अगले विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के इस चक्र में न्यूज़ीलैंड को चार टेस्ट मैच एशियाई सरज़मीं पर खेलने हैं। इसमें दो भारत के ख़िलाफ़ और दो अगले साल पाकिस्तान के ख़िलाफ़ प्रस्तावित है।

इस तथ्य से सभी वाकिफ़ हैं कि उपमहाद्वीप में सफलता के लिए आपके पास बेहतरीन स्पिनर होने ज़रूरी हैं। 2014 में डैनियल वेटोरी के संन्यास लेने के बाद से न्यूज़ीलैंड टेस्ट मैचों में इस कमी को नहीं भर पाया है। तब से उन्होंने लगभग सात प्रमुख स्पिनरों को मौक़ा दिया है, लेकिन कोई भी विश्वास नहीं जीत सका है।

भारत के इस दौरे पर न्यूज़ीलैंड ने मिचेल सैंटनर, एजाज़ पटेल और विलियम समरविल के रूप में तीन प्रमुख स्पिनर चुने हैं। इसके अलावा उनके पास रचिन रविंद्र और ग्लेन फ़िलिप्स के रूप में दो पार्ट टाइम विकल्प भी मौज़ूद हैं।

उपमहाद्वीप में विदेशी गेंदबाज़ों को दोहरी चुनौतियां होती हैं। उन्हें ना सिर्फ़ यहां की परिस्थितियों से तालमेल बिठाना होता है, बल्कि उन्हें अधिक गेंदबाज़ी भी करनी होती है, जिसके वे अभ्यस्त नहीं होते हैं। इसके अलावा भारत की धीमी पिचों पर उन्हें सामान्य से तेज़ गति से गेंदबाज़ी करनी होती है। इसके अलावा यहां पर गर्मी भी अधिक होती है।

2015 से न्यूज़ीलैंड के गेंदबाज़ों का स्ट्राइक रेट (76) और औसत (39) एशिया में सबसे ख़राब रहा है। इस कीवी टीम को एजाज़ पटेल से आक्रामक गेंदबाज़ी की उम्मीद है। इसके अलावा वह सैंटनर के सहारे बल्लेबाज़ों को दूसरे छोर से बांधे रखना चाहते हैं।

एजाज़ ने 2012-13 में प्रथम श्रेणी डेब्यू किया था। इसके बाद से वह लंबी दूरी तय कर चुके हैं। वह 2015-16 के बाद लगातार तीन सीज़न तक प्लंकेट शील्ड के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ बने।

एजाज़ के शुरुआती कोच रहे हेनरिक मलान कहते हैं, "वह प्रत्येक परिस्थिति में गेंदबाज़ी कर सकते हैं। वह चार दिन की क्रिकेट में दाएं हाथ के बल्लेबाज़ के लिए 6-3 की फील्डिंग लगाकर गेंदबाज़ी करते हैं, जो कि उनकी आक्रामकता और टेस्ट क्रिकेट की समझ को दर्शाता है।"

एजाज़ ने 2018 में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ यूएई में टेस्ट डेब्यू किया। उससे पहले वह उन गेंदबाज़ों के समूह का हिस्सा थे, जो कि न्यूज़ीलैंड के बल्लेबाज़ों को स्पिन गेंदबाज़ी खेलने की तैयारी करा रहे थे।

एजाज़ बताते हैं, "मैंने वहां छह सप्ताह बिताया था। वहां की पिचें एशियाई पिचों की तरह धीमी और नीची रह रही थीं। इससे मुझे उन परिस्थितियों में गेंदबाज़ी करने का अनुभव और कौशल प्राप्त हुआ, जो कि बहुत बहुमूल्य है।"

उनका डेब्यू भी बहुत संयोग से हुआ। सैंटनर उस समय फ़िट नहीं थे और एशियाई प​परिस्थितियों को देखते हुए न्यूज़ीलैंड को अपने एकादश में कम से कम दो स्पिनर ज़रूर खिलाने थे। 2019 में उन्होंने श्रीलंका के ख़िलाफ़ गॉल में 89 रन देकर पांच विकेट लिया। इंग्लैंड के ख़िलाफ़ एज़बेस्टन में फिर से सैंटनर की गैरमौज़ूदगी में उन्होंने 59 रन देकर चार विकेट झटके और यह निश्चित कर दिया कि 2021 और 2022 के आगामी एशियाई दौरे के लिए वही टीम के प्रमुख टेस्ट स्पिनर होने जा रहे हैं।

एजाज़ कहते हैं कि एशियाई सरज़मीं पर सफलता परिस्थितियों से ताल-मेल बिठाने पर ही निर्भर करती है। वह कहते हैं, "जब पिच अधिक स्लो होती है, तो आपको आगे गेंद करना होता है, ताकि बल्लेबाज़ ललचाए। लेकिन अगर आपको पिच से उतनी मदद नहीं मिलती है तो आपको एक निश्चित एरिया में ही लगातार गेंदबाज़ी करना होता है।"

बांग्लादेश में हुए पांच टी20 मैचों की सीरीज़ मे एजाज़ ने सिर्फ़ 3.65 की सर्वश्रेष्ठ इकॉनमी और 7.30 की सर्वश्रेष्ठ औसत से सर्वाधिक 10 विकेट लिए। उन्होंने धीमी, सूखी और घूमती हुई पिच पर अभूतपूर्व टर्न प्राप्त किया। उन्होंने इस दौरे में विकेट से अधिक अनुभव प्राप्त किए। उन्होंने बांग्लादेश के स्पिन गेंदबाज़ी कोच रंगाना हेराथ और वेटोरी से बात की। यह अनुभव आगामी भारत दौरे पर उनके काम आएगा।

एजाज़ ने बताया कि वेटोरी ने उन्हें टिप्स दिया कि वह जाकर लंबे समय तक एक ही टप्पे के आस-पास गेंदबाज़ी करें, जिससे उन्हें फ़ायदा होगा। इसलिए हेराथ से उन्हें कुछ नए वैरिएशन के बारे में टिप्स मिला, जो कि वह प्रयोग में लाना चाहते हैं। भारत के पास शीर्ष पांच में सिर्फ़ दाएं हाथ के बल्लेबाज़ हैं, जो कि उनकी बाएं हाथ की गेंदबाज़ी के लिए मददगार साबित हो सकते हैं। दूसरा टेस्ट मुंबई में खेला जाएगा, जहां पर एजाज़ पैदा हुए थे और लगभग छह साल तक रहे थे। एक तरीक़े से यह उनकी 'घर वापसी' भी होगी।

सैंटनर ने अपने डेब्यू टेस्ट में दो विकेट लिए और 31 व 45 के उपयोगी स्कोर बनाए। लोगों को लगा कि एक नया वेटोरी मिल गया, जो गेंद और बल्ले दोनों से अपना योगदान दे सकता है।

लेकिन छह साल और 24 टेस्ट के करियर में उनका गेंदबाज़ी औसत 45 और बल्लेबाज़ी औसत 24 का है। वह टीम से अंदर बाहर भी होते रहे हैं। एशिया में खेले चार टेस्ट मैचों में उन्होंने 59 की ख़राब औसत से सिर्फ़ 10 विकेट लिए हैं।

न्यूज़ीलैंड के पूर्व कोच माइक हेसन कहते हैं, "न्यूज़ीलैंड में स्पिनरों की भूमिका बहुत रक्षात्मक है। इसलिए अगर किसी गेंदबाज़ का औसत 40 रहता है तो उसे बुरा नहीं कहा जा सकता।"

सैंटनर ने अपना अंतिम प्रथम श्रेणी मैच मार्च 2020 में खेला था। सीमित ओवर क्रिकेट में टीम का नियमित सदस्य होने के कारण भी वह अधिक घरेलू मैच नहीं खेल पाते हैं।

हिमांशु अग्रवाल ESPNcricinfo में उप संपादक हैं, अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के दया सागर ने किया है