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क्या चंद्रकांत पंडित के पास कोई जादू की छड़ी है?

टीम चयन करने से पहले एमपी के कोच ने लगभग 150 खिलाड़ियों का साक्षात्कार लिया था

The winning moment: Madhya Pradesh players are ecstatic after winning their maiden Ranji Trophy title, Madhya Pradesh vs Mumbai, Ranji Trophy final 2021-22, Bangalore, June 26, 2022

पहली बार रणजी टाइटल जीतने के बाद एमपी की टीम  •  PTI

1998-99 के रणजी फ़ाइनल में कर्नाटका पर पहली पारी में बढ़त लेने बावजूद मध्य प्रदेश की टीम हार गई थी। मध्य प्रदेश के मौजूदा कोच चंद्रकांत पंडित उस समय टीम के कप्तान थे। 23 साल बाद मैदान वही था, मैच भी वही था, बस फ़र्क इतना साथ कि चंद्रकांत पंडित अब खिलाड़ी नहीं कोच थे और उनकी टीम रणजी फ़ाइनल जीत गई।
इसके बाद चंद्रकांत पंडित ने कहा, "शायद भगवान यह कहना चाह रहे हों कि मैं 23 साल बाद इसके लायक बना।"
रणजी फ़ाइनल के पांचवें दिन चंद्रकांत पंडित रात 2.36 बजे ही उठ गए थे लेकिन उसके बाद वाले दिन चंद्रकांत आराम से उठे और हमारे मीटिंग की टाइम 8.45 पर पूरी तरह से तैयार थे। चंद्रकांत के होटल के कमरे में प्रवेश करना स्कूल के प्रिंसिपल के कार्यालय में प्रवेश करने जैसा महसूस होता है। यदि किसी खिलाड़ी को हाज़िर होने के लिए कहा जाता है तो उससे अपेक्षा की जाती है कि वह तुरंत चंद्रकांत के कमरे में आ जाए।
सुबह की कॉफी पीते हुए चंद्रकांत कहते हैं, ''मैं किसी खिलाड़ी से कभी नहीं पूछता, 'अगर आप फ्री हैं तो क्या आप मेरे कमरे में आ सकते हैं?' अगर हम एक मिशन पर हैं तो मैं उनसे पूरी तरह से प्रतिबद्ध होने की उम्मीद करता हूं। हमारी टीम ने पूरे सीज़न में इस तरह की दिनचर्या का पालन किया है।"
हम पहले चंदू सर को जोर से हंसने के लिए कहेंगे। दिन हो या रात, किसी भी समय वह सिर्फ़ काम करते हुए ही दिखते हैं।
आदित्य श्रीवास्तव
हालांकि रणजी फ़ाइनल में जीत के बाद रूम का माहौल अलग है। रूम में नोटबुक, व्हाइटबोर्ड, स्टेशनरी जैसी चीज़ों का कोई निशान नहीं था।
पिछली रात की पार्टी में चंद्रकांत ने अपने खिलाड़ियों को बदलाव के तौर पर थोड़ी स्वतंत्रता के साथ आनंद लेने की अनुमति दी थी। हालांकि उसके कारण उनके कार्यक्रम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (एमपीसीए) के कई अधिकारियों के साथ उनकी दिन भर बैठकें होती रहती हैं, यहां तक ​​कि पत्रकारों और शुभचिंतकों के कॉल भी उनको आते रहे। शाम को इंदौर जाने के लिए एक फ्लाइट तय हो गई है, जहां उनका भव्य स्वागत होने वाला है। क्या उनके पास वास्तव में आराम करने का मौक़ा है?
रविवार को मैच के बाद मुस्कुराते हुए आदित्य श्रीवास्तव ने कहा, "हम पहले चंदू सर को जोर से हंसने के लिए कहेंगे। दिन हो या रात, किसी भी समय वह सिर्फ़ काम करते हुए ही दिखते हैं। अगर किसी खिलाड़ी को मदद की ज़रूरत है तो चंदू सर हमेशा मदद के लिए तैयार रहते हैं। हम आज उन्हें हमारे साथ थोड़ी मौज-मस्ती करने के लिए कहेंगे।"
एमपी की सफलता की अधिकतर कहानियां चंद्रकांत के इर्द-गिर्द घूमती हैं। दिनेश कार्तिक ने उन्हें रणजी ट्रॉफ़ी का एलेक्स फर्ग्यूसन कहा है। इरफान पठान ने यह प्रश्न उठाया कि क्या कोच के रूप में चंद्रकांत का छठा रणजी ख़िताब जीतना, उन्हें आईपीएल में कोचिंग करने का मौक़ा देगा। अभिनव मुकुंद को तो लगता है कि उनके पास कोई जादू की छड़ी है।
चंद्रकांत ने इन सारी बातों को चुपचाप सुना है। उन्हें पता है कि वह किस तरीक़े से काम करते हैं। उन्हें पता है कि टीमें जब भी उन्हें कोचिंग का मौक़ा देती हैं तो काफ़ी कुछ उन पर ही छोड़ देती हैं। चंद्रकांत ने 2002-03, 2003-04 और 2015-16 में मुंबई के साथ कोच के रूप में रणजी ट्रॉफ़ी जीता था, फिर 2017-18 में विदर्भ को अपना पहला रणजी ख़िताब दिलाया और फिर अविश्वसनीय रूप से 2018-19 में भी विदर्भ की टीम रणजी जीतने में सफल रही। यही नहीं चंद्रकांत 2011-12 में राजस्थान क्रिकेट के निदेशक भी थे जब उन्होंने अपने ख़िताब का बचाव किया था।
एमपी कोच के रूप में उनकी यात्रा 2020 में शुरू हुई। यह एक ऐसा वक़्त था जब तीन टीमों ने चंद्रकांत को कोच बनने का ऑफर दिया था और फिर एमपी ने भी उन्हें कोच बनने को कहा। 1998-99 के रणजी सेमीफ़ाइनल में मिली हार का दुख चंद्रकांत के लिए एमपी का कोच बनने के लिए सबसे बड़ा कारण था।
"मैं मार्च 2020 में अपने गांव में था जब एमपीसीए सचिव संजीव राव ने मुझे फोन किया। किसी ने उनसे कहा था कि मैं विदर्भ के साथ अपने कार्यकाल के बाद ब्रेक ले रहा हूं। मैंने सोचा कि क्यों न एमपी वापस जाऊं। आख़िरकार मैंने इस टीम के साथ छह साल एक खिलाड़ी के रूप में बिताया है। फिर मुझे याद आया कि 1998-99 में क्या हुआ था। शायद इसी के कारण मैंने उस ऑफ़र को स्वीकार कर लिया।"
अय्यर ने पूछा, 'अगर मैं असफल हो गया तो क्या होगा?' मैंने कहा जब मैं यहाँ हूँ, तो कुछ नहीं होगा। फिर उन्होंने पूछा, 'आपके जाने के बाद क्या होगा?' मैंने कहा कि तब तक आप अपनी जगह पक्की कर लेंगे। अब वह भारतीय टीम के साथ हैं।
चंद्रकांत पंडित
उन्होंने कुछ नियमों और शर्तों को स्पष्ट रूप से निर्धारित करते हुए इस ऑफ़र को स्वीकार किया। उन्हें टीम के खिलाड़ियों का चयन अपने हिसाब से करना था और वह टीम को जिस तरीक़े से भी आगे लेकर जाएं, उसमें उन्हें किसी का हस्तक्षेप नहीं चाहिए था।
जब वह काम पर उतरे, तो उन्होंने हर एक संभावित खिलाड़ी का साक्षात्कार लिया। इस दौरान उन्होंने लगभग 150 खिलाड़ियों से बात की। इन साक्षात्कारों में कई दिन, सप्ताह भी लग जाते थे, लेकिन चंद्रकांत के लिए यह एक महत्वपूर्ण आधार था। उन्होंने जिन खिलाड़ियो से बात की, उनके बारे में उनके सारी बातें उनके ऑफिस में लिख कर रखी हुई हैं।
वह खिलाड़ियों के बारे में पहला इंप्रेशन, एक क्रिकेटर के रूप में उनकी यात्रा और भविष्य की संभावनाएं, सब कुछ बहुत ही अच्छे तरीक़े से लिखा करते हैं। मैंने उनसे पूछा कि क्या किसी खिलाड़ी ने उनके पहले इंप्रेशन को ग़लत साबित किया? तब वह वेंकटेश अय्यर का उदाहरण देते हैं, जिसे टीम में शामिल करने में उन्हें हिचकिचाहट हुई थी।
चंद्रकांत कहते हैं "अय्यर नंबर 6 पर बल्लेबाज़ी करते थे और हमेशा नाबाद रहते हुए 20 या 24 रन बनाते थे। मैं उनसे लगातार कहता रहा कि वह एक ओपनर बनने के लिए बढ़िया दावेदार हैं।"
"अय्यर ने पूछा, 'अगर मैं असफल हो गया तो क्या होगा?' मैंने कहा जब मैं यहाँ हूँ, तो कुछ नहीं होगा। फिर उन्होंने पूछा, 'आपके जाने के बाद क्या होगा?' मैंने कहा कि तब तक आप अपनी जगह पक्की कर लेंगे। अब वह भारतीय टीम के साथ हैं। हालांकि यह सब कुछ उनके द्वारा किए गए प्रयास का फल है।"
सलामी बल्लेबाज़ के तौर पर खेलना अय्यर के लिए काफ़ी कारगर रहा। उन्होंने 2020-21 सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफ़ी में एमपी के टी20 रन चार्ट में शीर्ष स्थान हासिल किया, जिसमें उन्होंने पांच पारियों में 75.66 की औसत और 149.34 के स्ट्राइक रेट से 227 रन बनाए। इसके बाद वनडे प्रतियोगिता विजय हज़ारे ट्रॉफ़ी में उन्होंने पंजाब के ख़िलाफ़ 146 गेंदों में 198 रनों की तूफ़ानी पारी खेली, जिससे मध्य प्रदेश ने 3 विकेट पर 402 रन बनाए।
अय्यर एकमात्र उदाहरण नहीं हैं। उनके अलावा भी कई और खिलाड़ी हैं। यश दुबे ने इस सीज़न से पहले खेली गई 28 पारियों में ओपनिंग नहीं की थी। शीर्ष क्रम में पहली बार बल्लेबाज़ी करते हुए, उन्होंने केरल के ख़िलाफ़ 289 रन बनाया और फिर तीन मैच के बाद फ़ाइनल में एक और शतक बनाया। इसी तरह दुबे के साथ हिमांशु मंत्री को भी ओपनिंग करने के लिए पुश किया गया।
तेज़ गेंदबाज ईश्वर पांडे की चोटों की समस्या ने चंद्रकांत को एक नया बोलर भी ढूंढना पड़ा। जब चयन समिति ने अनुभव अग्रवाल को प्रस्तावित किया तो कुछ अभ्यास मैचों के बाद उन्होंने अनुभव को टीम में शामिल किया।
पंडित कहते हैं, ''जब हमने इंटरव्यू लिए थे, तब मैंने खिलाड़ियों से उनकी पसंद पूछी थी कि वह कहां खेलना चाहते हैं। आदित्य ने कहा कि मैं नंबर पांच पर बल्लेबाज़ी करना चाहता हूं। फिर मैंने शुभम शर्मा को ओपन विकल्प दिया। उन्होंने कहा 'मैं तीन पर बल्लेबाज़ी करना पसंद करूंगा।' हमने उनका प्रस्ताव मान लिया। "
"रजत पाटीदार नंबर तीन पर बल्लेबाज़ी करते थे। मैंने उससे कहा, 'रजत मुझे नंबर 4 पर तुम्हारी ज़रूरत है'। उसने कहा कि मैं तीन बल्लेबाज़ी करना पसंद करूंगा। फिर मैंने उससे कहा कि वह हमारा सबसे ज़्यादा रन बनाने वाला खिलाड़ी है। अगर हमारा ओपनिंग स्टैंड अच्छा है, तो वह वास्तव में मध्य क्रम में विपक्षी टीम पर हावी हो सकता है।"
"मैंने हिमांशु मंत्री से कहा कि मैं आपको एक सलामी बल्लेबाज के रूप में देख रहा हूं। मुझे उनकी तकनीक, गेंद को छोड़ने का स्वभाव पसंद आया। मेरा विचार बस बल्लेबाज़ी क्रम को ठीक करने और खिलाड़ियों से डर को दूर करने का था। अक्षत रघुवंशी 18साल के खिलाड़ी हैं। मैंने उससे कहा मैदान पर जाओ और अपना खेल खेलो। मैं नहीं चाहता कि वह अपनी शैली को छोड़ बल्लेबाज़ी करें।"
चंद्रकांत स्पष्ट है कि उन लोगों के लिए केवल "थोड़ी छूट" है जो उनके तरीक़ों के हिसाब से नहीं खेलते हैं।
वह कहते हैं "अब सभी खिलाड़ी धीरे-धीरे खुल रहे हैं और अपने विचार दे रहे हैं। कई बार मैच के दौरान मैं एक बोर्ड रखता था और खिलाड़ियों से अपनी टिप्पणियों को लिखने के लिए कहता था। वे जो महसूस करते हैं उसे लिखने के लिए स्वतंत्र हैं और हम इसके बारे में बाद में बात करते थे।"
"फ़ाइनल एकमात्र ऐसा मैच था जहां मैंने बोर्ड को संभाला था। मैं नहीं चाहता था कि वे उस पर समय बर्बाद करें। लीग चरण में सीखने की प्रक्रिया अलग है, फ़ाइनल में मैं इस तरह की चर्चा नहीं कर सकता। उनका ध्यान इस ओर लगाना था कि जब कोई गेम जीतना हो तो उन्हें बोर्ड पर क्या लिखना चाहिए।"
मैंने उनसे पूछा कि क्या उनकी कोचिंग की शैली घरेलू क्रिकेट के बाहर भी काम कर सकती है? वह कहते हैं, ''अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आपके पास ऐसे खिलाड़ी हैं जो चीज़ों को समझने के लिए पर्याप्त रूप से परिपक्व हैं और सहयोगी स्टाफ़ आपका मार्गदर्शन करता है। घरेलू क्रिकेट में एक व्यक्ति अपने तरीके़ को आसानी से व्यक्त करने के लिए पर्याप्त है। मेरे पास गेंदबाज़ी या बल्लेबाज़ी कोच नहीं है। बहुत सी चीजें एक युवा खिलाड़ी को भ्रमित कर सकती हैं।"
चंद्रकांत के तरीके़ सभी के लिए नहीं हैं। इसने एमपी की टीम में अद्भुत काम किया है, जैसा कि विदर्भ के साथ किया था, क्योंकि वे ऐसी टीमें हैं जो मुंबई, कर्नाटक और दिल्ली जैसी बड़ी टीमों को पछाड़ने के लिए ज़बरदस्त भूख के साथ मैदान पर उतरती हैं।
पंडित मानते हैं कि सफलता कई बलिदानों की क़ीमत पर मिलती है।
"मुझे याद है कि कप्तान आदित्य (श्रीवास्तव) की पिछले साल शादी होनी थी और उसने मुझसे पूछा, 'सर, मुझे कौन सी तारीख़ चुननी चाहिए?' मैंने उनसे कहा कि जून में कोई तारीख़ चुन लो। हालांकि एक बात का ख़्याल रहे कि उन्हें इसके लिए सिर्फ़ दो-तीन दिनों का समय मिलेगा। उस्से तो मैंने यह भी कहा था कि तुम्हें अपने हनीमून पर जाने का समय नहीं मिलेगा क्योंकि हमने अपनी तैयारी शुरू कर दी है।"
श्रीवास्तव ने जवाब में हंसते हुए कहा। "मेरी शादी को एक साल हो गया है और मैं अभी भी अपने हनीमून पर नहीं गया हूँ।" आदित्य के साथ ही पूरी टीम ने भी उनका साथ दिया है और परिणाम सबके सामने है।

शशांक किशोर ESPNcricinfo के सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के सब एडिटर राजन राज ने किया है।