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शिखा पांडे : बेलिंडा क्लार्क ने मुझे 'योग्य' और 'स्पेशल' महसूस कराया

"उन्होंने मुझे इस बात का एहसास कराया कि मेरे पास खेल को देने के लिए बहुत कुछ है और हार मान लेना कोई विकल्प नहीं है"

15 महीनों बाद शिखा पांडे की भारतीय टीम में वापसी हुई है  •  Associated Press

15 महीनों बाद शिखा पांडे की भारतीय टीम में वापसी हुई है  •  Associated Press

भारतीय ऑलराउंडर शिखा पांडे ने राष्ट्रीय टीम से बाहर रहने के दौरान ख़ुद को 'योग्य' और 'विशेष' महसूस कराने का श्रेय ऑस्ट्रेलिया की पूर्व कप्तान बेलिंडा क्लार्क को दिया है।

सितंबर 2022 में, क्लार्क ने ब्रिस्बेन में शिखा के लिए तीन सप्ताह के कार्यकाल की सुविधा प्रदान की, जहां उन्होंने क्लब क्रिकेट खेला। उस कार्यकाल ने बिग बैश लीग में ब्रिस्बेन हीट के लिए खेलने का मार्ग लगभग प्रशस्त किया, लेकिन शिखा को अपनी राज्य की टीम गोवा के साथ प्रतिबद्धताओं के कारण इस मौक़े को ठुकराना पड़ा।

उस कार्यकाल के चार महीनों बाद अब शिखा का भविष्य उज्जवल नज़र आ रहा है। साउथ अफ़्रीका में होने वाली आगामी त्रिकोणीय टी20 सीरीज़ और टी20 विश्व कप के लिए दल में चुने जाने के बाद वह 15 महीनों बाद भारतीय टीम में वापसी करने को तैयार हैं।

शिखा ने स्क्रॉल डॉट इन को बताया, "बेलिंडा के बारे में एक बात जो मुझे पसंद है, वह यह है कि उनमें सहानुभूति कम और हमदर्दी अधिक थी। उन्होंने मेरी कहानी सुनी और फिर अलग-अलग लक्ष्य निर्धारित करने के लिए मेरे साथ काम किया - न केवल क्रिकेट से संबंधित, बल्कि खेल के बाहर भी।"

उन्होंने आगे कहा, "हमने मेरे नेतृत्व गुणों पर काम किया, हमने विभिन्न पॉडकास्ट पर चर्चा की। हमने इस पर काम किया कि मैं राज्य के लिए कैसे फ़र्क़ पैदा कर सकती हूं और उन्होंने मुझे योग्य, यहां तक कि विशेष महसूस कराया।"

शिखा ने बताया कि क्लार्क के साथ काम करने के बाद उनकी मानसिकता में बड़ा बदलाव आया। इसने राष्ट्रीय टीम से दूर रहने के दौरान उनकी टीमों में 'अधिक समावेशी संस्कृति' को बढ़ावा देकर 'स्क्वॉड मानसिकता' विकसित करने में मदद की।

उन्होंने कहा, "मैंने उनके साथ जो सत्र किए, उससे मुझे अपनी टीम के माहौल में बदलाव लाने में काफ़ी मदद मिली। हम टीम में स्क्वॉड मानसिकता लेकर आए और हमने सकारात्मक सुदृढीकरण में अधिक विश्वास करना शुरू किया। हमने मनोवैज्ञानिक रूप से सुरक्षित वातावरण बनाने के महत्व को समझा जिसमें खिलाड़ी ख़ुद को महत्वपूर्ण महसूस करते हैं। साथ ही हमने अपने मतभेदों को स्वीकार करना शुरू कर दिया और एक अधिक समावेशी संस्कृति बनाने की कोशिश की।"



शिखा ने आगे कहा, "मुझे याद है कि शुरुआत में एक सत्र के दौरान बेलिंडा ने कहा था कि हम जिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं, वे हमें परिभाषित नहीं करती हैं। लेकिन हम उन परिस्थितियों के जवाब में क्या करना चुनते हैं और उनसे बाहर आने के लिए जो निर्णय हम लेते हैं वे हमें परिभाषित करते हैं। उन्होंने मुझे इस बात का एहसास कराया कि मेरे पास खेल को देने के लिए बहुत कुछ है और हार मान लेना कोई विकल्प नहीं है।"

शिखा का मानना ​​है कि उन बातचीतों ने उन्हें अपनी कमज़ोरियों को अपनाने और अपने संघर्षों को स्वीकार करने में मदद की।

एक वाकये को याद करते हुए शिखा ने कहा कि कैसे क्लार्क ने उन्हें समझाया कि दूसरों से अलग रहने में कोई बुराई नहीं है। उन्होंने कहा, "जब तक मैं ख़ुद से दूर नहीं जा रही थी, यह ठीक था। एक पेशेवर एथलीट के रूप में कभी-कभी आप संघर्षों और बुरे दौर से इतने डरे हुए होते हैं कि आप ऐसा कुछ भी नहीं करने की कोशिश करते हैं जो आपकी 'सुरक्षा' को ख़तरे में डाल सके।"

शिखा ने कहा, "हालांकि उन्होंने मुझे समझाया कि आपको प्रयोग करने के लिए तैयार रहना चाहिए। आपको यह समझने की आवश्यकता है कि आप कमज़ोर होंगे और यह ठीक है। उत्कृष्टता की खोज में असफल होना ठीक है, इसी तरह हम आगे बढ़ते हैं। हमें अपनी ग़लतियों को सीखने की ज़रूरत है। उस बातचीत ने मेरे लिए बहुत कुछ खोल दिया।"

उन्होंने आगे बताया, "मैं अभी इतना आश्वस्त महसूस कर रही हूं कि बेलिंडा क्लार्क जैसी व्यक्ति मेरे साथ खड़ी हैं। मैं उनके साथ संपर्क में रही हूं और मेरे चयन के बाद मैंने उन्हें एक संदेश भेजा और अगले दिन उनसे बात की। मैं बस धन्यवाद कहना चाहती थी क्योंकि वह बहुत ही कमज़ोर दौर में मेरे साथ थी और मुझे ख़ुद को फिर से मज़बूत करने में मदद करने के लिए उन्होंने मुझे बहुत आत्मविश्वास दिया।"

अंत में उन्होंने कहा, "कभी-कभी जब ऐसी चीज़ें होती हैं तो आप ख़ुद पर और अपनी क्षमताओं पर इतना संदेह करना शुरू कर देते हैं कि आप अपने ही दुश्मन बन जाते हैं। यह जानना कि वह मेरे साथ खड़ी हैं और उन्हें लगता है कि मैं अच्छी हूं, इसने मेरी बहुत मदद की है।