीं बल्कि गेंदबाज़ी के प्लान भी काफी अलग है। और इसलिए उन्हें भरोसा है कि अगर भारत लॉर्ड्स में चार तेज गेंदबाज होंगे तो वो अच्छा प्रदर्शन करेंगे।
उन्होंने कहा, "चार गेंदबाजों के संयोजन में आपके पास उस दिन का आंकड़ा होता है, जिस दिन आपके गेंदबाज़ आपको सफलता दिलाते हैं और आपको पता होता कि है कौन सा गेंदबाज़ किस स्टेज पर आपको सफलता दिला सकता है। आप उन्हें उसी अनुसार प्राथमिकता में रखते हैं। वह गेंदबाज़ जिसको सफलता मिलने की सबसे अधिक संभावना है, वह गेंदबाज़ी के लिए आता है और अपना स्पेल करता है। इस क्रम में हम उन गेंदबाज़ों को चुनते हैं जिनकी एनर्जी कम ना पड़े और जो आपको सफलता दिला सकते हैं।"
कोहली ने इस सवाल से भी असहमति जताई कि क्या चार तेज गेंदबाजों को खेलने का मतलब यह होगा कि चौथे तेज गेंदबाज को कम गेंदबाज़ी कराई जा सकती है। उन्होंने कहा, "हम निश्चित रूप से उस तरह के खाके में खेलना पसंद करते हैं और हमने कभी महसूस नहीं किया है कि जब भी हमने चार गेंदबाजों के साथ खेला है तो हमने किसी को कम गेंदबाजी कराई है।" हमने वास्तव में बहुत, बहुत संतुलित महसूस किया है क्योंकि हम लगातार दबाव बनाने और विकेट लेने की कोशिश करते रहते हैं।"
तो क्या हमें यह समझना चाहिए कि कोहली चार तेज गेंदबाजों और जाडेजा के साथ मैदान पर जाने की ओर इशारा कर रहें हैं? शायद हां। वैसे, लॉर्ड्स टेस्ट में दो स्पिनरों को खेलने वाली आखिरी टीम कौन सी थी? संकेत : बादल छाए हुए थे और टीम को काफी नुकसान झेलना पड़ा था।

नागराज गोलापुड़ी ESPNcricinfo न्यूज एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी में ​सब एडिटर राजन राज ने किया है।