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चार युवा श्रीलंकाई खिलाड़ी जो भारत के ख़िलाफ़ प्रभावित कर सकते हैं

पथुम निसंका इसमें सबसे प्रमुख हैं

टी20 सीरीज़ के खत्म होने के बाद भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट श्रृंखला शुरू हो रही है। श्रीलंकाई टीम ने अभी तक भारत के ख़िलाफ़ कभी भी भारतीय धरती पर कोई टेस्ट श्रृंखला नहीं जीती है। क्या मौजूदा श्रीलंकाई टीम इस इतिहास को बदलने का माद्दा रखती है?
अगर टीम को देखें तो शायद यह संभव नहीं हो पाएगा। हालांकि किसी भी सीरीज़ के शुरू होने से पहले आप इस तरह की नकारात्मक सोच के साथ आगे नहीं बढ़ सकते। इसी कारण से चलिए हम श्रीलंका के चार उन खिलाड़ियों की बात करते हैं, जो भले ही ज़्यादा प्रसिद्ध नहीं हैं लेकिन उनमे यह काबिलियत है कि श्रीलंका को एक बढ़िया टेस्ट टीम के रूप में स्थापित कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो श्रीलंका इस टेस्ट सीरीज़ में भारत को कड़ा टक्कर दे सकता है।
श्रीलंका के सभी युवा रेड-बॉल बल्लेबाज़ों में सबसे होनहार खिलाड़ी हैं। उनके पास विशेष रूप से स्पिन के ख़िलाफ़ एक कॉम्पैक्ट रक्षात्मक तकनीक है, और तेज़ गेंदबाज़ों के ख़िलाफ़ भी वह बढ़िया बल्लेबाज़ी करते हैं। वह अपने करियर में केवल छह टेस्ट (10 पारियां) खेले हैं, लेकिन अब तक, श्रीलंका में उनका औसत 37.71 और कैरेबियन देशों में 54.33 (दो मैचों में) है।
23 वर्षीय निसंका के लिए यह एक बढ़िया आंकड़ा है, लेकिन श्रीलंकाई घरेलू क्रिकेट का कोई भी बल्लेबाज़ निसंका की तुलना में टेस्ट क्रिकेट के लिए तैयार उतने तैयार नहीं दिखते हैं। शायद यह कोई आश्चर्य की बात नहीं होनी चाहिए, क्योंकि उन्होंने 3872 प्रथम श्रेणी रन बनाए हैं। उस दौरान उनका औसत 63.72 था। हाल के महीनों में उन्होंने छोटे प्रारूपों में भी सकारात्मक प्रभाव डाला है, लेकिन यह टेस्ट है जिसके लिए वह सबसे उपयुक्त हैं। बहुत कम ही श्रीलंका के बल्लेबाज़ अंतर्राष्ट्रीय मैचों में उतनी आसानी से कदम रख पाते हैं जैसा उन्होंने किया है।
13 टेस्ट मैचों में एम्बुलडेनिया ने पांच विकेट लिए हैं, और डरबन, हरारे और गाले में अपने टीम की जीत में मदद उन्होंने योगदान दिया है। वह सबसे बढ़िया प्रदर्शन तब करते हैं जब वह बल्लेबाज़ों को ड्राइव करने के लिए ललचाते हैं। श्रीलंका में एम्बुलडेनिया आमतौर पर नई गेंद के साथ विशेष रूप से कॉफ़ी बढ़िया गेंदबाज़ी करते हैं।
वह अक्सर नई गेंद को बल्लेबाज़ों से दूर लेकर जाने में कामयाब होते हैं। हालांकि एक बात यह भी है कि वह ज्यादातर अपनी स्टॉक गेंद पर ही निर्भर रहते हैं।
प्रवीण जयविक्रमा, 23
चूंकि भारत के अधिकतर बल्लेबाज़ दाएं हाथ के हैं, इसलिए श्रीलंका दो बाएं हाथ के स्पिनर्स के साथ उतर सकती है। जयविक्रमा ने अपने तीन मैच के करियर में सबको प्रभावित किया है। उन्होंने बांग्लादेश के ख़िलाफ़ अपने डेब्यू मैच में 11 विकेट लिए थे।
जयविक्रमा, एम्बुलडेनिया से अलग तरह के स्पिनर हैं। वह हवा में अधिक तेज़ हैं और सीधी विकेट टू विकेट गेंद फेंकते हैं। इसलिए वह सबसे अधिक क्लीन बोल्ड या पगबाधा करते हैं। तीन टेस्ट में उनका औसत 18.22 है।
ये दोनों लगभग एक ही खिलाड़ी हैं क्योंकि शायद सुरंगा लकमल दोनों मैच खेलेंगे और ऐसे में इनदोनों युवा गेंदबाज़ों में से एक ही गेंदबाज़ टीम में होगा। इनदोनों गेंदबाज़ों में क्षमता है कि वह 145 की गति से लगातार गेंदबाज़ी कर सकते हैं।
चमीरा अधिक विश्वसनीय विकल्प है। वह विपक्षी टीम के ख़िलाफ़ ज़्यादा घातक साबित होने में सक्षम है (वह पिछले एक साल में अपने बाउंसर से बहुत सारे बल्लेबाज़ों को परेशान कर सकते हैं), लेकिन आमतौर पर वह एक लाइन और लेंथ पर टिका रहते हैं।

ऐंड्रयू फ़िडेल फ़र्नांडो ESPNcricinfo के श्रीलंका संवाददाता हैं, अनुवाद ईएसपीएनक्रिकइंफ़ो हिंदी के राजन राज ने किया है