फ़ीचर्स

आख़िर क्यों ख़ास हैं संजू सैमसन

वह पहली ही गेंद से आक्रमण करते हैं जो उन्हे दूसरे खिलाड़ियों से अलग बनाता है

Sanju Samson arrives for IPL Qualifier 1, Gujarat Titans vs Rajasthan Royals, IPL 2022, Qualifier 1, Kolkata, May 24, 2022

संजू सैमसन ने क्वालीफ़ायर 1 में 26 गेंदों में 47 रनों की पारी खेली थी।  •  BCCI

आप संजू सैमसन हैं। भारत की टी20 टीम से बाहर किए जाने के बाद से आप अपनी पहली गेंद का सामना कर रहे हैं। आपको इसी कारण से टीम से बाहर किया गया है क्योंकि आपकी खेल की प्रति जो दृष्टिकोण है उससे आपकी निरंतरता में कमी आ रही है।
सैमसन क्या करते हैं और कैसे सोचते हैं?
मंगलवार को ईडन गार्डेंस में जब आप बल्लेबाज़ी करने आए तो आपको यश दयाल के गेंद का सामना करना था। पहली गेंद बिल्कुल विकेट के लाइन में थी और सैमसन ने उसे आराम से सीमा रेखा के बाहर की यात्रा पर भेज दिया। कई बार ऐसा होता है कि आप हिंदी व्याकरण में किसी चीज़ की सुंदरता का बोध कराने के लिए एक साथ क्रिया और क्रिया विशेषण का प्रयोग कर दें तो वह ठीक तरीक़े से काम नहीं करता है, लेकिन जब आप सैमसन शॉट का वर्णन कर रहे होते हैं तो ये दोनों चीज़ें बहुत ही सटीक तरह से उसका विश्लेषण करते हैं।
सैमसन के इस शॉट से साफ़ झलकता है कि सैमसन के दिमाग़ में उस वक़्त सिर्फ़ वह गेंद थी। वह सिर्फ़ उसी के बारे में सोच रहे थे। उनके पास भारतीय टीम में चयनित होने या नहीं होने को लेकर सोचने के लिए कोई समय नहीं था।
वह उस गेंद पर उसी तरीक़े की प्रतिक्रिया दे रहे थे जैसे कुछ भारतीय बल्लेबाज़ देते हैं, जब वे टी20 खेल में क्रीज़ पर नए होते हैं। हालांकि सैमसन इस मामले में थोड़ा बेहतर और अलग नज़र आते हैं क्योंकि शॉट लगाने के वक़्त उनके हाथ और आंखों का समन्वय जादूई है। इसके अलावा वह इस शैली से बल्लबाज़ी करने के लिए बिल्कुल तैयार रहते हैं।
इस महीने की शुरुआत में एक यूट्यूब शो: 'ब्रेकफास्ट विद चैंपियंस' के एक एपिसोड में, सैमसन ने टी0 प्रारूप के लिए अपने दृष्टिकोण को सबसे संक्षिप्त तरीक़े से समझाया था।
उन्होंने कहा था, 'मैं यहां ढेर सारे रन बनाने नहीं आया हूं। मैं यहां उतना रन बनाने आया हूं जो टीम के लिए काफ़ी प्रभावी साबित है।"
इस बात को लेकर स्वीकार्यता बढ़ रही है कि टी20 में बल्लेबाज़ी करने का यही सही तरीक़ा है। उदाहरण के लिए बुधवार के एलिमिनेटर में केएल राहुल की पारी पर चर्चा करते हुए, ईएसपीएनक्रिकइेंफ़ों के विशेषज्ञ विश्लेषक डैनियल वेटोरी ने उन्हें "थोड़ा जोखिम लेकर बल्लेबाज़ी करने की आवश्यकता है।"
जोखिम लेने को लेकर सैमसन का नज़रिया बिल्कुल साफ़ है। भारतीय टीम के कई खिलाड़ी आईपीएल के अन्य टीमों के कप्तान हैं लेकिन उनका रोल सैमसन के रोल से बिल्कुल अलग है। सैमसन को यह भी पता है कि उनकी टीम में उनका क्या रोल है। उनकी टीम में जॉस बटलर को पारी के अंत तक बल्लेबाज़ी करनी है और बाक़ी सभी बल्लेबाज़ों को क्रीज़ पर आकर तेज़ी से रन बटोरना है।
मंगलवार को गुजरात के ख़िलाफ़ सैमसन पहली पारी की पिच पर अपने किसी भी सहयोगी की तुलना में गेंद को बेहतर तरीक़े से टाइम कर रहे थे। इस पिच के बारे में बाद में बताया गया कि यहां गेंद थोड़ा फंस कर आ रही है। उस दिन वह जिस तरीक़े से बल्लेबाज़ी कर रहे थे और गेंद को टाइम कर रहे थे, अगर वह चाहते तो बड़े आराम से ख़ुद के लिए एक बढ़िया स्कोर बना सकते थे। हालांकि उन्होंने रिस्क लेकर तेज़ी से स्कोर को आगे बढ़ाया और बटलर को अंत तक खेलने की आज़ादी दी। उस दिन सैमसन की पारी भले ही टी20 क्रिकेट में परिभाषित की गई लंबी पारी नहीं थी। हालांकि उनकी पारी में वह सब कुछ था जिससे उनकी बल्लेबाज़ी को और उनको 'स्पेशल' बोला जा सके लेकिन उस पारी में यह भी दिख गया कि उन्हें क्यो भारतीय टीम के चयनकर्ता लगातार नज़रअंदाज कर रहे हैं।
एक बार भारत के हालिया टी20 टीम पर नज़र डालिए। उस टीम के शीर्ष क्रम में आपको ज़्यादा रिस्क लेने वाले खिलाड़ी नहीं मिलेंगे। ना ही वह खिलाड़ी मिलेंगे जिनका औसत कम है। आपको उसमें वह बल्लेबाज़ मिलेंगे जो आईपीएल में निश्चित तौर पर ज़्यादा रन बनाते हैं।
2020 के बाद से जिस भी भारतीय बल्लेबाज़ ने आईपीएल में तेज़ गेंदबाज़ों (कम से कम 200 गेंद) स्पिन गेंदबाज़ों (कम से कम 100 गेंद) का सामना किया है, उनमें से सिर्फ़ पृथ्वी शॉ और संजू सैमसन का स्ट्राइक रेट 140 से ज़्यादा का है। इसके अलावा अगर सिर्फ़ पावरप्ले की बात की जाए तो 200 गेंदों का सामना करने वाले दुनिया के किसी भी बल्लेबाज़ में सिर्फ़ पृथ्वी ही ऐसे हैं जिनका स्ट्राइक रेट 150 से ज़्यादा का है। इसके अलावा बीच के ओवरों में 150 से ज़्यादा की स्ट्राइक रेट सिर्फ़ सैमसन और मयंक अग्रवाल की है। हालांकि आप अगर इस सीज़न में पृथ्वी और सैमसन का स्ट्राइक रेट देखेंगे तो वह 30 से नीचे का है। मामला साफ़ है कि दोनों खिलाड़ी भारतीय टीम का हिस्सा नहीं हैं।
ऐसा हो सकता है कि जब सैमसन क्वालीफ़ायर 2 की तैयारी कर रहे हों तब उनके दिमाग़ में भारतीय टीम में चयन के बारे में कोई ख़याल आए या नहीं भी आ सकता है। वह अपने इंटरनेशनल करियर के बारे में कुछ भी सोच सकते हैं लेकिन एक बात तो तय है कि वह अपने खेल की शैली को नहीं बदलने वाले हैं।

कार्तिक कृष्णास्वामी ESPNcricinfo के सीनियर सब एडिटर हैंं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर राजन राज ने किया है।