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टी20 विश्व कप 2022: नए रूप वाली टीम इंडिया के लिए रोडमैप मुश्किल है

खिलाड़ियों की भूमिका स्पष्ट करने, आईपीएल प्रदर्शनों को सही तरीक़े से देखने की ज़रूरत

The Indian team lines up for the national anthem, India vs Namibia, T20 World Cup, Group 2, Dubai, November 8, 2021

सभी खिलाड़ियों को टीम से बाहर करने से पहले कम से कम 10 मैच देने की ज़रूरत  •  ICC via Getty

भारत 2021 टी20 विश्‍व कप में ख़िताब का दावेदार बनकर उतरा था, लेकिन ख़राब टीम संयोजन और ख़राब किस्मत की वजह से सेमीफ़ाइनल में जगह नहीं बना सका। अब अगला टी20 विश्व कप 2022 में ऑस्‍ट्रेलिया में खेला जाएगा और भारत के पास अब नया कप्तान होगा और नया कोच। अगले विश्व कप में मज़बूत दावेदार बनने के लिए उन्हें क्या करने की आवश्यकता है, इसका एक रोडमैप यहां है।
स्पष्ट भूमिका और सुरक्षा
टी20 क्रिकेट आसान दिख सकता है अगर खिलाड़ियों को उनका रोल दिया जाए और उन्हें उनके रोल के हिसाब से प्रदर्शन की छूट दी जाए। हर बार बिना असफल होने के डर के। कायरन पोलार्ड एक रात में ही दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फ़ीनिशर नहीं बने हैं। उन्होंने लगातार ऐसा किसी भी परिस्थिति और हालात में किया है।
यह विश्वास करने के लिए कि कोई खिलाड़ी आख़िरी ओवर में दस रन बचा सकता है या आख़िरी दो ओवरों में 30 रन बना सकता है, खिलाड़ियों को यह रोल लगातार निभाना होगा। अगर किसी खिलाड़ी का चयन पावरप्ले का लाभ उठाने या किसी गेंदबाज़ का चयन डेथ ओवरों में एक के बाद एक यॉर्कर करने के लिए हुआ है, तो उनको टीम से बाहर करने से पहले कम से कम 10 मैचों में परखा जाना सही होगा।
भारतीय क्रिकेट में अब निर्णय लेने वालों को खिलाड़ियों को इस तरह का स्थान देने की आवश्यकता है। टीम प्रबंधन को सही खिलाड़ियों को पहचानने की ज़रूरत है, उन्हें उनका सटीक रोल देने की आवश्यकता और विश्व कप के ख़त्म होने पर इसी रणनीति पर बने रहने की आवश्यकता है।
आईपीएल प्रदर्शनों को प्रासंगिक बनाएं
आईपीएल युवा क्रिकेटरों के लिए बेहतरीन मंच है, जहां पर वह अपनी क़ाबिलियत को दिखा सकते हैं, ख़ासतौर पर दबाव में। लेकिन अगर कोई ओपनर के तौर पर अच्छा करता है, तो यह नहीं सोचना चाहिए कि वह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में मध्य क्रम में भी अच्छा कर सकता है। आईपीएल नंबर राष्ट्रीय टीम में चयन के मापदंड नहीं होने चाहिए। जो रोल वह निभाते हैं, वो परिस्थिति और विरोधी टीम की क्वालिटी मायने रखती है। अगर कोई खिलाड़ी अपनी आईपीएल और राष्ट्रीय टीम के लिए भी एक ही रोल अदा करेगा तो उसके सफल होने की संभावना ज़्यादा है। यह भी अच्छा आइडिया है कि कौशल से भरपूर युवा क्रिकेटरों को परखने का आईपीएल में एक मौक़ा और दिया जाना चाहिए कि कैसे वह बेहतर रणनीति बनाते हें और विरोधी टीम को दबाव में लाते हैं। जिससे यह साफ़ हो सकेगा कि ये खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के लिए तैयार हैं।
पहले ही परिस्थिति ओर रूझान को समझें
टेस्ट सीरीज़ या वनडे विश्व कप की तुलना में टी20 विश्व कप में हार के बाद वापसी करने के कई मौक़े नहीं मिलते हैं। इसी के साथ मैचों से भरे अंतर्राष्ट्रीय कैलेंडर में आपके पास विश्व कप की तैयारी करने के ज़्यादा दिन नहीं होते हैं। वहीं गैर भारतीय खिलाड़ी तो दुनिया भर में टी20 लीग खेलते हैं लेकिन भारतीय खिलाड़ी केवल आईपीएल (घरेलू टूर्नामेंट और सैयद मुश्ताक़ अली ट्रॉफ़ी को छोड़कर) ही खेलते हैं। परिणाम स्वरुप परिस्थिति उन्हें विश्व कप के दौरान चौंका सकती हैं।
ऐसी चुनौतियों से बचने के लिए टीम प्रबंधन इस गर्मी में बिग बैश लीग और अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान ऑस्ट्रेलिया में परिस्थितियों का अध्ययन करने के लिए स्काउट्स और विश्लेषकों को भेज सकता है और वहां पर सफल होने के लिए आवश्यक कौशल को समझ सकता है।
बबल और कार्यभार का सम्मान
मंगलवार को ही अपना कार्यकाल पूरा करने वाले कोच रवि शास्त्री ने टी20 विश्व कप में भारत के दो बड़े मुक़ाबलों में सफल नहीं होने के पीछे बबल की थकान का कारण बताया।
वाकई बबल की थकान एक बड़ी चुनौती है जिसे बोर्ड को अच्छे से संभालने की ज़रूरत है। अगले दो सालों के शेड्यूल सामने हैं। ऐसे में यहां पर रोटेशन पॉलिसी ज़रूरी है। सभी खिलाड़ी आईपीएल और टेस्ट दौरों पर मौजूद होते हैं, लेकिन भारत को एक ऐसी रोटेशन पॉलिसी बनाने की ज़रूरत है, जहां पर सभी खिलाड़ी तरोताज़ा होकर विश्व कप में उतरें। बीसीसीआई को आराम करने वाले खिलाड़ियों के लिए पर्याप्त मुआवज़ा और सुरक्षा सुनिश्चित करने की ज़रूरत है। . अभी से तैयारी
पिछले दो विश्व कप में पांच साल का अंतर, साथ ही कोविड-19 से जुड़े मुद्दों ने टीमों के लिए अभी से योजना बनाना मुश्किल कर दिया है, लेकिन अगले विश्व कप की वे अभी से तैयारी शुरू कर सकते हैं। भारत 17 नवंबर से जयपुर में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ इसकी शुरुआत कर सकता है।
भारत या तो मल्टी फ़ॉर्मेट खेलने वाले खिलाड़ियों को इंग्लैंड दौरे पर टेस्ट और वनडे में आराम दे सकता है और उन्हें केवल टी20 खिला सकता है या वे वेस्टइंडीज़ की ही तरह सफ़ेद और लाल गेंद क्रिकेट की दो अलग टीम बना सकता है। दोनों के अपने कुछ फ़ायदे और नुक़सान हैं। अब यह नए कोच राहुल द्रविड़, नए कप्तान रोहित शर्मा और चयनकर्ताओं पर निर्भर करता है।
भारत का टेस्ट में अगला बड़ा दौरा साउथ अफ़्रीका और इंग्लैंड में एकमात्र टेस्ट है। इसका मतलब है कि वे अब पूरी तरह से विश्व कप पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

गौरव सुंदरारमन ESPNcricinfo में सीनियर स्‍टैट्स एनेलिस्‍ट हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी में सीनियर सब एडिटर निखिल शर्मा ने किया है।