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रोहित: श्रेयस जैसी बल्लेबाज़ी करने की ज़रूरत

बार-बार पिच के बारे में सवाल पूछे जाने पर नाराज़ हुए भारतीय कप्तान

भारतीय कप्तान रोहित शर्मा का मानना है कि इंदौर में बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफ़ी के तीसरे टेस्ट के दौरान ऑस्ट्रेलियाई स्पिनरों के सामने भारतीय बल्लेबाज़ उतना "दमख़म" नहीं दिखा सके। रोहित को लगा कि भारतीय बल्लेबाज़ स्पिनरों के सामने अधिक प्रोएक्टिव हो सकते थे। रोहित के अनुसार मैच में 11 विकेट चटकाने वाले नेथन लायन एवं अन्य गेंदबाज़ों के सामने भारतीय बल्लेबाज़ प्रोएक्टिव हो सकते थे। ताकि वह अपनी लेंथ पर सेटल न हो सकें।

रोहित ने पोस्ट-मैच प्रेज़ेंटेशन के दौरान कहा, "जब आप चुनौतीपूर्ण पिचों पर खेल रहे होते हैं तो आपको दमख़म दिखाना पड़ता है। मेरा मानना है कि हमने उनके गेंदबाज़ों को एक ख़ास लेंथ पर गेंदबाज़ी करने की अनुमति दी। लेकिन नेथन और अन्य ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज़ों को श्रेय जाना चाहिए। नेथन ने अच्छी गेंदबाज़ी की। सही लेंथ पर गेंदबाज़ी करते हुए, वह हमें लगातार चुनौती दे रहे थे। लिहाज़ा जब गेंदबाज़ ऐसा कर रहा हो, तो आपको अपने रणनीति के साथ बल्लेबाज़ी करनी होगी और अलग-अलग चीज़ें करने की कोशिश करनी होगी एवं थोड़ी दमख़म भी दिखानी होगी, जो मुझे लग रहा है कि हम नहीं कर पाए।"
रोहित ने बताया कि दूसरी पारी में सिर्फ़ 27 गेंदों में 26 रन बनाने वाले श्रेयस अय्यर ने भारत के बाक़ी बल्लेबाज़ों को दिखाया कि इस तरह की परिस्थितियों में कैसे बल्लेबाज़ी की जाती है। उन्होंने पोस्ट-मैच प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, "जब आप इस तरह की पिचों पर खेल रहे होते हैं तो आपको श्रेयस की जैसी पारी की ज़रूरत होती है। किसी को आगे आना होता है और गेंदबाज़ों पर दबाव बनाना होता है। ऐसा हमेशा नहीं हो सकता कि बल्लेबाज़ 100 रन, 90 रन, 80 रन बनाएंगे; आपको इस तरह का कैमियो खेलना होगा।"
"अगर शीर्ष बल्लेबाज़ों में से कोई एक बड़ा स्कोर करता है तो यह प्लस है, लेकिन जब आप पिच को जानते हैं कि चुनौतीपूर्ण है, आपको श्रेयस की तरह खेलने की ज़रूरत है।"
भारत की दूसरी में चेतेश्वर पुजारा ने सबसे ज़्यादा 142 गेंदों में 59 रन बनाए। पुजारा की पारी के दौरान एक समय पर, जब वह लायन की सटीकता और नज़दीकी फ़ील्डरों से जकड़े हुए थे, कैमरे ने रोहित को ड्रेसिंग रूम की बालकनी में यह भाव व्यक्त करते हुए पाया जैसे कि वह पुजारा से डिफ़ेंड करना छोड़ लायन को नज़दीकी फ़ील्डरों के ऊपर से मारने की कोशिश करने के लिए कह रहे हों।
दमख़म नहीं दिखाने को लेकर रोहित की टिप्पणी को इस संदर्भ में पुजारा से जोड़कर देखा जा सकता है, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि ऐसा नहीं है। अपनी प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान एक समय उन्होंने खिलाड़ियों के प्रदर्शन के बजाय पिच को लेकर बार-बार पूछे जाने पर नाराज़गी व्यक्त की और उस समय उन्होंने पुजारा का नाम लिया।
रोहित ने कहा, "जब भी हम भारत में खेलते हैं तो सबका ध्यान सिर्फ़ पिच पर होता है। आप लोग मुझसे नेथन के बारे में क्यों नहीं पूछ रहे हैं। उन्होंने कितनी अच्छी गेंदबाज़ी की, पुजारा ने दूसरी पारी में कितनी अच्छी बल्लेबाज़ी की, उस्मान ख़्वाजा ने कितना अच्छा खेला?"
बाद में उन्होंने कहा कि पुजारा का दृष्टिकोण किसी बल्लेबाज़ का अपनी ताक़त पर विश्वास करते हुए रन बनाने के तरीक़े का उदाहरण है। अभी वाली बात का मतलब है कि भारत कैसे चाहता है कि उसके खिलाड़ी चुनौतीपूर्ण पिचों पर बल्लेबाज़ी का रुख़ अपनाएं।
रोहित ने कहा, "पुजारा, पुजारा की तरह बल्लेबाज़ी कर रहे थे। वह क्रीज़ पर समय बिताना पसंद करते हैं, यही उनका बल्लेबाज़ी करने का तरीक़ा है। हो सकता है कि बहुत से अन्य खिलाड़ियों का यह अंदाज़ ना हो।"
"कुछ ऐसा ही हमने अपने ग्रुप में भी बात की थी कि अपने काम का अपना तरीक़ा ढूंढें। जितनी देर आप टीम के लिए कुछ कर पाए, हम एक यूनिट के तौर पर ख़ुश हैं। जैसे पहले दो मैचों में भी सभी से रन नहीं आए। जब तक रन आएंगे, हम एक यूनिट के तौर पर ख़ुश हैं।"

कार्तिक कृष्णास्वामी सीनियर ESPNcricinfo में सब एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo हिंदी के एडिटोरियल फ़्रीलांसर कुणाल किशोर ने किया है।