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आवश्यकता ही साहा की आक्रामकता की जननी है

साहा को पता है कि शुरुआत से ही जोखिम के साथ खेलना उनके लिए प्रासंगिक बने रहने के लिए ज़रूरी है

Wriddhiman Saha wasn't always orthodox during his half-century, Chennai Super Kings vs Gujarat Titans, IPL 2022, Wankhede Stadium, Mumbai, May 15, 2022

गेंद को सीमारेखा के पार भेजते साहा  •  PTI

आईपीएल में पहले छह ओवरों में कम से कम 500 गेंद खेलने वाले बल्लेबाज़ों में सिर्फ़ दस बल्लेबाज़ ही ऐसे हैं जिन्होंने प्रति ओवर आठ रन से अधिक (स्ट्राइक रेट के लिहाज़ से 133.33) की दर से रन बनाए हैं। इस सूची में नौवें नंबर पर ऋद्धिमान साहा हैं जो कि क्रिस गेल और एडम गिलक्रिस्ट के बीच में मौजूद हैं।
भारतीय बल्लेबाज़ों में सिर्फ़ वीरेंद्र सहवाग, राहुल त्रिपाठी, सूर्यकुमार यादव और पृथ्वी शॉ ही पावरप्ले में साहा के मुक़ाबले अधिक तेज़ गति से रन बना पाए हैं। 2020 में साहा द्वारा किया गया एक प्रदर्शन पावरप्ले में उनकी आक्रामकता की गवाही देता है। साहा को सीज़न के अंतिम चरण में सनराइज़र्स हैदराबाद के एकादश में जगह मिली और उन्होंने अपनी दूसरी ही पारी में 45 गेंदों पर 87 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेल डाली। हालांकि उनके लिए एकादश में जगह बनाना इतना आसान नहीं था, हैदराबाद केन विलियमसन को एकादश में वापस लाना चाहती थी, लिहाज़ा उन्हें साहा को टीम में शामिल करने के लिए जॉनी बेयरस्टो को बाहर का रास्ता दिखाना पड़ा।
टीमों में इस तरह से जगह पाना साहा के लिए अब आम बात है। आप तब तक साहा को नोटिस नहीं करते जब तक आप ऐसा करना ना चाहें। जिस वजह से उन्हें बाद में भूलना भी आसान हो जाता है। 2022 की नीलामी में साहा पर किसी भी टीम ने दांव नहीं लगाया, लेकिन दूसरे दिन विकेटकीपर की तत्परता से तलाश कर रही गुजरात टाइटंस ने साहा को अपनी टीम में शामिल कर लिया, इसके बाद उन्होंने मैथ्यू वेड को भी ख़रीद लिया। ज़ाहिर तौर पर वेड बतौर कीपर गुजरात के पहले विकल्प बनने वाले थे।
हर आईपीएल की ही तरह इस बार भी साहा को अपने मौक़े के लिए इंतज़ार करना पड़ा। जैसे ही उन्हें मौक़ा मिला, उन्होंने तत्काल ही मौक़े को भुना भी लिया। अप्रैल 17 को इस आईपीएल में अपना पहला मैच खेलने के बाद सिर्फ़ जॉस बटलर और ऋतुराज गायकवाड़ ने ही साहा के 312 रन से अधिक बनाए हैं। इस सीज़न की शुरुआत में गुजरात का शीर्ष क्रम उनके लिए चिंता का सबसे बड़ा सबब था जिसे साहा ने बहुत हद तक कम किया है।
लेकिन गुजरात ने सीज़न की शुरुआत में ही साहा का उपयोग क्यों नहीं किया? अमूमन साहा को लेकिन यह कारण गिनाए जाते हैं कि उन्हें टीमें कीपर के पहले विकल्प के बजाय बैकअप के तौर पर इस्तेमाल करती हैं। साहा का पावरप्ले में स्ट्राइक रेट भले ही गेल से कुछ ही कम हो लेकिन गेल के पास फ़ील्ड पाबंदियों के हटने के बाद अपना जलवा बिखेरने की महारत थी। दूसरी तरफ़ फ़ील्ड पाबंदियों के हटने के बाद साहा के लिए बाउंड्री तलाशना काफ़ी मुश्किल हो जाता है क्योंकि वह अधिकांश समय तीस गज के घेरे में मौजूद फ़ील्डरों के ऊपर से चिप शॉट खेलने में अधिक विश्वास रखते हैं।
आईपीएल करियर में मध्य ओवरों के दौरान साहा का स्ट्राइक रेट 113.93 का है, जो कि पावरप्ले में उनके 134.67 के स्ट्राइक रेट के मुक़ाबले काफ़ी कम है। इस सीज़न भी उनका प्रदर्शन कुछ वैसा ही रहा है। साहा ने इस सीज़न में पावरप्ले के दौरान 138.56 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए हैं जबकि मध्य ओवरों के दौरान उनका स्ट्राइक रेट 101.3 का रहा है। साहा कुछ इसी अंदाज़ में बल्लेबाज़ी करते हैं वह बाद में बाउंड्री निकाल पाने के विश्वास के साथ बल्लेबाज़ी नहीं कर सकते। संक्षेप में, वह कम विस्फोटक सुनील नारायण की तरह बल्लेबाज़ी करते हैं।
ईएसपीएनक्रिकइंफो के इंटेंट आंकड़ों के अनुसार, साहा ने इस सीज़न में पावरप्ले में 153 गेंदों में से 60 गेंदों पर आक्रामक प्रतिक्रिया की पेशकश की है। पावरप्ले में कम से कम 100 रन बनाने वाले भारतीय शीर्ष क्रम के बल्लेबाज़ों में से केवल यशस्वी जायसवाल (52%) और त्रिपाठी (42%) ने इस चरण में अधिक बार आक्रमण किया है। शॉ, साहा से कुछ दशमलव अंक पीछे हैं। उस परिप्रेक्ष्य में, केएल राहुल, विराट कोहली और शुभमन गिल, गुजरात में साहा के ओपनिंग पार्टनर, पावरप्ले के दौरान 24% से 27% के बीच आक्रमण-शॉट-प्रतिशत में कामयाब रहे हैं।
साहा ने राजस्थान रॉयल्स के ख़िलाफ़ गुजरात के क्वालिफ़ायर की पूर्व संध्या पर कहा, "पावरप्ले में बल्लेबाजी करना मेरे खेलने के तरीके के अनुकूल है।कई सालों से मैंने पहले छह ओवरों में बल्लेबाजी करना पसंद किया है, और अंदर जाकर कुछ जोखिम भरे शॉट खेले हैं। यह टीम की मदद करता है, और यह मुझे योगदान करने की अनुमति देता है। अगर मैं पहले छह ओवरों में योगदान दे सकता हूं और अच्छी साझेदारी करता हूं, तो बाद में आने वाले बल्लेबाज़ों के लिए यह थोड़ा आसान हो जाता है। वह शायद दो-तीन अतिरिक्त गेंदें अपनी नज़रें जमाने के लिए ले सकते हैं, और शायद हम एक बड़ा स्कोर बना सकते हैं।"
इस उच्च जोखिम वाले दृष्टिकोण को साहा के पूरे दिल से गले लगाने में शायद निस्वार्थता है, लेकिन इससे भी अधिक यह स्पष्ट व्यावहारिकता है। वह अपने खेल को अंदर से समझते हैं और मानते हैं कि यह एकमात्र तरीका है जिससे कोई अपनी सीमाओं के साथ तेज़ी से विकसित हो रहे प्रारूप में प्रासंगिक बना रह सकता है।

कार्तिक कृष्णास्वामी ESPNcricinfo में सीनियर सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी में एडिटोरियल फ़्रीलांसर नवनीत झा ने किया है।