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अश्विन की बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों के विरुद्ध उपयोगिता उन्हें दिला सकती है एकादश में स्थान

अक्षर ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ प्लेयर ऑफ़ द सीरीज़ रहने के बावजूद टीम में अपनी जगह ऑफ़ स्पिनर को दे सकते हैं

ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ हालिया सीरीज़ में अक्षर पटेल ने 7.87 के औसत और 6.30 की इकॉनमी के साथ आठ विकेट लिए, जो अपने आप में ज़बरदस्त आंकड़े कहलाएंगे। अब याद कीजिए कि तीन मैचों में ऑस्ट्रेलिया ने 211 और 186 के स्कोर के बीच आठ ओवर के मुक़ाबले में 90 रन का स्कोर बनाया, तो आपको समझ आएगा अक्षर को प्लेयर ऑफ़ द सीरीज़ का ख़िताब क्यों मिला।
अब अगर हम आप से कहें कि हो सकता है तिरुवनंतपुरम में अक्षर साउथ अफ़्रीका के विरुद्ध पहले एकादश का हिस्सा नहीं बनें, तो आपको आश्चर्य हो सकता है। लेकिन आधुनिक क्रिकेट मैच-अप पर चलता है, और जहां ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज़ी क्रम में मैथ्यू वेड इकलौते खब्बू बल्लेबाज़ थे, साउथ अफ़्रीका में क्विंटन डिकॉक, राइली रूसो और डेविड मिलर तीनों एकादश का हिस्सा हो सकते हैं।
क्रिकेट के एक्सपर्ट हमेशा मैच-अप के महत्व का समर्थन नहीं करते, लेकिन आंकड़े ज़रूर इनकी पूरी कहानी बता जाती हैं। अगर इस साल के ऐसे टी20 मैचों को देखें जहां गेंद-दर-गेंद आंकड़े उपलब्ध है, तो बाएं हाथ का स्पिनर का बाएं हाथ और दाएं हाथ के बल्लेबाज़ों के ख़िलाफ़ इकॉनमी क्रमश: 8.12 और 6.86 है। ऐसे ही दाएं हाथ के स्पिनर बाएं हाथ के बल्लेबाज़ को औसतन 6.60 की इकॉनमी से गेंद डालता है और बाएं हाथ के बल्लेबाज़ को 7.28 की इकॉनमी से।
क्रिकेट में वैसे भी कम बाएं हाथ के बल्लेबाज़ हैं, और ऐसे में बाएं हाथ के स्पिनर को उनके विरुद्ध आक्रमण पर अधिक ना लाना भी असामान्य नीति नहीं। अपने टी20 जीवन में अक्षर ने बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों को केवल 857 गेंदें डाली हैं (इकॉनमी 8.58) जबकि दाएं हाथ के बल्लेबाज़ों को 2385 (6.68 की इकॉनमी) गेंदें।
आम तौर पर भारत के एकादश का गठन ऐसा होता है कि आप बाएं हाथ के स्पिनर को वैसे भी खिला ही सकते हैं। हालांकि साउथ अफ़्रीका के विरुद्ध पहले मैच में हार्दिक पंड्या और दीपक हुड्डा के ना होने से संभवत: भारत के पास पांच गेंदबाज़ी के विकल्प ही बचेंगे। ऐसे में किसी भी गेंदबाज़ को अनुचित मैच-अप पकड़ाना ठीक नहीं होगा।
वैसे भी भारतीय दल में एक गेंदबाज़ है जो बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों के लिए काल समान है। जब से पिछले साल विश्व कप में आर अश्विन चार वर्षों के बाद टी20 अंतर्राष्ट्रीय टीम में लौटे, बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों के विरुद्ध उनकी इकॉनमी है 6.05, जो खब्बू बल्लेबाज़ों को न्यूनतम 50 गेंदें डालने वाले गेंदबाज़ों में सर्वश्रेष्ठ है। उनके ख़िलाफ़ इस बीच उनका 13.25 का औसत केवल अर्शदीप सिंह (बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों के विरुद्ध 12.00 का औसत) के पीछे दूसरे स्थान पर है। तुलना के तौर पर अक्षर और युज़वेंद्र चहल की यही इकॉनमी है 8.92 और 8.10 की।
वैसे टी20 क्रिकेट में अश्विन केवल एक ऑफ़ स्पिनर ही नहीं रहते। अपने कैरम बॉल और हाल ही में विकसित इनस्विंग गेंद के चलते वह दाएं हाथ के बल्लेबाज़ों को भी बांध देते हैं। उनके ख़िलाफ़ पिछले विश्व कप से अश्विन की इकॉनमी है 6.13, जिससे बेहतर भारतीय गेंदबाज़ों में केवल रवींद्र जाडेजा (5.55) की इकॉनमी है।
अगर इन आंकड़ों को देखकर आपको लगता है कि अश्विन फिर पहले स्थान पर भारत के एकादश में स्पिनर क्यों नहीं बनते, तो आसान जवाब है कि जाडेजा और अक्षर की बल्लेबाज़ी उन्हें ऑलराउंडर की श्रेणी में डालती है। उन दोनों को सातवें नंबर पर खिलाए जाने के अलावा क्रम में आगे-पीछे भी किया जा सकता है। अश्विन अपने आप में एक उपयोगी बल्लेबाज़ हैं लेकिन उनमें जाडेजा या अक्षर जितनी निरंतर बड़े शॉट लगाने की क्षमता नहीं है। इसके अलावा वह दाएं हाथ के बल्लेबाज़ हैं और अपने साथियों जैसी विविधता नहीं लाते।
साउथ अफ़्रीका के विरुद्ध आप अश्विन की गेंदबाज़ी को उनकी बल्लेबाज़ी से अधिक मोल दे सकते हैं। पंड्या की जगह वैसे भी ऋषभ पंत के रूप में एक बाएं हाथ का बल्लेबाज़ एकादश में शामिल हो सकता है। हर्षल पटेल के रहते आपको अश्विन को सात पर भी खिलाने की ख़ास ज़रूरत नहीं है। एक और विकल्प हो सकता है चहल को ड्रॉप करके आप अक्षर और अश्विन दोनों को खिलाएं।
अगर भारत अपने पिछले सीरीज़ के सर्वश्रेस्ठ प्लेयर को ड्रॉप भी कर दे, तो आपको आश्चर्यचकित नहीं होना चाहिए। यह एक उच्च-श्रेणी के क्रिकेटर के ख़िलाफ़ की गई कोई साज़िश नहीं होगी, बल्कि भारत के टी20 दल के ज़बरदस्त गहराई का एक संकेत होगा।

कार्तिक कृष्‍णास्‍वामी ESPNcricinfo में सीनियर सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo में स्‍थानीय भाषा प्रमुख देबायन सेन ने किया है।