डेविड वॉर्नर और सनराइज़र्स हैदराबाद एक दूसरे से जुड़े हुए हैं। उनका रिश्ता इतना मज़बूत है कि आप उन्हें एक दूसरे का पर्यायवाची भी कह सकते हैं। 2016 में टीम ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का ख़िताब वॉर्नर की कप्तानी में जीता था। उन्होंने 142.59 के बढ़िया स्ट्राइक रेट से बल्लेबाज़ी करते हुए उनके लिए 4014 रन बनाए और तेलुगु पॉप संस्कृति से जुड़े अपने सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए स्थानीय जनता का दिल जीत लिया।

हालांकि यह सीज़न उनके लिए निराशाजनक रहा है। कप्तान के रूप में सीज़न की शुरुआत करने के बाद ख़राब नतीजों के चलते यह ज़िम्मेदारी केन विलियमसन को सौंपी गई। इसके अलावा उन्हें प्लेइंग XI में अपने स्थान से भी हाथ धोना पड़ा। अब तो ऐसी नौबत आ गई है जहां टीम ने उन्हें रॉयल्स के ख़िलाफ़ मैच से पहले होटल में ही छोड़ दिया। इस साल सनराइज़र्स की मात्र दूसरी जीत का जश्न वॉर्नर ने मैदान पर नहीं बल्कि अपने कमरे में टीवी पर देखकर मनाया।

इंस्टाग्राम पर वॉर्नर ने अपनी जगह एकादश में खेल रहे जेसन रॉय के प्रदर्शन की सराहना की। साथ ही उन्होंने संकेत दिए कि शायद उनका सीज़न समाप्त हो चुका है और वह बचे हुए मैचों के लिए भी मैदान पर नहीं आएंगे। सनराइज़र्स के मुख्य कोच ट्रेवर बेलिस ने लगभग इस बात की पुष्टि की और उन्होंने वॉर्नर को होटल में ही रहने देने के पीछे का कारण भी बताया।

उन्होंने कहा, "हम फ़ाइनल में जगह नहीं बना सकते हैं इसलिए हमने यह फ़ैसला किया है कि हम युवा खिलाड़ियों को न केवल मैच खेलने का बल्कि मैदान पर आकर समय बिताने का मौक़ा देंगे। वह (वॉर्नर) इकलौते अनुभवी खिलाड़ी नहीं हैं जिसे हमने होटल में छोड़ा था (केदार जाधव और शाहबाज़ नदीम भी उस सूची में शामिल थे)। हमारे पास कई ऐसे युवा खिलाड़ी हैं जिन्हें मैदान पर उतरने का मौक़ा ही नहीं मिला है। भले ही रिज़र्व के तौर पर, हम उन्हें टीम के साथ यात्रा करने और मैच को अनुभव करने का अवसर देना चाहते थे। यह आने वाले मैचों में भी जारी रह सकता है।"

यह देखते हुए कि सनराइज़र्स ने एक सीज़न में वॉर्नर को दो बार टीम से बाहर किया है और अब वह मैदान पर रणनीति बनाने वाले समूह का हिस्सा नहीं है, अटकलें लगाई जा रही है कि शायद यह इस खिलाड़ी और फ़्रेंचाइज़ी के बीच सप्रेम रिश्ते का अंत हो सकता है। बेलिस ने कहा कि इसके बारे में फ़ैसला भविष्य में लिया जाएगा।

बेलिस ने कहा, "इस विषय पर अभी चर्चा नहीं हुई है। यह बड़े ऑक्शन से पहले आख़िरी सीज़न है। आगे चलकर यह सभी निर्णय लिए जाएंगे। लंबे समय से वह हैदराबाद सनराइज़र्स के लिए अपना योगदान देते आए हैं और उनके द्वारा बनाए गए रनों के लिए हम सब उनकी बहुत इज़्ज़त करते हैं। मुझे यकीन है कि वह आगे भी इस टूर्नामेंट में बहुत रन बनाएंगे।"

ये ऐसे फ़ैसले हैं जिनके बारे में तभी सोचा जा सकता है जब ऑक्शन की शर्तें स्पष्ट हों: मुख्य रूप से कितने खिलाड़ियों को रिटेन किया जा सकता है और कितने आरटीएम कार्ड टीमों के पास उपलब्ध होंगे।

सिद्धार्थ मोंगा ESPNcricinfo में असिस्टेंट एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर अफ़्ज़ल जिवानी ने किया है।