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नुरुल हसन : ख़ुद के खेल की बजाय टीम को प्राथमिकता देना अधिक ज़रूरी

"अच्छा नहीं खेलने पर हमें आलोचनाओं के लिए भी तैयार रहना होगा"

Nurul Hasan in action, Bangladesh vs Pakistan, 1st T20I, Dhaka, November 19, 2021

नुरुल अब फिर से न्यूज़ीलैंड में बांग्लादेश की अगुवाई करने जा रहे हैं  •  AFP/Getty Images

नुरुल हसन में कुछ अलग है। चाहे वह डाउन द ग्राउंड उनके फ़्लैट-बल्ले वाले शॉट हों, या जुलाई में अचानक कप्तान के रूप में नामित होने के बाद उन्होंने ख़ुद को और बांग्लादेश की टी20 टीम को संभाला हो। वह शाकिब की जगह कार्यवाहक कप्तान बनाए गए थे।
नुरुल अब फिर से न्यूज़ीलैंड में बांग्लादेश की अगुवाई करने जा रहे हैं। एक वक़्त था जब वे सीनियर टीम में अपनी स्थाई जगह और घरेलू स्तर पर एक दिग्गज खिलाड़ी होने के बीच अपनी बारी का लंबा इंतज़ार कर रहे थे।
लगातार उतार-चढ़ाव नुरुल को विचलित कर सकते थे लेकिन उन्होंने हथियार डालने के बजाय सीनियर टीम में जगह बनाने के लिए अपने खेल को नया रूप दिया। पहले तीन बेहतरीन महीनों के साथ इस साल की शुरुआत करने के बाद बांग्लादेश के प्रदर्शन में लगातार गिरावट दर्ज की गई है और सामने एक मुश्किल टी20 सीज़न है। लिहाज़ा बांग्लादेश नुरुल जैसी शैली वाले बल्लेबाज़ों के लिए बेताब है।
यह एक ऐसा आत्मविश्वास है जिसे बांग्लादेश के कई खिलाड़ी आत्मसात कर सकते हैं। नुरुल का विश्वास है कि यह ना सिर्फ़ मौजूदा खिलाड़ियों बल्कि आगे आने वाले अन्य खिलाड़ियों के लिए भी मददगार साबित हो सकता है। वह यह बात भी स्वीकार करते हैं कि जीतने में दृढ़ विश्वास रखने की वजह से हारने पर आलोचनाओं की क़ीमत चुकानी पड़ सकती है लेकिन अगर यह आगे आने वाले खिलाड़ियों के आत्मविश्वास में वृद्धि कर सकता है तो वह इसके लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
नुरुल ने ईएसपीएनक्रिकइंफ़ो से कहा, "ऐसा हमारी संस्कृति में है, हम असफलता के भय से अपने लक्ष्य और इच्छाओं की बात नहीं करते। मैं यह कहूं कि हम विश्व कप जीतना चाहते हैं तो ज़ाहिर तौर पर हम सिर्फ़ ऐसा कहने भर से जीत नहीं जाएंगे लेकिन लगातार ऐसा कहने का एक बड़ा फ़ायदा आने वाली पीढ़ी को यह होगा कि उनके भीतर विश्व कप जीतने को लेकर मज़बूत आत्मविश्वास पैदा हो जाएगा। मैं संभवतः तब तक क्रिकेट ना खेलूं लेकिन यह आत्मविश्वास आगे जाएगा।"
उन्होंने अपनी बात पर ज़ोर देते हुए कहा, "हमें इस तरह की परंपरा बनानी होगी। जब हम ख़राब भी खेलें तो हमें आलोचनाओं के लिए तैयार रहना होगा लेकिन हमें इसके बारे में सोचना होगा। हमें ख़ुद पर विश्वास करना होगा। यदि हम में से तीन या चार खिलाड़ी लय में आ गए तो यह निश्चित तौर पर टीम के लिए मददगार सिद्ध होगा। मैं अकेला ऐसा सोचना नहीं चाहता। मुझे लगता है कि अगर हम इस पर चर्चा करते हैं तो यह भविष्य में टीम के लिए ही कारगर साबित होगा।"
नुरुल काफ़ी आश्चर्यजनक तौर पर बांग्लादेश टीम के कप्तान बने थे। ज़िम्बाब्वे दौर से पहले बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) ने महमदुल्लाह को कप्तानी से हटा दिया था जिसके बाद वह किसी युवा खिलाड़ी को कमान सौंपना चाहती थी। लिटन दास एक विकल्प थे लेकिन घरेलू क्रिकेट में नुरुल की नेतृत्व क्षमता और उनकी टीम मैन वाली बल्लेबाज़ी को देखते हुए बीसीबी ने उनका रुख़ किया।
नुरुल ने कप्तानी मिलने के बाद हुए अनुभव के बारे में बात करते हुए कहा कि उनके लिए यह अचंभित करने योग्य घटना नहीं थी बल्कि उनका ध्यान ज़िम्मेदारी को पूरा करने पर अधिक केंद्रित था। नुरुल ने कहा, "मुझे चुनौतियां पसंद हैं। मैंने इसके बारे में ज़्यादा नहीं सोचा। मैं इस चुनौती को भुनाने पर ध्यान दे रहा था। मैं हमेशा ही हर चुनौती का लुत्फ़ हटाने के बारे में सोचता हूं।"
आपको बांग्लादेश के अन्य स्थापित खिलाड़ियों द्वारा ऐसे शब्द सुनने को नहीं मिलेंगे लेकिन सिर्फ़ मीडिया और प्रशंसकों को संतुष्ट करने के बजाय नुरुल एक अलग तरह का रवैया रखते हैं। अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के बलबूते सीनियर टीम में वापसी करने से पहले उनके लिए वक़्त अंधकारमय थे। पिछले वर्ष ढाका प्रीमियर लीग में उनकी बड़े शॉट खेलने की क्षमता ने उन्हें सीनियर टीम में जगह दिलाई लेकिन टी20 विश्व कप में वो वैसा लय नहीं दिखा सके। चटगांव टेस्ट में पाकिस्तान एक ख़िलाफ़ एक ख़राब शॉट खेलने के बाद उनके करियर पर सवालिया निशान खड़ा हो गया लेकिन ढाका प्रीमियर लीग में उन्होंने एक बार फिर उन्होंने लाजवाब प्रदर्शन किया और उनके प्रदर्शन की बदौलत शेख़ जमाल धानमोंडी क्लब ने पहला ख़िताब भी अपने नाम किया। नुरुल ने ना सिर्फ़ इस बार वापसी की बल्कि ज़िम्बाब्वे के विरुद्ध उन्हें टी20 टीम का कप्तान भी बनाया गया।
नुरुल ने कहा, "मेरे पास भी भावनाएं हैं लेकिन पिछले कुछ वर्षों से मैं अब कम ही उत्साहित होता हूं। मैं शायद पहले अलग था लेकिन अब मैं मैच दर मैच के हिसाब से सोचता हूं।
बांग्लादेश के लिए कम से कम तीन टी20 अंतर्राष्ट्रीय खेलने वाले बल्लेबाज़ों में आख़िरी पांच ओवर के दौरान नुरुल का 160.97 का स्ट्राइक रेट है, जो कि अन्य के मुक़ाबले सबसे अधिक है। हालांकि पिछले वर्ष से अब तक उन्होंने पांच अलग अलग पायदानों पर भी बल्लेबाज़ी की है। यह एक ऐसा तथ्य है जो कि उनके आंकड़ों को देखते समय नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। ख़ुद नुरुल का मानना है कि टी20 में बल्लेबाज़ी के लिए कोई एक स्थाई स्थान हो ही नहीं सकता, टीम की ज़रूरत के हिसाब से स्थान परिवर्तित होने पर भी कोई गुरेज़ नहीं होना चाहिए। नुरुल ने कहा कि सफ़ेद गेंद क्रिकेट में रन बनाने से खेल पर अपना प्रभाव छोड़ना अधिक ज़रूरी है। "आप रन बनाएं और टीम मुक़ाबला हार जाए तो इसका कोई अर्थ नहीं है।"
"एक ऐसा समय था जब मैं अपनी मज़बूती पर काम किया करता था लेकिन मैच के दौरान ऐसा ज़रूरी नहीं है कि गेंदबाज़ मुझे वैसे ही शॉट्स खेलने देगा"
नुरुल हसन
यदि मैदान पर छक्के जड़ने की बात की जाए तो बांग्लादेश की टीम ने इस वर्ष सूर्यकुमार यादव के व्यक्तिगत नंबरों की तुलना में कम छक्के लगाए हैं। पिछले वर्ष ढाका में धीमी और नीची रहने वाली पिचों पर न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध खेलने के बाद से ही बांग्लादेश की टीम ने संघर्ष किया है।
हालांकि नुरुल मानते हैं कि बड़ी हिट्स के अलावा चौके और स्ट्राइक रोटेट करना भी ज़रूरी है। उन्होंने कहा, "सिर्फ़ बड़े शॉट्स लगाना आपको जीत नहीं दिला सकता। अगर आप मैच की परिस्थिति के अनुरूप बल्लेबाज़ी करते हैं और गैप निकालते हैं तो आपके लिए काम आसान हो जाता है। छक्के जड़ना तब आसान हो जाता है जब आपके सामने सही गेंद आए। एक ऐसा समय था जब मैं अपनी मज़बूती पर काम किया करता था लेकिन मैच के दौरान ऐसा ज़रूरी नहीं है कि गेंदबाज़ मुझे वैसे ही शॉट्स खेलने देगा। मुझे मैच की परिस्थिति और ज़रूरत को समझना होगा। एक अच्छा शॉट खेलने के मुक़ाबले रन बनाना और मैच की परिस्थिति को समझना अधिक ज़रूरी है।"
शाकिब के वापस आने के बाद नुरुल एक विकेटकीपर बल्लेबाज़ की भूमिका में होंगे। जिनके ऊपर अंतिम के पांच ओवरों में बल्लेबाज़ी करते हुए बांग्लादेश को एक बड़े स्कोर तक पहुंचाने की ज़िम्मेदारी होगी। वह इस बात को बख़ूबी जानते हैं और वह इस बार कुछ भी अवसर के भरोसे छोड़कर पछताना भी नहीं चाहते।

मोहम्मद इसाम ESPNcricinfo के बांग्लादेशी संवाददाता हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के फ़्रीलांस जर्नलिस्ट नवनीत झा ने किया है।