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भारत, इंग्लैंड और नॉकआउट मैचों में दबाव की कहानी

दोनों टीमें हालिया समय में सीमित ओवर की सर्वश्रेष्ठ टीमें रही हैं लेकिन दोनों के पास वैश्विक ख़िताबों का अभाव है

2013 में इंग्लैंड के ख़िलाफ़ चैंपियंस ट्रॉफ़ी फ़ाइनल जीतने के बाद भारत छह आईसीसी टूर्नामेंट्स के नॉकआउट दौर में पहुंचा है, लेकिन उसे एक भी टूर्नामेंट में ख़िताबी जीत हासिल नहीं हुई है। वहीं इंग्लैंड ने इस दौरान 2019 वनडे विश्व कप जीता था।
2013 के बाद से आईसीसी के पांच बड़े वैश्विक टूर्नामेंट हुए हैं, जिसमें चार अलग-अलग टीमें विजेता हुई हैं। एक मुक़ाबला तो ऐसा भी हुआ था कि सुपर ओवर के बाद भी विजेता का पता नहीं चल पाया था। यह बताता है कि वैश्विक क्रिकेट पर अब किसी एक या देश का एकाधिकार नहीं है।
2013 में चैंपियंस ट्रॉफ़ी जीतने के बाद भारत ने आईसीसी के वैश्विक टूर्नामेंट में आठ नॉकआउट मुक़ाबले खेले हैं, जिसमें उनका रिकॉर्ड 3-5 का रहा है। वहीं इंग्लैंड के लिए यह रिकॉर्ड 3-3 का है।
इंग्लैंड के ऑलराउंडर मोईन अली का मानना है कि उनकी टीम को और भी बड़े ख़िताब जीतने की ज़रूरत है ताकि उन्हें एक महान टीम के रूप में भविष्य में याद किया जाए। उनके कप्तान जॉस बटलर भी उनसे सहमत दिखते हैं।
बटलर ने कहा, "हम सिर्फ़ वो टीम नहीं बनना चाहते हैं, जो सिर्फ़ अच्छा क्रिकेट खेले। आपको कुछ हासिल करना होगा। सेमीफ़ाइनल और फ़ाइनल तो ठीक है, लेकिन अगर आप टूर्नामेंट जीतते हैं तो कुछ और ही बात होती है। अब हम वही हासिल करना चाहते हैं। हम जिस तरीक़े से अभी खेल रहे हैं, हमारे पास ऐसा करने का बेहतरीन मौक़ा है। हमें अपनी योग्यता पर विश्वास है और अगर हम अपनी क्षमता के अनुसार अपना सर्वश्रेष्ठ दें तो हम टूर्नामेंट जीत सकते हैं।"
भारत और इंग्लैंड के बीच सेमीफ़ाइनल मुक़ाबला ऐडिलेड ओवल में होना है, जहां पर बांग्लादेश से हारकर इंग्लैंड की टीम 2015 के वनडे विश्व कप के शुरुआती दौर से ही बाहर हो गई थी। बटलर तब टीम के युवा खिलाड़ियों में से एक थे और उन्हें यह हार अब भी याद है।
वह कहते हैं, "इस हार के बाद इंग्लैंड क्रिकेट के माइंडसेट में ही परिवर्तन हो गया। अब हम जिस तरह से सफ़ेद गेंद की क्रिकेट खेलते हैं, उससे हमें बेहतर परिणाम मिला है। इससे हमारा विश्वास और भी बढ़ा है। पाकिस्तान दौरे पर भी हमें कुछ युवा खिलाड़ी मिले थे, जिन्होंने अच्छा प्रदर्शन कर विश्वास जगाया था। यह दिखाता है कि इंग्लिश क्रिकेट अब बदल रहा है और मैं अपने आपको ख़ुशक़िस्मत मानता हूं कि मैं इस यात्रा का एक हिस्सा हूं।"
बटलर का मानना है कि भले ही यह सेमीफ़ाइनल मैच है, लेकिन कुछ चीज़ों के अलावा ज़्यादा कुछ नहीं बदलेगा। वह कहते हैं, "हां, चूंकि यह सेमीफ़ाइनल है तो प्रेस बॉक्स में अधिक लोग होंगे, लेकिन गेम तो पहले की ही तरह होगा। कोई मिसफ़ील्ड कर सकता है, कोई वाइड गेंद फेंक सकता है, कोई कैच छोड़ सकता है। जो चीज़ें एक मैच में होती हैं, वह सेमीफ़ाइनल में भी होंगी।"
वहीं अगर भारत की बात की जाए तो कप्तान रोहित शर्मा कहते हैं, "नॉकआउट मैच बहुत महत्वपूर्ण होते हैं और हम इसे समझते हैं। नॉकआउट मैच का मतलब यही होता है कि आपके पास सिर्फ़ एक ही मौक़ा है और ग़लती करने की गुंजाइश बहुत कम है। लेकिन मुझे यह भी लगता है कि किसी भी खिलाड़ी का करियर किसी एक नॉकआउट मैच से परिभाषित नहीं हो सकता है। कोई भी खिलाड़ी इस स्टेज तक पहुंचने के लिए साल भर मेहनत करता है, इसलिए कोई एक मैच किसी का भाग्य निर्धारित नहीं कर सकता। एक खिलाड़ी और एक टीम के रूप में हमें इस स्तर तक पहुंचने पर गर्व है।"

सिद्धार्थ मोंगा ESPNcricinfo में असिस्टेंट एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर दया सागर ने किया है।