कई बार जब आपके पास उनके बारे में सोचने के लिए ज़्यादा समय नहीं होता, तो चीज़ें आसान हो जाती है। केएल राहुल इस बात से सहमत हो सकते हैं।

काउंटी सिलेक्ट इलेवन के ख़िलाफ़ अभ्यास मैच में नंबर पांच पर बल्लेबाज़ी करते हुए शतक लगाने के बाद भी केएल राहुल 2 अगस्त को यह सोच के साथ ट्रेंट ब्रिज पर अभ्यास सत्र के लिए गए थे कि वह पहला टेस्ट मैच नहीं खेलेंगे। राहुल के सबसे अच्छे दोस्तों में से एक, मयंक अग्रवाल अपने सलामी जोड़ीदार रोहित शर्मा के साथ नेट में बल्लेबाज़ी कर रहे थे। 15 मिनट बाद, मोहम्मद सिराज की बाउंसर गेंद अग्रवाल के सिर पर जा लगी और वह कनकशन के कारण पहले टेस्ट मैच से बाहर हो गए।

उसके बाद राहुल के लिए चीज़ें तेज़ी से आगे बढ़ीं और उन्हें उस सत्र में बल्लेबाज़ी करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया था। दो दिन बाद, टॉस पर कप्तान विराट कोहली ने कहा कि राहुल रोहित के साथ ओपनिंग करेंगे।

इंग्लैंड के पिछले दौरे पर तेज़ गेंदबाज़ों के ख़िलाफ़ राहुल की तकनीकी गलतियों का खुलासा हुआ था। पहले चार टेस्ट में राहुल की औसत मात्र 14.12 थी, और पूरी सीरीज़ में वह पांच बार बोल्ड और तीन बार एलबीडब्ल्यू आउट हुए थे। उस खराब फ़ॉर्म के बावजूद राहुल ने ओवल मैदान पर 149 रन बनाकर सीरीज़ को अच्छे ढंग से समाप्त किया था। उसके बाद ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज़ में उन्हें असफलताएं मिली और चयनकर्ताओं ने राहुल को टीम से बाहर करने का फ़ैसला किया।

इस निराशा के दौर से गुज़रते हुए भी राहुल अपना काम करते चले गए। उन्होंने आईपीएल और भारत के लिए सफ़ेद गेंद की क्रिकेट में खूब रन बनाए और टेस्ट टीम में वापसी की। इस बार उन्हें ओपनर नहीं बल्कि मध्य क्रम के बल्लेबाज़ के तौर पर देखा जाने लगा। तेज़ी से रन बनाने की क्षमता और मैदान के चारों ओर शॉट लगाने की अपनी क़ाबिलियत को ध्यान में रखते हुए टीम प्रबंधन सहमत थे कि राहुल अब मध्य क्रम में एक बढ़िया विकल्प हो सकते हैं क्योंकि रोहित शर्मा के साथ शुभमन गिल और पृथ्वी शॉ को सलामी बल्लेबाज़ी के लिए चुना गया था।

लेकिन गिल चोटिल होने के बाद भारत लौट आए हैं और श्रीलंका सीरीज़ के बाद सीधे इंग्लैंड पहुंचे पृथ्वी शॉ अब भी क्वारंटीन में है। बैक-अप ओपनर अग्रवाल के कनकशन की वजह से पहले टेस्ट से बाहर होने के कारण राहुल के लिए शीर्ष क्रम के दरवाज़े फिर से खुल गए। हो सकता है कि उन्होंने 2018 में चीज़ों को बहुत ज़्यादा सोच-समझकर उन्हें उलझा दिया हो, लेकिन तीन साल बाद, 29 साल की उम्र में, राहुल अधिक अनुभवी, अधिक आश्वस्त और अधिक जिम्मेदार हैं। शायद आईपीएल में पंजाब किंग्स की कप्तानी संभालने के बाद उन्हें वह अतिरिक्त आत्मविश्वास मिला है।

यह सब इसलिए मायने रखता है क्योंकि टेस्ट क्रिकेट में ओपन करना बहुत मुश्किल काम है, खासकर इंग्लैंड की परिस्थितियों में जहां गेंद पूरा दिन स्विंग करती है। नई गेंद के ख़िलाफ़ राहुल को एक मुश्किल स्थिति में डाला गया और उन्हें भारत को इस सीरीज़ में अच्छी शुरुआत दिलाने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई।

स्वाभाविक रूप से आक्रामक और वर्तमान में क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ स्ट्रोक निर्माताओं में से एक होने के नाते, राहुल और रोहित के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी अपने उत्साह पर अंकुश लगाना। विशेष रूप से इंग्लैंड में एक सलामी बल्लेबाज़ के तौर पर आप को धैर्य रखना पड़ता है। मुरली विजय से ही पूछ लो। 2014 के इंग्लैंड दौरे में ट्रेंट ब्रिज और लॉर्ड्स में खेले गए पहले दो टेस्ट में विजय ने कुल मिलाकर पहली पारी में 122 और दूसरी पारी में 101 गेंदें छोड़ी थी। विजय ने नॉटिंघम में पहली पारी में 146 रन और फिर लॉर्ड्स में 95 रन बनाए थे और भारत को पहला टेस्ट ड्रॉ कराने के बाद सीरीज़ में 1-0 की बढ़त दिलाई थी।

इस टेस्ट में राहुल ने अपने अंदर के "साधु" को जगाया - जो क्रिकेट की बिरादरी में विजय का उपनाम भी है। पहली पारी में राहुल ने 76 गेंदें छोड़ी, जो 2018 के उस दौरे के बाद से इंग्लैंड में एक पारी में किसी भी भारतीय बल्लेबाज़ द्वारा छोड़ी गई दूसरी सबसे ज़्यादा गेंदें है। यह 86 गेंदों के आंकड़े से महज़ 10 गेंदे कम है जो राहुल ने 2018 में पूरे पांच टेस्ट मैच मिलाकर छोड़ी थी जहां उन्होंने 10 पारियां खेली थी और 450 गेंदों का सामना किया था।

उन सभी गेंदों को छोड़ने के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण यह था कि राहुल जानते थे कि उनका ऑफ़-स्टंप कहा है। इससे राहुल को खेलने के लिए सही गेंदें चुनने का मौका मिला। और तो और गुरुवार को पहले घंटे में, इंग्लैंड के तेज़ गेंदबाज़ों ने ऑफ़ स्टंप के बाहर अच्छी गेंदबाज़ी की और बहुत कम फुल गेंदें डाली। रन आसानी से नहीं आ रहे थे पर राहुल धैर्यवान रहे। उन्होंने परिस्थितयों का सम्मान किया और अपना समय लिया।

इससे राहुल को ऑली रॉबिन्सन के साथ चल रही प्रतियोगिता में मदद मिली जो कई बार शब्दों का आदान-प्रदान करके उनकी एकाग्रता को भंग करने की कोशिश कर रहे थे। राहुल जवाब देने से कतराने वालों में से नहीं है, लेकिन इस बार राहुल शांत नज़र आए और उन्होंने अपने बल्ले से जवाब दिया। रॉबिन्सन का प्लान था कि वह चौथे स्टंप पर गुड लेंथ से गेंदों को बाहर निकालेंगे और राहुल को शरीर से दूर खेलने का आमंत्रण देंगे। राहुल ने उसे अस्वीकार किया - वह आगे की ओर अपना पैर निकालते और लाइन को पढ़ने के बाद आत्मविश्वास के साथ गेंद को कीपर के पास जाने देते। राहुल इस बात से भी वाकिफ़ थे कि रॉबिन्सन के लंबे कद से वह गेंद के उछाल पर भरोसा कर सकते हैं।

2018 की तुलना में राहुल ने कुछ तकनीकी बदलाव भी किए हैं। स्काई क्रिकेट के लिए टीवी कॉमेंट्री पर भारत के पूर्व कीपर दिनेश कार्तिक के अनुसार राहुल ने अब बल्लेबाज़ी के लिए खड़े रहते समय अपने पैरों के बीच की दूरी को कम किया है। साथ ही राहुल ने अपना बैकलिफ़्ट भी छोटा और सीधा किया है। इसके अलावा आगे का पैर ज़्यादा बाहर निकालकर वह गेंद को सही समय पर अपने बल्ले के पूरे चेहरे के साथ खेलने का प्रयास कर रहे हैं।

बेशक राहुल ने कुछ गलतियां भी की। दो बार जेम्स एंडरसन की गेंद पर राहुल के बल्ले का बाहरी किनारा लगा। दोनों बार गेंद स्लिप की ओर गई और दोनों बार राहुल बच गए। पहली बार 52 रन के स्कोर पर डॉम सिबली ने अपनी बाईं ओर गेंद को टपकाया और फिर 78 रन पर जो रूट गेंद को पकड़ने में विफल रहे। लंच के बाद पहले ही ओवर में रूट ने राहुल का वह कैच छोड़ा था। इंग्लैंड की योजना अब फुल गेंदों के साथ स्टंप्स पर आक्रमण करने की थी। वह भारतीय बल्लेबाज़ों को ज़्यादा से ज़्यादा गेंदें खिलाना चाहते थे।

लंच के बाद अपने दूसरे ओवर में एंडरसन अपनी योजना पर कायम रहे। राहुल ने पहले एक ऑन ड्राइव लगाई और फिर कवर ड्राइव के साथ चौका बटोरा। एंडरसन ने एक छोटी गेंद के साथ राहुल को पीछे धकेला जो उछाल के साथ उनके कंधों के पास आई थी। दो गेंदों बाद एंडरसन ने राहुल को चौथे स्टंप पर लेंथ गेंद डालकर लालच दिया। इस प्रकार की गेंदों को राहुल अब तक पैर आगे निकालकर, अंतिम समय तक देखने के बाद छोड़ रहे थे। पर इस बार वह ड्राइव लगाने गए और एंडरसन के जाल में फंस गए।

जब एंडरसन और इंग्लैंड की टीम जश्न मना रही थी, राहुल एक पल के लिए वहीं खड़े रहे। उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था। वह अपनी गलती से नाराज़ थे। उन्हें ड्रेसिंग रूम में वापस भेजने के लिए अंपायर को अपनी उंगली उठानी पड़ी।

जैसा कि ईएसपीएनक्रिकइंफ़ो के मैच डे विशेषज्ञ वीवीएस लक्ष्मण ने कहा, यह राहुल के लिए एक 'सफलतापूर्ण पारी' थी। टीम में अपनी वापसी पर राहुल ने दिखाया कि उन्होंने टेस्ट क्रिकेट से दूर अपने समय में बहुत कुछ सीखा है जैसे कि परिस्थितियों का सम्मान करना, प्रारूप का सम्मान करना, मैच की स्थिति को पढ़ना और ढीली गेंद की प्रतीक्षा करना।

भले ही यह मौका अपने मित्र के साथ हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद आया हो, राहुल ने साबित कर दिया है कि वह इस स्थान के लिए एक प्रबल दावेदार ज़रूर हैं।

नागराज गोलापुड़ी ESPNcricinfo के न्यूज़ एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर (@jiwani_afzal) ने किया है।