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आख़िर भारतीय मध्यक्रम कब अपने ख़राब फ़ॉर्म को पीछे छोड़ेगा?

पुजारा, कोहली और रहाणे का ख़राब फ़ॉर्म अब भारत को चुभने लगा है

साल 2020 से भारत के नंबर 3 से नंबर 5 बल्लेबाज़ों ने 13 टेस्ट मैचों में सिर्फ 27.44 की औसत से रन बनाए हैं। इसमें सिर्फ एक शतक शामिल है, जो कि अजिंक्य रहाणे ने ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर मेलबर्न में बनाया था। ख़राब औसत के इस मामले में भारतीय टीम वेस्टइंडीज़ के बाद सिर्फ दूसरे नंबर पर है। वेस्टइंडीज़ के नंबर 3 से नंबर 5 बल्लेबाज़ों का औसत 27.06 रहा है।
साल 2021 में पुजारा ने 28 की औसत से 389 रन बनाए हैं, वहीं कोहली के लिए ये आंकड़े 27 की औसत से 271 रन हैं। रहाणे ने इस दौरान 20 से कम की औसत से 261 रन बनाया है। 2020 से इन तीनों में से किन्हीं दो की सिर्फ एक अर्धशतकीय साझेदारी हुई है, जब कोहली और रहाणे ने विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) फ़ाइनल में 61 रन की साझेदारी की थी।
नॉटिंघम के पहले टेस्ट में पुजारा और कोहली एंडरसन की लगातार गेंदों पर आउट हुए, जबकि रहाणे उस पारी में रनआउट हुए। दूसरे टेस्ट की पहली पारी में कोहली ने एंडरसन के सामने फिर से वही गलती की, जबकि पुजारा और रहाणे ऐसी गेंदों पर अपना विकेट दे बैठे, जिन्हें आसानी से कीपर के लिए छोड़ा जा सकता था। मध्य क्रम के इस कोलैप्स ने दोनों टेस्ट में रोहित-राहुल की अच्छी शुरुआत को बर्बाद कर दिया।
आधुनिक क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ों में शामिल इन तीनों खिलाड़ियों का प्रदर्शन अब भारत के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि ये तीनों लगातार एक ही ग़लती दोहरा रहे हैं।
डब्ल्यूटीसी फ़ाइनल के दूसरी पारी के दौरान कोहली, जेमीसन की चौथे स्टंप की बाहर जाती गेंद के पीछे गए और स्लिप में कैच दे बैठे। ट्रेंट ब्रिज में भी यही हुआ, जब एंडरसन की वैसी ही गेंद पर गोल्डन डक पर आउट हुए।
इस टेस्ट से पहले कोहली ने अपनी इस कमजोरी पर कोच रवि शास्त्री की निगरानी में काम किया था। दीप दासगुप्ता कहते हैं कि पहले बाहर निकलती गेंदों पर कोहली का फ्रंटफुट मिड ऑफ़ की तरफ होता था, जिससे उन्हें ऑफ़ साइड के क्षेत्र में ड्राइव करने में मदद मिलती थी। लेकिन अब उनका आगे का पैर अधिक सीधा और गेंदबाज़ की तरफ हो रहा है, जिसकी वजह से उनका संतुलन प्रभावित हो रहा है और वह ड्राइव करने या स्ट्राइड लेने में असहज हो रहे हैं।
जहां कोहली एक तकनीकी खामी की वजह से लगातार असफल हो रहे हैं, वहीं पुजारा और रहाणे के लिए यह अब दिमागी खेल बन चुका है। डब्ल्यूटीसी फ़ाइनल के बाद शायद पुजारा से टीम प्रबंधन द्वारा यह भी कहा गया है कि वह रन के लिए जाएं। पुजारा ने ट्रेंट ब्रिज में इसकी एक झलक भी दिखाई थी, जब उन्होंने चौथे दिन की आख़िरी गेंद पर स्क्वेयर ड्राइव लगाकर चौका जड़ा था।
एंडरसन ने इस सीरीज़ में बाहर जाती गेंदों से पुजारा को दो बार आउट किया है। शुक्रवार सुबह पुजारा ने बल्लेबाज़ी कोच विक्रम राठौड़ के साथ नेट्स पर अभ्यास किया, जहां पर राठौड़ से उन्होंने गहन चर्चा भी की।
भारत के पूर्व बल्लेबाज़ और ESPNcricinfo के क्रिकेट एक्सपर्ट वीवीएस लक्ष्मण का मानना है कि पुजारा को पिछले साल पीठ में चोट लगी थी, जिस कारण वह अपना संतुलन पाने में नाकाम हो रहे हैं। लक्ष्मण ने बताया कि उन्हें खुद 2011-12 में पीठ की चोट के बाद यह समस्या हुई थी, तब उन्होंने अपनी फ़ीट मूवमेंट पर खासा ध्यान दिया था। पुजारा को भी ऐसा करना होगा।
दिसंबर, 2020 में मेलबर्न में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ शतक लगाने के बाद रहाणे ने 14 पारियों में सिर्फ एक अर्धशतक की मदद से 269 रन बनाए हैं। शुक्रवार को भी एंडरसन की एंगल बनाकर बाहर निकलती गेंद पर रहाणे क्रीज़ में ही डटे रहे, जो उनकी तकनीकी कुशलता पर सवाल उठाता है।
लक्ष्मण का मानना है कि रन बनाने के चक्कर में रहाणे वैसी भी गेंदों को खेल रहे हैं, जिन्हें आसानी से छोड़ा जा सकता है। लक्ष्मण के अनुसार, "रहाणे ऑस्ट्रेलिया दौरे से ही रनों के लिए बेचैन दिख रहे हैं। वह अपने फ़ुटवर्क के बारे में भी संशय में हैं। उनका आत्मविश्वास भी थोड़ा सा हिला हुआ है, यही कारण है कि वह बाहर जाती गेंदों के पीछे भी भाग रहे हैं। रहाणे कुछ इसी तरह ऑस्ट्रेलिया में भी आउट हो रहे थे, फिर चाहे आप एडिलेड देख लो या ब्रिस्बेन।"
इन तीनों बल्लेबाज़ों के ख़राब फ़ॉर्म ने अब तक इस सीरीज़ में भारत को कुछ बड़ा नुकसान नहीं पहुंचाया है, लेकिन यह भी एक तथ्य है कि इंग्लैंड दोनों मैचों में वापसी करने में सफल रहा है। शुक्रवार को 278/3 के स्कोर के बाद भारत के आख़िरी सात विकेट सिर्फ 86 रन के ही अंतराल में गिर गए। अगर भारत चार तेज़ गेंदबाज़ों के अपने टीम संतुलन पर कायम रहता है, तो सीरीज़ में बने रहने के लिए भारतीय मध्यक्रम को जल्द से जल्द वापस फ़ॉर्म में लौटना होगा।

नागराज गोलापुड़ी ESPNcricinfo में ग्लोबल न्यूज़ एडिटर हैं, अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के दया सागर ने किया है