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बल्लेबाज़ी क्रम में बदलाव कर भारतीय टीम ने अपने पैरों पर ही कुल्हाड़ी मारी : जयवर्दना

पूर्व श्रीलंकाई कप्तान ने कहा कि इतने बड़े टूर्नामेंट के बीच में आप ऐसे बदलाव नहीं कर सकते

जयवर्दना के अनुसार ऐसे अहम मैच से पहले बल्लेबाज़ी क्रम में बदलाव नहीं किया जाना चाहिए  •  BCCI

जयवर्दना के अनुसार ऐसे अहम मैच से पहले बल्लेबाज़ी क्रम में बदलाव नहीं किया जाना चाहिए  •  BCCI

मुंबई इंडियंस के प्रमुख कोच और पूर्व श्रीलंकाई कप्तान महेला जयवर्दना का मानना है कि न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ मैच में रोहित शर्मा को ओपनिंग पर ना भेजकर भारतीय टीम ने अपने पैरों पर ख़ुद कुल्हाड़ी मारी है।
ईएसपीएनक्रिकइंफ़ो टाइमआउट कार्यक्रम में उन्होंने कहा, "आप अपने बल्लेबाज़ी क्रम को लेकर लचीले हो सकते हैं, लेकिन अपने शीर्ष तीन से आपको खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। अधिकतर टीमें ऐसा ही करती हैं, उनका शीर्ष क्रम लगभग निश्चित है। ये ऐसे खिलाड़ी हैं, जो आपके लिए मैच का मोमेंटम तैयार करते हैं। तीसरे नंबर का बल्लेबाज़ पारी को एंकर करता है। इसके बाद के बल्लेबाज़ खेल की गति को बढ़ाते हैं।"
जयवर्दना का अब भी मानना है कि भारतीय टीम बेहतर करती अगर रोहित ऊपर आते। उन्होंने कहा, "वह टी20 में लंबे समय से यही भूमिका निभा रहे हैं, वहीं विराट कोहली आईपीएल में ओपनिंग और भारत के लिए नंबर तीन पर खेलते हैं। मुझे लगता है कि अगर बदलाव करना था तो केएल राहुल को नंबर चार पर भेज देते क्योंकि वह पहले ऐसा कर चुके हैं और वह बदलाव को बहुत जल्दी ही अपना लेते हैं।"
जयवर्दना ने आगे कहा कि अगर भारतीय टीम की शुरुआत सही होती तो नंबर चार पर ऋषभ पंत ही सबसे अच्छे बल्लेबाज़ होते क्योंकि बाएं हाथ के स्पिनर मिचेल सैंटनर और लेग स्पिनर ईश सोढ़ी के सामने वह मनचाहे ढंग से शॉट खेलने की क्षमता रखते हैं।
उन्होंने कहा कि बेहतर होता अगर टीम इंडिया दो से तीन बल्लेबाज़ों के बल्लेबाज़ी क्रम में परिवर्तन करने की बजाय सिर्फ़ किसी एक बल्लेबाज़ के क्रम से छेड़छाड़ करती। ख़ासकर जब आपके सामने न्यूज़ीलैंड जैसा बेहतरीन गेंदबाज़ी आक्रमण हो तो आप अधिक प्रयोग के बारे में नहीं सोच सकते। उन्होंने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि विश्व कप के बीच में इतने महत्वपूर्ण मैच के दौरान खिलाड़ियों की भूमिकाएं बदलकर उन्हें नई भूमिकाएं दी गईं।
जयवर्दना ने कहा, "अगर वह खिलाड़ी अपने स्थान पर असफल होते तो उन पर सवाल भी खड़े किए जा सकते थे। जब आप विश्व कप जैसे किसी टूर्नामेंट में जाते हैं तो आपको अधिकतर चीज़े निश्चित कर के जाना होता है। सबको अपनी भूमिकाएं पता होना चाहिए और अगर कोई अपनी भूमिका निभाने में असफल होता है तो उसके लिए विकल्प भी तैयार होने चाहिए। मेरे ख़्याल से भारत यहां पर ही पीछे रह गया। उनके पास निश्चित योजनाओं की कमी थी।"
जयवर्दना ने माना कि पाकिस्तान से हारने के बाद खिलाड़ियों के खेल में 'असफलता का डर' भी घुसता हुआ दिखा। लगातार दो मैच हारने के बाद भारत के सेमीफ़ाइनल में पहुंचने की संभावना लगभग समाप्त हो गई हैं। हालांकि अभी भी एक छोटी सी गणितीय संभावना बाक़ी है। जयवर्दना का मानना है कि अगर अब भी भारतीय टीम सेमीफ़ाइनल में पहुंच जाती है तो वह वापसी करने की क्षमता रखती है।