यह मैच की आख़िरी गेंद थी।

ऑस्ट्रेलिया के लिए इस गेंद पर टिकी थीं अपने विश्व रिकॉर्ड लगातार वनडे जीतों के आंकड़े को 25 से 26 तक ले जाने की उम्मीद। आख़िरी गेंद पर तीन रन या उससे बेहतर और साथ ही साथ मल्टीफ़ॉर्मेट श्रृंखला में भी भारत से 4-0 आगे होने का मौक़ा।

भारत के लिए इस गेंद के कई मतलब थे। क्षेत्ररक्षण में ख़ामियों के बावजूद, फ़्लडलाइट की दूधिया रोशनी में एक अनुभवहीन गेंदबाज़ी क्रम, ओस से भीगे विदेशी मैदान में भी एक शक्तिशाली टीम को हराने की क़ाबिलियत रखती है।

यह मैच की आख़िरी गेंद थी और भारत को इस बात का पूरा विश्वास था कि वह जीत दर्ज कर लेंगे। मिडविकेट पर खड़ीं यास्तिका भाटिया को उनके साथियों ने जश्न के माहौल में घेर लिया। उस गेंद को डालने वाली झूलन गोस्वामी ख़ुशी से दहाड़ मारते हुए दौड़ी आईं और यास्तिका को गले से लगा लिया। पीठ थपथाने और हाई फ़ाइव के बीच भारतीय ख़ेमे में राहत की सांस थी।

उधर निकोला कैरी निराश होकर नॉनस्ट्राइकर बेथ मूनी के पास आईं और दोनों लगभग भारतीय खिलाड़ियों के क़रीब से गुज़रने की तैयारी में थीं। कॉमेंट्री पर कहा गया, "भारत ने यह मुक़ाबला जीत लिया है। ऑस्ट्रेलिया के जीत का सिलसिला 25 पर रुक गया।"

लेकिन अचानक ऐसा लगा कि पिक्चर अभी बाक़ी है। भारतीय खिलाड़ी, ऑस्ट्रालियाई बल्लेबाज़, कॉमेंटेटर और अंपायर - सब असमंजस में थे कि मैच ख़त्म हुआ है कि नहीं।

यास्तिका के कैच पर कोई शक़ की गुंजाइश नहीं थी। कैरी ने एक फ़ुल टॉस सीधा उनके हाथों में तेज़ गति से भेज दिया था। ओह, फ़ुल टॉस? यानि नोबॉल की संभावना? क्या यह गेंद कैरी के क़मर के ऊपर जा रही थी? क्या उनके क्रीज़ की गहराई का उपयोग करने का प्रयास उन्हें बचा लेगा? क्या उसके बाद आगे आने से उन्हें फिर गेंदबाज़ का फ़ायदा करवा दिया? कैरी के क़द से कोई फ़र्क़ पड़ता है क्या? वैसे कैरी मैदान में कर भी क्या रही हैं? अगर पहले वनडे में नाबाद 93 रन बनाने वाली रेचल हेंस को गुरुवार को कोहनी में चोट नहीं लगी होती तो कैरी इस वक़्त अपने क़िस्मत के फ़ैसले के लिए प्रतीक्षा भी नहीं कर रही होतीं।

ग़ौरतलब है कि अंपायर शेरिडन और ऑक्सनफ़ोर्ड ने इस गेंद पर कोई सवाल नहीं उठाए थे। इस सीरीज़ में डीआरएस का प्रावधान भी नहीं है। यानी इस वक़्त जो भी फ़ैसला होगा उस पर ऑस्ट्रेलियाई टीम का कोई नियंत्रण नहीं है।

यह मैच की आख़िरी गेंद थी। लेकिन यह आप जाकर कैरी, यास्तिका, गोस्वामी या कॉमेंटटर्स को ज़रा बताएं या हैरप पार्क में डे-नाइट मुक़ाबले का मज़ा लेने आए समर्थकों को, जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया की पारी के पहले 10 ओवर में अलिसा हीली, मेग लानिंग और एलीस पेरी जैसे दिग्गजों को 0, 6, 2 पर आउट होते हुए देखा। या कहिए मेघना सिंह को, जिन्होंने गोस्वामी के साथ ऑस्ट्रेलिया के टॉप ऑर्डर की ऐसी दुर्दशा करवाई या स्मृति मांधना को, जिनके 94 गेंदों पर 86 ने भारत के 274 के स्कोर की नींव बिछाई जिस पर ऋचा घोष, पूजा वस्त्रकर और गोस्वामी ने कुछ और मज़बूत ईंट जोड़े।

यह मैच की आख़िरी गेंद थी, लेकिन टीवी अंपायर फ़िलिप गिलेस्पी इस गेंद को बार-बार देख कर सही नतीजे पर पहुंचना चाहते हैं। आख़िर में उन्होंने अपना फ़ैसला शेरिडन को सुनाया और शेरिडन ने अपना हाथ बाहर कर दिया। नोबॉल! और यह मैच की आख़िरी गेंद नहीं थी।

भारत की अपनी बदक़िस्मती को अविश्वास के साथ पचाना पड़ा। यास्तिका ने अपने मुंह को हाथों से ढक लिया। कप्तान मिताली राज बिना ख़ास भाव के अपने फ़ील्ड को सजाने में जुट गईं। गोस्वामी ने शेरिडन से गेंद पर एक सवाल ज़रूर पूछा और फिर उसी अविश्वास के साथ गेंदबाज़ी करने के लिए एक बार फिर तैयार हुईं। भारतीय डगआउट में पल भर में ख़ुशी की जगह तनाव और मायूसी ने घर बना लिया। 37 पर खेल रहीं कैरी और 125 पर स्थित मूनी अंपायर शेरिडन से नए आख़िरी गेंद का समीकरण स्पष्ट करने बात करने लगीं और दीप्ति शर्मा उनके पास कोई नई जानकारी पाने खड़ी हो गईं।

मूनी ने मैच के बाद माना, "मैदान पर देखने वाले लोगों का कहना था की गेंद साफ़ नो बॉल थी। मेरे लिए कहना मुश्किल है पर उस वक़्त हम सिर्फ़ यह जानना चाहते थे कि उस गेंद पर रन कितने मिलें और हम में से स्ट्राइक पर कौन था।"

स्मृति ने भी कहा, "हमने गेंद के बतौर टीम नहीं देखा है। मैदान पर यह देखना मुश्किल होता है कि फ़ुलटॉस क़मर के ऊपर पहुंचेगी या नहीं। अभी इस फ़ैसले पर नाख़ुश होने का मौक़ा नहीं मिला है। पर ऐसी चीज़ें क्रिकेट में आपके हित में जाएं तो आप ज़रूर ख़ुश होते हैं। लेकिन इसमें मुझे नहीं लगता कोई विवादास्पद बात थी।"

आख़िर में आख़िरी गेंद डाली गई। फ़ुल। तेज़। कैरी ने उसे मिडविकेट और लॉन्गऑन के बीच ज़ोर से मारा और शेफ़ाली वर्मा के स्थान पर फ़ील्डिंग कर रहीं जेमिमाह रॉड्रिग्स तेज़ी से गेंद तक पहुंच तो गईं लेकिन दूसरा रन लेने से नहीं रोक पाईं।

थ्रो को पकड़ कर गोस्वामी ने नॉनस्ट्राइकर छोर पर बेल्स गिराए ज़रूर लेकिन तब तक मूनी क्रीज़ पार कर चुकीं थीं। उनके हाथ हवा में थे और उन्होंने इस शानदार जीत पर अपने उत्साह को साफ़ दर्शाया।

बाद में उन्होंने कहा, "ओस के चलते उन्होंने गेंद को भी आख़िरी ओवर से पहले बदल दिया था। यह भी हमारे लिए फ़ायदेमंद रहा। आख़िरी ओवर में गति के साथ एक नए गेंद का सहारा मिला।"

स्मृति ने आख़िरी ओवर गोस्वामी से करवाए जाने के फ़ैसले को सही बताते हुए कहा, "हम उस ओवर से पहले यही सोच रहे थे कि ओवर स्पिनर से करवाएं या झुलुदी से। लेकिन उनके पास यॉर्कर डालने की कला है और हमें लगा ओस से लैस मैदान पर तेज़ गति से यॉर्कर डालना ही सही रणनीति थी।"

झूलन गोस्वामी के पहले ओवर में गेंद का सबसे उम्दा बॉल देखने को मिला। एक सटीक इनस्विंगर जिसने हीली को डक पर पवेलियन का रास्ता दिखाया और उनका आख़िरी ओवर कई वर्षों तक विश्व क्रिकेट के सबसे अजीबोग़रीब फ़िनिश में शुमार होगा। लगभग 20 साल के अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट जीवन में विश्व की सबसे सफल गेंदबाज़ ने शायद ही ऐसी पारी का अनुभव कभी किया हो।

ऑन्नेशा घोष ESPNcricinfo ESPNCricinfo में सब एडिटर हैं, अनुवाद ESPNcricinfo के सीनियर असिस्टेंट एडिटर और स्थानीय भाषा प्रमुख देबायन सेन ने किया है