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क्या पाकिस्तान के ख़िलाफ़ अपनी रणनीति बदलेगा भारत?

पिछले T20 विश्व कप के बाद से पाकिस्तान के स्पिनरों ने दूसरे सर्वाधिक विकेट लिए हैं और उनके पास एक मिस्ट्री स्पिनर भी है। कोलंबो की धीमी और स्पिन को मददगार परिस्थिति क्या भारत-पाकिस्तान मुक़ाबले में रोमांच पैदा करने की वजह बन पाएगी?

Navneet Jha
नवनीत झा
Feb 14, 2026, 5:45 PM • 3 hrs ago
T20 विश्व कप में पावरप्ले में भारत अपना सबसे बड़ा स्कोर खड़ा कर चुका था, टूर्नामेंट के इतिहास में भारत ने सबसे तेज़ 100 रन भी बना लिए थे और इशान किशन के रूप में एक सेट बल्लेबाज़ पावरप्ले में ही 20 गेंदों पर अर्धशतक लगाकर क्रीज़ पर मौजूद था। सामने नामीबिया थी जिसे अंडर लाइट्स अभ्यास करने का पर्याप्त मौक़ा भी नहीं मिला था। भारत के पक्ष में हर वो चीज़ जा रही थी जो उन्हें 250 के आसपास का स्कोर तक आसानी से ले जा सकती थी लेकिन स्पिन ने भारत को 209 के स्कोर पर ही रोक दिया।
पहली नज़र में यह जबरन नुक्स निकालने की कोशिश प्रतीत होती है। ख़ासकर एक ऐसी पिच जहां स्पिन को मदद मिल रही थी, गेंद फंस कर बल्ले पर आ रही थी, सामने नामीबिया जैसी कमज़ोर और अनुभवहीन टीम ही सही लेकिन भारतीय गेंदबाज़ों ने उन्हें मात्र 116 के स्कोर पर समेट दिया था और एक पल भी विपक्षी टीम को गेम में आने का मौक़ा नहीं दिया था। T20 विश्व कप में रनों के अंतर से अपनी सबसे बड़ी जीत हासिल भी की थी।
लेकिन जब बात विश्व कप की हो और सबकुछ ठीक होते हुए भी सबकुछ न मिल पाने की टीस का घर पर ही अनुभव किए ज़्यादा समय न बीता हो, नवंबर 2023 की एक शाम युवाओं के लिए मूव ऑन न कर पाने का पर्याय बन गई हो, ऐसी स्थिति में कहीं एक बार फिर वहीं खड़े न रह जाने की चिंता अभिव्यक्त होने के लिए विकल्प तलाशने लग जाती है।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर चेतेश्वर पुजारा ने ESPNcricinfo टाइम आउट हिंदी में कहा, "यह चिंता का विषय है, सिर्फ़ यह मैच नहीं, अगर एक मैच में यह होता तो हम समझ सकते थे लेकिन पहला जो मुक़ाबला हुआ, वहां पर भी भारत को बल्लेबाज़ी में दिक़्क़त हुई थी। पावरप्ले में अच्छी शुरुआत हुई थी लेकिन बाद में काफ़ी विकेट गिरे। भारत के पास 240-250 का स्कोर बनाने का मौक़ा था लेकिन वह मौक़ा भुना नहीं पाए। स्कोर को एक बार छोड़ भी दें तो भारत को स्पिनरों के ख़िलाफ़ थोड़ी दिक़्क़त हुई और इसमें थोड़ा सा सुधार लाना होगा क्योंकि जब आप स्पिनर के सामने अच्छी बल्लेबाज़ी नहीं करते हैं तो इस विश्व कप में ख़ासकर जो भारत और श्रीलंका में खेला जा रहा है जहां स्पिनर को अच्छी मदद मिलने वाली है, वहां भारतीय बल्लेबाज़ों को एक तरीक़ा ढूंढना होगा कि कैसे और बेहतर बल्लेबाज़ी करें।"
हालांकि पिछले T20 विश्व कप के बाद से लेकर अब तक तेज़ गेंदबाज़ी के मुक़ाबले भारतीय बल्लेबाज़ों ने स्पिन के ख़िलाफ़ ही बेहतर औसत से रन बनाए हैं और दोनों ही तरह की गेंदबाज़ी के ख़िलाफ़ भारतीय बल्लेबाज़ों का स्ट्राइक रेट 155 के ऊपर रहा है। लेकिन T20 विश्व कप 2026 के पहले दो मुक़ाबलों में स्पिन के ख़िलाफ़ भारतीय बल्लेबाज़ों के आंकड़े इस आंकड़े के एकदम उलट हैं। पहले दो मुक़ाबलों में भारतीय बल्लेबाज़ों ने तेज़ गेंदबाज़ी के ख़िलाफ़ जहां 181.94 के स्ट्राइक रेट से रन बनाए हैं तो वहीं स्पिन के ख़िलाफ़ भारत का स्ट्राइक रेट 100 से भी नीचे का रहा है।
भारत का अगला मुक़ाबला पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कोलंबो के आर प्रेमदासा स्टेडियम में होना है, जहां T20 की 49 पूर्ण पारियों में पहली पारी का औसत स्कोर 152 ही है। इस विश्व कप में पहली छह पारियों में इस मैदान पर स्पिनरों ने 7.47 की इकॉनमी से 20 विकेट हासिल किए हैं। पाकिस्तान ने इस विश्व कप में अपने दोनों मुक़ाबले SSC में खेले हैं लेकिन SSC की तुलना में आर प्रेमदासा में इस विश्व कप में स्पिनरों का आंकड़ा बहुत जुदा नहीं हैंT20 विश्व कप 2026 के पहले उलटफेर का गवाह भी यही मैदान बना है। ऐसे में भारत को कोलंबो में किस रणनीति के तहत बल्लेबाज़ी करनी चाहिए?
पुजारा ने कहा, "विश्व कप से पहले जो मुक़ाबले हुए उनमें ज़्यादातर मुक़ाबले फ़्लैट विकेट्स पर हुए जहां स्पिनर को उतनी मदद नहीं मिल रही थी। तो वहां पर चौके छक्के मारना आसान है लेकिन उसके लिए भी अलग स्किल की ज़रूरत होती है। हालांकि कई बार आपको सिंगल डबल पर ध्यान देना होता है, मैच में कई बार ऐसे मोमेंट आते हैं जब विकेट गिरते हैं तो आप एक ही लय में बल्लेबाज़ी नहीं कर सकते।
"कोलंबो में यहां से परिस्थिति और अलग होगी। कोलंबो में विकेट और धीमी रहेगी और स्पिनर को और अधिक मदद मिलेगी। हमने देखा कि कोलंबो में बाक़ी की टीमें एक रणनीति के तहत खेल रही हैं, स्ट्राइक रोटेट करने पर ध्यान दे रही हैं और सिंगल और डबल्स पर फ़ोकस कर रही हैं और ऐसे मैदान पर जहां आउटफ़ील्ड बड़ा होता है तो यह भी काफ़ी मायने रखता है। यह सब ध्यान में रखना होगा और यह भी कि किस गेंदबाज़ के ख़िलाफ़ आक्रमण किया जा सकता है और किसके ख़िलाफ़ थोड़ा संभलकर बल्लेबाज़ी करने की ज़रूरत है। अगर किसी ओवर में छह रन भी आएं तो दबाव में न आएं।"
पाकिस्तान ने USA के ख़िलाफ़ खेले मुक़ाबले में शाहीन शाह अफ़रीदी को अपने एकादश में एकमात्र विशेषज्ञ तेज़ गेंदबाज़ के रूप में शामिल किया था। पिछले T20 विश्व कप के बाद से अब तक सभी पूर्ण देशों में पाकिस्तान के स्पिनरों ने दूसरे सर्वाधिक विकेट हासिल किए हैं। पाकिस्तान के पास उस्मान तारीक़ के रूप में एक मिस्ट्री स्पिनर भी मौजूद है, जो इस मैच के लिए विशेष रूप से चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। चर्चा जितनी उनकी गेंदबाज़ी को लेकर हो रही है उतनी ही चर्चा उनके ऐक्शन और पॉज़ को लेकर भी है।
ESPNcricinfo रन-नीति पर आकाश चोपड़ा ने तारीक़ की काट पर चर्चा करते हुए कहा, "तारीक़ थोड़े से अलग तो हैं, वह एक राउंड आर्म ऐक्शन वाले स्पिनर हैं जबकि सामान्यत: ऑफ़ स्पिनर हाई आर्म ऐक्शन वाला होता है। तो ऐसे में ऑफ़ स्पिन पाने के लिए रिस्ट को सीधा करना पड़ता है, निश्चित तौर पर उन्हें उतनी ऑफ़ स्पिन नहीं मिलती है लेकिन उनकी गेंद बाहर जाती है जो देखना काफ़ी दिलचस्प होगा। हवा में और पड़ने के बाद भी बाहर जाती है जो उनको पहली बार खेलेगा उसे यह एहसास ज़रूर होगा कि यह गेंद अलग आई है।"
पूर्व भारतीय क्रिकेटर आर अश्विन ने तारीक़ के ख़िलाफ़ भारतीय टीम को एक दिलचस्प रणनीति अपनाने की सलाह दी है कि जब तारीक़ पॉज़ लें तो भारतीय बल्लेबाज़ हट जाएं और इससे वह तारीक़ का ध्यान भटकाने में सफल हो सकते हैं। चोपड़ा, अश्विन की बातों से सहमत दिखे लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय बल्लेबाज़ों को तारीक़ के ऐक्शन पर ध्यान देने के बजाय गेंद के हिसाब से ही खेलने पर ध्यान देना चाहिए।
चोपड़ा ने कहा, "उनका ऐक्शन ऐसा है कि कई बार बल्लेबाज़ का ध्यान गेंद के बजाय ऐक्शन पर अधिक चला जाता है। मुझे लगता है कि गौतम (गंभीर) और सितांशु कोटक भी यही बता रहें होंगे कि 'आपको ऐक्शन को देखने की ज़रूरत है ही नहीं, आपको सिर्फ़ हाथ को देखना है और हाथ से जब गेंद निकलती है तो गेंद को देखना है' क्योंकि अगर आप उनके हाथ पर ध्यान देंगे तो आप यह पता लग सकते हैं कि वो कैसी गेंद डालने जा रहे हैं, आर्म गेंद डालेंगे, धीमी डालेंगे या तेज़ डालेंगे।
"यह गेममैनशिप है, हो सकता है कि बल्लेबाज़ करें भी लेकिन आप यह एकाध बार ही कर सकते हैं। क्योंकि फिर अंपायर इसकी पुनरावृत्ति को रोकने के लिए बल्लेबाज़ और गेंदबाज़ दोनों को समझाएंगे कि ऐसा न करें क्योंकि ऐसे तो ओवर ही समाप्त नहीं होगा। अश्विन ने सुझाव तो बहुत अच्छा दिया है और मुझे लगता है कि भारतीय बल्लेबाज़ एकाध बार ऐसा करेंगे भी, तो मज़ा आएगा।"
भारत-पाकिस्तान मुक़ाबले में इस आनंद की तलाश क्रिकेट प्रशंसक काफ़ी अरसे कर रहे हैं। T20 विश्व कप में भारत ने पाकिस्तान को सात बार हराया है जबकि पाकिस्तान सिर्फ़ एक बार ही भारत को हरा पाया है। एशिया कप 2025 में तीनों मुक़ाबले में पाकिस्तान भारत को ख़ास टक्कर नहीं दे पाया। भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने एशिया कप के दौरान कहा भी था कि भारत-पाकिस्तान मुक़ाबला अब राइवलरी नहीं रहा है। लेकिन कोलंबो की परिस्थितियों और वैसी परिस्थितियों में खेल चुके पाकिस्तान ने मुक़ाबले में रोमांच पैदा करने की उम्मीद तो दी है।
हालांकि श्रीलंका, मिस्ट्री स्पिनर और भारत का नाता पहले भी रहा है जब लगभग दो दशक पहले इसी देश में भारत ने एक मिस्ट्री स्पिनर की सबसे पहले काट ढूंढी थी। मैच की पूर्व संध्या पर ख़ुद कप्तान सूर्यकुमार अभ्यास सत्र के दौरान तारीक़ की तरह पॉज़ लेकर बल्लेबाज़ों का अभ्यास कराते दिखे।
नामीबिया के ख़िलाफ़ मैच के बाद पोस्ट मैच प्रेज़ेंटेशन में सूर्यकुमार ने भारत के बड़े स्कोर तक न पहुंच पाने का श्रेय इस खेल के संतुलन बनाने के गुण को भी दिया था। भारत के स्पिनरों से बच निकलना पाकिस्तान के लिए भी आसान नहीं रहने वाला है। शीर्ष T20I गेंदबाज़ वरुण चक्रवर्ती ने अपनी लय को नहीं छोड़ा है, पाकिस्तान के ख़िलाफ़ भारत के पास स्पिन तिकड़ी को मैदान में उतारने का विकल्प भी है। पिछले T20 विश्व कप के बाद से अगर पाकिस्तानी स्पिनरों ने भारत के मुक़ाबले बेहतर इकॉनमी से दूसरे सर्वाधिक विकेट लिए हैं तो सर्वाधिक विकेट भारतीय स्पिनरों ने ही लिए हैं। इस अवधि में वेस्टइंडीज़ के बाद स्पिन के ख़िलाफ़ सबसे ज़्यादा विकेट पाकिस्तानी बल्लेबाज़ों ने ही गंवाए हैं। इन सबके इतर सबसे बड़ी लेवलर ख़ुद प्रकृति भी इस मुक़ाबले का इंतज़ार कर रही है।

नवनीत झा ESPNcricinfo में कंसल्टेंट सब एडिटर हैं।