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चार दिन, चार किरदार : जो बने भारत की जीत के सूत्रधार

दो दिन कड़ी टक्कर झेलने के बाद कैसे हुई भारत की वापसी

राजकोट टेस्ट में पहले दो दिनों तक कड़ी टक्कर झेलने के बाद भारत ने ना सिर्फ़ वापसी की बल्कि एक रिकॉर्ड टेस्ट जीत को भी अपने नाम किया। वह भी तब जब इस टेस्ट में भारतीय टीम की हार सुनिश्चित करने के लिए तमाम परिस्थितियां भी एक साथ आ गई थीं। केएल राहुल टीम में चयनित होने के बावजूद मैच से पहले फ़िट नहीं हो पाए थे। विराट कोहली पहले ही सीरीज़ से बाहर थे, और तो और भारत को पूरा एक दिन, एक कम गेंदबाज़ के साथ गेंदबाज़ी करनी थी
मुसीबतों का पहाड़ भारत पर पहले दिन ही टूट पड़ा था। राजकोट का पाटा विकेट बल्लेबाज़ों के लिए अनुकूल था और भारत ने टॉस भी जीत लिया। भारत ने पहले बल्लेबाज़ी करने का फ़ैसला तो कर लिया था लेकिन महज़ 33 के स्कोर पर भारत के तीन विकेट गिर चुके थे। भारतीय बल्लेबाज़ी में अब अनुभव के नाम पर सिर्फ़ रवींद्र जाडेजा और रविचंद्रन अश्विन का आना ही बाक़ी था।
हालांकि ऐसी मुश्किल परिस्थिति से निकालने के लिए ख़ुद कप्तान रोहित शर्मा ने अपने कंधों पर ज़िम्मेदारी ली। रोहित ने जाडेजा के साथ ना सिर्फ़ साझेदारी की बल्कि ख़ुद भी यह सुनिश्चित किया कि वह कोई लूज़ शॉट खेलकर अपना विकेट ना गंवाए। रोहित तीसरे सत्र में जब आउट हुए तब उनके नाम तीन छक्के और 14 चौकों के साथ 131 रन थे और भारत के स्कोरबोर्ड पर 227 रन जुड़ चुके थे। रोहित ने बतौर कप्तान इस मैच में आगे चलकर भी अहम भूमिका निभाई।
"...जैसे ही हमने टॉस जीता मैंने यही सोचा कि यही तो हमें चाहिए था..."
मैच समाप्त होने के बाद जाडेजा ने पोस्ट मैच प्रेज़ेंटेशन में यही कहा था। हालांकि टॉस जीतना भारत के लिए शुरुआत में शुभ संकेत लेकर नहीं आया था। लेकिन रोहित के साथ मिलकर भारत को संकट से उबारने की ज़िम्मेदारी अब जाडेजा के कंधों पर ही थी। बाएं और दाएं हाथ के कॉम्बिनेशन को सुनिश्चित करने और बल्लेबाज़ी क्रम में आगे डेब्यू खिलाड़ियों (सरफराज़ ख़ान और ध्रुव जुरेल) को देखते हुए जाडेजा को प्रमोट किया गया। रोहित के साथ एक बड़ी साझेदारी करने के बाद जाडेजा ने सरफराज़ के साथ भी 87 रन की साझेदारी की थी।
हालांकि जाडेजा का एक ग़लत कॉल के चलते आक्रामक बल्लेबाज़ी कर रहे सरफराज़ को पवेलियन जाना पड़ा। पूरे मैच में यही एक लम्हा था जिससे जाडेजा के प्रति मेहमान टीम एहसानमंद हो सकती थी। क्योंकि मैच के चारों दिन जाडेजा अपने खेल से इंग्लैंड की नाक में दम कर देने वाले थे। तीसरे दिन जाडेजा ने मैच में इंग्लैंड की पकड़ को ढीला करने में अहम योगदान निभाते हुए दो विकेट लिए जबकि चौथी पारी में उन्होंने इंग्लैंड की आधी टीम को पवेलियन लौटाया। तीसरे दिन इंग्लैंड अति आक्रामक शैली में बल्लेबाज़ी करने का इरादा लेकर उतरा था और जाडेजा ने उसके ही कप्तान को आक्रामक शॉट खेलने पर मजबूर करते हुए अपनी जाल में फांस लिया था। राजकोट टेस्ट पांचवें दिन के खेल तक अगर नहीं पहुंच पाया तो उसका श्रेय चौथी पारी में जाडेजा द्वारा लिए गए पंजे को जाता है।
"...अश्विन भैया नहीं थे तो हम सिर्फ़ चार ही गेंदबाज़ थे..." - सिराज
पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने ESPNcricinfo से मैच डे हिंदी में पहले दिन के खेल की समाप्ति के बाद ही यह कहा था कि राजकोट की विकेट 400-450 रन वाली है। भारत ने पहले दिन के खेल को 326 के स्कोर पर समाप्त किया था लेकिन अगले दिन भारत ना सिर्फ़ 445 पर ऑल आउट हो गया था बल्कि इंग्लैंड ने दिन का खेल समाप्त होने तक 207 रन बना लिए थे। राजकोट में इंग्लैंड को भले ही एक शर्मनाक हार झेलनी पड़ी हो लेकिन दूसरे दिन की समाप्ति के बाद इंग्लैंड ही खेल में आगे था।
तीसरे दिन भारत के ऊपर मुसीबतें चारों ओर से आई थीं। रविचंद्रन अश्विन को पारिवारिक मेडिकल इमरजेंसी के चलते टेस्ट मैच बीच में ही छोड़कर जाना पड़ गया था और इंग्लैंड के अभी भी आठ विकेट बचे हुए थे। सभी को उम्मीदें तो जसप्रीत बुमराह से थीं लेकिन इस बार भारत के लिए मैच का पासा मोहम्मद सिराज ने पलटा। सिराज ने इंग्लैंड के चार बल्लेबाज़ों को पवेलियन भेजा, जिसमें एक विकेट पहले मैच के हीरो रहे ऑली पोप का भी शामिल था जो उन्होंने दूसरे दिन लिया था। सिराज ने चौथे दिन भी ना सिर्फ़ बुमराह के साथ मिलकर इंग्लैंड की सलामी जोड़ी पर दबाव बनाया बल्कि इस दबाव से पैदा हुई गफ़लत की स्थिति को भी भारतीय टीम के पक्ष में भुनाया। डकेट को जुरेल ने एक अच्छा टेक करते हुए रन आउट किया और वो गेंद जुरेल तक सिराज ने ही पहुंचाई।
जायसवाल अपने टेस्ट करियर का सिर्फ़ सातवां मैच खेल रहे थे लेकिन दूसरी पारी में तुलनात्मक तौर पर उनके ख़राब प्रदर्शन की दबी ज़ुबान में आलोचना तो हो ही रही थी। इस दोहरे शतक से पहले जायसवाल ने भारत के लिए दूसरी पारी में खेली कुल पांच पारियों में बिना कोई अर्धशतक के 103 रन ही बनाए थे लेकिन राजकोट में जायसवाल ने इससे दोगुने से भी ज़्यादा रन बना डाले।
भारत के पास तीसरे दिन 126 की बढ़त थी लेकिन पहले टेस्ट में भारत इससे 64 रन की अधिक बढ़त लेने के बावजूद इंग्लैंड से हार गया था। रोहित ने आक्रमाक शुरुआत की लेकिन वह स्वीप शॉट खेलने के चक्कर में पवेलियन लौट गए। दूसरी पारी में जायसवाल के अब तक के ख़राब प्रदर्शन की झलक उनकी धीमी शुरुआत में भी दिखाई दे रही थी। पहली 62 गेंदों पर जायसवाल के बल्ले से सिर्फ़ 28 रन ही आए थे लेकिन जल्द ही जायसवाल ने अपना गियर बदला और इसके ठीक 60 गेंद बाद जायसवाल अपना शतक पूरा कर चुके थे।
जायसवाल जब 104 के स्कोर पर थे तब उनकी पीठ में खिंचाव आया और उन्हें पवेलियन लौटना पड़ा। हालांकि अगले दिन जायसवाल फिर वापस बल्लेबाज़ी के लिए लौटे और सरफ़राज़ के साथ मिलकर इंग्लैंड के सामने 556 का एक विशालकाय लक्ष्य खड़ा कर दिया। भारत की 434 रनों की जीत में डेब्यू कर रहे सरफ़राज़ ही भारत की ओर से इकलौते बल्लेबाज़ थे जिन्होंने दोनों पारियों में अर्धशतक लगाया था।