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सहज और कुशल सिराज भारत के लिए तुरुप का इक्का बनकर उभरे

नई गेंद के साथ उनका नियंत्रण पहले पावरप्ले में भारत के लिए अहम साबित हुआ

वनडे टीम में वापसी के बाद लगातार चमक रहे हैं मोहम्‍मद सिराज  •  Gallo Images/Getty Images

वनडे टीम में वापसी के बाद लगातार चमक रहे हैं मोहम्‍मद सिराज  •  Gallo Images/Getty Images

अंतर्राष्ट्रीय सफे़द गेंद कैलेंडर में आमतौर पर एक अलिखित लय होती है क्‍योंकि यहां पर वनडे वर्ष और टी20 अंतर्राष्‍ट्रीय वर्ष होते हैं, जिसमें टीम उस लिहाज़ से दोनों में से एक प्रारूप को एहमियत देती हैं जिसका वैश्विक टूर्नामेंट नज़दीक होता है।
कोविड-19 के समय से वनडे मैच एक अजीब और उपेक्षित स्‍थान पर आ गए हैं। टी20 विश्‍व कप पहले 2020 में होना था और इसे 2021 में आगे बढ़ाया गया। अब एक और टी20 विश्‍व कप इस महीने शुरू हो रहा है। इस बीच एक वनडे चैंपियंस ट्रॉफ़ी भी हो सकती थी लेकिन इसको हटा दिया गया, ऐसे में वनडे ऐसा प्रारूप बन गया जहां पर आप अधिकतर अपनी दोयम दर्जे की टीम खिलाने लगे।
यह वह समय था जब इस साल फ़रवरी में मोहम्‍मद सिराज की वेस्‍टइंडीज़ टीम के ख़‍िलाफ़ घरेलू वनडे सीरीज़ में वापसी हुई। वह इससे पहले जनवरी 2019 में एकमात्र वनडे खेले थे।
अहमदाबाद में अपनी वापसी वाले मैच में सिराज ने नई गेंद ली और मेडन के साथ शुरुआत की। अपने दूसरे ओवर में शे होप ने उन पर लगाकर दो चौके लगाए, यह गेंदें फ़ुलर आउट स्विंग थीं जिन पर ख़ूबसूरत कवर ड्राइव लगाई गई। इसके बाद सिराज ने अपनी क्रॉस सीम गेंद की, यह पिछली दो गेंद की तरह ड्राइव लगाने वाली ही गेंद थी लेकिन वह गिरकर अंदर आई और होप के बल्‍ले का अंदरूनी किनारा लेकर स्‍टंप्‍स पर जाकर लगी।
उस समय से सिराज ने भारत को वनडे मैचों में पहले पावरप्‍ले में लगातार सफलताएं दिलाई हैं। मंगलवार को इसमें दो और विकेट जुड़ गए और दोनों ही शॉर्ट लेंथ गेंद थी। हमेशा से फ़‍िरोज़ शाह कोटला की दोहरी गति वाली पिच ने इसमें लाभ पहुंचाया।
बल्‍लेबाज़ों को सिराज की शॉर्ट बॉल समझने में दिक़्क़त होती है। ऐसा उनकी रिलीज़ और जिस तरह से वह तेज़ी से क्रीज़ की ओर आते हैं उसकी वजह से है। आप उम्‍मीद करते हैं कि गेंद स्किड होकर तेज़ी से बल्‍ले पर आएगी। जब यह इसके बजाय आपकी ओर रुक कर आती है, जैसा कि रीज़ा हेंड्रिक्स पुल लगाने की पोज़िशन में जल्‍दी आ गए थे, तो ऐसे में आप इससे पहले कि समझे क्‍या हो रहा है, आप शॉट खेलने के आधे रास्‍ते तक आ जाते हैं।
हेंड्रिक्‍स का विकेट सिराज का इस साल पहले 10 ओवरों में 12वां विकेट था, जो किसी भी पूर्ण सदस्य टीम के किसी गेंदबाज़ के इस साल सबसे ज्‍़यादा विकेट हैं। सिराज की पहले पावरप्‍ले में इस साल 15.66 की औसत और 3.54 की इकॉनमी रही है।
यह शानदार और ख़ासतौर से टीम प्रबंधन का हौसला बढ़ाने वाले आंकड़े हैं क्‍योंकि यह उस समय आए हैं जब भारतीय टीम नई गेंद की गेंदबाज़ी में जूझ रही थी।
और यह एकदम अलग है। 2020 की शुरुआत से सिराज की वापसी से पहले आख़‍ि‍री वनडे तक भारत ने 18 मैच खेले और उनके गेंदबाज़ पावरप्‍ले में 115.77 की औसत से मात्र नौ ही विकेट चटका पाए। वे उस दौर में विश्‍व में सबसे ख़राब थे। ज़‍िम्‍बाब्‍वे की भी औसत 63.45 की थी, जबकि भारत की 5.78 की इकॉनमी भी इस दौर में सबसे ख़राब थी। पाकिस्‍तान 5.34 के साथ दूसरे नंबर पर थी।
विकेट नहीं लेने की ही वजह से भारत का इस दौर में 7-11 का जीत-हार का रिकॉर्ड था। विरोधी टीम के शीर्ष क्रम ने इसका जमकर फ़ायदा उठाया क्‍योंकि पहले विकेट के लिए ही तब सात शतकीय साझेदारी लगी थी।
भारत ने इस दौरान दुनिया की सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ी टीम के ख़‍िलाफ़ खेला लेकिन वह भी अपनी पहली पसंद के गेंदबाज़ों के साथ खेल रहा था। जसप्रीत बुमराह ने 12 पारियों में शुरुआती 10 ओवर में गेंदबाज़ी की और 213.00 की औसत से केवल एक ही विकेट लिया। भुवनेश्‍वर कुमार ने सात पारियों में 64.50 की औसत से गेंदबाज़ी की। ये दोनों जहां रनों को रोकने में क़ामयाब रहे तो मोहम्‍मद शमी ने 75.50 की औसत और 6.29 की इकॉनमी से गेंदबाज़ी की। इस दौर में कम से कम 100 गेंद करने वाले भारतीय गेंदबाज़ों में नवदीप सैनी ने 6.47 की इकॉनमी से गेंद की और वह एक भी विकेट नहीं ले पाए।
अरे..झटका लगा ना!
यह भी संभव था कि सिराज उस दौर में गेंदबाज़ी करते और वह भी ख़राब रहते। उनका नई गेंद से गेंदबाज़ी सुधार से भारत का कुल रिकॉर्ड बेहतर हुआ है। सिराज की वापसी के बाद से पहले पावरप्‍ले में उनकी औसत 21.10 की हो गई है और वे 4.22 रन प्रति ओवर रन ख़र्च कर रहे हैं, जो दर्शाता है कि उन्‍होंने गेंदबाज़ों के लिए बेहतर परिस्थिति में या कमज़ोर शीर्ष क्रम के ख़‍िलाफ़ गेंदबाज़ी की है।
लेकिन यह मायने नहीं रखता कि किन स्थितियों में वे आए, सिराज के नई गेंद से बेहतर हुए गेंदबाज़ी रिकॉर्ड को दरक़‍िनार नहीं किया जा सकता। उनकी वापसी से उन्‍होंने पहले 10 ओवर में 318 गेंदें की हैं, 102 गेंदें करने वाले प्रसिद्ध कृष्‍णा से तीन गुना ज्‍़यादा।
उन्‍होंने साउथ अफ़्रीका के ख़‍िलाफ़ तीन मैचों की वनडे सीरीज़ में दिखाया है कि नई सफ़ेद गेंद से गेंदबाज़ी करने के लिए जिस भी कौशल की ज़रूरत होती है वह सब सिराज में हैं। वह दाएं हाथ के बल्‍लेबाज़ों के लिए गेंद को बाहर की ओर स्विंग कराते हैं और उनकी क्रॉस सीम गेंद उनके लिए अंदर की ओर आती है। उनकी लाइन और लेंथ ऐसी होती है कि गेंद ऑफ़ स्‍टंप के क़रीब गिरती है और उनके पास सटीक बाउंसर भी है।
उनके पास खेल के दूसरे पड़ाव के लिए भी कई कौशल हैं। उन्‍होंने 44वें से 50वें ओवर तक लगातार गेंदबाज़ी की और केवल 14 रन दिए और चार रन ओवर थ्रो (जो बाई के ख़ाते में गए और ना कि उनके आंकड़ों में)। चार ओवरों में उन्‍होंने शॉट नहीं खेले जाने वाली धीमी गति की कटर गेंद डाली। उन्‍होंने ऐसी लेंथ पर गेंद की जहां पर ड्राइव नहीं लगाई जा सकती थी और ना ही पुल किया जा सकता था। उन्‍होंने रांची की सूखी पिच पर यह सब कुछ किया।
परिस्थितियां माकूल नहीं थी। आख़‍िरी ओवर में गेंद हरे रंग की हो गई थी जो अक्‍सर वनडे क्रिकेट में नहीं देखा जाता है लेकिन उन्‍होंने नियंत्रण से इसका अच्‍छा इस्‍तेमाल किया।
आप उनके हाल के सारे प्रदर्शन पर भी नज़र डाल सकते हैं। इंदौर में तीसरे टी20 के दौरान उदाहरण के लिए 17वें ओवर में उन्‍होंने सटीक यॉर्कर डाली और केवल आठ रन दिए। एक ऐसे मैच में जहां पर बल्‍लेबाज़ों का दबदबा था।
जो नियंत्रण सिराज ने उस ओवर में दिखाया, वही उन्‍होंने पूरी वनडे सीरीज़ में दिखाया, जो दर्शाता है कि वह लय में हैं। इसका सबूत तो बस उनको रन-अप पर आते देखने और क्रीज़ पर उनके छलांग लगाने से पता चल जाता है। सब कुछ एक दम सहज और लयबद्ध है।
यह भी मौक़ा है कि उनकी लय उन्‍हें बुमराह की जगह टी20 विश्‍व कप टीम में जगह दिला दे। कोविड-19 से हाल में जूझे शमी की फ़‍िटनेस के बारे में स्‍पष्‍टता नहीं है और दीपक चाहर जो रिज़र्व सूची में थे, चोटिल हो गए हैं।
जब भारत ने टी20 विश्‍व कप पर रणनीति बनानी शुरू की तो सिराज उनके प्‍लान में दूर तक भी नहीं थे। उन्‍होंने इस साल केवल दो टी20 अंतर्राष्‍ट्रीय खेले, जबकि आवेश ख़ान 15 खेल गए। आप यह तर्क दे सकते हैं कि सिराज को असली परीक्षा का समय नहीं मिला।
वनडे पूरी तरह से टी20 अंतर्राष्‍ट्रीय से अलग हैं, जहां अलग ज़रूरतें होती हैं। अगर कुछ ताक़त टी20 अंतर्राष्‍ट्रीय में ट्रांसफ़र हो सकती हैं तो वह सिराज के पास सबसे बड़ी है - नई गेंद से गेंदबाज़ी। वह बेशक़ बुमराह की कमी को नहीं भर सकते हैं लेकिन सिराज के पास गति हैं, उनके पास गेंद को स्किड कराने की कला है और वह कौशल से भरपूर हैं। यह दर्शाता है कि वह लय में हैं और यह कारण बहुत हैं।

कार्तिक कृष्‍णास्‍वामी ESPNcricinfo में सीनियर सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी में सीनियर सब एडिटर निखिल शर्मा ने किया है।