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क्या ज़रूरत से ज़्यादा आक्रामकता पड़ गई केकेआर को भारी?

आरसीबी के हाथों हार में केकेआर के गेंदबाज़ मैच को अंतिम ओवर में ले गए

Faf du Plessis and Shreyas Iyer share a laugh at the toss, Kolkata Knight Riders vs Royal Challengers Bangalore, IPL 2022, Navi Mumbai, March 30, 2022

टॉस के दौरान एक दूसरे के साथ मज़ाक करते फ़ाफ़ और श्रेयस  •  BCCI

अगर रॉयल चैलेंसजर्स बैंगलोर ने इस मुक़ाबले को आसानी से जीत लिया होता, तो हम यह सवाल नहीं पूछ रहे होते। वह भी तब जब इसी वेन्यू पर पिछले मुक़ाबले में 206 रन के लक्ष्य का पीछा किया गया हो और जहां ओस मैच में अपनी अहम भूमिका निभाता है। लिहाज़ा एक तरफ आप 170-180 रन स्कोर खड़ा करने के बाद भी हार सकते हैं, तो वहीं स्कोर बोर्ड पर 220 रन टांगने की चाह में 130 रनों पर सिमट जाने का ख़तरा भी बढ़ जाता है। केकेआर ख़ुद एक ऐसी टीम है जो सम्मानजनक रूप से हारने के बनिस्बत एक असंभव सा प्रतीत होने वाले लक्ष्य का पीछा करते हुए बड़े अंतर से हारना ज़्यादा पसंद करेगी।
हालांकि इस मुक़ाबले की पिच थोड़ी अलग थी। मैदान पर ओस पड़ने के बावजूद केकेआर के गेंदबाज़ी आक्रमण शुरुआती झटके देकर आरसीबी पर दबाव बना दिया। केकेआर के कोच ब्रेंडन मैक्कलम ने पिच पर बात करते हुए कहा कि इस पिच पर स्पंजी टेनिस बॉल जैसी उछाल थी, जिससे बल्लेबाज़ों के लिए अपनी मर्ज़ी के मुताबिक शॉट खेलना काफ़ी मुश्किल सिद्ध हो रहा था। ऐसी परिस्थिति होने के बावजूद केकेआर के दस में से आठ बल्लेबाज़ बड़े शॉट लगाने के चक्कर में, गेंद को सीमारेखा के बाहर पहुंचाने के प्रयास में आउट हो गए। वह भी तब स्कोर बोर्ड साफ़ तौर पर इस ओर इशारा कर रहा था कि अगर उन्होंने अपना इरादा नहीं बदला तो पूरी टीम सस्ते में ही सिमट जाएगी।
अधिकतर मौकों पर टी-ट्वेंटी क्रिकेट इसी तरह खेली जाती है। केकेआर भी इसी तरह से खेलने में विश्वास रखती है। लेकिन क्या केकेआर आरसीबी के ख़िलाफ़ परिस्थितियों को बेहतर तरीके से भांप सकती थी और स्कोर बोर्ड पर 150 या उसके आसपास का लक्ष्य खड़ा कर सकती थी? विशेषकर तब जब बल्लेबाज़ी के दौरान सात गेंदों के शेष रहते ही पूरी टीम ऑल आउट हो गयी। महज़ 128 रनों का बचाव करते हुए भी केकेआर एक वक़्त जीत दहलीज़ तक पहुंच चुकी थी।
हालांकि मैक्कलम मुक़ाबले में अपनी टीम के आक्रमक रुख से इत्तेफ़ाक़ रखते हैं। मैकुलम ने कहा कि उनकी टीम जिस अंदाज़ के साथ मैदान में उतरी वह उन्हें काफ़ी पसंद आया। मैक्कलम ने कहा, "मुझे लगा कि इंटेंट बहुत ही अच्छा था। आप इस तथ्य का समर्थन करते हैं कि आप मैदान में अतिरिक्त बल्लेबाज़ के साथ उतरे हैं। आपके पास बल्लेबाज़ी में काफ़ी गहराई मौजूद है। लेकिन ज़ाहिर तौर पर आप इतनी आसानी से आउट होने की उम्मीद भी नहीं कर सकते।"
मैक्कलम ने आगे कहा, "सच कहूं तो मुझे लगा कि आज भाग्य हमारे साथ नहीं है। जब आप आक्रमक विकल्प के लिए जाते हैं तो कभी-कभी चीज़ें आपके पक्ष में नहीं जातीं। लेकिन मैं यह चाहता हूं कि हम इस आक्रामकता को जारी रखें। क्योंकि पिछले सीज़न इसी आक्रामक अंदाज़ ने हमारी काफ़ी मदद की थी।"
यह काफ़ी दिलचस्प है कि मैक्कलम को लगता है कि आक्रामक खेल उनकी टीम को काफ़ी भाता है। अधिकांश भागों के लिए यह कथन सच भी है। केकेआर सुनील नारायण का बतौर बल्लेबाज़ भी उपयोग करती है। जब भी टीम किसी दुविधा में होती है तब मैक्कलम ख़ुद भी टीम को आक्रामक खेल खेलने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। हालांकि वेंकटेश अय्यर और अजिंक्य रहाणे का केकेआर की पारी की शुरुआत करना उनके आक्रामक रुख से परे है। लेकिन ऐरन फ़िंच के आने के बाद यह मसला भी हल हो जाएगा।
मैच के अंतिम क्षणों में आंद्रे रसल का सौ फीसदी फ़िट प्रतीत न होना केकेआर और टीम के आक्रामक रुख के लिए चिंता का सबब है। रसल के पूर्ण रूप से फ़िट न होने की वजह से कप्तान श्रेयस अय्यर को डेथ ओवर में वेंकटेश अय्य से गेंदबाज़ी करवानी पड़ी।
मैक्कलम ने रसल की चोट को लेकर कहा, "आंद्रे ने बॉउंड्री पर दौड़ लगायी और गोता लगाया। दुर्भाग्य से उन्हें टक्कर लग गयी। लेकिन आंद्रे इसके बावजूद अपने काम को पूरा करने को लेकर तत्पर थे।लो स्कोरिंग गेम में ऐसी घटनाएं भी होती हैं जो आपके विरुद्ध जाती हैं।"
केकेआर निश्तित तौर पर यह उम्मीद कर रही होगी यह टक्कर से अधिक न हो क्योंकि वह पूरे टूर्नामेंट में अपने आक्रामक खेल को जारी रखना चाहेंगे।

सिद्धार्थ मोंगा ESPNcricinfo में असिसटेंट एडिटर हैं। अनुवाद एडिटोरियल फ़्रीलांसर नवनीत झा ने किया है।