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संजू सैमसन : जब आपको लगता है कि काम पूरा हो गया है तब माइंडसेट कुछ क्षणों के लिए बदल सकता है

अब्दुल समद ख़ुद को ख़ुशक़िस्मत मानते हैं कि उन्हें दूसरा मौक़ा मिला

जयपुर में सनराइज़र्स हैदराबाद के ख़िलाफ़ मिली नाटकीय हार पर राजस्थान रॉयल्स के कप्तान संजू सैमसन ने कहा कि आईपीएल की प्रवृति ऐसी है कि कोई भी टीम कठिन परिस्थिति से उबर कर मैच जीत सकती है। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने मैच के अहम मोड़ पर नो बॉल डाले जाने से होने वाली पीड़ा की बात भी स्वीकारी।
हैदराबाद को अंतिम ओवर में जीत के लिए 16 रन चाहिए थे। संदीप शर्मा ने अब्दुल समद को अंतिम गेंद पर लांग ऑफ़ पर कैच आउट करा दिया और राजस्थान के खेमे में जश्न का माहौल भी शुरू हो गया लेकिन वह गेंद नो बॉल क़रार दे दी गई। अब अंतिम गेंद पर चार रनों की ज़रूरत थी जिसे समद ने संदीप के सिर ऊपर से छक्के के लिए जड़ दिया।
मैच के बाद संजू ने ब्रॉडकास्टर से कहा, "ईमानदारीपूर्वक कहूं, तो हम सभी आईपीएल की प्रवृति से भली भांति परिचित हैं। इस तरह के मुक़ाबले आईपीएल को ख़ास बनाते हैं। आप कभी भी यह महसूस नहीं कर सकते कि आपने मुक़ाबला जीत लिया है। मुझे संदीप पर विश्वास था। एक ऐसी ही परिस्थिति से वह हमारे लिए मैच जिता चुके थे। उन्होंने आज भी वैसा कर ही दिया था लेकिन उस नो बॉल ने हमारे लिए मैच का परिणाम बिगाड़ दिया।"
नो बॉल पर संजू ने बात करते हुए कहा, "यह नो बॉल थी और हमें दोबारा गेंद डालनी थी। और मुझे लगता है कि संदीप जानते हैं कि उन्हें क्या करना है लेकिन ज़ाहिर तौर पर जब आपको लगता है कि काम पूरा हो गया है तब कुछ क्षणों के लिए मांडेसेट में बदलाव आ जाता है। हर कोई जश्न मना रहा था। लेकिन यह इस खेल की प्रवृति है हालांकि अब ऐसे मोड़ पर लाइन को नहीं लांघ सकते।"
समद ने कहा, "मैं गेंद के स्लॉट में आने का इंतज़ार कर रहा था और मुझे एक नो बॉल भी मिल गई। जब मैंने क्रीज़ क्रॉस की तब अंपायर ने मुझे बताया कि यह एक नो बॉल है। इसलिए मैंने मार्को (यानसन) को वापस आने के लिए कहा। अंपायर ने कहा कि हमें एक ही रन दिया जाएगा। मैं सही एरिया में गेंद हिट करने की कोशिश कर रहा था। और वैसा ही हुआ है, गेंद वहीं गई और यह काम आया।"
हैदराबाद के कप्तान ऐडन मारक्रम ने इस जीत पर समद की तारीफ़ों के पुल बांध दिए। उन्होंने कहा, "भावनाएं पलक झपकने के साथ बदल गईं। लेकिन यह जीत हमारे लिए अच्छी रही और यह काफ़ी मायने भी रखती है। समद जैसे एक ऐसे बल्लेबाज़ के लिए जो कड़ी मेहनत करते हैं और उन्हें सिर्फ़ ऐसी परिस्थिति में बल्लेबाज़ी करने का अवसर मिलता है जब अंतिम ओवर में 15 रनों की ज़रूरत होती है, यह कभी आसान नहीं रहता।"