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कोरोना महामारी के कारण एक साल बर्बाद होने के बाद भारतीय क्रिकेटरों को एक नई शुरुआत का है इंतज़ार

इस महामारी ने पहले ही काफ़ी समय बरबाद कर दिया है और बीसीसीआई से मिल रहे मिले-जुले संकेत मामले को बिगाड़ रहे हैं

चेतन साकरिया की तरह आईपीएल करार मिलने से पहले तक कई घरेलू खिलाड़ियों की ज़िंदगी का हाल एक जैसा होता है  •  BCCI

चेतन साकरिया की तरह आईपीएल करार मिलने से पहले तक कई घरेलू खिलाड़ियों की ज़िंदगी का हाल एक जैसा होता है  •  BCCI

फरवरी 2021 से पहले तक चेतन साकरिया को घरेलू क्रिकेट में सौराष्ट्र के लिए अपने शानदार प्रदर्शन के लिए जाना जाता था। चेतन अपने परिवार के लिए कमाई का इकलौता ज़रिया थे। वह अपने चाचा को अपना स्टेशनरी व्यवसाय चलाने में मदद करने के साथ-साथ क्रिकेट में अपना नाम बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। साल 2018 में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनका पदार्पण हुआ। दो साल बाद, 2020 में वह रणजी ट्रॉफ़ी जीतने वाली टीम का हिस्सा थे। साकरिया को पुरस्कार राशी का एक बड़ा हिस्सा मिला पर वह आईपीएल 2021 में राजस्थान रॉयल्स द्वारा चुने जाने वाली 1 करोड़ 20 लाख रुपयों की राशी की तुलना में बहुत कम था। एक सफल सीज़न के बाद साकरिया को श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय टीम में चुना गया है।
हाल ही में ईएसपीएनक्रिकइंफ़ो से बातचीत के दौरान साकरिया ने बताया, "बहुत से लोग कह रहे हैं कि (महामारी की वजह से) आईपीएल को बंद कर देना चाहिए। लेकिन इससे हम जैसे परिवारों को काफी मदद पहुंची है। मेरे पिताजी (जिनका मई 2021 में निधन हुआ) का स्वास्थ्य खराब था। अगर यह टूर्नामेंट नहीं होता तो मैं उनके इलाज का खर्च नहीं उठा पाता। अब मैं अपनी बहन की पढ़ाई के बारे में सोच सकता हूं और राजकोट में अपने परिवार के लिए एक अच्छा घर बना सकता हूं।"
पिछले साल रणजी ट्रॉफ़ी के फ़ाइनल मुकाबले में साकरिया के प्रतिद्वंद्वी, बंगाल के बल्लेबाज़ सुदीप घरामी ने टॉप-लेवल क्रिकेट की अनुपस्थिति में लगभग 15 महिने लॉकडाउन में बिताए हैं।
साकरिया की तरह घरामी भी एक साधारण परिवार से आते हैं। बचपन में उनके पिताजी ने उन्हें लकड़ी से बल्ला बनाकर दिया था। बंगाल के लिए अंडर-23 क्रिकेट खेलने से जो पैसे उन्होंने कमाए, उससे उन्होंने कोलकाता से लगभग 50 किलोमीटर दूर नैहाटी में अपने परिवार के लिए एक छोटा सा घर बनाया। इस समय वह ज़रूर अपनी वित्त परिस्थिति के बारे में सोच रहे हैं परंतु उनका ध्यान अब तक के अपने छोटे करियर में शानदार फ़ॉर्म की तलाश पर है।
घरामी ने कहा, "यह समय सभी के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। पर खासकर उन खिलाड़ियों के लिए जो कोलकाता में नहीं बल्कि उपनगरों में या गांवों में रहते हैं। यहां अभ्यास करने के लिए कोई उचित जगह नहीं है। मैं कोलकाता जाकर अपने रिश्तेदारों के साथ रहता हूं ताकि मैं वहां ट्रेनिंग कर सकूं। यह साल बहुत कठिन रहा है।"
वह आगे कहते हैं, "पैसा एक मुद्दा है लेकिन करियर के इस पड़ाव पर मेरे लिए सबसे बड़ी बात नहीं है। मैं वैसे भी अनुबंधित खिलाड़ी नहीं हूं। लेकिन हां, एक साल तक ठीक से क्रिकेट नहीं खेल पाना कठिन रहा। मैंने अब ईस्ट बंगाल के साथ करार किया है। साथ ही मैंने सुना है कि गए वर्षों की तरह इस साल बंगाल में हमारा पूरा क्रिकेट सीज़न होगा। पिछले साल हमारे पास केवल वनडे और टी20 मैच थे। बंगाल क्रिकेट संघ (सीएबी) ने सभी के लिए टीकाकरण की व्यवस्था की है जो सभी खिलाड़ियों और कर्मचारियों के हित में है।"
ज़िम्मेदारी का 'पासिंग द पार्सल'
साकरिया और घरामी - 2 खिलाड़ी जिनका जीवन और परिस्थितियां सामान्य पटरी पर चल रही थी। फिर एक को मिला आईपीएल का करार वही दूसरे के हाथ लगी निराशा। भारतीय क्रिकेट के कई खिलाड़ियों का हाल इनकी कहानी से मिलता-जुलता है। घरेलू सीज़न में औसतन 750 से 800 खिलाड़ी भाग लेते हैं और उनमें से 10 फ़िसदी लोगों को ही आईपीएल टीम मिल पाती है और वह भी काफ़ी मशक्कत करने के बाद।
आईपीएल की शुरुआत से ही खिलाड़ियों के वेतन के बीच का अंतर बढ़ सा गया है। इस महामारी ने घरेलू सीज़न के मोटे हिस्से को मिटाकर इसे और खराब कर दिया है। पिछले सीज़न के पुरुष कैलेंडर में आईपीएल के अलावा सैयद मुश्ताक़ अली टी20 और विजय हज़ारे वनडे टूर्नामेंट खेला गया था। एक खिलड़ी के लिए मैच प्रैक्टिस और अपने वेतन का बड़ा हिस्सा रहने वाली रणजी ट्रॉफ़ी प्रतियोगिता तो खेली ही नहीं गई। नए रूप और एक नई दिशा की तत्तकाल आवश्यकता वाले महिला कैलेंडर को भी छोटा कर दिया गया था। बहु-दिवसीय और अंडर-16 क्रिकेट की अनुपस्थिति में केवल वनडे प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था।
बीत गई सो बात गई। आने वाला सीज़न आशाओं से भरा हुआ लग रहा है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने सितंबर 2021 से 2127 मैचों वाले एक लंबे क्रिकेट कैलेंडर की घोषणा की है। विशेष रूप से इनमें पुरुष और महिलाओं के टूर्नामेंटों के साथ-साथ आयु वर्ग के मैच भी शामिल हैं। हालांकि इस कैलेंडर पर किसी खिलाड़ी ने कोई टिप्पणी नहीं की है। पहले वे छूटे हुए घरेलू टूर्नामेंटों के मुआवज़े पर स्पष्टता चाहते हैं। और जिन खिलाड़ियों को पिछले सीज़न के मैचों के लिए पैसों का भुगतान नहीं किया गया है, वे चाहते हैं कि यह मुद्दा भी सुलझाया जाए।
नवंबर 2019 में बीसीसीआई के अध्यक्ष पद का भार संभालते समय सौरव गांगुली ने कहा था कि घरेलू खिलाड़ियों के लिए केंद्रीय अनुबंधों की शुरुआत करना उनकी पहली प्राथमिकताओं में से एक है। इस बात को अठारह महिने बीत चुके हैं, और सब कुछ वैसे का वैसा ही है। जून में, बीसीसीआई ने मुआवज़े के इस मुद्दे की "जल्द से जल्द" जांच करने के लिए तीन सदस्यीय शीर्ष पैनल का गठन किया था। तीन सप्ताह बाद, कोई नहीं जानता कि पैनल के सदस्य कौन हैं, और समस्या का समाधान क्या है। एक वरिष्ठ खिलाड़ी ने तो इस स्थिति को बोर्ड और संघों के बीच "पासिंग द पार्सल" का खेल बताया।
"लोगों को यह गलतफ़हमी है कि सरकारी अधिकारियों को अच्छी तनख़्वाह दी जाती है। फिर भी हम उन सैकड़ों खिलाड़ियों की तुलना में एक बेहतर स्थिति में है जिनके पास इस समय कोई काम नहीं है"
छत्तीसगढ़ के ऑलराउंडर विशाल कुशवाहा
2017-18 सीज़न तक, घरेलू खिलाड़ियों को दो किश्तों में भुगतान किया जाता था - एक मैच फ़ी और दूसरा बोनस जो बीसीसीआई के सकल राजस्व हिस्सेदारी (जीआरएस) से आता था। जीआरएस में गैर-आईपीएल मीडिया अधिकारों और सभी प्रकार के प्रायोजनों (टीम, परिधान, सीरीज़) की राशी का समावेश होता है। आनुपातिक आधार पर बोनस की गणना की जाती है और अगले वर्ष की वार्षिक जनरल बैठक में खातों की पुष्टि के बाद इसका भुगतान किया जाता है।
2018 के बाद से, जीआरएस बोनस को मैच फीस में जोड़ा गया, जिससे खिलाड़ियों के वेतन में लगभग 200% की बढ़ोतरी हुई है। खिलाड़ियों को अब प्रथम श्रेणी और वनडे मैचों के लिए प्रति दिन 35,000 रुपए और टी20 मैचों के लिए 17,500 रुपए मिलते हैं।
इन सबके बीच समस्या ये है कि पिछले तीन वर्षों में एजीएम की अनुपस्थिति में बोनस की गणना नहीं हो पाईं है तथा प्रकिया में किसी प्रकार का सुधार नहीं आ पाया है। इसके पीछे दो कारण है - पहला ये कि बीसीसीआई को प्रशासंकों की समिती द्वारा चलाया जा रहा था और दूसरा यह महामारी।
बीसीसीआई के एक अंदरूनी सूत्र ने बताया, "कभी-कभी संघों के द्वारा बीसीसीआई को सौंपे जाने वाले चालान में देरी होती है। और तो और बहुत से राज्य संघों ने बीसीसीआई के नए संविधान का पालन नहीं किया था। मुझे लगता है कि कुछ खिलाड़ियों को इसलिए समय पर पैसा मिलता था क्योंकि उनके चालान समय पर आते थे, वहीं कुछ असोसिएशन के खिलाड़ियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। कुछ नए संघों को तो पता ही नहीं था कि उन्हें करना क्या है।"
दूसरे छोर पर घास शायद थोड़ी ज़्यादा हरी है.....
कुछ खिलाड़ी अपने लिए दूसरे रास्ते खोज रहे हैं। जी हां, आपने सही पढ़ा, दुनिया के सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड के खिलाड़ी कहीं और जाकर अपने लिए मौके ढूंढ रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के ऑलराउंडर विशाल कुशवाहा ने 2020-21 में सीमित ओवरों की प्रतियोगिताओं में भाग लिया था, और यहां तक कि कुछ आईपीएल टीमों के साथ ट्रायल भी किया, जहां उन्हें निराशा हाथ लगी। जबकि वह रायपुर में महालेखा परीक्षक कार्यालय में कार्यरत हैं, क्रिकेट की आय की कमी ने उन्हें यूके में अवसरों की तलाश करने के लिए मजबूर कर दिया है।
उनका कहना है, "लोगों को यह गलतफ़हमी है कि सरकारी अधिकारियों को अच्छी तनख़्वाह दी जाती है। फिर भी हम उन सैकड़ों खिलाड़ियों की तुलना में एक बेहतर स्थिति में है जिनके पास इस समय कोई काम नहीं है।"
कुशवाहा अब कॉलोनी बे क्रिकेट क्लब के साथ पांच महीने के अनुबंध पर है जहां उन्हें प्रति माह 1000 पाउंड (लगभग 1 लाख 3 हज़ार रुपए) मिलते हैं। इन पैसों में उनका गुज़ारा हो जाता है। उन्होंने कहा, "क्लब ने मुझे रहने की जगह दी है, लेकिन बाकी सभी खर्चे मुझे ख़ुद उठाने हैं। कॉन्ट्रैक्ट से पैसे बचाना आसान नहीं है, लेकिन मैं कम से कम अपनी ज़रूरत की चीजों का ध्यान रख लेता हूं। मुझे भारत में कई सारे लोन चुकाने है। इसलिए मैंने सोचा कि कम से कम यहां से मुझे कुछ पैसे मिल जाएंगे। मेरे नियोक्ता बहुत दयालु हैं जिन्होंने मुझे छुट्टी दे दी, लेकिन यूके में मैं लंबे समय के लिए बिना वेतन की छुट्टी पर हूं।"
अपने प्रथम श्रेणी डेब्यू मैच के पहले ही ओवर में हैट्रिक लेकर रिकॉर्ड बुक में प्रवेश करने वाले, मध्य प्रदेश के बाएं हाथ के तेज़ गेंदबाज़ रवि यादव ने पहले सीज़न से मिले पैसों से फ़िरोज़ाबाद (उत्तर प्रदेश) के बाहरी इलाके में अपने गांव में एक क्रिकेट अकादमी का निर्माण किया।
उन्होंने कहा, "मैंने पिछले दो साल की अपनी बचत को एक छोटी सी सुविधा बनाने में खर्च कर दिया है। मेरे पास क्रिकेट के बाहर कोई नौकरी नहीं है, इसलिए मुझे न केवल अपने क्रिकेट के साथ-साथ बल्कि उसके बाद भी अपना घर चलाने के लिए एक रास्ता खोजने की ज़रूरत थी। मैं [लगभग] ३० साल का हूं और केवल बहु-दिवसीय क्रिकेट खेलता हूं। पिछले सीजन में, मुझे टी20 या वनडे टीम में नहीं चुना गया था, जिसके वजह से मेरी आय कुछ भी नहीं थी।"
"निराशाजनक बात यह है कि असोसिएशन ने हमें बीसीसीआई से संपर्क करने के लिए कहा लेकिन बीसीसीआई में कोई है ही नहीं जो हमारी बात का जवाब दे। हम चाहते हैं कि घरेलू क्रिकेट के संबंध में संपर्क करने के लिए एक विशेष व्यक्ति का चयन हो। मुझे नहीं लगता कि हम कुछ ज़्यादा मांग रहे हैं।"
गुमनाम घरेलू क्रिकेटर
"उसके बाद लॉकडाउन आया और मेरी अकादमी बंद हो गई। मेरी आय का अंतिम स्रोत भी कट गया। मैंने पिछले 18 महीनों में अपना गुज़ारा करने के लिए बहुत संघर्ष किया है। उम्मीद है कि आने वाले समय में चीजें बेहतर होंगी," रवि ने कहा।
एक लंबे घरेलू सीज़न की घोषणा इन क्रिकेटरों के लिए और खास तौर पर कम विशेषाधिकार प्राप्त लोगों के लिए आशा की एक किरण बनकर आई है। आईपीएल में दो नई टीमों के जुड़ने की संभावना और 2022 सीज़न से पहले होने वाला मेगा ऑक्शन भी इन खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा-स्त्रोत बन सकती है।
केरल के ऑलराउंडर जलज सक्सेना का कहना है, "जब हम नियमित रूप से खेलते रहते हैं, तो कुछ पहलुओं को अनदेखा कर देते हैं। मैंने व्यक्तिगत रूप से मैच अभ्यास या नियमित सीज़न की अनुपस्थिति में मानसिक पहलू पर काम किया था। जब आप मैदान पर जाते हैं, तो आप बहुत सारी भावनाओं से गुज़रते हैं। गेंदबाजी करते समय आप विकेट लेने के लिए चिंतित होते हैं। जब खराब फ़ॉर्म से जूझ रहे होते हैं, तो आप उस एक बड़े स्कोर को प्राप्त करने के लिए उत्सुक होते हैं। कभी-कभी, जब आप भावनाओं को ख़ुदपर हावी होने देते हैं, तो मुश्किल हो जाती है। मैंने सांस लेने की ऐसी तकनीकों का अभ्यास किया है जिससे मेरे मन को शांती मिली है और मैं बेहतर निर्णय ले पा रहा हूं।
जलज ने कहा, "मैं अब एक शांत स्थिति में हूं। कभी-कभी भावनाएं और प्रदर्शन हाथों-हाथ नहीं चलते हैं। इसलिए आपको ख़ुद को खेल से अलग करना होगा। मैंने इस अवधि में हर दिन योग का अभ्यास किया जिससे मुझे अपने शरीर के प्रत्येक अंग को महसूस करने में मदद मिली।"
पिछले साल दिसंबर तक, भारत के पूर्व विकेटकीपर, सबा करीम, बीसीसीआई के क्रिकेट संचालन महाप्रबंधक के रूप में घरेलू क्रिकेट से संबंधित मामलों के लिए एक सूत्री संपर्क थे। कई खिलाड़ियों ने कहा है कि उनके जाने के बाद से उनके और प्रभारी अधिकारियों के बीच संपर्क टूट गया है।
एक सीनियर खिलाड़ी ने कहा, "निराशाजनक बात यह है कि असोसिएशन ने हमें बीसीसीआई से संपर्क करने के लिए कहा लेकिन बीसीसीआई में कोई है ही नहीं जो हमारी बात का जवाब दे। हम चाहते हैं कि घरेलू क्रिकेट के संबंध में संपर्क करने के लिए एक विशेष व्यक्ति का चयन हो। मुझे नहीं लगता कि हम कुछ ज़्यादा मांग रहे हैं।"
टॉप लेवल पर क्रिकेट खेलने वाले अधिकांश देशों के खिलाड़ियों को घरेलू अनुबंध मिल रहे हैं। बीसीसीआई को खिलाड़ियों और संघों की बड़ी संख्या के साथ नियमित रूप से निपटना पड़ता हैं, जिससे उनका काम अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
लेकिन बीसीसीआई ने अतीत में इससे भी ज़्यादा चुनौतीपूर्ण कार्यों को पूरा किया है, जैसे कि तीन सप्ताह से कम समय में दक्षिण अफ़्रीका में एक आईपीएल सीज़न को स्थानांतरित करना, या चरमराते अंतर्राष्ट्रीय कैलेंडर और कोरोना महामारी के बीच यूएई में बचे हुए आईपीएल सीज़न को फ़िट करना। कई खिलाड़ियों ने साफ़ दर्शाया है कि बात शायद उस एक सवाल पर आ जाती है कि बीसीसीआई का इरादा क्या हैं?

शशांक किशोर ESPNcricinfo में सीनियर सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर अफ़्ज़ल जिवानी (@jiwani_afzal) ने किया है।