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भारतीय टीम: दावेदार बहुत लेकिन मौक़े कम

टीम चुनने के लिए बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं, लेकिन चुनौती कुछ चुनिंदा खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें विश्व कप से पहले पर्याप्त मौक़े देना है

क़रीब-क़रीब दो महीने पहले, जब भारत के बड़े नाम वाले खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया में टी20 विश्व कप की तैयारी कर रहे थे, तब दूसरे दर्जे की भारतीय टीम ने घर में साउथ अफ़्रीका के ख़िलाफ़ तीन वनडे खेले। उस समय क्रिकेट की दूनिया का ध्यान कहीं और था, लेकिन भारतीय वनडे टीम के आसपास रहने वाले तीन खिलाड़ियों ने नियमित चयन के लिए अपनी ओर ध्यान खींचा।
लखनऊ में बारिश से प्रभावित पहले मैच में संजू सैमसन ने 63 गेंदों में नाबाद 86 रनों की पारी खेली, जिससे भारत को निराशाजनक स्थिति से उबरने में मदद मिली और मेज़बान टीम एक ज़बरदस्त जीत के क़रीब पहुंच गई थी।
रांची में खेले गए दूसरे वनडे में इशान किशन ने सात छक्कों से सजी 84 गेंदों में 93 रनों की पारी खेली और भारत ने 279 रनों के लक्ष्य को 25 गेंदें शेष रहते हासिल कर लिया।
दिल्ली में सीरीज़ के आख़िरी मैच में मोहम्मद सिराज ने नई गेंद से ज़बरदस्त स्पेल डाला और दो विकेट चटकाए, जिसने साउथ अफ़्रीका को 99 रन पर समेटने की नींव रखी। सिराज ने 4.52 की इकॉनमी से सीरीज़ में पांच विकेट लिए। उनकी इकॉनमी दोनों टीमों के किसी भी गेंदबाज़ से सबसे अच्छी थी। इस प्रदर्शन के लिए सिराज को प्लेयर ऑफ़ द सीरीज़ के ख़िताब से भी नवाजा गया।
सैमसन, किशन और सिराज अभी पहली पसंद के वनडे खिलाड़ियों की जगह नहीं लेने वाले थे, लेकिन इन प्रदर्शनों से उन्हें आगे चलकर भारत की वनडे टीम में नियमित दिखने की उम्मीद की होगी।
अब आते हैं 31 अक्तूबर पर, जहां चीज़ें ज़टिल हो गईं।
भारतीय चयनकर्ताओं ने उसी दिन दो वनडे टीमों की घोषणा की। सैमसन, न्यूज़ीलैंड दौरे पर जा रही टीम में थे, लेकिन उसके बाद बांग्लादेश जाने वाली टीम में नहीं थे। जबकि किशन और सिराज के लिए कहानी इसके ठीक विपरीत था।
नियमित वनडे खिलाड़ियों के सर्कल के बाहर के अन्य खिलाड़ियों ने भी ख़ुद को इसी स्थिति में पाया। बल्लेबाज़ों में शुभमन गिल, दीपक हुड्डा और सूर्यकुमार यादव बांग्लादेश नहीं बल्कि न्यूज़ीलैंड जा रहे थे, रजत पाटीदार और राहुल त्रिपाठी न्यूज़ीलैंड नहीं बल्कि बांग्लादेश जा रहे थे। न्यूज़ीलैंड जाने वाली टीम में कलाई के दो स्पिनर थे और बांग्लादेश में एक भी नहीं। तेज गेंदबाज़ों में अर्शदीप सिंह और उमरान मलिक न्यूज़ीलैंड दौरे के लिए चुने गए थे और यश दयाल को बांग्लादेश के लिए चुना गया (यश दयाल को चोट लग गई और उनको कुलदीप सेन ने उन्हें रिप्लेस किया)।
अभी जैसी स्थिति है, सिर्फ़ छह ही खिलाड़ी ऐसे हैं जो दोनों वनडे टीमों में शामिल रहे।
भारतीय चयनकर्ताओं का काम बहुत कठिन है। प्रत्येक रोल के लिए खिलाड़ियों की भारी संख्या को देखते हुए आपके द्वारा किया गया कोई भी फ़ैसला उचित और अनुचित दोनों होगा।
लेकिन टीम चुनने का मूल तर्क़ निश्चितताओं को चुनना है - जब तक कि आप उन्हें आराम नहीं दे रहे - और प्रत्येक रोल के लिए संभावितों का एक क्रम बनाने के बाद अन्य जगहों को भरें ताकि उन्हें मौक़ा मिलने पर ज़्यादा बढ़िया से मौक़ा मिल सके।
हालांकि न्यूज़ीलैंड और बांग्लादेश के लिए चुनी गई वनडे टीम उस तर्क़ का पालन नहीं करती है। बड़ी संख्या में भारतीय टीम का दरवाज़ा खटखटा रहे खिलाड़ियों को दो दलों में बांट देने से इस बात की पूरी संभावना थी कि उनमें से बहुतों को प्रभावित करने के लिए बहुत कम मौक़े मिलेंगे।
न्यूज़ीलैंड में मैचों का बारिश से प्रभावित होने की वजह से गेंदबाज़ों का वर्कलोड काफ़ी कम हुआ। जहां अर्शदीप और उमरान को अच्छे मौक़े मिले, वही 2019 विश्व कप के बाद टीम से बाहर होने के बाद वापसी करने की जुगत में लगे कुलदीप ने एक भी मैच नहीं खेला और वह बांग्लादेश दौरे पर भी नहीं जा रहे हैं।
सैमसन के मामले ने सबसे ज़ोरदार बहस छेड़ दी है। उन्होंने पहला वनडे खेला और अच्छा योगदान दिया, लेकिन आख़िरी दो वनडे से बाहर रहे, क्योंकि भारत को छठे गेंदबाज़ी विकल्प के लिए एक बल्लेबाज़ को बाहर करने की ज़रूरत थी।
आप यह तर्क दे सकते हैं भारत को सैमसन के बजाय किसी और को बाहर कर सकता था। शायद सूर्यकुमार यादव को, जिन्होंने दूसरे वनडे से पहले अपनी पिछली सात वनडे पारियों में 6, 27, 16, 13, 9, 8 और 4 रनों की पारी खेली थी। लेकिन यह संभव है कि टीम प्रबंधन ने हुड्डा को सुर्यकुमार के बजाय सैमसन के रोल के लिए देखा, क्योंकि यहां मामला आख़िरी ओवरों का है। सूर्यकुमार का मिडिल ओवरों में रन बनाने का कौशल ज़बरदस्त है।
और जबकि सूर्यकुमार ने अभी तक टी20 जैसा प्रदर्शन वनडे में नहीं किया है, यह पूरी तरह से उचित है कि उनके जैसे क्षमतावान खिलाड़ी को ज़्यादा मौक़े दिए जाएं। अगर वह 30 गज के दायरे के बाहर पांच फ़ील्डर होने के बावजूद गैप को बेहतरीन अंदाज़ से भेद सकता है तो आप उन्हें ऐसा करने के लिए और भी अधिक समर्थन देंगे, जब 30 गज के बाहर चार फ़ील्डर होंगे, जैसा कि वनडे में मिडिल ओवरों में चार खिलाड़ी बाहर रहते हैं।
इसलिए सैमसन का न्यूज़ीलैंड में आख़िरी दो वनडे से बाहर बैठना पूरी तरह से उचित था। यह समझ में नहीं आ रहा कि न तो सैमसन और न ही सूर्यकुमार या शुभमन गिल, बांग्लादेश के ख़िलाफ़ वनडे टीम का हिस्सा क्यों नहीं हैं? शुभमन तो भारत के पहली पसंद के एकादश का हिस्सा बनने की दावेदारी ठोक रहे हैं। लेकिन वह बांग्लादेश में पहली पसंद की अंतिम पंद्रह में भी नहीं हैं।
रोहित शर्मा, के एल राहुल और विराट कोहली की दल में वापसी हुई है। शिखर धवन, श्रेयस अय्यर और ऋषभ पंत तीनों सीनियर बल्लेबाज़ बांग्लादेश में भी भारतीय दल का हिस्सा हैं। इनके होते हुए यह संभावना नहीं है कि सैमसन, सूर्यकुमार या गिल को सीरीज़ में मौक़ा मिलता। हालांकि अगर बीमारी या चोट के कारण कोई बदलाव करना पड़ेगा तो रजत पाटिदार या राहुल त्रिपाठी में से किसी एक को खिलाना पड़ेगा, जिन्होंने अभी तक अपना वनडे डेब्यू नहीं किया है।
निश्चित रूप से सबसे संभावित परिदृश्य यह है कि सीनियर खिलाड़ी कम से कम पहले दो वनडे के लिए अपनी जगह ले लेंगे और दूसरी पंक्ति के अधिकांश खिलाड़ी बेंच पर रहेंगे और जब एक नया चयन पैनल आएगा, तब उनके पास अपनी पहली पसंद की वनडे दल में अंतिम तीन या चार नामों को चुनने के लिए हालिया प्रदर्शन के नाम पर थोड़े-बहुत आंकड़े होंगे। यह आदर्श परिदृश्य नहीं है, ख़ासकर जब विश्व कप एक साल से भी कम समय दूर हो।
बांग्लादेश सीरीज़ और विश्व कप के बीच भारत को 15 द्विपक्षीय वनडे और एशिया कप खेलना है। ये काफ़ी मैच हैं, जहां आपको एक बड़े टूर्नामेंट के लिए योजनाओं को अंतिम रूप देना है। यह आने वाले चयनकर्ताओं को आगे की प्रकिया को स्पष्टता के साथ शुरू करने में मदद करेगा। अभी जैसी स्थिति है, यह कहना मुश्किल है कि उनके पास बहुत अधिक होगा।

कार्तिक कृष्णास्वामी ESPNcricinfo में सीनियर सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के एडिटोरियल फ़्रीलांसर कुणाल किशोर ने किया है।