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दिनेश कार्तिक की सफल वापसी का पंत के लिए क्या मायने हैं

उनके विकेटकीपर होने का इससे कोई लेना-देना नहीं है

जैसा कि समकालीन विकेटकीपरों से उम्मीद किया जाता है, ऋषभ पंत और दिनेश कार्तिक ने करियर को आपस में जोड़ा है। पंत का टेस्ट डेब्यू 2018 में इंग्लैंड में हुआ, जब कार्तिक ने पहले दो टेस्ट में रन नहीं बनाया। इस तरह से अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में कार्तिक की कई वापसी में से एक का समापन हो गया। इंग्लैंड की अपनी अगली यात्रा पर पंत और कार्तिक 2109 विश्व कप सेमीफ़ाइनल में 5 रन पर तीन विकेट गंवा चुकी टीम इंडिया को नाजुक स्थिति से उबारने की कोशिश कर रहे थे।
अब पंत, कार्तिक की पूर्व आईपीएल टीमों में से एक की कप्तानी करते हैं, जिससे बचना मुश्किल है क्योंकि कार्तिक आसपास रहे हैं। जिस तरह कार्तिक खेलने के लिए आईपीएल में घूमे हैं, उसी तरह वह भारत के पूरे बल्लेबाज़ी क्रम में एक ऐसी भूमिका की तलाश में रहे हैं जिसपर वह अच्छा प्रदर्शन कर सकें।
कार्तिक की हालिया वापसी उनकी अब तक की सबसे अच्छी स्पष्ट रोल के साथ आई है, यही वजह है कि पंत के प्रदर्शन का उनके भाग्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। हालांकि, उनकी साधारण वापसी के तीन साल बाद पंत के लिए एक बेहद सफल टेस्ट करियर शुरू करने का मार्ग प्रशस्त हुआ। कार्तिक की सफल वापसी से पंत के टी20 विश्व कप में जगह बनाने की संभावना थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन उन कारणों से नहीं जिनकी आप कल्पना करेंगे।
उनके विकेटकीपर होने का इससे कोई लेना-देना नहीं है। भारत के प्लान ए में वे पूरी तरह से अलग दो रोल के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। कार्तिक एक विशेष रोल के लिए आए हैं जहां टीम यह सुनिश्चित करना चाहती है कि वह 14वें ओवर से पहले न आएं। दूसरी ओर पंत पारी की शुरुआत में विस्फोटक बल्लेबाज़ी करेंगे, जिस कारण वह काफ़ी पहले उतरेंगे। उनसे पारी की शुरुआत भी कराई जा सकती है, जो उन्होंने जूनियर क्रिकेट में सफलतापूर्वक किया है, लेकिन इतने सारे शीर्ष क्रम के बल्लेबाज़ों के रहते हुए उन्हें वह स्थान देना आसान नहीं है।
किसी ऐसी स्थिति में जहां भारत हार्दिक पंड्या के रूप में एक और फ़िनिशर खोजने में विफल रहता है, तो पंत या सूर्यकुमार यादव फ्लोटर की भूमिका निभाते। अब जब भारत को आदर्श संयोजन मिल गया है - पंड्या, कार्तिक और रवींद्र जाडेजा या अक्षर पटेल निचले मध्य क्रम में खेल रहे हैं - पंत के पास फ़्लोटर का विकल्प नहीं है। फ़िनिशर की भूमिका में कार्तिक का फ़िट होना भारत के लिए अच्छी ख़बर है लेकिन पंत और अन्य मध्य और शीर्ष क्रम के उम्मीदवारों के लिए उतनी अच्छी ख़बर नहीं है।
अब अगर हम रोहित शर्मा और विराट कोहली की जगह पक्का मानकर संभावित परिदृश्य की कल्पना करें और केएल राहुल से भारत ओपनिंग करवाता है, तो पंत, सूर्यकुमार, संजू सैमसन, श्रेयस अय्यर और इशान किशन के लिए भारत की फ़ुल स्ट्रेंथ बल्लेबाज़ी क्रम में प्रतिस्पर्धा करने के लिए केवल एक स्थान बचता है।
पंत के पास नंबर 4 स्लॉट के लिए बहुत कुछ है। कीपिंग के मामले में वह सर्वश्रेष्ठ विकेटकीपर हैं, और कई बार संघर्ष करते दिखने के बावजूद उनके आंकड़े अभी भी उतने ख़राब नहीं हैं। वह हाल ही में समाप्त हुए आईपीएल सीज़न में 30 से अधिक औसत और 150 से अधिक का स्ट्राइक रेट रखने वाले केवल 10 खिलाड़ियों में शामिल हैं। उनमें से आठ बल्लेबाज़ों ने 300 या उससे अधिक रन बनाए। उन आठ में से पंत एकमात्र ऐसे खिलाड़ी थे जिन्होंने 50 से अधिक का स्कोर नहीं बनाया।
जिसका मतलब है कि कोई भी "मैच जीतने वाली" पारी दिखाई नहीं दे रही है क्योंकि उनकी पारी लंबी नहीं है या वैसी नहीं जो पहले की असफलताओं को छिपा सके, जो परंपरागत रूप से समीक्षकों के दिमाग़ में रहती है। ये आंकड़े कंसिस्टेंसी दिखान के लिए अच्छे हैं, लेकिन यदि आप 80 का स्कोर- पहले बल्लेबाज़ी कर रहे हों या चेज़ करे रहे हों- नहीं करते हैं यह स्मृति में नहीं रहता है। ऐसा नहीं है कि पंत केवल 30 रन बनाने के लिए जाते हैं, लेकिन जिस स्ट्राइक रेट पर उन्होंने रन बनाए उनके पिछले दो सीज़न से काफ़ी बढ़िया रहा लेकिन इसमें किसी भी समय आउट होने का जोख़िम शामिल था। यह साफ़ है कि उनकी टीमें चाहती हैं कि वह एक ख़ास तरीक़े से खेलें। यह ठीक है अगर पंत तेज़ी से रन बटोरने के प्रयास में आउट हो जाते हैं, जब वे यह मानकर चलें कि 13 वें ओवर के बाद फ़िनिशर का रोल अदा करना है।
इस बात से इनक़ार नहीं किया जा सकता है कि ऑफ़ स्टंप से काफ़ी बाहर की गेंदों ने पंत के ख़िलाफ़ देर से काम किया, लेकिन वह इससे बेख़बर नहीं होंगे। वह इस रणनीति का मुक़ाबला करने के लिए राहुल द्रविड़ और अन्य कोचों के साथ काम करेंगे। साउथ अफ़्रीका के ख़िलाफ़ अंतर्राष्ट्रीय सीरीज़ बेशक़ पंत के लिए अच्छी नहीं रही, लेकिन यह टीम मैनेजमेंट बिना सोचे-समझे फ़ैसला नहीं लेने वाली है। साथ ही पंत बाएं हाथ के बल्लेबाज़ हैं, जो उनके लिए बड़े पैमाने पर काम करता है अगर भारत रोहित, राहुल और कोहली के शीर्ष तीन के साथ खलेता है।
रोहित और कोहली दोनों को भारतीय प्लेइंग-XI में होना चाहिए या नहीं यह एक और दिन की कहानी है। विश्व कप में अपेक्षित परिस्थितियां और उन परिस्थितियों में उनका अनुभव उनके पक्ष में जाता है। तेज़, उछाल वाली पिचों पर अभ्यस्त होने में कुछ समय लग सकता है, और टी 20 विश्व कप टीमों को जल्दी बाहर करने के लिए बदनाम है। यह कहने के बाद, क्या दो एक जैसे बल्लेबाज़ों का होना एक लग्जरी है जो बीच के ओवरों में तेज़ी से रन नहीं बनाते हैं?
रोहित और द्रविड़ के लिए यह एक मुश्किल और अविश्वसनीय निर्णय है, लेकिन अगर रोहित और कोहली दोनों पारी की शुरुआत करेंगे, तो पंत और सूर्यकुमार बल्लेबाज़ी क्रम में संभवतः उस अंतिम स्थान के लिए प्रितस्पर्धा करेंगे। उनमें से किसी एक के लिए बाहर बैठना कठिन होगा, लेकिन भारत को खुशी होगी कि उन्हें एक विशेषज्ञ फ़िनिशर मिल गया है, और उन्हें अपने किसी मिडिल ओवरों के बल्लेबाज़ को डेथ-ओवर की भूमिका में धकेलना नहीं पड़ेगा।

सिद्धार्थ मोंगा ESPNcricinfo के असिस्टेंट एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के एडिटोरियल फ़्रीलांसर कुणाल किशोर ने किया है।