हर्ष दुबे: फेसबुक पर पता चला कि मुझे कप्तान बनाया गया है
विदर्भ के कप्तान दुबे का मानना है कि उनकी टीम के खिलाड़ियों में जीत की जो भूख थी, उसी ने उन्हें चैंपियन बनाने में मदद की
ESPNcricinfo स्टाफ़
Jan 21, 2026, 6:45 AM
विदर्भ ने विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी 2025-26 सीज़न का ख़िताब जीता • Ajinkya Salwe
विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी का नया चैंपियन बनने के बादविदर्भ के ड्रेसिंग रूम में जश्न अभी थमा नहीं है। टीम इस ऐतिहासिक कामयाबी के खुमार में है। हालांकि सौराष्ट्र के ख़िलाफ़ रविवार को मैदान पर उतरने से ठीक पहले खिलाड़ियों और मैनेजमेंट में थोड़ी बेचैनी भी थी।
खिताबी भिड़ंत से ठीक पहले ध्रुव शौरी की पीठ में आए तेज़ खिंचाव ने विदर्भ के खेमे में थोड़ी खलबली मचा दी थी। स्लिप में कैच लपकने के प्रयास में लगी यह चोट शाम होते-होते मसल स्पैज़म में बदल गई और शौरी फ़ाइनल की रेस से बाहर हो गए।
टीम ने सुरक्षा के लिहाज़ से सेमीफ़ाइनल से पहले ही एक बैकअप खिलाड़ी का इंतज़ाम कर लिया था, क्योंकि यश राठौड़ अंगूठे की चोट से जूझ रहे थे। राठौड़ की हिम्मत की दाद देनी होगी कि उन्होंने दर्द को नज़रअंदाज़ करते हुए फ़ाइनल में शिरकत की और नंबर तीन पर आकर 54 रनों की एक टिकाऊ पारी भी खेली। हालांकि, शौरी की चोट इतनी गंभीर थी कि वे मैच तक फ़िट नहीं हो पाए।
विदर्भ के कप्तान हर्ष दुबे ने ESPNcricinfo से कहा "हमारे पास पहले से रिप्लेसमेंट मौजूद था, जिससे मैच वाले दिन शांत दिमाग़ से फ़ैसला लेना आसान हो गया।"
शौय की जगह टीम में अनकैप्ड फ़ैज़ मोहम्मद शेख़ को शामिल किया गया। फ़ैज़ की साख एज-ग्रुप क्रिकेट में टिककर खेलने और पारी को बुनने वाले बल्लेबाज़ की रही है। यही खू़बी उन्हें शुभम दुबे पर बढ़त दिला गई, क्योंकि शुभम को टीम में मुख्य रूप से एक फ़िनिशर के तौर पर देखा जाता था। अपने लिस्ट ए डेब्यू पर फ़ैज़ ने सधी हुई शुरुआत की और 15 गेंदों पर 19 रनों की छोटी लेकिन अहम पारी खेली।
दुबे ने कहा, "हमने शेख़ से बस यही कहा कि इस पल का आनंद लें और वैसे ही खेलें जैसे वह हमेशा खेलते आए हैं।"
विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी फ़ाइनल में अथर्व तायड़े का मैच पलट देने वाला शतक•PTI
'IPL में अनसोल्ड रहना तायड़े की आग को और भड़का गया'
टीम के भरोसे पर पूरी तरह खरे उतरने वाले एक और योद्धा रहे अथर्व तायड़े। 25 साल के इस खिलाड़ी के लिए 2024-25 का सत्र ज़्यादातर इंतज़ार में ही बीता, क्योंकि शौरी और राठौड़ की सलामी जोड़ी ने टीम में अपनी जगह पक्की कर ली थी। हालांकि एक बेहतरीन सीज़न के दम पर करुण नायर की दोबारा कर्नाटक वापसी और दानिश मलेवार की इंजरी ने विदर्भ को अपनी रणनीति पर नए सिरे से विचार करने को मजबूर किया।
मिडल ऑर्डर में स्पिनर्स का डटकर सामना करने के लिए यश राठौड़ को नई भूमिका सौंपी गई। इसका सीधा फ़ायदा तायड़े को मिला और उनके लिए पारी की शुरुआत करने का दरवाज़ा एक बार फिर खुल गया।
अथर्व ने इससे पहले अपना आख़िरी लिस्ट ए शतक साल 2021 में आंध्रा (164*) के विरुद्ध लगाया था। इस टूर्नामेंट के ग्रुप स्टेज में भी वे कई बार बड़ी पारी के करीब पहुंचे, पर उसे तीन अंकों तक नहीं ले जा सके। आख़िरकार उन्होंने फ़ाइनल जैसे बड़े मुक़ाबले को अपने लिए चुना और 129 रनों की एक ऐसी पारी खेली जिसने मैच का पासा ही पलट दिया।
दुबे ने कहा, "अथर्व हमें अच्छी शुरुआत दिला रहे थे, लेकिन उन्हें बड़े स्कोर में तब्दील नहीं कर पा रहे थे। नॉकआउट्स में भी एक बार जल्दी आउट हुए और एक बार 60-70 रनों की पारी खेली थी। IPL नीलामी में अनसोल्ड रहना उस भूख को और बढ़ा गया। वह साबित करना चाहते थे कि वह IPL से परे भी अपनी एक अलग साख रखते हैं। फ़ाइनल में ऐसा करना इसे ख़ास बना गया।"
लीग चरण में नहीं खेले, लेकिन मौक़ा मिलने पर दर्शन नालकांडे ने असर छोड़ा•PTI
नई गेंद के साथ पड़िक्कल के ख़िलाफ़ गेंदबाज़ी करना चाहते थे यश ठाकुर
चयन में यही स्पष्टता विदर्भ की गेंदबाज़ी रणनीति में भी दिखी।
विदर्भ ने महज़ एक तय रणनीति पर टिके रहने के बजाय परिस्थितियों और 'मैच अप्स' को देखते हुए फ़ैसलों में लचीलापन दिखाया। नॉकआउट मुक़ाबलों के दौरान इस बदलाव का सीधा लाभ यश ठाकुर और दर्शन नालकांडे को पहुंचा। अब तक यश ठाकुर की भूमिका मुख्य रूप से पहले बदलाव (फ़र्स्ट चेंज) वाले गेंदबाज़ की थी, लेकिन सेमीफ़ाइनल की दहलीज़ पर टीम मैनेजमेंट ने एक साहसी क़दम उठाने का मन बना लिया।
दुबे ने कहा, "सेमीफ़ाइनल से एक दिन पहले मुझे याद आया कि पिछले साल के फ़ाइनल में यश ने देवदत्त पड़िक्कल को स्लिप में कैच कराया था। यश ख़ुद मेरे पास आए और बोले कि वह नई गेंद से पड़िक्कल को गेंदबाज़ी करना चाहते हैं।"
दुबे ने उन पर भरोसा किया। इसके बाद जो हुआ, वह सीम गेंदबाज़ी का शानदार स्पेल था। तब तक टूर्नामेंट में 800 से ज़्यादा रन बनाकर सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले पड़िक्कल उस दिन इसका जवाब नहीं ढूंढ पाए। उन्हें खाता खोलने में 18 गेंदें लगीं और फिर वह विकेटकीपर को कैच दे बैठे।
दुबे ने कहा, "वह स्पेल व्हाइट बॉल क्रिकेट में देखे गए सर्वश्रेष्ठ स्पेल्स में से एक था। पिच में नमी थी और उसने पांच ओवर तक बेहतरीन गेंदबाज़ी की। देर से मूवमेंट और लगातार सटीक लाइन। उसी ने मैच हमारे पक्ष में सेट कर दिया।"
यश ठाकुर के शुरुआती स्पेल के बाद महफ़िल लूटने की बारी दर्शन नालकांडे की थी। राजकोट में हुए लीग स्टेज के मैचों के दौरान वे प्लेइंग XI का हिस्सा नहीं थे, क्योंकि वहां की परिस्थितियां प्रफुल हिंगे जैसे 'हिट द डेक' गेंदबाज़ों के लिए ज़्यादा मददगार थीं। हालांकि, नॉकआउट दौर की धीमी और कम उछाल वाली पिचों पर नालकांडे की गेंदबाज़ी विदर्भ की योजना में बिल्कुल सटीक बैठी।
विजेता रह चुकी कर्नाटक के विरुद्ध सेमीफ़ाइनल में उन्होंने अपना जलवा दिखाते हुए पांच विकेट झटके। उनके सबसे बड़े शिकार करुण नायर बने, जो केएल श्रीजित के साथ मिलकर कर्नाटक को 330 रनों के बड़े स्कोर की ओर ले जा रहे थे। लेकिन नालकांडे की एक चतुराई भरी धीमी गेंद (स्लोअर बॉल) ने नायर को गच्चा दे दिया और वहीं से मैच का पासा पलट गया।
दुबे ने कहा, "वह साझेदारी मैच को हमसे दूर ले जा सकती थी। दर्शन की स्लोअर गेंद पिच पर थोड़ी रुक कर गई और करुण जल्दी आउट हो गए।यह सब एक भूख का नतीजा था। जिसने भी खेला, बस जीतना चाहता था। नॉकआउट्स में यही सबसे अहम बात थी।"
विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ रहे अमन मोखाड़े•PTI
'इस समूह में प्रदर्शन की भूख हर खिलाड़ी में दिखती है'
विदर्भ का पूरा अभियान धैर्य और भूख से भरा रहा।
अमन मोखाड़े विदर्भ की इस सफलता की सबसे चमकती मिसाल बनकर उभरे। टूर्नामेंट की शुरुआत में टीम की योजना के हाशिए पर रहने वाले मोखाड़े ने अंत में 814 रन कूटे और सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ के रूप में अपना सफ़र पूरा किया। उनका 90.44 का औसत और पांच शतक उनकी ज़बरदस्त क्लास की गवाही देते हैं। ख़ासकर सेमीफ़ाइनल में पिछले विजेता को टूर्नामेंट से बेदखल करने वाली उनकी 138 रनों की पारी को इस पूरे सत्र के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों में गिना जा रहा है।
मोखाड़े का यह प्रचंड फ़ॉर्म कोई इत्तेफ़ाक़ नहीं था। इससे ठीक पहले रणजी ट्रॉफ़ी में भी उनका बल्ला आग उगल रहा था, जहां उन्होंने 96.16 की औसत से 577 रन बनाए थे। वे एलीट डिविज़न के टॉप पांच रन बनाने वाले बल्लेबाज़ों की फ़ेहरिस्त में भी शामिल रहे थे।
दुबे ने कहा, "अगर आप हमारे खिलाड़ियों के उम्र समूह रिकॉर्ड देखें, तो वे शानदार है। कई खिलाड़ी सिर्फ़ मौक़े का इंतज़ार कर रहे हैं। पिछले साल करुण खू़ब रन बना रहे थे। इसलिए अमन को ज़्यादा मौक़े नहीं मिले। लेकिन उसने उनसे बहुत कुछ सीखा। फिर से वही भूख कि जब भी मौक़ा मिलेगा, मैं प्रदर्शन करूंगा। यही इस समूह की पहचान है।"
आर समार्थ, जो उत्तराखंड के साथ एक दौर के बाद नायर की जगह आए थे, उन्होंने भी कर्नाटक के ख़िलाफ़ सेमीफ़ाइनल में अहम अर्धशतक लगाया।
दुबे ने बंगाल के ख़िलाफ़ टूर्नामेंट के पहले मैच को टर्निंग प्वाइंट बताया। विदर्भ ने 392 रन बनाए थे, फिर भी मैच हार गया। "उस मैच के बाद कड़वी लेकिन ज़रूरी बातें हुईं। हमने पांच छह कैच छोड़े थे। राजकोट बल्लेबाज़ी के लिए मुफ़ीद है, इसलिए हमने उन चीज़ों पर बात की जिन्हें हम कंट्रोल कर सकते थे। सटीकता, अनुशासन, डेथ बॉलिंग और फ़ील्डिंग।
"उस मैच के बाद से हम हर क्षेत्र में बेहतर होते गए। उसी ने पूरे टूर्नामेंट का सुर तय कर दिया।"
विदर्भ की सफलता में हर्ष दुबे और यश ठाकुर की अहम भूमिका रही•Tanuj/UPCA
दुबे की कप्तानी की कहानी: 'मुझे फ़ेसबुक पर पता चला'
दुबे के लिए विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी खिताब उनकी कप्तानी यात्रा में एक अहम पड़ाव था।
उम्र समूह और सीनियर टीम की ज़िम्मेदारियों के बीच लगातार आवाजाही के कारण उन्हें किसी टीम के साथ लंबे समय तक कप्तानी का मौक़ा नहीं मिला। इस सीज़न में भी उन्हें टूर्नामेंट शुरू होने से कुछ दिन पहले ही पता चला कि वह विदर्भ की अगुवाई करेंगे। वजह थी एक फ़ेसबुक पोस्ट। उन्होंने कहा, "मैं हैरान नहीं था, लेकिन पूरी तरह तैयार भी नहीं था। मैंने इसे एक और मौक़े की तरह लिया।"
सीखने की प्रक्रिया तेज़ रही। सीज़न की शुरुआत में विदर्भ का T20 अभियान उम्मीद के मुताबिक़ नहीं रहा था, जिससे दुबे को फ़ैसले लेने, संवाद और मानकों पर दोबारा सोचने की ज़रूरत पड़ी।
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है बल्लेबाज़ आपको मैच जिता सकते हैं, लेकिन टूर्नामेंट जीतने के लिए मज़बूत गेंदबाज़ी और अच्छी तैयारी ज़रूरी होती है। हमने उसी पर फ़ोकस किया।"
यह बात बंगाल से मिली हार के बाद वापसी में दिखी, या फ़ाइनल से पहले शौरी की अनुपस्थिति को जिस तरह टीम ने संभाला, उसमें भी।
जश्न छोटा रहा। टीम बस में थोड़ी देर संगीत और नाच के साथ विदर्भ का पहला व्हाइट बॉल खिताब मनाया गया। 12 घंटे के भीतर ही टीम फिर सफ़र पर निकल पड़ी। 22 जनवरी से शुरू होने वाले आंध्रा के ख़िलाफ़ रणजी ट्रॉफ़ी मैच के लिए अनंतपुर तक का पांच घंटे का सफ़र।
रणजी ट्रॉफ़ी में विदर्भ ग्रुप ए में शीर्ष पर है और नॉकआउट में पहुंचने की मज़बूत स्थिति में है। लेकिन हेड कोच उस्मान ग़नी उन्हें याद दिलाते रहते हैं कि रणजी सीज़न एक नया दिन और एक नया मैच है।
"अतीत की कामयाबी में डूबे रहने का समय नहीं है। आगे बढ़ते रहने का ही वक़्त है।"
