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द हंड्रेड से दोबारा इस तरह फ‍िर से फलक पर चमकी जेमिमाह रोड्रिग्‍स

टूर्नामेंट में रन बनाने के मामले में सबसे आगे रहने वाली खिलाड़ी ने आलोचना को किया दरकिनार

भारत की युवा बल्‍लेबाज जेमिमाह रोड्रिग्‍स  •  Getty Images

भारत की युवा बल्‍लेबाज जेमिमाह रोड्रिग्‍स  •  Getty Images

भारत और नॉर्दर्न सुपरचार्जर्स की बल्लेबाज जेमिमाह रोड्रिग्स ने कहा कि उन्होंने आलोचना का सामना इसे अनदेखा करके किया। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में इस साल कुछ कठिनाईयों भरे महीने निकालने के बाद रोड्रिग्स द हंड्रेड टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली महिला बनकर उभरी हैं। यहां यह बताना जरूरी है कि टूर्नामेंट में 80 प्रतिशत लीग मैच खेले जा चुके हैं।
रोड्रिग्स ने टूर्नामेंट की शुरुआत 43 गेंद में नाबाद 92 रनों की तेजतर्रार पारी से की, जिसमें उन्होंने 17 चौके और एक छक्का लगाया और अपनी टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा उन्होंने 41 गेंद में 60 और 44 गेंद में 57 रन की भी पारियां खेली। वह अब तक पांच पारियों में 60.25 के औसत और 154.48 के स्ट्राइक रेट से 241 रन बना चुकी हैं।
यह कामयाबी रोड्रिग्स ने ठीक भारत की इंग्लैंड के साथ सीमित ओवर की सीरीज के बाद की, जहां वनडे सीरीज के दो मैच में वह दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू सकी थी। इसके बाद उन्हें टी20 सीरीज में मौका नहीं दिया गया था।
रोड्रिग्स ने स्काई स्पोर्ट्स में मंगलवार को कॉमेंट्री करते हुए कहा कि मेरे लिए आलोचना का सामना करने का सबसे अच्छा जरिया यही है कि मैं इसको अनदेखा करती हूं। मैं ऑनलाइन नहीं जाती ना ही अपने बारे में खबरे पढ़ती हूं, क्योंकि यह मुश्किल है जब आप अपना सर्वश्रेष्ठ दे रहे हो और कड़ी मेहनत कर रहे हो। कोई नहीं जानता कि आप क्या सह रहे हो, कोई आपके आंसूओ के बारे में नहीं जानता, कोई नहीं जानता कि आपका दिल टूटा है, यह पसीना ही आपको बताता है कि आप कहां हो। और दूर बैठा कोई सोशल मीडिया पर पोस्ट कर देता है, यह मुश्किल है और अगर आप मेरे से पूछें कि मैंने इसका कैसे सामना किया तो मैं इन सब से दूर रहती हूं और अपने खेल पर फोकस करती हूं और सकारात्मक रहने का प्रयास करती हूं।
2018 में पदार्पण करने के बाद 20 वर्षीय रोड्रिग्स भारत की सबसे युवा उभरती हुई खिलाड़ियों में से एक रही हैं, लेकिन 2021 में उनकी राह थोड़ी मुश्किल हो गई, जब कोविड-19 के साये के बाद लंबे समय बाद भारत में दोबारा क्रिकेट शुरू हुआ। साउथ अफ्रीका के खिलाफ घर में खेली गई सीरीज में वह 1, 9, 0 का स्कोर कर सकीं। इसके बाद टी20 में उन्होंने 30 और 16 रन बनाए। इसके कुछ महीनों बाद इंग्लैंड में वह सिर्फ दूसरा और तीसरा वनडे खेली, जहां पर उन्होंने 15 गेंद में आठ और 21 गेंद में चार ही रन बनाए। इसके बाद उन्हें टी20 सीरीज में बेंच पर बैठना पड़ा। वह टेस्ट टीम का भी हिस्सा थी लेकिन वहां पदार्पण नहीं कर सकीं, जबकि ब्रिस्टल में हुए टेस्ट में उनकी पांच साथियों ने टेस्ट पदार्पण किया। द हंड्रेड में आने से पहले उन्होंने अपनी पिछली सात अंतर्राष्ट्रीय पारियों में 61.26 के खराब स्ट्राइक रेट से मात्र 68 रन ही बनाए थे, वह भी 9.71 के खराब औसत के साथ।
एक भारतीय क्रिकेटर होने के नाते दबाव पर रोड्रिग्स ने कहा कि यह उनके लिए रोलरकोस्टर राइड की तरह रहा है, कभी ऊपर और कभी नीचे। यही तो क्रिकेट है, जो आपको बहुत कुछ सीखाता है, जो आपको एक खिलाड़ी ही नहीं एक इंसान के तौर पर भी आपको बदल देता है। मैं अभी भी सीख रही हूं कि कैसे संतुलन बनाया जाए, क्योंकि यह इतना आसान नहीं है। पिछले कुछ महीने काफी मुश्किल थे, लेकिन वापसी करना अच्छा है और कहीं ना कहीं आपको क्रिकेट में संतुलन बनाना बहुत जरूरी है।
रोड्रिग्स ने कहा कि 2020 में ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ फाइनल खेलने के बाद उन्हें जो एक साल का गैप मिला उसमें उन्हें दोबारा से अपने ​बेसिक्स पर काम करने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक नहीं खेलना बहुत मुश्किल था और कई बार यह परेशानी भरा था क्योंकि हमें यात्रा करने, दुनिया भर में घूमने और क्रिकेट खेलने की आदत है। पहले दो महीने तो अच्छे थे क्योंकि हमें ब्रेक मिला और अपने परिवार के साथ समय बिताने का वक्त मिला, लेकिन इसके बाद परिवार भी परेशान हो गया और कहने लगा कि जेमिमाह कब जाएगी(हंसते हुए)? वैसे उन्होंने ऐसा कहा नहीं था।
उन्होंने आगे कहा कि हम खेलने के लिए और इंतजार नहीं कर सकते थे। और जब हमने कुछ मैच देखे जहां इंग्लैंड और ऑस्‍ट्रेलिया की टीम खेल रही थी, तब हमने सोचा कि हमें कब खेलने को मिलेगा? क्योंकि तब भारत में काफी कोविड-19 के केस थे। हमारे लिए अभ्यास करना काफी मुश्किल था। मैं अपनी बिल्डिंग के एक छोटे से हिस्से में अभ्यास करती थी, वो भी प्लास्टिक की गेंद से जिससे कार के शीशे नहीं टूटें। तो सही मायने में वह मुश्किल समय था और मुझे काफी कुछ सिखाया। साथ ही मुझे अपने बेसिक्स पर ध्यान देने में भी मदद मिली।
अगले महीने से यूएई में आईपीएल का दूसरा चरण शुरू होने वाला है। रोड्रिग्स को उम्मीद है कि महिला टी20 चैलेंज भी लौटेगा, जो आमतौर पर प्लेऑफ के बीच में खेला जाता है।
उन्होंने कहा कि यही समय है जब हमें महिला के आईपीएल (महिला टी20 चैलेंज) को कराना चाहिए। हम सभी इसको लेकर बहुत उत्सुक हैं और बीसीसीआई पूरा प्रयास कर रही हे कि इसकी शुरुआत हो सके। उम्मीद है इस बार यह जल्दी शुरू होगा क्योंकि इससे भारत में महिला क्रिकेट को बूस्ट मिलता है और आप नहीं जानते कि आपको शेफाली वर्मा या ऋचा घोष जैसी खिलाड़ी मिल जाएं, यह सभी खिलाड़ी वहीं से ही मिली हैं। जैसे शेफाली ने महिला टी20 चैलेंज खेलने के बाद ही भारत के लिए पदार्पण किया था। उम्मीद है जल्द ही महिलाओं का टी20 चैलेंज देखने को मिलेगा।
पिछले तीन महिलाओं के ग्लोबल टूर्नामेंट में दो बार भारतीय टीम उप विजेता रही थी, इसमें 2020 टी20 विश्व कप और 2017 वनडे विश्व कप शामिल हैं। रोड्रिग्स ने कहा कि यह 2017 वनडे विश्व कप था जिसके बाद भारत में महिला क्रिकेट पूरी तरह से बदल गया।
रोड्रिग्स ने कहा कि 2017 विश्व कप के बाद चीजें बहुत बदल गई हैं। मैंने निजी तौर पर महिला क्रिकेट में बहुत बदलाव देखा है। मैं ग्राउंड पर जाती थी और वहां पर 200 लड़के होते थे और मैं अकेली लड़की, लेकिन अब जब आप वहां जाते हो तो अब वहां पर लड़कियों के लिए अलग से नेट है। यह देखकर मुझे बहुत खुशी मिलती है कि युवा लड़कियां खेल में आ रही हैं और परिजन आते हैं और कहते हैं कि मुझे मेरी बेटी को इंडिया खिलाना है। चीजें बहुत बदल गई हैं।

विशाल दीक्षित ESPNcricinfo में असिस्टेंट एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी में सीनियर सब एडिटर निखिल शर्मा ने किया है।