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हमें खुलकर खेलने की आदत डालनी होगी : रोहित शर्मा

भारतीय कप्तान ने ख़राब फ़ॉर्म से जूझ रहे विराट कोहली का समर्थन किया

इंग्लैंड के विरुद्ध टी20 अंतर्राष्ट्रीय सीरीज़ में विराट कोहली ने कुल नौ गेंदों का सामना करते हुए पांच बार बाउंड्री लगाने का प्रयास किया। दो बार गेंद - वाइड मिडऑन के ऊपर से चौका और गेंदबाज़ के सिर के ऊपर से छक्का - सीमा रेखा के पार गई। हालांकि बची हुई तीन गेंदों पर वह दो बार आउट हुए। कोहली के टी20 करियर को मद्देनज़र रखते हुए यह सच है कि ऐसा आक्रामक अंदाज़ उनके लिए सही नहीं है।
हालांकि कोहली भारत के शीर्ष क्रम में बल्लेबाज़ी करते हैं जहां सभी खिलाड़ियों को जोखिम उठाकर तेज़ गति से रन बनाने का कार्य दिया गया है। टीम चाहती है कि कोहली समेत प्रत्येक खिलाड़ी इस विचारधारा को अपनाए।
भारतीय कप्तान रोहित शर्मा से पूछा गया कि क्या कोहली का यह नया आक्रामक अंदाज़ टीम प्रबंधन के कहने पर आया है या एक व्यक्तिगत रणनीति के तहत। जवाब में रोहित ने कहा, "यह दोनों चीज़ों का मिश्रण है। एक टीम के तौर पर हम एक निश्चित अंदाज़ से खेलना चाहते हैं और हर एक खिलाड़ी को इस विचारधारा को अपनाना होगा। इस दल में मौजूद सभी बल्लेबाज़ जोखिम लेने और बल्ले के साथ अतिरिक्त योगदान देने को तैयार हैं।"
रोहित ने आगे कहा, "यह महत्वपूर्ण है कि आप स्वयं चिंतन करें और पता लगाए कि कौन सी चीज़ आपके लिए काम कर रही है और कौन सी नहीं। प्रयास किए बिना यह पता नहीं चलेगा। हम कुछ समय से इस विचारधारा को अपना रहे हैं और किसी दिन यह काम करता है और किसी दिन नहीं। हालांकि हम मैदान पर जाकर जोखिम लेने से कतराएंगे नहीं। ऐसा करने से ही बतौर टीम हम सीखेंगे और आगे बढ़ेंगे। हर कोई इस बात से सहमत हैं और टीम इस दिशा में आगे बढ़ना चाहती है।"
लंबे समय से भारतीय टीम ने टी20 मैचों को वनडे मैचों की तरह खेला है। पहले बल्लेबाज़ी करते हुए टीम जोखिम केवल उन्हीं मैचों में लेती थी जहां सीरीज़ दांव पर हो। हालांकि इस नए टीम प्रबंधन ने इस सोच को बदलने की शुरुआत की है। वह चाहते हैं कि टीम वनडे को टी20 की तरह खेले। इस सोच ने कई लोगों को प्रभावित किया हैं। इंग्लैंड की वनडे और टी20 टीम की कायापलट में बड़ी भूमिका निभाने वाले ओएन मॉर्गन भारत के आक्रामक अंदाज़ से काफ़ी प्रसन्न हुए। नासिर हुसैन का मानना है कि गहराई को देखते हुए भारत को प्रत्येक टूर्नामेंट के फ़ाइनल में होना चाहिए।
यह पूछे जाने पर कि क्या टी20 विश्व कप के साल में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ होने वाली वनडे सीरीज़ को कम महत्व दिया जाएगा, रोहित ने साफ़ तौर पर इस बात का खंडन किया। उन्होंने कहा, "हमें सीमित ओवरों की क्रिकेट को ठीक से समझना होगा। मेरा मतलब है कि वनडे क्रिकेट टी20 का एक लंबा रूप है। आप वनडे मैचों में थोड़े कम ही सही लेकिन जोखिम ज़रूर लेंगे। ऐसा नहीं है कि जोखिम बिल्कुल भी नहीं लेना होगा।"
भारतीय कप्तान ने कहा, "हमें खुलकर खेलने की आदत डालनी होगी। जब आप स्वतंत्र रूप से खेलने की कोशिश करते हैं, तो यह व्यक्तिगत प्रदर्शन और टीम के परिणाम दोनों में विफलताओं के भय के साथ आता है, लेकिन आपको इससे बहुत कुछ सीखने को मिलता है। हम बड़ी तस्वीर देख रहे हैं, छोटी तस्वीर नहीं। ये सभी मैच हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि कहीं न कहीं हमें कुछ बदलने की ज़रूरत है, और हम देख सकते हैं कि चीज़ें थोड़ी बदलनी शुरू हो गई हैं।"
"इस सीरीज़ में हमारे प्रत्येक खिलाड़ी का खेलने का अंदाज़ सबसे सकारात्मक बात रही। वह किस तरह क्रीज़ पर आए, कैसे उन्होंने हर पल का आनंद लिया, दोनों हाथों से मौक़ों को स्वीकार किया और अतिरिक्त जोखिम उठाया। हम उनकी मानसिकता को बदलना चाहते हैं और वह इसके लिए तैयार हैं। जब भी मैं खिलाड़ियों से बात करता हूं, मुझे उनसे सकारात्मक जबाव मिलते हैं।"
अपनी विकेट को अत्याधिक महत्व देने और खुलकर नहीं खेलने का एक बड़ा कारण एकादश में प्रत्येक स्थान के लिए चल रही तीव्र प्रतिस्पर्धा है। यदि टीम चाहती है कि खिलाड़ी खुलकर खेले तो उन्हें स्पष्ट संदेश दिया जाना चाहिए। इसलिए हम उम्मीद करते हैं कि कोहली को टीम की ज़रूरत के अनुसार खेलने के लिए दंडित किया जाएगा। इसलिए बाहर से बन रहा दबाव (कपिल देव की टिप्पणी, वीरेंद्र सहवाग और वेंकटेश प्रसाद के ट्वीट) कोहली के प्रति टीम के विचार को बदलेगा नहीं।
कोहली के ख़राब फ़ॉर्म के कारण उन्हें टीम से बाहर करने की बातों पर रोहित ने कहा, "मैं नहीं जानता ये एक्सपर्ट हैं कौन। मुझे तो यह भी नहीं पता कि उन्हें एक्सपर्ट क्यों कहा जाता है। वह बाहर से सब कुछ देख रहे हैं, उन्हें नहीं पता अंदर क्या चल रहा है। हम एक टीम गठित कर रहे हैं जिसमें बहुत सोच-विचार की आवश्यकता होती है। खिलाड़ियों का समर्थन किया जाता है और उन्हें मौक़े दिए जाते हैं। बाहर वाले लोगों को यह सब नहीं पता और बाहर चल रही बाते मायने नहीं रखती।"
रोहित ने कहा, "फ़ॉर्म ऊपर नीचे होते रहता है लेकिन खिलाड़ी की गुणवत्ता कभी कम नहीं होती। हमें यह याद रखना चाहिए। हम इसी गुणवत्ता का समर्थन करते हैं। यह मेरे और कई खिलाड़ियों के साथ पहले हो चुका है। जब किसी खिलाड़ी ने कई वर्षों तक अच्छा प्रदर्शन किया है, आप एक या दो सीरीज़ अथवा एक या दो वर्षों में उसे दरकिनार नहीं कर सकते। लोगों को यह बात समझने में समय लगता है लेकिन टीम चलाने वाले लोगों को गुणवत्ता का महत्व पता है।"
हालांकि कोहली के लिए फिर से भारतीय टी20 अंतर्राष्ट्रीय टीम का प्रमुख सदस्य बनना इतना आसान नहीं होगा क्योंकि अन्य बल्लेबाज़ों ने अपनी मज़बूत दावेदारी पेश की हैं। आयरलैंड में शतक बनाने के बाद दीपक हुड्डा ने सीरीज़ के पहले मैच में 33 रन बनाए। सूर्यकुमार यादव ने अंतिम टी20 में शतक जड़कर सुर्ख़ियां बटोरी। हार्दिक पंड्या ने अपनी गेंदबाज़ी फ़िटनेस साबित करने के बाद अपना स्थान पक्का कर लिया है। जब केएल राहुल वापस आएंगे, किसी ना किसी को बाहर जाना होगा। और इन युवा खिलाड़ियों को इसी प्रकार का समर्थन मिलेगा।
रोहित ने कहा, "कप्तान, कोच, चयनकर्ता - सभी की अपनी भूमिकाएं हैं। अगर हम एक चीज़ करेंगे और चयनकर्ता उससे अलग तो नहीं चलेगा। यह महत्वपूर्ण है कि टीम को गठित करने वाले सभी लोग सर्वसहमति के साथ आगे बढ़े। इन खिलाड़ियों को खुलकर खेलने की आज़ादी देना महत्वपूर्ण है। यह बहुत प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं लेकिन इनकी प्रतिभा उस आज़ादी के साथ ही निखरकर सामने आएगी।"
उन्होंने आगे कहा, "हमने देखा है कि कुछ लड़के दबाव में खेल रहे हैं। हम नहीं चाहते कि वे दबाव में खेलें। अगर वे उस स्वतंत्रता के साथ खेलते हैं, तो वे अपनी अपेक्षाओं से बेहतर प्रदर्शन करेंगे। आपने आज एक उदाहरण देखा [सूर्यकुमार], आयरलैंड में एक और [हुड्डा] देखा। मैं नाम नहीं लूंगा। इस तरह लड़के निखरते हैं। उन्हें यह बताना महत्वपूर्ण है कि एक टीम प्रबंधन के रूप में हम उनसे क्या चाहते हैं। वह संदेश सुसंगत होना चाहिए। अगर आप आज कुछ कहते हैं और कल कुछ और, तो यह काम नहीं करेगा।"

सिद्धार्थ मोंगा ESPNcricinfo में असिस्टेंट एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर अफ़्ज़ल जिवानी ने किया है।