ऐशेज़ में बेन स्टोक्स की वापसी से क्रिकेट जगत में ख़ासा उत्साह है लेकिन शायद इस बात की ख़ुशी जैक लीच को कुछ ज़्यादा ही होगी। 2019 के विख्यात हेडिंग्ली टेस्ट में स्टोक्स के साथ क्रीज़ पर मौजूद रह चुके लीच पिछले सीज़न इंग्लैंड के लिए एक भी टेस्ट नहीं खेले। दरसल स्टोक्स की ग़ैरमौजूदगी में टीम को संतुलित ना कर पाने के चलते लीच 2019 के ऐशेज़ के बाद एक भी घरेलू टेस्ट नहीं खेल पाए।

भारत के ख़िलाफ़ स्टोक्स की भरपाई करने के लिए मोइन अली को टीम में शामिल किया गया लेकिन लीच को फिर भी जगह नहीं मिली। हालांकि लीच का टेस्ट रिकॉर्ड अपने आप में पर्याप्त है - 16 टेस्ट में 29.98 की औसत से 62 विकेट और 11 टेस्ट अपने देश के बाहर। साथ ही पिछले ऐशेज़ में 25.83 की औसत से 12 विकेट।

खेल से इतने दिन दूर रहने के बाद ब्रिस्बेन में स्टोक्स को टेस्ट क्रिकेट में डालना एक दांव लग सकता है लेकिन लीच की क़िस्मत भी इस चयन से जुड़ी है। लीच का कहना है, "स्टोक्स के आने से टीम संतुलन में ख़ासा फ़र्क़ पड़ेगा और स्पिन विभाग के लिए तो और भी राहत की बात होगी। इंग्लैंड में मुझे ऐसा बताया गया कि स्टोक्स के ना होने से टॉप ऑर्डर में एक ऑलराउंडर का स्थान छूट गया और इसी वजह से मुझे चुनना मुश्किल हो गया था। तब से अब तक मैं इस सीरीज़ का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था।"

मौसम में ख़राबी के चलते इंग्लैंड के लिए अभ्यास के केवल 29 ओवर का खेल हो पाया है लेकिन लीच आश्वस्त हैं कि मैच में यह अभ्यास की कमी उन्हें नहीं खलेगी। साथ ही ब्रिस्बेन में मौसम में नमी अगर बरक़रार रहे तो इंग्लैंड स्पिनर के बिना भी मैच खेलने का विचार कर सकता है। लेकिन ब्रिस्बेन के पिच पर उछाल के चलते स्पिनर को फ़ायदा मिलता है और नेथन लायन जैसे गेंदबाज़ को इससे काफ़ी मदद मिली है। लीच का कहना है, "मैंने लायन को इन परिस्थितियों में सफल होते देखा है और उन्होंने मुझे काफ़ी प्रभावित किया है। कैसे वह स्पिन से नहीं बल्कि उछाल से गेंद को ड्रिफ़्ट और डिप करवाते हैं और ओवर स्पिन से बल्लेबाज़ों को छकाते हैं। आप क्रिकेट में विपक्ष से बहुत कुछ सीख सकते हैं।"

जब इंग्लैंड ने 2010-11 में ऐशेज़ जीता था तो ग्रैम स्वॉन ने 39.80 के औसत से 15 विकेट लिए थे। ख़ासकर एडिलेड टेस्ट में उन्होंने आख़िरी दिन केवल 2.72 की रफ़्तार से रन देते हुए ऑस्ट्रेलिया पर अंकुश लगाए रखा था जिससे उन्हें सीरीज़ जीतने में मदद मिली थी। साथ ही लीच ने पिछले कुछ सालों में रवींद्र जाडेजा (दो बार) और साउथ अफ़्रीका के केशव महाराज और पॉल हैरिस को ऑस्ट्रेलिया में क़ामयाब होते देखा है।

लीच ने कहा, "मुझे लगता है जाडेजा यहां भारत से ज़्यादा भिन्न गेंदबाज़ी नहीं करते। यह देख कर मुझे अच्छा लगता है कि वह घर जैसी गेंदबाज़ी करते हुए सफल रहे हैं। मैंने भी 2019 में इंग्लैंड में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध अच्छी गेंदबाज़ी की थी। बाएं हाथ के स्पिनर्स की सफलता को देखते हुए मैं काफ़ी उत्साहित हूं।"

ब्रिस्बेन में शायद परिस्थितियां स्पिन के लिए अनुकूल नहीं होंगी और दूसरा ऐशेज़ टेस्ट पिंक बॉल के साथ एडिलेड में लाइट्स में खेला जाएगा। लेकिन लीच उसका फ़ायदा दर्शाते हुए कहते हैं, "मैं स्टुअर्ट ब्रॉड और जेम्स एंडरसन के साथ खाना खाने गया था तो एक व्यक्ति हमारे पास आए और गाबा के लिए शुभकामनाएं देने लगे। फिर उन्होंने कहा कि पिच पर अच्छी ख़ासी घास होगी और हमें सतर्क रहना होगा। तो मैंने यही सोचा कि इंग्लैंड के क्रिकेट इतिहास के दो सबसे महान तेज़ गेंदबाज़ों के लिए यह चेतावनी थी या ख़ुशख़बरी!"

ऐंड्रयू मक्ग्लैशन ESPNcricinfo में डिप्‍टी एडिटर हैं। अनुवाद ESPNcricinfo में सीनियर असिस्‍टेंट एडिटर और स्‍थानीय भाषा प्रमुख देबायन सेन ने किया है।