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निकोलस : इंग्लिश क्रिकेट को अधिनायकों की ज़रूरत है

इंग्लिश क्रिकेट से जुड़े हर व्यक्ति को उसे सम्मानजनक जगह दिलाने के लिए साथ काम करना पड़ेगा

Joe Root leads England off after their defeat, West Indies vs England, 3rd Test, Grenada, 4th day, March 27, 2022

रुट इंग्लैंड के सबसे सफल टेस्ट कप्तान हैं  •  Getty Images

जो रूट के बारे में ख़बर सुनकर खेद हुआ। वह एक अच्छे इंसान होने के साथ ही इंग्लैंड के महानतम बल्लेबाज़ों में से एक हैं। उन्होंने इंग्लैंड की कप्तानी जैसे बड़े ज़िम्मेदारी को सबसे लंबे समय तक निभाया और लोगों का दिल जीता।
हालिया समय में ऐसी भावना बढ़ती जा रही थी कि उनके कप्तानी का समय समाप्त हो चुका है और ऐसी बात इतने ईमानदार व्यक्ति को काफ़ी दुःख देती होगी। उन्होंने हमेशा इंग्लैंड की अगुआई करने को एक सौभाग्य समझा और यह उनकी टीम भावना का प्रतीक है कि अब किसी और की कप्तानी में भी वह अपनी टीम को आगे ले जाने में भूमिका अदा करना चाहते हैं।
यह बात दुर्भायपूर्ण है लेकिन ठीक भी। उनकी कप्तानी में वह तेज और कल्पनाशक्ति मौजूद नहीं जो उनमें बतौर उपकप्तान दिखती थी। एलेस्टर कुक की कप्तानी में रूट सुझाव और रणनीतिक इनपुट देते नहीं थकते थे। बाद में उनकी कप्तानी में वह बात नज़र नहीं आई। हालांकि यह भी उल्लेखनीय है कि उन्होंने कोविड महामारी के दिनों में टीम का नेतृत्व किया जब इंग्लैंड टीम ने अत्यधिक मैच भी खेले। रूट एक सरल, मेहनती व्यक्ति हैं जिनको पिछले कुछ सालों में एक ऐसी टीम की ज़िम्मेदारी निभानी पड़ रही थी जिसके खिलाड़ी आपसी तालमेल नहीं बिठा पा रहे थे। अगर उनके ऊपर इंग्लैंड क्रिकेट में प्रबंधन में अस्पष्टता है तो उनके नीचे खेल के स्तर में भारी गिरावट भी है।
और यहां से इंग्लैंड क्रिकेट कहां जा सकता है?
ऐसा सुनने में आया है कि ऐंड्र्यू स्ट्राउस अंतरिम प्रबंधन निदेशक नहीं बने रहना चाहते हैं। इंग्लैंड में अख़बारों में रॉब की का नाम चर्चा में है, जो ऐश्ली जाइल्स की जगह ले सकते हैं। की काउंटी क्रिकेट को अच्छे से जानते हैं और उनकी कॉमेंट्री से पता चलता है कि वह क्रिकेट से प्रेम करते हैं। यह इस पद के लिए मददगार साबित होंगे।
हालांकि हर चीज़ से पहले इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड की अध्यक्षता का सवाल है। इस पद को प्राथमिकता मिलनी चाहिए लेकिन क्या ऐसा होगा? इंग्लैंड क्रिकेट में पांच बड़े पद खाली हैं और नए अध्यक्ष चाहेंगे कि सारे नियुक्ति उनकी पसंद के हों।
कुछ ही समय में टॉम हैरीसन मुख्य कार्यकारी का पद त्याग कर देंगे। ऐसे में उनके उत्तराधिकारी चाहेंगे कि एक व्यस्त अंतर्राष्ट्रीय समर से पहले नेशनल टीम के कोच और कप्तान की नियुक्ति हो जाए। बोर्ड की अध्यक्षता का निर्णय 17 मई तक ही घोषित होगा यानी केन विलियमसन के साथ लॉर्ड्स में पहले टेस्ट के लिए टॉस से केवल एक हफ़्ते पहले तक का समय मिलेगा। हालांकि बहुत कुछ परदे के पीछे भी सुनिश्चित किया जा रहा होगा।
रूट की जगह कौन ले सकता है? बेन स्टोक्स एक विकल्प हैं लेकिन पिछले साल में उन्होंने व्यक्तिगत जीवन में कई उतार चढ़ाव देखे हैं और ऊपर से शायद सीज़न की शुरुआत में फ़िट भी नहीं होंगे। जेम्स विंस फ़िलहाल टीम में भी नहीं हैं। रोरी बर्न्स ने भी अपनी जगह टीम में पक्की नहीं की है। क्या मोईन अली को कप्तानी का लालच देकर टेस्ट क्रिकेट में वापस लाया जा सकता है? जिमी एंडरसन और स्टुअर्ट ब्रॉड भी दावेदारी में होते लेकिन ऑस्ट्रेलिया में उन दोनों ने टीम प्रबंधन पर कुछ तीख़ी बातें की थी। कोई एक नाम भी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आता दिखता।
टेस्ट टीम का कोच कौन बनेगा? मेरे लिए गैरी कर्स्टन से बेहतर कोई दावेदार नहीं हैं। उनमें चरित्र की शक्ति, क्रिकेट जगत में एक बड़ा क़द और गेम की सही मात्रा में सूझबूझ का सही मिश्रण मौजूद है। उन्होंने भारत और साउथ अफ़्रीका दोनों टीमों के साथ अच्छे प्रदर्शन दिए हैं। उन्हें गुजरात टाइटंस से इंग्लैंड तक लाने के लिए अच्छे ख़ासे पैसे देने होंगे।
सीमित ओवर क्रिकेट के कोच का सवाल भी पेचीदा है। मेरे हिसाब से ओएन मॉर्गन को दोनों प्रारूपों से संन्यास लेते हुए तुरंत कोचिंग रोल पकड़ लेनी चाहिए लेकिन शायद वह ख़ुद सहमत नहीं होंगे। पॉल कॉलिंगवुड और महेला जयवर्दना भी मज़ेदार नाम हैं। जयवर्दना कई बिज़नेस में शामिल हैं और कुछ फ्रैंचाइज़ीयों से भी जुड़े हैं। इंग्लैंड कोच बनने के लिए उन्हें कॉलिंगवुड से काफ़ी कुछ ज़्यादा छोड़ना पड़ेगा।
उम्मीद तो यही रहेगी कि अध्यक्ष हर नियुक्ति को एक योजना के अनुसार कर सकेंगे लेकिन अब लगता है कि यह संयोग से ही होंगे। आशा करेंगे कि सब तालमेल बिठा लेंगे और क्रिकेट को जड़ से मज़बूत करने की पूरी कोशिश करेंगे।
इस काम को 18 काउंटी अच्छे से निभा सकते हैं। अगर काउंटी टीमें पहले स्तर की अकादमी बनेंगीं तो लॉबोरो की अकादमी एक फ़िनिशिंग स्कूल का काम करेगी।
काउंटी क्रिकेट एक बहुत ज़रूरी कड़ी होगी लेकिन उसमें क्रिकेट के स्तर में बढ़ोतरी आवश्यक है। केंट के लिए 46 वर्षीय डैरेन स्टीवेंस अभी भी क्रिकेट खेल रहे हैं यह अपने आप में प्रशंसनीय बात है लेकिन वह इंग्लैंड टेस्ट क्रिकेट के कोई काम के नहीं हैं। नए अध्यक्ष को इस चुनौती को समझना होगा और इसमें बदलाव लानी होगी।
नए अध्यक्ष के पास क्रिकेट के आधुनिकीकरण के प्रति निष्ठा होनी चाहिए। उनके पास इंग्लैंड में इस खेल के इतिहास और इसके महत्व को समझते हुए बदलाव करने की शक्ति होनी चाहिए। हम क्या ग़लत है उसके बारे में सुनते सुनते थक चुके हैं।
पहली चीज़ होगी कि इंग्लैंड क्रिकेट के अलग-अलग अंश एक जुट होकर इसे आज के दुनिया में एक सम्मानजनक पड़ाव तक ले जाएं। चाहे वह अध्यक्ष हों या बोर्ड सदस्य, मुख्य कार्यकारी, कर्मचारी, कप्तान, कोच, खिलाड़ी, ग्राउंड स्टाफ़ या कोई और - सब को अपनी भूमिका निभानी होगी। इंग्लैंड टीम और उसके कप्तान को कोसना उतना ही आसान है जितना राष्ट्रीय स्तर पर एक खेल को चलाना मुश्किल है। क्रिकेट एक ऐसा खेल है जिसकी बुनियाद है कि आप में प्यार हो।

मार्क निकोलस इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर और प्रख्यात टीवी कॉमेंटेटर हैं