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पंत के बाद उत्तराखंड से दिल्ली आया एक और बाएं हाथ का आक्रामक विकेटकीपर बल्लेबाज़

घरेलू क्रिकेट के बाद अब आईपीएल में भी अनुज रावत को सफलता की तलाश है

अपने 18वें जन्मदिन से कुछ ही दिन पहले अपने प्रथम श्रेणी डेब्यू पर तेज़ गेंदबाज़ों के सामने विकेटकीपिंग के दौरान अनुज रावत की उंगली में चोट लगी।
रावत को यह मौक़ा इसलिए मिला था क्योंकि दिल्ली के नियमित कीपर ऋषभ पंत इंडिया ए का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। रावत अगले मैच से बाहर बैठने का सोच रहे थे और तब उनके साथी और बचपन के दोस्त पुलकित नारंग ने उनसे कहा, "उंगली कट जाए, कुछ भी हो जाए, मना नहीं करना। रणजी से बड़ा कुछ नहीं होता।"
बस उसी दिन से रावत इस सलाह पर अमल कर रहे हैं, फिर चाहे वह घरेलू क्रिकेट के मैच से ठीक पहले आईपीएल ट्रायल के लिए जाना हो या बल्लेबाज़ी क्रम में ऊपर से नीचे जाना। उंगली की चोट के कारण वह ठीक से बल्ला भी पकड़ नहीं पा रहे थे। हालांकि उन्होंने रेलवेज़ के विरुद्ध अगले मैच में हिस्सा लिया और 74 रन बनाए। उनका मानना है कि इसी पारी ने अगले महीने खेले गए अंडर-19 एशिया कप की टीम में उन्हें प्रवेश दिलाया। वह इसे 'कर्मा' कहते हैं।
जब पंत भारतीय टीम के लिए खेल रहे थे तब 2018-19 के सीज़न के लिए रावत को दिल्ली की टीम में बरक़रार रखा गया। उनकी शुरुआत बिल्कुल भी अच्छी नहीं रही और आठ पारियों में वह कभी 30 का आंकड़ा पार ही नहीं कर पाए।
फिर दिसंबर में दिल्ली की वह ठंडी सुबह आई जब दिल्ली के ख़िलाफ़ मध्य प्रदेश 132 रन पर सिमट गई। रावत जो अमूमन छठे या सातवें नंबर पर बल्लेबाज़ी करते थे, खाना खाने के लिए चले गए। इतने में ही आवेश ख़ान ने पहले ओवर में दो विकेट निकाले और दिल्ली के कोच मिथुन मनहास ने रावत को पैड करकर पांचवें नंबर पर बल्लेबाज़ी करने भेजा। तीसरे ओवर में दिल्ली ने केवल आठ रनों पर तीन विकेट गंवा दिए थे।
आगामी आईपीएल सीज़न से पहले रावत ने कहा था, "मुझे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था। जैसा कि लोग कहते हैं कि आप खुले दिमाग़ से और बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।"
183 गेंदों में 14 चौके और चार छक्कों की मदद से रावत ने 134 रन बनाए और वह अपनी टीम को 261 तक लेकर गए। वह कहते हैं कि उन्होंने जीवनभर में जो भी कुछ सीखा, उसे उन्होंने मैदान पर दर्शाया। साथ ही वह खाली दिमाग़ से खेल रहे थे।
एक साल बाद दिसंबर 2019 में रावत को राजस्थान रॉयल्स और कोलकाता नाइट राइडर्स ने ट्रायल के लिए बुलाया। कुछ दिन पहले ही उन्होंने चेतन साकरिया और जयदेव उनादकट के आक्रमण वाले सौराष्ट्र के गेंदबाज़ी क्रम के विरुद्ध सैयद मुश्ताक़ अली ट्रॉफ़ी के मैच में लॉन्ग ऑन और डीप मिडविकेट के बीच सात छक्के जड़े थे।
रावत ने बताया कि वह ट्रायल के लिए जाने ही नहीं वाले थे। उन्होंने कहा, "उस समय घरेलू क्रिकेट के मैच चल रहे थे। रॉयल्स ने कहा कि मैं एक दिन अथवा चंद घंटों के लिए आ जाऊं और इसलिए मैं नागपुर गया। ट्रायल अच्छा गया और मैं रणजी के लिए निकलने ही वाला था जब केकेआर ट्रायल के लिए मुझे फ़ोन आया। मैंने ठाणे में वह ट्रायल दिया और वहां से अगले दिन मैच खेलने के लिए सीधे केरला चला गया।"
राजस्थान ने 80 लाख रुपये देकर रावत को अपनी टीम में जोड़ा था लेकिन उन्हें 2020 में खेलने का मौक़ा नहीं मिला। जब अक्तूबर 2021 में उन्हें आख़िरकार अपना डेब्यू मैच मिला तो वह पहली गेंद पर आउट हो गए। वह इस तरह गोल्डन डक पर आउट होने से निराश थे लेकिन उन्होंने इस बारे में सोच विचार करने में अधिक समय व्यर्थ नहीं किया। उनके अनुसार पहली गेंद पर आउट होना बेहतर है बजाय इसके कि वह टीम को जीत के क़रीब लेकर जाते और फिर आउट होते।
रामनगर के एक खेती करने वाले परिवार में जन्में रावत घर पर और आस-पड़ोस के खेतों में क्रिकेट खेलते थे लेकिन उन्होंने टीवी पर कम ही मैच देखे थे। ऐडम गिलक्रिस्ट और कुमार संगकारा को खेलते देख इस खेल में उनकी रुचि बढ़ती गई। एक दिन माता-पिता ने दोनों बेटों से उनके भविष्य को लेकर चर्चा की और बड़े भाई ने डॉक्टर बनने की इच्छा व्यक्त की।
इस बात को याद करते हुए रावत ने कहा, "मैंने तुरंत कह दिया कि मैं क्रिकेट खेलना चाहता हूं।" रावत के पिता एक लोकल क्रिकेटर थे और उन्होंने अपने बेटे को आगे बढ़ाने के लिए उसे दिल्ली भेजने का फ़ैसला किया। उनके एक पारिवारिक मित्र ने सुझाव दिया कि वह विकेटकीपर बन जाए क्योंकि हर एकादश को विकेटकीपर की तलाश होती है। रावत ने कहा, "उन दिनों ऐसे खिलाड़ी कम ही थे जो विकेटकीपिंग करने के साथ साथ बाएं हाथ से सलामी बल्लेबाज़ी करते थे।"
रावत से दो साल बड़े पंत भी क्रिकेट में बेहतर मौक़ों के लिए उत्तराखंड से दिल्ली आए थे और उन्होंने विकेटकीपिंग करना शुरू किया था। रावत और पंत के सफ़र में यह एक और समानता थी।
रावत दिल्ली के पूर्व क्रिकेटर राजकुमार शर्मा की अकादमी में भर्ती हो गए। यह वही अकादमी है जिसने भारत को विराट कोहली के रूप में एक बड़ा सितारा दिया था। रावत को घर से दूर रहने और नई जगह पर पैर जमाने में समय लगा क्योंकि कोचिंग अलग थी। उन्हें प्रोफ़ेशनल क्रिकेट खेलने में पांच-छह साल लग गए।
इस दौरान उन्होंने सीखा कि कैसे बल्लेबाज़ी क्रम में उन्हें अलग-अलग स्थान पर खेलने में सक्षम होना चाहिए। कई सालों तक शीर्ष क्रम में खेलने के बाद दिल्ली की टीम में उनका चयन मध्य क्रम के लिए हुआ था। अकादमी में उन्हें बताया गया था कि उन्हें हर स्थान पर खेलने के लिए तैयार रहना चाहिए।
आईपीएल 2022 की बड़ी नीलामी तक रावत को घरेलू क्रिकेट में बाउंड्री लगाने वाले विशेषज्ञ बल्लेबाज़ के तौर पर जाना जाता था। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु सलामी जोड़ी में फ़ाफ़ डुप्लेसी का साथ निभाने के लिए एक बाएं हाथ के बल्लेबाज़ की तरफ़ देख रही थी। उन्होंने 3 करोड़ 40 लाख रुपये देकर रावत को ख़रीदा।
दो सालों से रावत आईपीएल में अपने पहले रन की तलाश कर रहे थे जब बेंगलुरु ने पहले ही मैच में उन्हें बल्लेबाज़ी करने का मौक़ा दिया। रावत ने खुले मन से बल्लेबाज़ी की और चहलकदमी करते हुए संदीप शर्मा की गेंद को लॉन्ग ऑन के बाहर भेजकर अपने आईपीएल करियर का खाता खोला। राजस्थान रॉयल्स के विरुद्ध उन्होंने प्रसिद्ध कृष्णा को दो लगातार चौके जड़े। अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन उन्होंने मुंबई इंडियंस के लिए बचाकर रखा था जहां 47 गेंदों पर 66 रन बनाकर वह बेंगलुरु की जीत के नायक रहे थे।
हालांकि इसके बाद उनके बल्ले से क्रमशः 12,0,4,4 के स्कोर बने और वह एकादश से बाहर हो गए। इन सबके बीच लोगों ने आक्रामक बल्लेबाज़ी के शैली के कारण उनकी तुलना फिर एक बार पंत के साथ की।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या रावत, पंत की तरह बड़े मच के दबाव को झेलकर अच्छा प्रदर्शन कर पाते हैं या नहीं?

विशाल दीक्षित ESPNcricinfo में असिस्टेंट एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर अफ़्ज़ल जिवानी ने किया है।