गौतमी नायक: मुझे विश्वास हो गया है कि मैं यहां खेलना डिज़र्व करती हूं
RCB की युवा बल्लेबाज़ WPL फ़ाइनल के लिए तैयार हैं
शशांक किशोर
Feb 3, 2026, 11:37 AM
गौतमी नायक ने 19 जनवरी को गुजरात जायंट्स के ख़िलाफ़ 55 गेंदों में 73 रन बनाए थे • BCCI
19 जनवरी को गौतमी नायक की ज़िंदगी लगभग रातों-रात बदल गई, जब उन्होंने WPL 2026 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए अपना पहला अर्धशतक लगाया। घर पर फ़ोन आने लगे और लोग उन्हें पहचानने लगे। लेकिन वह पल उनके दिल में तब सच में उतरा, जब उन्होंने अपनी मां की भरी हुई आवाज़ सुनी।
"मेरी मां रो रही थीं और कह रही थीं कि उन्हें मुझ पर बहुत गर्व है," 27 वर्षीय नायक कहती हैं।
उनकी एकेडमी के छोटे खिलाड़ी, उन्हें अलग नज़र से देखने लगे हैं। वे कहने लगे हैं, "अगर गौतमी कर सकती है, तो हम भी कर सकते हैं।"
वडोदरा चरण के पहले मैच में गुजरात जायंट्स (GG) के ख़िलाफ़ RCB की टीम 9 रन पर 2 विकेट खो चुकी थी, तभी नायक बल्लेबाज़ी के लिए आईं। स्मृति मांधना ने उनसे साझेदारी बनाने को कहा, भले ही इसके लिए थोड़ा संघर्ष क्यों न करना पड़े। लक्ष्य 160 तक पहुंचने का था, लेकिन टीम 178 तक पहुंच गई। इसमें नायक का योगदान 55 गेंदों में 73 रन था, जिससे वह WPL में अर्धशतक लगाने वाली पहली भारतीय अनकैप्ड खिलाड़ी बनीं।
"उस पारी के बाद बहुत कुछ बदल गया है। मैं खुद भी हैरान थी, लेकिन उसी समय बहुत शांत भी," वह कहती हैं। "मुझे लगा कि मैं भी इस स्तर पर खेल सकती हूं।"
नायक को यह आत्मविश्वास अपनी तैयारी से भी मिला। नीलामी के बाद RCB की सभी भारतीय खिलाड़ियों को उनकी भूमिकाओं के बारे में बताया गया। इसके बाद बेंगलुरु में बल्लेबाज़ी कोच आरएक्स मुरली के तहत एक महीने का कैंप लगा और फिर सभी खिलाड़ियों की विस्तृत रिपोर्ट मुख्य कोच मालोलन रंगराजन को भेजी गई।
"हमने मानसिक तैयारी, शॉट चयन और मैच की परिस्थितियों पर बहुत काम किया," नायक उस दौर के बारे में कहती हैं। डॉट गेंदों से निपटने, दर्शकों के सामने खेलने और अलग-अलग पिचों पर पारी के दौरान मैच परिस्थितियों के अनुसार समाधान खोजने जैसे पहलुओं पर खास ध्यान दिया गया।
"जो आप अब देख रहे हैं, वही उस सारी मेहनत का नतीजा है।"
नायक के पास एक और सहारा था- महाराष्ट्र प्रीमियर लीग (MPL), जहां उन्हें मांधना के साथ खेलने का अनुभव मिला। उनकी शुरुआती बातचीत ज़्यादातर मैदान के बीच ही हुई। लेकिन बाउंड्री के बाहर हुई कुछ बातचीत ऐसी हैं, जिन्हें वह आज भी संजोकर रखती हैं।
"उन्होंने मुझे सिर्फ़ तकनीकी नहीं, बल्कि मानसिक तौर पर भी बहुत इनपुट दिया," नायक कहती हैं। "MPL में हम ज़्यादातर मैच के दिन ही मिलते थे। वहां भी बड़े खिलाड़ियों में यह प्रवृत्ति होती है कि वे आते हैं, अपना काम करते हैं और चले जाते हैं।
स्मृति मांधना ने मुश्किल दौर में गौतमी नायक का मार्गदर्शन किया•BCCI
"लेकिन स्मृति, युवा खिलाड़ियों के साथ समय बिताती थीं। वह समझाती थीं कि कि अगले स्तर तक पहुंचने के लिए क्या चाहिए और मैच विनर बनना कितना ज़रूरी है। उन्होंने मुझे एक बल्लेबाज़ के तौर पर किन खास पहलुओं पर ध्यान देना चाहिए, इस पर भी बात की।"
मैदान के बाहर भी नायक को अपनी कुछ WPL टीम-साथियों से प्रेरणा मिली है।
"मैं सभी के साथ अच्छी तरह घुली-मिली हूं, लेकिन ख़ास तौर पर ग्रेस हैरिस और नेडीन डी क्लर्क के साथ मेला ख़ास रिश्ता बन गया है," वह कहती हैं। "ग्रेस की गेम प्लान बहुत सरल है। उनके शॉट्स में बहुत स्पष्टता होती है। वह मैदान पर खेल का लुत्फ़ उठाती हैं और मस्ती करती हैं। वह कभी दबाव में नहीं दिखतीं।
"नेडीन से मैंने उनकी कभी हार न मानने वाली सोच से बहुत कुछ सीखा है। हालात चाहे जैसे हों, जीत रहे हों या हार रहे हों, वह योगदान देने का तरीका ढूंढ लेती हैं। अगर विकेट चाहिए होते हैं, तो वह दिलाती हैं। पहले मैच में भी जब उम्मीदें ख़त्म हो गई थीं, उन्होंने एक अहम पारी खेली। उन्हें क़रीब से देखना मेरे लिए बहुत सीख देने वाला रहा।"
राज्य स्तर पर महराष्ट्र के लिए और MPL में नायक की सफलता एक शीर्ष क्रम की बल्लेबाज़ के रूप में रही है। लेकिन पिछले तीन सप्ताह में उन्होंने यह समझ लिया है कि टीम में जहां जगह मिले, वहां खेलने के लिए लचीलापन ज़रूरी है।
"मैं बस खेलना चाहती हूं। टीम मुझे जो भी भूमिका दे, मैं उसके लिए तैयार हूं," वह कहती हैं। "ऐसा नहीं है कि मैं सिर्फ सलामी बल्लेबाज़ी ही करना चाहती हूं। मैं अभ्यास में भी उसी तरह तैयारी करती हूं। मुझे पहले ही बता दिया गया था कि मुझे नंबर 4 या 5 पर भी मौक़ा मिल सकता है, इसलिए मैंने अपना खेल उसी हिसाब से तैयार किया।
"जहां भी मेरे लिए जगह हो और जहां टीम को मेरी ज़रूरत हो, मुझे तैयार रहना है। अगर वे मुझसे ओपेन करने को कहें, तो उसके लिए भी मैं तैयार हूं। वह भी मेरी ही जगह है।"
इस तैयारी के पीछे एक तय दिनचर्या है, जिसमें ध्यान, प्राइमिंग सेशन और संगीत शामिल हैं। "ये चीज़ें मुझे शांत रखती हैं। खासकर ध्यान को लेकर मैं बहुत पेशेवर हो गई हूं," वह कहती हैं। "संगीत के मामले में मैं काफी चुनिंदा हूं। मुझे मैच से पहले या बल्लेबाज़ी के लिए उतरने से पहले धीमे गाने सुनना पसंद है।"
गुरुवार के फ़ाइनल से पहले नायक मानती हैं कि यही 'शांति' इस सीज़न की उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि रही है।
अर्धशतक ने भले ही दूसरों की नज़र में उनकी छवि बदल दी हो, लेकिन उससे भी ज़्यादा अहम यह है कि इससे उन्होंने ख़ुद को देखने का नज़रिया बदल लिया है। "अब मुझे पता है कि मैं यहां खेलना डिज़र्व करती हूं।"
शशांक किशोर ESPNcricinfo में वरिष्ठ संवाददाता हैं
