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उनादकट : 'सौराष्ट्र की सफलता में योगदान देना मेरे दिल के क़रीब है'

बाएं हाथ के गेंदबाज़ ने भारतीय टीम छोड़कर रणजी फ़ाइनल खेलने का निर्णय लिया था

सौराष्ट्र के कप्तान जयदेव उनादकट ने फ़ाइनल में 44 रन देकर तीन विकेट झटके  •  PTI

सौराष्ट्र के कप्तान जयदेव उनादकट ने फ़ाइनल में 44 रन देकर तीन विकेट झटके  •  PTI

सौराष्ट्र के कप्तान जयदेव उनादकट के लिए दिल्ली में भारतीय टेस्ट दल को छोड़कर रणजी ट्रॉफ़ी फ़ाइनल खेलने के फ़ैसले को लेकर कोई दो-राहे नहीं थी।
ईडन गार्डंस पर बंगाल के विरुद्ध पहले दिन का खेल समाप्त होने के बाद उनादकट ने ईएसपीएनक्रिकइंफ़ो को बताया, "मेरी वापसी और सफलता में सौराष्ट्र का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मैंने भारतीय टीम प्रबंधन से बातचीत की और उन्होंने मेरे फ़ैसले का समर्थन किया। सौराष्ट्र की सफलता में योगदान देना मेरे दिल के क़रीब है। "
उनादकट ने मैच की शुरुआत में ही अपना योगदान देना शुरू कर दिया। टॉस जीतकर उन्होंने बंगाल को पहले बल्लेबाज़ी करने के लिए आमंत्रित किया और पहले ही ओवर में अनुभवी अभिमन्यु ईश्वरन को आउट किया। उसी स्पेल में उन्होंने विपक्षी कप्तान मनोज तिवारी को गली में कैच करवाया। उनादकट ने 44 रन देकर तीन विकेट लिए और बंगाल पहली पारी में 174 पर सिमट गई। 2017-18 के फ़ाइनल के बाद पहली बार किसी टीम ने पहले गेंदबाज़ी करने का निर्णय लिया और उनादकट ने कहा कि पहले दिन गेंदबाज़ी के लिए अनुकूल परिस्थितियों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया था।
उनादकट ने कहा, "पिच पर मौजूद घास ने फ़ाइनल में टॉस के फ़ैसले को आसान कर दिया। लेकिन शुरआती विकेट झटकने के लिए अन्य गेंदबाज़ों का कौशल आवश्यक था। हम जानते थे कि हमें शुरुआत में पिच की मदद का फ़ायदा उठाना था क्योंकि आगे जाते हुए पिच सपाट हो गई। हम जानते थे कि ऐसा होगा और इसलिए (पिच पर) नमी रहते हुए उनके बड़े विकेट निकालना ज़रूरी था।"
उन्होंने आगे कहा, "दाएं हाथ के बल्लेबाज़ों के विरुद्ध मेरी योजना राउंड द विकेट से आने की होती है। दाएं हाथ के बल्लेबाज़ के लिए बाहर जाती गेंद को खेलना कठिन हो सकता है।"
यह पहला मौक़ा है जब रणजी ट्रॉफ़ी में पूर्ण डीआरएस प्रणाली का इस्तेमाल किया जा रहा है। सौराष्ट्र ने दो बार इसका असफल इस्तेमाल किया। जब एक बार टीम ने रिव्यू नहीं लेने का फ़ैसला किया तो वह शाहबाज़ अहमद को जीवनदान दे बैठे। शाहबाज़ 38 रन पर खेल रहे थे और रिप्ले में देखा गया कि रिव्यू लेने पर वह पगबाधा हो जाते। शाहबाज़ ने कुल मिलाकर 69 रन बनाए।
कप्तान उनादकट ने कहा कि घरेलू मैचों में डीआरएस उनकी टीम के लिए नया है और ग़लतियां सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा, "जिस तरह पहली पारी ख़त्म हुई, यह चिंता का विषय नहीं है। ऐसा बहुत कम होता है जहां घरेलू खिलाड़ी डीआरएस के साथ खेलते हैं। यह उनके लिए नया है और ग़लतियां हो सकती हैं लेकिन डीआरएस का लागू होना एक सकारात्मक बात है।"

मनोज तिवारी : 'मैच अभी ख़त्म नहीं हुआ'


1989-90 के बाद अपने पहले रणजी ट्रॉफ़ी ख़िताब का पीछा कर रही मेज़बान टीम बंगाल भले ही बैकफ़ुट पर हो, उनके कप्तान मनोज तिवारी को पहली पारी में बढ़त लेने की उम्मीद है।
तिवारी ने पत्रकारों से कहा, "मैच अभी ख़त्म नहीं हुआ। अब भी संभावना है कि हम उन्हें ऑलआउट कर बढ़त ले सकते हैं। मैं ऐसा कह रहा हूं क्योंकि मुझे लगता है कि कल भी पिच आज की तरह होगी। हम पहले ही सुधार के क्षेत्रों पर चर्चा कर चुके हैं। यह आठ विकेट लेने वाली गेंदों के बारे में है और हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि कल रन ख़र्च न हों।"
कोलकाता में शाम के समय अंधेरा जल्दी हो जाता है, इसलिए यहां दिन के मैच आधे घंटे पहले शुरू होते हैं। इससे सुबह गेंदबाज़ अधिक हावी होते हैं और बंगाल इसी का फ़ायदा उठाना चाहता है।
पहले छह ओवरों में सौराष्ट्र ने 38 रन बना लिए थे। अगले 11 ओवरों में बंगाल ने केवल 45 रन ख़र्च किए और दो विकेट झटके। इन दोनों चरणों के बीच का अंतर छठे और सातवें ओवर के बीच तिवारी द्वारा बुलाया गया हडल था।
तिवारी ने कहा, "थोड़ी बाउंड्रियां लगने के बाद सभी शांत हो गए थे और उनका मनोबल कम हो गया था। उन्हें यह याद दिलाना ज़रूरी था कि मैच अभी ख़त्म नहीं हुआ है। उन्हें दम के साथ गेंदबाज़ी करने को कहना भी ज़रूरी था। और आपने देखा कि हमें स्टंप्स से पहले दो विकेट मिले।"
उन्होंने आगे कहा, "क्रिकेट दिमाग़ का खेल है। कभी-कभी आप लय में नहीं होते। गेंद को देरी से छोड़ने पर वह शॉर्ट हो जाती है, जल्दी छोड़ने पर वह ओवरपिच हो जाती है। यह पूरे सीज़न में हमारे गेंदबाज़ों की सबसे ख़राब शुरुआत थी लेकिन कोई बात नहीं। हमें कल बेहतर होने की उम्मीद है।"

राजन राज ESPNcricinfo हिंदी में सब एडिटर हैं।