भारत के ख़िलाफ़ मैच का बहिष्कार करने पर क्या ICC, PCB को कोई सज़ा भी दे सकता है?
क्या सिर्फ़ इस मैच के अंक को विपक्षी टीम को दिया जाएगा या फिर इससे अधिक भी कुछ हो सकता है?
ESPNcricinfo स्टाफ़
Feb 3, 2026, 3:49 PM • 2 hrs ago
पाकिस्तान ने कहा है कि वे 15 फ़रवरी को भारत के ख़िलाफ़ नहीं खेलेंगे • Getty Images
पाकिस्तान ने कहा है कि वे T20 विश्व कप में भारत के ख़िलाफ़ 15 फ़रवरी को कोलंबो में होने वाले अपने ग्रुप मैच का बहिष्कार करेंगे।
यह फ़ैसला पाकिस्तान सरकार के आधिकारिक X अकाउंट पर किए गए एक पोस्ट के ज़रिए बताया गया। ICC ने जवाब देते हुए कहा कि वे, PCB से इस मुद्दे पर एक ऐसे समाधान तलाशने की उम्मीद करते हैं, जो सभी हितधारकों के हितों की रक्षा करे। ICC ने PCB को याद दिलाया कि ऐसे क़दम से पाकिस्तान और "वैश्विक क्रिकेट इकोसिस्टम" पर "गंभीर और दीर्घकालिक" परिणाम हो सकते हैं।
इसके बाद से इस बात को लेकर काफ़ी अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या पाकिस्तान वास्तव में बहिष्कार करेगा? टीम पहले ही कोलंबो में मौजूद है और यह भी चर्चा का विषय है कि PCB को इसके क्या संभावित नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं?
ICC टूर्नामेंट्स में अलग-अलग देशों की भागीदारी एक एग्रीमेंट MPA के तहत नियंत्रित होती है, जिसकी एक कॉपी ESPNcricinfo के पास है। उसी दस्तावेज़ के आधार पर हमने क़ानूनी विशेषज्ञ नंदन कामत और रज़ा अली से बहिष्कार के नतीजों पर बात की। उनके जवाब और नज़रिए नीचे संकलित किए गए हैं।
ICC पाकिस्तान के ख़िलाफ़ क्या संविदात्मक कार्रवाई कर सकता है?
हर ICC सदस्य इन टूर्नामेंट्स में खेलने के लिए MPA पर हस्ताक्षर करता है। इसके एक क्लॉज़ 5.7.1 में सदस्य देश बिना किसी शर्त के न सिर्फ़ उन सभी ICC इवेंट्स में खेलने की प्रतिबद्धता जताते हैं, जिनके लिए वे क्वालिफ़ाई करते हैं, बल्कि उन इवेंट्स में तय किए गए हर मैच को खेलने का भी वादा करते हैं।
ICC यह दावा कर सकता है कि पाकिस्तान इन प्रतिबद्धताओं और दायित्वों को पूरा नहीं कर रहा है और इसलिए समझौते का उल्लंघन कर रहा है।
अगर PCB भारत के ख़िलाफ़ ग्रुप मैच के बहिष्कार के लिए अप्रत्याशित परिस्थितियों (Force Majeure) का हवाला देता है, तो क्या इससे वह वित्तीय देनदारियों से बच सकता है?
Force Majeure एक क़ानूनी अवधारणा और कॉन्ट्रैक्ट में शामिल एक प्रावधान है, जो किसी अप्रत्याशित और नियंत्रण से बाहर की घटना की स्थिति में किसी पक्ष को अपने दायित्व निभाने से छूट देता है। आम तौर पर इसमें प्राकृतिक आपदा, युद्ध या आतंकवादी घटना शामिल होती है। MPA के क्लॉज़ 12 में अहम बात यह है कि इसमें सरकारी आदेश को भी Force Majeure के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
संभावना है कि PCB यह तर्क देगा कि वह अपनी सरकार के आदेशों से बंधा हुआ है और भारत के ख़िलाफ़ ग्रुप मैच खेलने में असमर्थ है। MPA में यह भी कहा गया है कि PCB को इस मामले में अपनी सरकार के लिखित आदेश के साथ इसकी औपचारिक सूचना ICC को देनी होगी। इस सूचना में PCB को यह भी बताना होगा कि क्यों, कैसे और किस हद तक वह इन आदेशों को मानने के लिए बाध्य है और ऐसा आदेश उनकी संविदात्मक प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की क्षमता को कैसे सीमित कर रहा है।
इस स्टोरी को लिखने के समय तक यह स्पष्ट नहीं है कि PCB ने ICC को औपचारिक रूप से इस बारे में सूचित किया है या नहीं। हालांकि वह, यह दलील दे सकता है कि ICC की आधिकारिक प्रतिक्रिया के ज़रिए उन्हें इसकी विधिवत सूचना मिल चुकी है।
क्या ICC यह तर्क दे सकता है कि पाकिस्तान को या तो सभी मैच खेलने होंगे या एक भी नहीं। PCB किन दलीलों का इस्तेमाल कर सकता है?
इस पर दोनों पक्षों की ओर से तर्क दिए जा सकते हैं और यह इस बात पर निर्भर करेगा कि Force Majeure क्लॉज़ की व्याख्या कैसे की जाती है।
ICC यह दलील दे सकता है कि अगर किसी टीम को सरकार द्वारा टूर्नामेंट के एक मैच को खेलने से रोका जाता है, तो वह टीम अपने संविदात्मक दायित्वों को पूरा करने में असमर्थ हो जाती है, जिनमें टूर्नामेंट के सभी मैच खेलना शामिल है। यह Force Majeure के प्रभाव की एक व्यापक व्याख्या होगी। ऐसे में ICC कह सकता है कि भागीदारी की शर्तें आंशिक रूप से पूरी नहीं की जा सकतीं और उसे PCB की भागीदारी के अधिकारों को पूरी तरह समाप्त करने का अधिकार है।
दूसरी ओर PCB यह दावा कर सकता है कि यह आंशिक Force Majeure है, जो सिर्फ़ एक मैच में भाग लेने की उनकी क्षमता को सीमित करता है और इससे अपने आप टूर्नामेंट से बाहर किया जाना या समझौता समाप्त होना ज़रूरी नहीं है। वह यह भी तर्क दे सकता है कि भले ही टूर्नामेंट की खेलने की शर्तों में मैच को बहिष्कृत करने से जुड़े प्रावधान लागू न हों, लेकिन वही शर्तें प्वाइंट सिस्टम और नेट रन रेट की गणना के तरीक़े बनाए रखती हैं, जिसमें मैच के बहिष्कार को हार के बराबर माना जाता है। उनका तर्क होगा कि यही स्थापित खेल दंड है और इसके अलावा उन्हें कोई सज़ा नहीं मिलनी चाहिए।
क्या इस मामले में कोई ग्रे एरिया है क्योंकि PCB के चेयरमैन मोहसिन नक़वी पाकिस्तान सरकार में भी वरिष्ठ मंत्री हैं?
अंतरराष्ट्रीय खेल क़ानून के तहत अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघ अपने राष्ट्रीय सदस्य निकायों से यह उम्मीद करते हैं कि वे अपनी-अपनी सरकारों के हस्तक्षेप के बिना स्वायत्त रूप से संचालित हों। ICC की भी ऐसी ही अपेक्षा होगी, हालांकि व्यवहार में वह जानता है कि ख़ासकर उपमहाद्वीप के सदस्यों के मामले में ऐसा हमेशा नहीं होता। लेकिन एक सामान्य स्थिति में वह, क्रिकेट बोर्ड और सरकार को दो अलग-अलग संस्थाएं मानेगा, भले ही दोनों में कुछ समान लोग हो सकते हैं। अगर दोनों पर एक ही व्यक्ति का नियंत्रण हो, तो बोर्ड का मामला कमज़ोर हो जाता है और ICC अन्य बातों के साथ यह तर्क दे सकता है कि Force Majeure स्वयं उत्पन्न किया गया था, इससे बचा जा सकता था और इसलिए यह संविदात्मक बचाव के रूप में प्रभावी नहीं है।
Force Majeure की स्थिति से बचने का सिद्धांत ऐसे सभी इवेंट्स में एक अंतर्निहित और महत्वपूर्ण प्रावधान है और यह MPA का हिस्सा है। क्या Force Majeure की स्थिति से बचने के लिए कोई प्रयास किया गया या कोई एहतियाती क़दम उठाया गया? BCCI द्वारा चैंपियंस ट्रॉफ़ी 2025 को पाकिस्तान में न खेलने का फ़ैसला भी Force Majeure के रूप में बचाव किया जा सकता है, क्योंकि यह भारत सरकार का आदेश था।
लेकिन ICC यह तर्क दे सकता है कि Force Majeure की स्थिति को हाइब्रिड मॉडल व्यवस्था के ज़रिए कमज़ोर किया गया, ताकि भारत, पाकिस्तान से खेल सके। चूंकि हाइब्रिड व्यवस्था मौजूद है, इसलिए Force Majeure का हवाला देना मुश्किल हो सकता है, हालांकि असंभव नहीं। PCB मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को एक नए Force Majeure के रूप में पेश कर सकता है।
अगर पाकिस्तान 2026 T20 विश्व कप में भारत के ख़िलाफ़ कोई नॉकआउट मैच खेलता है, तो क्या इससे ग्रुप मैच न खेलने का उसका मामला कमज़ोर पड़ेगा?
मामला उस सरकारी आदेश के शब्दों पर निर्भर करेगा, जिस पर PCB, Force Majeure का दावा कर रहा है। पाकिस्तान सरकार का X पोस्ट विशेष रूप से 15 फ़रवरी के मैच के बहिष्कार की बात करता है। लेकिन एक ही विपक्षी के ख़िलाफ़ ग्रुप मैच और नॉकआउट मैच के बीच फ़र्क़ करने का कोई स्पष्ट तर्क सरकार के आदेश में होना मुश्किल है।
PCB पर कौन से संभावित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं?
PCB का तर्क होगा कि इसे Force Majeure का मामला माना जाना चाहिए और विपक्षी टीम को अंक देने के अलावा कोई सज़ा लागू नहीं होनी चाहिए। सबसे ख़राब हाल में भी यह सिर्फ़ संविदात्मक उल्लंघन है, जिसके लिए अधिकतम हर्जाना और क्षतिपूर्ति ही बनती है।
दूसरी ओर ICC इसे आगे बढ़ाते हुए यह तर्क दे सकता है कि यह न सिर्फ़ समझौते को तोड़ना है, बल्कि ICC संविधान के तहत इससे PCB के ख़िलाफ़ आगे की कार्रवाई करने का आधार भी बनता है। ICC संविधान में ऐसे प्रावधान हैं, जिनके तहत ICC बोर्ड की राय में किसी सदस्य द्वारा दायित्वों के गंभीर उल्लंघन की स्थिति में उसकी सदस्यता निलंबित या समाप्त की जा सकती है। हालांकि यह एक बेहद कठोर क़दम होगा।
क्या ICC इवेंट में पहले टीमों के मैच न खेलने के मामले, जैसे- 2003 विश्व कप में इंग्लैंड का ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ और न्यूज़ीलैंड का केन्या के ख़िलाफ़ न खेलना, या 2009 T20 विश्व कप में UK सरकार द्वारा ज़िम्बाब्वे टीम को वीज़ा न देने का मामला, इस स्थिति में कोई प्रासंगिकता रखते हैं?
पिछले उदाहरण नैतिक रूप से कुछ महत्व रख सकते हैं, लेकिन क़ानूनी कार्यवाही में उनकी मिसाल के तौर पर बहुत ज़्यादा अहमियत होने की संभावना नहीं है। ऐसे मामलों का फ़ैसला मुख्य रूप से मौजूदा संविदात्मक दस्तावेज़ों की तथ्यात्मक और क़ानूनी व्याख्या पर निर्भर करेगा।
