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सूर्यकुमार यादव की विरासत तय करेगा यह T20 विश्व कप

भारत के पहले T20 विशेषज्ञ का ख़राब फ़ॉर्म जारी है

नागपुर में भारत के कप्तान सूर्यकुमार यादव 100 T20I खेलने वाले 53वें खिलाड़ी बन जाएंगे। इनमें से 44 खिलाड़ी पूर्ण सदस्य देशों से हैं।
न्यूज़ीलैंड के लिए 81 और हॉन्ग कॉन्ग के लिए 19 मैच खेलने वाले मार्क चैपमैन इन 44 खिलाड़ियों की सूची में शामिल नहीं हैं। इन 44 खिलाड़ियों में सूर्यकुमार इकलौते ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने ना तो 10 टेस्ट मैच खेले हैं और ना ही 40 वनडे। वह पूर्ण सदस्य देशों के सबसे लंबे समय तक टिके रहने वाले T20I विशेषज्ञ हैं।
तेज़ी से बदलते प्रोफ़ेशनल क्रिकेट के परिदृश्य में यह एक छोटा सा माइलस्टोन है, लेकिन दिलचस्प यह है कि यहां तक पहुंचने वाले पहले खिलाड़ी सूर्यकुमार हैं। T20 विशेषज्ञ बहुत हैं और उनकी संख्या बढ़ती जाएगी। लेकिन इतने मैच खेलने वाला पहला खिलाड़ी बनना, उन्होंने कभी इस इरादे से अपना अंतरराष्ट्रीय करियर नहीं शुरू किया था।
वह आज जब भी मौक़ा मिलता है, मुंबई के लिए प्रथम श्रेणी और लिस्ट ए क्रिकेट खेलते हैं। उनकी उम्र 35 साल है। जब उन्होंने अपना करियर शुरू किया था, तब T20 विशेषज्ञ बनना तो दूर, यह एक कल्पना भी नहीं थी। न ही इसे कोई व्यवहारिक करियर विकल्प माना जा सकता था।
यह दिखाता है कि सीमित ओवर क्रिकेट का परिदृश्य कितना बदल चुका है। 2023 वनडे विश्व कप फ़ाइनल के बाद भारत ने सिर्फ़ 23 वनडे, जबकि 54 T20I खेले हैं। सिर्फ एक फ़ॉर्मेट खेलने के बावजूद, इस अवधि में सूर्यकुमार भारत के लिए चौथे सबसे ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले खिलाड़ी हैं।
T20 स्पेशलिस्ट के उभार के पीछे शायद यह तर्क है कि वनडे से T20 में ढलना, टेस्ट से वनडे में ढलने से बिल्कुल अलग है। T20 लगभग एक अलग खेल है, न कि उसी खेल का बस एक अलग फ़ॉर्मेट। सूर्यकुमार ने संयोग से ऐसा खेल विकसित कर लिया है, जो इस फ़ॉर्मेट में काम करता है, जबकि अब युवा खिलाड़ी इसी के लिए ट्रेनिंग कर रहे हैं।
भारत की नियमित T20I एकादश के आठ में से छह बल्लेबाज़ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिर्फ़ यही फ़ॉर्मेट खेलते हैं- संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा, शिवम दुबे, रिंकू सिंह और सूर्यकुमार।
हालांकि, T20 नाम के इस 'अलग खेल' का कोई अलग फ़ैनबेस नहीं है। इससे सिर्फ़ T20 खेलने वालों के सामने अलग तरह की चुनौतियां आती हैं। भारतीय खिलाड़ियों के मामले में यह और बढ़ जाता है, क्योंकि वे IPL के अलावा किसी और लीग में नहीं खेल सकते।
सूर्यकुमार की तुलना कभी एबी डी विलियर्स से होती थी और अब स्थिति यह है कि उन्होंने एक साल में एक भी अंतरराष्ट्रीय अर्धशतक नहीं लगाया है। टीमें अब उनके ख़िलाफ़ बेहतर गेंदबाज़ी कर रही हैं।
जब रोहित शर्मा और विराट कोहली 2024 T20 विश्व कप में उतरे थे, तो वे ICC ख़िताब के लिए बेचैन थे, लेकिन क्रिकेटर के तौर पर उनकी विरासत सुरक्षित थी। सूर्यकुमार के लिए यह विश्व कप सब कुछ तय कर सकता है।
हां, वह 2024 में विश्व कप जीतने वाली टीम का हिस्सा थे और फ़ाइनल के आख़िरी ओवर में उन्होंने डेविड मिलर का एक निर्णायक कैच भी लपका था, लेकिन हालिया संघर्षों को देखते हुए वह याद अब काफ़ी दूर की लगती है।
आने वाले दो महीने सूर्यकुमार के लिए थोड़ी बेचैनी लेकर आएंगे। बल्ले से उनके इस बेहद ख़राब साल में, वह फ़ुल गेंदों पर आउट हो रहे हैं, जिन्हें आमतौर पर बल्लेबाज़ मारना पसंद करते हैं। वह कह चुके हैं कि उन्हें पता है कि क्या ग़लत हो रहा है और वह इस पर काम कर रहे हैं।
एक सोच यह भी है कि कहीं कोई हल्की चोट उनकी हिटिंग क्षमता को रोक तो नहीं रही। कप्तान होने के नाते वह बाहर बैठ नहीं सकते। उन्हें इसी दबाव और नज़रों के बीच खुद को वापस लय में लाना होगा।
यह संभावना कम है कि सूर्यकुमार 2028 T20 विश्व कप तक खेलेंगे। अगर वह कप्तान के तौर पर यह विश्व कप नहीं जीतते, तो उनका करियर IPL खिताबों के साथ तो ख़त्म होगा, लेकिन T20I क्रिकेट में कोई तुरंत याद रहने वाली बड़ी ट्रॉफ़ी नहीं होगी। अगले दो महीने सूर्यकुमार की विरासत तय करने वाले हो सकते हैं।

सिद्धार्थ मोंगा ESPNcricinfo में वरिष्ठ लेखक हैं