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समिउद्दीन : पैट कमिंस जैसा कोई नहीं

पाकिस्तान के ख़िलाफ़ टेस्ट सीरीज़ में ऑस्ट्रेलियाई कप्तान ने दिखाया कि वह महानतम तेज़ गेंदबाज़ों में से एक हैं

पैट कमिंस ने पाकिस्तान के गैर-मददगार पिचों पर भी जबरदस्त गेंदबाज़ी की  •  AFP/Getty Images

पैट कमिंस ने पाकिस्तान के गैर-मददगार पिचों पर भी जबरदस्त गेंदबाज़ी की  •  AFP/Getty Images

जीवन में अन्याय की कोई कमी नहीं और इस बात का एहसास छोटी छोटी चीज़ों में हमें याद आ जाता है। लेकिन जब आप पैट कमिंस को पूरे लय में गेंदबाज़ी करते हुए देखते हैं तब आपको पता लगता है कि जीवन कितना कठोर और अन्यायी हो सकता है।
हम विश्व क्रिकेट में तेज़ गेंदबाज़ी के एक सुनहरे युग में हैं। कमिंस के साथ गेंदबाज़ी करते हैं जॉश हेज़लवुड, जिनमें ग्लेन मैक्ग्रा और स्टुअर्ट क्लार्क जैसे गेंदबाज़ों की परछाई नज़र आती है। उनके तीसरे साथी हैं मिचेल स्टार्क, जिन्हें आप मिचेल जॉनसन का उन्नत रूपांतर मान सकते हैं।
उधर जसप्रीत बुमराह जैसी प्रतिभा शायद ही किसी तेज़ गेंदबाज़ मैं है और कगिसो रबाडा के एक्शन की सहजता माइकल होल्डिंग जैसे महान गेंदबाज़ की निपुणता की याद दिलाता है। दोनों ऐसे गेंदबाज़ हैं, जो पीढ़ी में एक ही बार दिखते हैं और जिन्हें महानतम गेंदबाज़ों की सूची में जगह मिलेगी।
जेम्स एंडरसन और स्टुअर्ट ब्रॉड तो महानतम गेंदबाज़ हैं ही और जब जोफ़्रा आर्चर चोट से वापस आएंगे तब अपनी दावेदारी को मज़बूत करेंगे। इसके आगे हैं मोहम्मद शमी, इशांत शर्मा, केमार रोच और शाहीन शाह अफ़रीदी - गुणों से भरपूर तेज़ गेंदबाज़ जो या तो एक ज़बरदस्त करियर निभा चुके हैं या ऐसे जीवन की कगार पर हैं।
फिर टीम साउदी, ट्रेंट बोल्ट, काइल जेमिसन और नील वैगनर को भी नहीं भुलाया जा सकता। अपने देश के तीन महानतम गेंदबाज़ों में से दो एक शानदार युवा प्रतिभा और एक कर्मठ प्रतियोगी जिसके जोश की मिसाल विश्व क्रिकेट में नहीं है।
लेकिन यह सब भी कमिंस को गेंदबाज़ी करते देख सोचते होंगे कि जीवन इतनी अन्यायी क्यों है? सिर्फ़ पाकिस्तान में नहीं, आप कमिंस की गेंदबाज़ी का स्तर ऐशेज़ 2021-22 से उठा लीजिए या फिर पिछले साल के भारत दौरे के दौरान या उससे पहले जब न्यूज़ीलैंड, ऑस्ट्रेलिया में खेलने गया था या फिर 2019 की ऐशेज़ सीरीज़। इस सूची का कोई अंत नहीं।
बल्लेबाज़ों को कमिंस की नाइंसाफ़ी का संज्ञान है। कुछ नए खिलाड़ी जैसे इस सीरीज़ में अब्दुल्लाह शफ़ीक़ इसे भुगतकर जान लेते हैं। वैसे तो इस सीरीज़ में शफ़ीक़ अपनी टीम के सर्वाधिक स्कोरर रहे और छह पारियों में केवल एक बार कमिंस का शिकार बने। ऊपर से ऐसा लगता है इस लड़ाई में जीत युवा बल्लेबाज़ की हुई।
लेकिन अगर ऑस्ट्रेलिया इस सीरीज़ में स्लिप्स पर बेहतर कैच पकड़ता तो शफ़ीक़ तीन और बार कमिंस के हाथों आउट होते और इकलौते अवसर पर उनका विकेट भी दर्शाता है कि दरअसल इस जंग में शफ़ीक़ की जीत नहीं हुई थी। कराची में आख़िरी दिन शफ़ीक़ 96 पर खेल रहे थे। लंच से पहले कमिंस गेंदबाज़ी करने आए और शफ़ीक़ को ऑफ़ स्टंप के बाहर खिलाने लगे। जब शफ़ीक़ स्ट्राइक से हटे तो उन्होंने बाबर आज़म को दोनों तरफ़ रिवर्स स्विंग से परेशान किया। फिर जब उन्होंने शफ़ीक़ को गेंद डाली तो बल्लेबाज़ बाहर निकलती हुई गेंद पर ड्राइव लगाने के प्रयास में आउट हुए, क्योंकि वह अस्पष्ट थे कि क्या गेंद रिवर्स के ज़रिए अंदर आएगी और आएगी तो कितना ज़्यादा स्विंग लेते हुए?
मोहम्मद रिज़वान अक्सर कहते हैं कि उन्होंने हेज़लवुड से कठिन तेज़ गेंदबाज़ नहीं खेला। शायद इस सीरीज़ के बाद उनका ह्रदय परिवर्तन होगा। कमिंस के विरुद्ध कराची में पहली पारी में हर गेंद पर वह असहज दिखे। उन सात गेंदों में कमिंस ने उन्हें अपनी गति, उछाल, स्विंग से इतना परेशान किया जैसा शायद ही वह 2021 में 44 अंतर्राष्ट्रीय पारियों में दिखे हों।
मज़े की बात यह है कि इन पारियों के दौरान कमिंस ने ऐसा कुछ भी अद्भुत नहीं किया जो वह हर पारी में नहीं करते हों। उनको सपाट पिचों पर भी कोई बदलाव लाने की विशेष ज़रूरत नहीं पड़ती। जितना भी आप हेज़ेलवुड की तारीफ़ करें, इस मामले में मैक्ग्रा के उत्तराधिकारी कमिंस ही हैं।
इस सीरीज़ में कमिंस और ऑस्ट्रेलिया ने विवादस्पद सैंडपेपरगेट सीरीज़ के बाद सबसे ज़्यादा सफलता-पूर्वक रिवर्स स्विंग का उपयोग किया। लेकिन इसमें भी कमिंस की रणनीति की सहजता आंकड़ों से निकल आती है। उन्होंने अपनी 661 गेंदों में से लगभग 60 प्रतिशत गेंदों को ऑफ़ स्टंप के बाहर गुड लेंथ या उससे थोड़ा छोटा रखा।
दिसंबर 2020 से लेकर इस सीरीज़ तक उन्होंने ऐसा 55 प्रतिशत गेंदों के साथ किया था। शायद पाकिस्तान में सपाट पिचों के चलते उन्होंने अपनी लाइन को ऑफ़ स्टंप के ज़्यादा क़रीब रखा था - इस सीरीज़ में पाकिस्तानी बल्लेबाज़ों ने उनकी गेंदों को औसतन ओवर में एक से भी कम बार बिना किसी शॉट खेले छोड़ा। यह औसत आम तौर पर ओवर में दो गेंदें होती है।
तेज़ गेंदबाज़ों को विदेशी धरती पर असरदार होने के लिए कुछ प्रयोग करने पड़ते हैं। पाकिस्तान जैसी धीमी पिचों पर उन्हें ज़्यादा फ़ुल गेंदबाज़ी की ज़रूरत पड़ती है। साथ ही स्विंग के अलावा कटर का इस्तेमाल और अन्य विविधताएं लाना आम बात है। कमिंस ने ऐसा कुछ नहीं किया।
इस सब से कभी कभी कमिंस की गेंदबाज़ी कुछ हद तक फीकी और मशीनी लग सकती है। कमिंस एक शानदार गेंदबाज़ हैं और उनका जीनियस कभी कभी साधारण बात लग सकता है। लेकिन सीरीज़ के आख़िरी दिन रिज़वान को डाली गई यॉर्कर, या कराची में बाबर को की गई एक और तेज़ यॉर्कर, या अज़हर अली के ख़िलाफ़ रिटर्न कैच याद करिए। कमिंस क्रिकेट को आकर्षक भी बना देते हैं।
और उनकी गति को भी याद रखिए। क्रिकेट का असली मज़ा तब आता है जब गेम में गति हो और बल्लेबाज़ के सामने विकेट बचाने के साथ साथ शारीरिक क्षति से भी बचने की चुनौती भी पेश होती है। कमिंस लगातार 140 किमी पर गेंदबाज़ी डालते हैं और ऐसा लगता है कि वह चाहें तो इस गति में इज़ाफ़ा कर सकते हैं। वर्तमान क्रिकेट में गति और दिशा का संपूर्ण मिश्रण शायद ही किसी और गेंदबाज़ में है।
उनके करियर के आंकड़े अब बताते हैं कि कमिंस ऑल टाइम ग्रेट की श्रेणी में आ चुके हैं। पाकिस्तान में विदेशी तेज़ गेंदबाज़ों के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के मामले में उनका नाम कुछ वेस्टइंडीज़ के लीजेंड के साथ लिया जाएगा।
डेल स्टेन को छोड़कर यह एशिया में किसी ग़ैर-एशियाई तेज़ गेंदबाज़ का सबसे उम्दा प्रदर्शन रहा। जीवन अन्यायी है क्योंकि पैट कमिंस जैसा अच्छा कोई हो नहीं सकता, और यक़ीनन उन्हें देखने का सौभाग्य हम सबको मिल रहा है।

उस्मान समिउद्दीन ESPNcricinfo में सीनियर एडिटर हैं, अनुवाद ईएसपीएनक्रिकइंफ़ो हिंदी के प्रमुख देबायन सेन ने किया है