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भारत में महिला क्रिकेट को मजबूत करने के लिए 'मज़बूत नींव' की जरूरत: सबा करीम

बीसीसीआई के पूर्व महिला क्रिकेट प्रमुख ने उन क्षेत्रों पर जोर दिया जिन पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है

इंग्लैंड के ख़िलाफ़ टेस्ट मैच ड्रॉ कराने के बाद स्नेह राणा और तानिया भाटिया  •  Getty Images

इंग्लैंड के ख़िलाफ़ टेस्ट मैच ड्रॉ कराने के बाद स्नेह राणा और तानिया भाटिया  •  Getty Images

भारत में महिला क्रिकेट 2017 के वनडे विश्व कप और 2020 के टी20 विश्व कप के फ़ाइनल में पहुंचने के बाद से सुर्खियां बंटोर रहा है। इस साल के अंत तक भारत ने लगभग सात साल के अंतराल के बाद दो टेस्ट मैच खेल लिए होंगे। इसमें से एक हाल ही में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ ड्रॉ के रूप में समाप्त हुआ, जबकि दूसरा सितंबर में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ गुलाबी गेंद से खेला जाएगा। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) हर साल आईपीएल प्ले ऑफ़ के साथ-साथ महिला टी20 चैलेंज प्रतियोगिता का भी आयोजन कर रहा है।
इन सब बातों से यह प्रतीत होता है कि भारत में महिला क्रिकेट सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि, पिछले दिसंबर तक क्रिकेट संचालन के लिए बीसीसीआई के महाप्रबंधक रहे सबा करीम को लगता है कि बोर्ड को महिला खेल के प्रशासन को और अधिक पेशेवर बनाने व पुरुषों के क्रिकेट से एक अलग योजना बनाने की जरूरत है। यह करने के बाद ही महिला क्रिकेट का विकास तेज़ी से हो सकता है।
करीम ने ईएसपीएन क्रिकइंफ़ो के साथ बातचीत में कहा, "यह एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन एक ठोस योजना भी होनी चाहिए। मुझे लगता है कि आगे बढ़ने का तरीका इस खेल को और अधिक पेशेवर बनाना है। महिला क्रिकेट का विकास पुरुष क्रिकेट से अलग होना चाहिए और इसकी योजना भी अलग होनी चाहिए। हमारे पास खेल को और लोगों तक पहुंचाने के कार्यक्रमों के साथ एक अलग रचनात्मक योजना होनी चाहिए।"
करीम ने कहा कि युवा महिला खिलाड़ियों के लिए सबसे निचले पायदान से ऊपर की ओर आने का रास्ता अभी तक ठीक से नहीं बनाया गया है। उन्होंने कहा, "भारत में, हमारे पास अभी भी ज़्यादा लड़कियां घर से बाहर निकलकर खेल का हिस्सा नहीं बनती हैं। हमको यह सुनिश्चित करना होगा कि सिस्टम में प्रवेश करने से लेकर बाहर निकलने तक उनके रास्ते में कोई बाधा ना आए। उदाहरण के लिए, एक लड़के के लिए क्रिकेट खेलने के लिए दो किलोमीटर जाना आसान है, लेकिन एक लड़की के लिए यह इतना आसान नहीं है। हमें इसे और अधिक सुलभ बनाने की जरूरत है?"
"इसके अलावा बीसीसीआई के पास अंडर-19 और अंडर-23 क्रिकेट है, लेकिन 40% से 50% लड़कियां दोनों अंडर-19 और अंडर-23 खेलती हैं, क्योंकि वहां बहुत सारी लड़कियां हैं ही नहीं। हमें दोनों का अलग कैलेंडर रखना चाहिए ताकि कोई टकराव न हो। लड़कों के साथ ऐसा नहीं है, क्योंकि खिलाड़ी बहुत सारे हैं। इसलिए महिलाओं के लिए योजना अलग होनी चाहिए।"
जब भारत ने इस महीने की शुरुआत में ब्रिस्टल में टेस्ट मैच खेला था, तो वह सात साल में टीम का पहला टेस्ट मैच नहीं था। कई सालों बाद लंबे प्रारूप में भारतीय खिलाड़ियों द्वारा खेला गया पहला मैच था क्योंकि बीसीसीआई ने 2017-18 सत्र के बाद अपनी महिला घरेलू प्रथम श्रेणी प्रतियोगिता को बंद कर दिया है।
बीसीसीआई के तीन साल के कार्यकाल में घरेलू और महिला क्रिकेट की प्राथमिक जिम्मेदारी करीम पर ही थी। उनका काम था- घरेलू और महिला क्रिकेट के समग्र विकास के लिए रोडमैप और संरचना तैयार करना। करीम ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति (सीओए) की बीसीसीआई से महिला क्रिकेट के बारे में कभी-कभार ही बातचीत होती थी। इस दौरान ऐसा कुछ भी नहीं जिससे महिला क्रिकेट में प्रथम श्रेणी क्रिकेट के फिर से शुरू होने का संकेत मिले।
"केवल इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट मैच होते थे और कोई भी देश वहां खेलने के लिए उत्सुक नहीं होता था। वहां खेलने की अपनी बाधाएं थीं। बहुत सारी महिला क्रिकेटर पेशेवर नहीं होती थीं, ऐसे में उनके लिए लंबे समय तक वहां रहना भी एक समस्या थी। मुझे लगता है कि इसलिए बीसीसीआई ने टेस्ट मैच नहीं कराने का फैसला किया और इसलिए कोई प्रथम श्रेणी भी टूर्नामेंट नहीं होता है।"
"कुछ अन्य देशों के साथ भी इसको लेकर चर्चा और बातचीत हुई। खासकर बीसीसीआई इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाले मल्टी फॉर्मेट सीरीज़ से प्रभावित था। मुझे खुशी है कि अब बीसीसीआई ऐसा करने में सफल हो रहा है। लेकिन इसे बनाए रखने के लिए हमें घरेलू सर्किट में भी महिलाओं के लिए बहु-दिवसीय क्रिकेट की आवश्यकता है। यह अंडर -23 स्तर से शुरू हो सकता है और फिर इसे सीनियर लेवल तक ले जाया जा सकता है।"
हालांकि करीम ने स्वीकार किया कि ऐसा कहना, करने से बहुत आसान है। उन्होंने कहा, "इसका एकमात्र रास्ता है कि महिलाओं के तीन दिवसीय मैचों की प्रतियोगिता का नियमित आयोजन हो। लेकिन मुद्दा मैचों का संचालन नहीं है, बीसीसीआई वैसे भी अच्छी संख्या में मैचों की मेज़बानी करता है। मुद्दा कैलेंडर का है। भारतीय क्रिकेट कैलेंडर पहले से ही बहुत व्यस्त है और हमारे पास कई सारे टूर्नामेंट कराने के लिए बहुत ही सीमित समय है। आप सितंबर से पहले भी सीज़न शुरू नहीं कर सकते।"
"एक महिला बहु-दिवसीय टूर्नामेंट के लिए हमें कुछ और जगहों की जरूरत है, जहां मैच कराए जा सकें। इसके अलावा हमें मैच अधिकारियों, स्कोरर, ग्राउंडस्पर्सन, वीडियो विश्लेषकों आदि की भी जरूरत होगी।"
आपको बता दें कि करीम ने राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) के निदेशक राहुल द्रविड़ के परामर्श से भारतीय महिला क्रिकेट को अगले स्तर पर ले जाने के लिए एक व्यापक योजना तैयार की थी। इनमें से अधिकांश योजनाएं ऐसी थीं, जिसमें राज्य संघों के सहयोग के साथ घरेलू और निचले स्तर पर महिला क्रिकेट को विकसित करना था।
"टियर -2 और टियर -3 क़स्बों और स्कूलों में महिला क्रिकेट को बढ़ावा देना था। इसके साथ ही महिला आईपीएल भी हमारी भविष्य की योजनाओं में शामिल थी। हालांकि आईपीएल के सफल होने के लिए हमें एक मजबूत घरेलू क्रिकेट संरचना की जरूरत है। अगर हमारी नींव मजबूत होती है तो महिला आईपीएल भी पुरुषों के आईपीएल की तरह सफल हो सकता है। भारत में जिस तरह से पुरुष क्रिकेट खेला जाता है, हमें बहुत अधिक करने की आवश्यकता नहीं है। कुछ ऐसी ही संरचना की जरूरत महिला क्रिकेट में भी है।"
करीम ने कहा, "हमारे केंद्र में सिर्फ बीसीसीआई नहीं बल्कि राज्य संघ प्रमुख रूप से थे। शुरुआत में राज्य संघों की ही यह जिम्मेदारी है और बीसीसीआई को उसके लिए एक उचित योजना, एक उचित रोडमैप के साथ आना चाहिए। लेकिन बीसीसीआई सब कुछ नहीं कर सकता। ऐसा करने के लिए राज्य संघों को भी अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभाने की जरूरत है।"

शाम्मो दासगुप्ता ESPNcricinfo में सीनियर असिस्टेंट एडिटर है।